21-Jul-2020 12:00 AM
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पार्टी विथ डिफरेंस वाली भाजपा को सत्ता से दूर होते ही न जाने किसकी नजर लग गई है। अपनी एकता और अखंडता के बड़े-बड़े दावे करने वाली इस पार्टी में गुटबाजी चरम पर पहुंच गई है। गुटबाजी का आलम यह है कि जिलाध्यक्षों की नियुक्ति भी अटक गई है। सभी नेता अपने-अपने गुट के लोगों को जिलाध्यक्ष बनाने की कवायद में जुटे हुए हैं।
छत्तीसगढ़ भाजपा की प्रदेश कार्यकारिणी और मोर्चा प्रकोष्ठ के अध्यक्षों की नियुक्ति गुटबाजी में फंस गई है। जानकारी के मुताबिक अलग-अलग खेमा प्रदेश कार्यकारिणी में ज्यादा से ज्यादा अपने लोगों को शामिल कराने की कोशिश में लगा हुआ है। वहीं मोर्चा प्रकोष्ठ में भी अपने खास लोगों को महत्वपूर्ण पद दिलाने की होड़ लगी हुई है। इतना ही नहीं गुटबाजी की वजह से जिन 11 जिलों में जिला अध्यक्षों का चुनाव नहीं हो पाया था वो अब तक खेमेबाजी में ही उलझा है। मनोनयन नहीं हो पा रहा है, हालांकि मौजूदा परिस्थितियों में प्रदेश भाजपा में पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह की पसंद को ज्यादा तवज्जो दिए जाने की चर्चा है। यही वजह है कि दूसरे गुट भी सक्रिय हो गए हैं और कई पदों पर सिर फुटौवल के हालात होने लगे हैं।
ऐसे में प्रदेश कार्यकारिणी और मोर्चा प्रकोष्ठ के अध्यक्ष पदों के प्रमुख दावेदार दोनों गुटों में तालमेल बैठाने में लगे हुए हैं। बता दें कि नए प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय की कार्यकारिणी में 4 उपाध्यक्ष, 4 महामंत्री, 8 मंत्री, एक कोषाध्यक्ष बनाए जाने हैं। इनमें महत्वपूर्ण पदों के लिए तीन पूर्व मंत्रियों के नाम तय माने जा रहे हैं। चर्चा है कि प्रदेश अध्यक्ष के बाद संगठन के सबसे प्रभावशाली महामंत्री पद पर पूर्व मंत्री राजेश मूणत की ताजपोशी तय है। इसी तरह पूर्व मंत्री महेश गागड़ा या केदार कश्यप में से किसी एक को भी महामंत्री बनाया जा सकता है। एक महामंत्री का पद वरिष्ठ विधायक शिवरतन शर्मा को दिया जा सकता है। इसी तरह कुछ पूर्व विधायकों को उपाध्यक्ष, प्रदेश मंत्री और मोर्चा-प्रकोष्ठ के अध्यक्ष पद पर बैठाने की चर्चा है। ये भी तय मानकर चला जा रहा है कि युवा और महिला मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष भी बदलेंगे।
राजधानी रायपुर में जिला अध्यक्ष के दावेदारों के बीच जुबानी जंग शुरू हो गई है। पार्टी कार्यालय एकात्म परिसर से लेकर वॉट्सएप ग्रुप में बड़े नेताओं पर जोरदार टिप्पणी की जा रही है। भाजपा के आला नेताओं के एक वॉट्सएप ग्रुप महाभारत-चक्रव्यूह में पदाधिकारी, पूर्व पदाधिकारियों को निशाने पर ले रहे हैं। इसमें विधानसभा चुनाव, नगरीय निकाय चुनाव और पंचायत चुनाव में हार का ठीकरा जिन नेताओं के सिर फोड़ा जा रहा है, उसमें से अधिकांश जिलाध्यक्ष पद के दावेदार हैं। आला नेताओं वाले ग्रुप में गंदे और भद्दे कमेंट को लेकर यह चर्चा शुरू हो गई है कि सत्ता से बाहर होने के बाद पार्टी का अनुशासन तार-तार हो गया है।
ग्रुप में एक कार्यकर्ता तो जिलाध्यक्ष राजीव अग्रवाल के लिए अपशब्द के साथ-साथ गालियों का भी इस्तेमाल कर रहा है। एक पदाधिकारी ने कमेंट किया- 'कार्यकर्ता जब तक चापलूसी करेगा, तब तक शोषित होगा। सेनापति वही जो हमेशा चौकन्ना रहे।’ सोशल मीडिया पर अनूप मसंद और राजीव अग्रवाल का संवाद भी वायरल हो रहा है। इसमें राजीव अग्रवाल कह रहे हैं, हार कर देखो, बहुत आनंद आता है, लेकिन यह भी सभी के भाग्य में नहीं होता है। दरअसल, भाजपा में नए जिलाध्यक्ष की दौड़ में तीन प्रमुख नेताओं के नाम आ रहे हैं। ये सभी पिछले पांच साल से जिलाध्यक्ष रहे राजीव अग्रवाल को हटाकर नए जिलाध्यक्ष की नियुक्ति की मांग कर रहे हैं। इसको देखते हुए कार्यकर्ता राजीव को निशाने पर ले रहे हैं।
नए जिलाध्यक्ष की नियुक्ति से पहले कई मंडलों में कार्यकारिणी की घोषणा हो रही है। पहले तेलीबांधा मंडल की कार्यकारिणी को लेकर विवाद हुआ था। अब जवाहर नगर मंडल को लेकर विवाद शुरू हो गया है। बताया जा रहा है कि एकात्म परिसर में ही दो पदाधिकारियों का गुट आपस में भिड़ गया। एक पदाधिकारी का कहना था कि कार्यकारिणी की घोषणा नए जिलाध्यक्ष के आने के बाद की जाए। इसको लेकर तू-तू, मैं-मैं तक हो गई।
विकास की चिड़िया खोज रही भाजपा
छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने विकास की चिड़िया खोजने का कैंपेन चलाया था। अब डेढ़ साल बाद उस कैंपेन को भाजपा शुरू करने जा रही है। पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने ट्वीट किया, विकास की चिड़िया पता नहीं छत्तीसगढ़ में डेढ़ साल से कहां उड़ रही है? न सड़क, न अस्पताल, न स्कूल, न कॉलेज, न रोजगार, न शराबबंदी, न समर्थन मूल्य, न रोजगार भत्ता। वो चश्मा और आईना कहां गया, जिसमें यह सब दिखता था। डॉ. रमन ने भूपेश बघेल द्वारा 18 अप्रैल 2018 को किए गए एक ट्वीट पर यह तंज कसा है। डॉ. रमन राज्य सरकार पर हमला बोलने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं। पिछले कुछ दिनों से रमन मुख्यमंत्री बघेल पर ट्वीट करके निशाना साध रहे हैं। भूपेश बघेल ने विपक्ष में रहते हुए 2018 में गुमशुदा विकास की चिड़िया पर तंज कसते हुए आईना दिखाने की कोशिश की थी। विधानसभा चुनाव से पहले एक के बाद एक कई वीडियो जारी कर चश्मा और आईना के जरिए प्रदेश में विकास के दावों को झूठा बताते हुए दिखाया था। अब रमन ने एक बार फिर भूपेश सरकार को उनके वादों की याद दिलाई है, जिन्हें अभी तक पूरा नहीं किया गया है।
- रायपुर से टीपी सिंह