उम्मीदों का नया भारत
21-Aug-2020 12:00 AM 4280

 

देश की आजादी की 74वीं वर्षगांठ पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उम्मीदों के नए भारत की तस्वीर दुनिया के सामने रखी। प्रधानमंत्री ने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में भारत कई मामलों में विश्व का सिरमौर बनेगा। साथ ही उन्होंने भविष्य की दिशा और दशा का भी खाका खींचा। इससे उम्मीद जगी है कि आने वाले समय में हमारे देश में उम्मीदों का उदय होगा। जिससे गरीबी, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार जैसी समस्याओं से मुक्ति मिलेगी।

15 अगस्त पर प्रधानमंत्री का भाषण ना सिर्फ हमारी देश की वर्तमान स्थिति को बतलाता है बल्कि भविष्य में हम किस दिशा की ओर बढ़ेंगे इसकी भी रूपरेखा तय करता है। हमारी विदेश नीति हो या कूटनीति या फिर राष्ट्रीय सुरक्षा का मसला हो, तमाम मुद्दों पर प्रधानमंत्री देश के सामने अपनी बात रखते हैं। इस बार भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के विकास की तस्वीर प्रस्तुत की है। वैसे तो हर साल विकास का खाका प्रस्तुत किया जाता है लेकिन इस बार प्रधानमंत्री कुछ अलग ही अंदाज में दिखे। इसकी वजह यह रही कि मंदिर निर्माण की शुरूआत के साथ ही सरकार का आत्मविश्वास बढ़ा है। यह आत्मविश्वास हमें नए भारत की ओर ले जाएगा। गौरतलब है कि आजादी के 73 बसंत बाद भी हमें कई समस्याओं पर विजय हासिल करनी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनता के मन में विश्वास जगाया है कि आने वाला समय समस्याओं पर विजय का होगा।

15 अगस्त, 1947 को मिली आजादी के बाद से ही भारत कई समस्याओं से जूझता रहा है। जब हम गुलामी में थे तब चीन जापान से युद्ध के बाद फिर से गृहयुद्ध में था और जापान, जर्मनी जैसे देश विश्वयुद्ध के ध्वंस के बाद हमारी जैसी स्थिति में थे। वे सब अपनी अर्थव्यवस्था के पुनर्निर्माण में लग गए और हम समाजवाद, विश्वशांति, जातीय-भाषाई जागरण, यूनियनबाजी आदि में व्यस्त रहे। हमने राष्ट्रनिर्माण का कोई ठोस अभियान नहीं चलाया। क्षेत्र-भाषावार राज्य बनाए। फिर कश्मीर में युद्धविराम, 370, 35-ए के साथ कश्मीर की समस्या खड़ी की। लेकिन 2014 के बाद कई समस्याओं का निराकरण सुनियोजित तरीके से हो रहा है। इसलिए 15 अगस्त को 74वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नए भारत के लिए उम्मीद की जो तस्वीर दिखाई है उसे देखकर लोग अहलादित हैं।

कई चुनौतियां सामने

कोरोनाकाल में 74वें स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 7वीं बार लालकिले पर झंडा फहराया और देशवासियों को संबोधित किया। अपने 86 मिनट के भाषण में प्रधानमंत्री मोदी ने आत्मनिर्भर भारत, कोरोना संकट, आतंकवाद, विस्तारवाद, संप्रभुता, रिफॉर्म, मध्यमवर्ग, महिलाओं, किसानों, कामगारों और कश्मीर से लेकर लेह-लद्दाख तक का विशेष रूप से जिक्र किया। प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में पड़ोसी देशों की एक नई परिभाषा भी दी। उन्होंने कहा कि भौगोलिक सीमा से जुड़े देश ही पड़ोसी नहीं हैं, बल्कि जिनसे हमारे दिल मिलते हैं, जो हमारी तरह समान विचारधारा रखते हैं, वह भी हमारे पड़ोसी हैं। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि कोरोना महामारी इतनी बड़ी विपत्ति नहीं कि आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को रोक पाए। इसके साथ ही उन्होंने नेशनल डिजिटल हेल्थ मिशन के शुरू होने का ऐलान भी किया। प्रधानमंत्री मोदी ने भारत को वैश्विक पटल पर लाने की तमाम योजनाओं, संकल्पों और कार्यों के बारे में भी बताया।

वस्तुत: यह स्वतंत्रता दिवस कोरोना की भयावहता और राम मंदिर निर्माण के भूमिपूजन के लिए इतिहास में कभी नहीं भुलाया जा सकता। गौरतलब है कि आंखें खुलीं तो हमारे सामने 1947 से चले आ रहे असंभव से सपनों की एक शृंखला थी। सवाल थे कि अनुच्छेद-370, धारा 35-ए का खात्मा और पीओके की वापसी कभी हो पाएगी? हमारी अर्थव्यवस्था जैसे चीन की पूरक अर्थव्यवस्था होती जा रही थी। सरकारी खर्च बढ़ाकर जीडीपी बढ़ाई जा रही थी। बैंकों को बड़े ऋण देने के लिए बाध्य किया जा रहा था। परिवर्तन की व्यग्र प्रतीक्षा के बीच बदलाव का दूसरा दौर 2014 से प्रारंभ हुआ। कर्मठता, जनसरोकार और समावेशी राष्ट्रवाद इस परिवर्तन की पहचान बने। समानांतर अर्थव्यवस्था और आर्थिक अपराध पर लगातार हमले जारी हैं। अनुच्छेद-370 और धारा 35-ए इतिहास हो गई। जम्मू-कश्मीर अब केंद्र शासित प्रदेश है। नागरिकता विवाद समाप्त हुआ। वहां आतंकवाद अंतिम सांसें गिन रहा है और जनप्रतिनिधियों की नई पौध आ रही है। पीओके का जो लक्ष्य कभी दूर था वह दिखना प्रारंभ हो गया है।

नई उम्मीदें

प्रधानमंत्री ने जो बातें कहीं उनमें नई शिक्षा नीति, आत्मनिर्भर भारत अभियान, कोरोना से भारत की लड़ाई, जम्मू-कश्मीर में चुनाव, नेशनल डिजिटल हेल्थ मिशन और राम जन्मभूमि मंदिर का शिलान्यास, चीन-पाकिस्तान पर परोक्ष निशाना और सीमावर्ती इलाकों में एनसीसी कैडेट्स की संख्या बढ़ाना और उनका प्रशिक्षण मुख्य है। राम जन्मभूमि मंदिर के बारे में तो प्रधानमंत्री 5 अगस्त को ही बहुत विस्तार से बोले थे। शिलान्यास के बाद उन्होंने अयोध्या में ही लंबा भाषण दिया था, इसलिए इस बारे में उनके पास बहुत कुछ बोलने के लिए नहीं था। हां, यह पहली बार हुआ कि किसी प्रधानमंत्री ने राम मंदिर का जिक्र लाल किले से किया।

जहां तक नई शिक्षा नीति की बात है तो प्रधानमंत्री ने 5 अगस्त को अयोध्या से लौटने के एक दिन बाद ही शिक्षा पर हुए एक सम्मेलन में बहुत विस्तार से शिक्षा नीति के बारे में बोला था। पिछले दो हफ्ते में वे दो बार विस्तार से इस बारे में बोल चुके हैं। सो, इस बारे में भी कहने के लिए कुछ नहीं बचा था। इसके बारे में लगभग सारी बातें प्रधानमंत्री खुद देश के लोगों को बता चुके हैं। प्रधानमंत्री ने 11 अगस्त को देश के सबसे ज्यादा संक्रमण वाले दस राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ कोरोना वायरस की रोकथाम को लेकर वीडियो कांफे्रंसिंग के जरिए बातचीत की थी। इससे पहले भी कई बार वे कोरोना के मसले पर मुख्यमंत्रियों से बात कर चुके हैं। 11 अगस्त की बातचीत में उन्होंने दावा किया कि कोरोना से भारत की लड़ाई सही दिशा में जा रही है। हालांकि हकीकत यह है कि भारत में अब हर दिन 60 हजार से ज्यादा मामले आ रहे हैं और एक हजार लोगों की रोज मौत हो रही है। फिर भी उनका दावा है कि लड़ाई सही दिशा में जा रही है। बहरहाल, 11 अगस्त को मुख्यमंत्रियों से बातचीत में उन्होंने जो कुछ कहा वहीं लाल किले से भी कहा।

आत्मनिर्भर भारत अभियान

जहां तक आत्मनिर्भर भारत अभियान की बात है तो मई के महीने से लेकर अभी तक इस मुद्दे का ऐसा तेल निकाला जा चुका है कि अब इसमें निचोड़ने के लिए एक बूंद तेल नहीं बचा है।  पहले तो प्रधानमंत्री ने खुद राष्ट्र के नाम संबोधन में इसका ऐलान किया था। उसके बाद 5 दिन लगातार प्रेस कांफे्रंस करके वित्त मंत्री ने इस अभियान के बारे में एक-एक बात बताई। इसके बाद तीन महीने में इसके हर पहलू की व्याख्या की जा चुकी है। खुद प्रधानमंत्री अनगिनत बार इसके बारे में बता चुके हैं। फिर भी लाल किले से 87 मिनट के भाषण में उन्होंने 30 बार आत्मनिर्भर भारत का जिक्र किया।

एलएसी और एलओसी

स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले से होने वाले भाषण से पहले हर बार भारत के लोगों को यह जिज्ञासा रहती है कि प्रधानमंत्री पाकिस्तान के बारे में क्या बोलते हैं। इस बार यह भी जिज्ञासा थी कि प्रधानमंत्री चीन के बारे में क्या बोलते हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने दोनों के बारे में परोक्ष रूप से अपनी बात कही। उन्होंने आतंकवाद और विस्तारवाद दोनों के दिन खत्म होने की बात कही, जिसमें पाकिस्तान और चीन का जिक्र छिपा था। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि एलएसी से लेकर एलओसी तक जिसने भारत की ओर आंख उठाकर देखने की जुर्रत की उसे सुरक्षा बलों ने उन्हीं की भाषा में जवाब दिया। वैसे भी प्रधानमंत्री लाल किले से भाषण करते हुए किसी दूसरे देश का नाम लेकर उस पर हमला नहीं कर सकते। तभी यह भी कोई नई बात नहीं थी। पिछले अनेक वर्षों से देश के प्रधानमंत्री लाल किले से आतंकवाद, पाकिस्तान आदि को परोक्ष रूप से निशाना बनाते रहे हैं। सो, नया कुछ नहीं था प्रधानमंत्री के पास कहने के लिए। उन्होंने पुरानी सारी बातें दोहराईं। वे जिन बातों पर चुप रहे वो बातें ज्यादा अहम हैं। जैसे उन्होंने देश के आर्थिक मंदी के दुष्चक्र में फंसने का जिक्र नहीं किया। उन्होंने देश के करोडों लोगों के फिर से गरीबी रेखा के नीचे पहुंचने का जिक्र नहीं किया। देश की बड़ी आबादी बाढ़ की चपेट में है और कोरोना से लड़ने की हकीकत यह है कि भारत के ज्यादातर हिस्सों में आज भी लोग जांच और इलाज के लिए अस्पताल-अस्पताल भटक रहे हैं। अगर इन बातों का जिक्र करके प्रधानमंत्री देश के लोगों को भरोसे में लेते तो बेहतर होता।

नेशनल डिजिटल हेल्थ मिशन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से एक नए हेल्थ मिशन की घोषणा की। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज से देश में नेशनल डिजिटल हेल्थ मिशन का बहुत बड़ा अभियान शुरू होने जा रहा है। नेशनल डिजिटल हेल्थ मिशन, भारत के हेल्थ सेक्टर में नई क्रांति लेकर आएगा। यही नहीं देश को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों को विश्वास दिलाया कि देश के वैज्ञानिक दिन-रात एक कर कोरोना महामारी को परास्त करने में जुटे हैं। इसके लिए वह दिन-रात वैक्सीन तैयार कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा, 'आज भारत में कोराना की एक नहीं, दो नहीं, तीन-तीन वैक्सीन्स टेस्टिंग के चरण में हैं। जैसे ही वैज्ञानिकों से हरी झंडी मिलेगी, वैसे ही देश की तैयारी उन वैक्सीन की बड़े पैमाने पर प्रोडक्शन करने की भी है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, 'आज से देश में एक और बहुत बड़ा अभियान शुरू होने जा रहा है। ये है नेशनल डिजिटल हेल्थ मिशन। नेशनल डिजिटल हेल्थ मिशन, भारत के हेल्थ सेक्टर में नई क्रांति लेकर आएगा। आपके हर टेस्ट, हर बीमारी, आपको किस डॉक्टर ने कौन-सी दवा दी, कब दी, आपकी रिपोर्ट्स क्या थीं, ये सारी जानकारी इसी एक हेल्थ आईडी में समाहित होगी।

नई राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा रणनीति

प्रधानमंत्री मोदी ने लाल किले से कहा, 'कोरोना के समय में हमने देख लिया है कि डिजिटल भारत अभियान की क्या भूमिका रही है। अभी पिछले महीने ही करीब-करीब 3 लाख करोड़ रुपए का ट्रांजेक्शन अकेले भीम यूपीआई से हुआ है। साल 2014 से पहले देश की सिर्फ 5 दर्जन पंचायतें ऑप्टिल फाइबर से जुड़ी थीं। बीते पांच साल में देश में डेढ़ लाख ग्राम पंचायतों को ऑप्टिकल फाइबर से जोड़ा गया है। प्रधानमंत्री ने कहा, 'आने वाले एक हजार दिन में इस लक्ष्य को पूरा किया जाएगा। आने वाले एक हजार दिन में देश के हर गांव को ऑप्टिकल फाइबर से जोड़ा जाएगा। देशवासियों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने विश्वास दिलाया कि भारत इस संदर्भ में सचेत है, सतर्क है और इन खतरों का सामना करने के लिए फैसले ले रहा है और नई-नई व्यवस्थाएं भी लगातार विकसित कर रहा है। देश में नई राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा रणनीति का मसौदा तैयार कर लिया गया है।

सरकारी दखलअंदाजी से मुक्ति चाहिए

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, 'मध्यम वर्ग से निकले प्रोफेशनल्स भारत ही नहीं पूरी दुनिया में अपनी धाक जमाते हैं। मध्यम वर्ग को अवसर चाहिए, मध्यम वर्ग को सरकारी दखलअंदाजी से मुक्ति चाहिए। ये भी पहली बार हुआ है जब अपने घर के लिए होम लोन की ईएमआई पर भुगतान अवधि के दौरान 6 लाख रुपए तक की छूट मिल रही है। 'अभी पिछले वर्ष ही हजारों अधूरे घरों को पूरा करने के लिए 25 हजार करोड़ रुपए के फंड की स्थापना हुई है। एक आम भारतीय की शक्ति, उसकी ऊर्जा, आत्मनिर्भर भारत अभियान का बहुत बड़ा आधार है। इस ताकत को बनाए रखने के लिए हर स्तर पर, निरंतर काम हो रहा है। 'आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में, आधुनिक भारत के निर्माण में, नए भारत के निर्माण में, समृद्ध और खुशहाल भारत के निर्माण में, देश की शिक्षा का बहुत बड़ा महत्व है। इसी सोच के साथ देश को एक नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति मिली है।

110 जिलों में विशेष प्रयास

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने उद्बोधन में कहा- 'विकास के मामले में देश के कई क्षेत्र भी पीछे रह गए हैं। ऐसे 110 से ज्यादा आकांक्षी जिलों को चुनकर, वहां पर विशेष प्रयास किए जा रहे हैं ताकि वहां के लोगों को बेहतर शिक्षा मिले, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलें, रोजगार के बेहतर अवसर मिलें। आत्मनिर्भर भारत की एक अहम प्राथमिकता है- आत्मनिर्भर कृषि और आत्मनिर्भर किसान। देश के किसानों को आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर देने के लिए कुछ दिन पहले ही एक लाख करोड़ रुपए का 'एग्रीकल्चर इनफ्रास्ट्रक्चर फंड बनाया गया है। इसी लाल किले से पिछले वर्ष मैंने जल जीवन मिशन का ऐलान किया था। आज इस मिशन के तहत अब हर रोज एक लाख से ज्यादा घरों को पानी के कनेक्शन जोड़ने में सफलता मिल रही है।

प्रधानमंत्री ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा- 'आज दुनिया की बहुत बड़ी-बड़ी कंपनियां भारत का रुख कर रही हैं। हमें मेक इन इंडिया के साथ-साथ मेक फॉर वर्ल्ड के मंत्र के साथ आगे बढ़ना है। भारत को आधुनिकता की तरफ, तेज गति से ले जाने के लिए, देश के ओवरऑल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट को एक नई दिशा देने की जरूरत है। ये जरूरत पूरी होगी नेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन प्रोजेक्ट से। इस पर देश 100 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। अलग-अलग सेक्टर्स के लगभग 7 हजार प्रोजेक्ट्स को आईडेंटिफाई भी किया जा चुका है। ये एक तरह से इंफ्रास्ट्रक्चर में एक नई क्रांति की तरह होगा। अब इंफ्रास्ट्रक्चर में सिलोस को खत्म करने का युग आ गया है। इसके लिए पूरे देश को मल्टी मॉडल कनेक्टिविटी इंफ्रास्ट्रक्चर से जोड़ने की एक बहुत बड़ी योजना तैयार की गई है।

क्रिएटिविटी और स्किल्स को बढ़ाना

अपने भाषण में प्रधानमंत्री मोदी ने आत्मनिर्भर भारत अभियान पर जोर दिया। उन्होंने कहा- 'आखिर कब तक हमारे ही देश से गया कच्चा माल, फिनिश्ड प्रोडक्ट बनकर भारत में लौटता रहेगा। एक समय था, जब हमारी कृषि व्यवस्था बहुत पिछड़ी हुई थी। तब सबसे बड़ी चिंता थी कि देशवासियों का पेट कैसे भरें। आज हम सिर्फ भारत ही नहीं, दुनिया के कई देशों का पेट भर सकते हैं। आत्मनिर्भर भारत का मतलब सिर्फ आयात कम करना ही नहीं, हमारी क्षमता, हमारी क्रिएटिविटी हमारी स्किल्स को बढ़ाना भी है। सिर्फ कुछ महीने पहले तक एन-95 मास्क, पीपीई किट, वेंटिलेटर ये सब हम विदेशों से मंगाते थे। आज इन सभी में भारत, न सिर्फ अपनी जरूरतें खुद पूरी कर रहा है, बल्कि दूसरे देशों की मदद के लिए भी आगे आया है। वोकल फॉर लोकल, रि-स्किल और अप स्किल का अभियान, गरीबी की रेखा के नीचे रहने वालों के जीवनस्तर में आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था का संचार करेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि कोरोना के इस असाधारण समय में, सेवा परमो धर्म: की भावना के साथ, अपने जीवन की परवाह किए बिना हमारे डॉक्टर्स, नर्सें, पैरामेडिकल स्टाफ, एंबुलेंस कर्मी, सफाई कर्मचारी, पुलिसकर्मी, सेवाकर्मी, अनेकों लोग, चौबीसों घंटे लगातार काम कर रहे हैं। इन सभी कोरोना वॉरियर्स को भी मैं आज नमन करता हूं।

एनसीसी का होगा विस्तार

प्रधानमंत्री ने कहा- 'अब एनसीसी राष्ट्रीय कैडेट कोर का विस्तार देश के 173 बार्डर और तटीय जिले तक सुनिश्चित किया जाएगा। इस अभियान के तहत करीब 1 लाख नए एनसीसी कैडेट्स को विशेष ट्रेनिंग दी जाएगी। इसमें भी करीब एक तिहाई बेटियों को ये स्पेशल ट्रेनिंग दी जाएगी। प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में कहा कि  हमने अपनी बेटियों की शादी के लिए न्यूनतम आयु पर पुनर्विचार करने के लिए समिति का गठन किया है। समिति की रिपोर्ट प्रस्तुत करने के बाद हम उचित निर्णय लेंगे। उन्होंने कहा- 'भारत में महिलाशक्ति को जब-जब भी अवसर मिले, उन्होंने देश का नाम रोशन किया, देश को मजबूती दी है। आज भारत में महिलाएं अंडरग्राउंड कोयला खदानों में काम कर रही हैं तो लड़ाकू विमानों से आसमान की बुलंदियों को भी छू रही हैं। देश के जो 40 करोड़ जनधन खाते खुले हैं, उसमें से लगभग 22 करोड़ खाते महिलाओं के ही हैं। कोरोना के समय में अप्रैल-मई-जून, इन तीन महीनों में महिलाओं के खातों में करीब-करीब 30 हजार करोड़ रुपए सीधे ट्रांसफर किए गए हैं।

ये साल विकास यात्रा का है

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ये एक साल जम्मू-कश्मीर की एक नई विकास यात्रा का साल है। ये एक साल जम्मू-कश्मीर में महिलाओं, दलितों को मिले अधिकारों का साल है। ये जम्मू-कश्मीर में शरणार्थियों के गरिमापूर्ण जीवन का भी एक साल है। लोकतंत्र की सच्ची ताकत स्थानीय इकाइयों में है। हम सभी के लिए गर्व की बात है कि जम्मू-कश्मीर में स्थानीय इकाइयों के जनप्रतिनिधि सक्रियता और संवेदनशीलता के साथ विकास के नए युग को आगे बढ़ा रहे हैं। बीते वर्ष लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाकर, वहां के लोगों की वर्षों पुरानी मांग को पूरा किया गया है। हिमालय की ऊंचाइयों में बसा लद्दाख आज विकास की नई ऊंचाइयों को छूने के लिए आगे बढ़ रहा है। जिस प्रकार से सिक्किम ने ऑर्गेनिक स्टेट के रूप में अपनी पहचान बनाई है, वैसे ही आने वाले दिनों में लद्दाख, अपनी पहचान एक कार्बन न्यूट्रल क्षेत्र के तौर पर बनाए, इस दिशा में भी तेजी से काम हो रहा है।

राम मंदिर निर्माण मील का पत्थर

गुटनिरपेक्षता, राष्ट्रीय राजनीति में तुष्टीकरण, राज्यों में भाषा-जातिवादी आग्रह हमारा बेड़ा गर्क कर रहे थे। 2014 और फिर 2019 ने इसे बदल दिया है। विश्व की प्राचीनतम संस्कृति सभ्यता का देश अपनी संस्कृति को लेकर एक अपराधी के समान क्षमाप्रार्थी हो रहा था। राष्ट्र, संस्कृति की बात करने वाले नए अछूत बन गए थे। राम मंदिर का पुनर्निर्माण शताब्दियों की व्यग्रता की परिणीति है। बात-बात पर अपने को एटॉमिक पावर बताने वाले पाकिस्तान की सर्जिकल और बालाकोट एयरस्ट्राइक के बाद जो हैसियत है वह अब किसी से छिपी नहीं है।

अभी चीन के साथ डोकलाम के बाद लद्दाख में बराबरी का मोर्चा लगा हुआ है। सेनाओं की जरूरतें बड़ी तेजी से पूरी की जा रही हैं। पहली बार सैन्य रणनीति की महत्ता को स्वीकार करते हुए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जैसा पद सृजित किया गया है। बहुत कुछ हुआ है और बहुत कुछ होना बाकी है। हमें अब कॉमन सिविल कोड की दिशा में चलना है। राजनीति का जाति-संप्रदायवाद एक बड़ी समस्या है। राज्यों तक सीमित राष्ट्रीय सरोकारविहीन भाषा-जाति आधारित परिवारवादी दल दूसरी बड़ी समस्या हैं। समग्र राष्ट्र की सोच जब उनके संविधान में ही नहीं है तो गठबंधन के केंद्रीय दायित्वों में वे अपना स्वार्थ सिद्ध करने के अतिरिक्त और क्या करेंगे? ये क्षत्रप राष्ट्रीय राजनीति को स्वहित के रिमोट से चलाते हैं। इनसे मुक्ति राष्ट्रपतीय लोकतंत्र के माध्यम से ही संभव है।

कई बदलाव किए गए

वैसे इसमें कोई शक नहीं कि आजादी के संघर्ष की कहानी उन असंख्य आजादी के दीवानों के उल्लेख के बिना हमेशा अधूरी मानी जाएगी जिन्होंने देश के लिए अपने प्राणों को न्योछावर किया, वे सब हमारे पूज्य हैं और इतिहास के अमर हस्ताक्षर हैं, उनको शत्-शत् बार प्रणाम है लेकिन आजादी के बाद के 73 सालों में बहुत कुछ बदला है और बीते 75 महीनों के मोदी कार्यकाल में तो इतना कुछ बदला है कि एक नया इतिहास बन गया। पिछले साल की स्वतंत्रता दिवस के आसपास जहां एक ओर जम्मू-कश्मीर से धारा-370 और 35ए  का खात्मा हुआ तो वहीं तीन तलाक जैसी कुप्रथा का अंत हुआ। यही नहीं विगत वर्ष का अंत और इस वर्ष का प्रारंभ भी नागरिकता संशोधन कानून के लिए हमेशा याद किया जाएगा। यह सारे काम कमजोर इच्छाशक्ति वाली सरकार के वश के नहीं थे। ये सभी ऐसे निर्णय हैं जिनसे 70 सालों से चले आ रहे सामाजिक और सियासी असंतुलन को खत्म करने में मदद मिली है। आज कश्मीर की स्थिति में बदलाव ने वहां के लोगों की उन्नति के रास्ते खोल दिए हैं। सामाजिक-आर्थिक दशाओं में तो परिवर्तन हो ही रहे हैं, अधोसंरचना का विकास तीव्र गति से हो रहा है। वहां 70 सालों से राज्य के कई नागरिक अंधेरे में जीवन यापन कर रहे थे उन क्षेत्रों में शत-प्रतिशत विद्युतीकरण किया गया है। दुर्गम स्थानों को सड़कों से जोड़ा जा रहा है। निम्नतम स्थिति वाले वाल्मीकि समाज को सम्मानित नागरिक बनाने का काम किया गया है। यहां ऐसे कई वर्ग थे जिनके कोई संवैधानिक अधिकार नहीं थे उन्हें नई नीति बनाकर ना केवल नागरिकता प्रदान की गई बल्कि जीविकोपार्जन तथा चुनावों में भाग लेने के  अधिकार दिए गए हैं। लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा देकर अनेक परियोजनाओं के साथ विश्वविद्यालय की स्थापना तथा मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेजों की स्थापना की दिशा में द्रुत गति से काम किया जा रहा है।

लाल किले पर बहुत कुछ पहली बार

इस बार स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले से होने वाला सालाना आयोजन और प्रधानमंत्री के भाषण में बहुत कुछ पहली बार हुआ। पहले, कोरोना वायरस की वजह से आयोजन की रूप-रेखा में बदलाव हुआ था और दूसरे, प्रधानमंत्री का भाषण भी पहले से अलग था। लाल किले से मोदी के सात बार के भाषण में यह पहली बार हुआ कि वे कागज देख कर भाषण दे रहे थे। ऐसा लग रहा था कि पूरा भाषण लिखा हुआ था और तभी वे हर लाइन के बाद नीचे कागज देख रहे थे। इससे पहले भी वे कागज लाते थे पर वे नोट्स की शक्ल में होते थे और प्रधानमंत्री धाराप्रवाह ही बोलते थे। इस बार इस बार लाइन के बाद वे नीचे देख रहे थे। भारत में राम जन्मभूमि का विवाद सदियों से चल रहा था। पर इससे पहले संभवत: किसी प्रधानमंत्री ने इसका जिक्र लाल किले से अपने भाषण में नहीं किया था। बतौर प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने छह बार लाल किले से भाषण दिया और उनके समय भी अयोध्या का मुद्दा भाजपा के घोषणापत्र में था पर उन्होंने लाल किले से स्वतंत्रता दिवस के भाषण में इसका जिक्र नहीं किया। नरेंद्र मोदी ने भी अपने पहले छह भाषणों में इसका जिक्र नहीं किया। अपने सातवें भाषण में मोदी ने लाल किले से इस विवादित मुद्दे का जिक्र किया। नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री के रूप में अपने पहले भाषण में लाल किले से स्वच्छता और शौचालय का जिक्र किया था। तब भी यह हैरान करने वाली बात थी। इस बार उन्होंने गांव की और गरीब महिलाओं के लिए सैनिटरी पैड उपलब्ध कराने का जिक्र किया। पहली बार किसी ने लाल किले की प्राचीर से इस जरूरी मुद्दे का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने एक रुपए की कीमत पर 5 करोड़ सैनिटरी पैड उपलब्ध कराए हैं। इस तरह गांव और गरीब महिलाओं की सेहत की चिंता उन्होंने जताई। आयोजन में भी कई चीजें पहली बार हुईं। पहली बार इतनी कम संख्या में लोगों को बुलाया गया। बहुत चुनिंदा मंत्रियों, नेताओं और अधिकारियों की मौजूदगी लाल किले की प्राचीर पर रही। इस बार बच्चे भी स्वतंत्रता दिवस समारोह के लिए नहीं बुलाए गए थे। सामने मैदान में सिर्फ एनसीसी के कैडेट्स थे। हर बार की तरह प्रधानमंत्री मोदी उतर कर उनसे मिलने नहीं गए। उन्होंने गाड़ी से ही हाथ हिलाकर उनका अभिवादन किया।

प्रधानमंत्री की प्रमुख घोषणाएं

15 अगस्त को प्रधानमंत्री ने भविष्य के भारत का जो खाका प्रस्तुत किया उसमें कई घोषणाएं की गईं। जिनमें प्रमुख घोषणाएं हैं...

फाइबर केबल से जोड़ा जाएगा

प्रधानमंत्री मोदी ने देश के द्वीपों को लेकर कहा, अगले 1000 दिन में लक्षद्वीप को भी सबमरीन ऑप्टिकल फाइबर केबल से जोड़ दिया जाएगा।

दक्षिण एशिया में विकास महत्वपूर्ण

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, हमारे पड़ोसी देशों के साथ, चाहे वो हमसे जमीन से जुड़े हों या समंदर से, अपने संबंधों को हम सुरक्षा, विकास और विश्वास की साझेदारी के साथ जोड़ रहे हैं। उन्होंने कहा, दक्षिण एशिया में दुनिया की एक चौथाई जनसंख्या रहती है। हम सहयोग और सहभागिता से इतनी बड़ी जनसंख्या के विकास और समृद्धि की अनगिनत संभावनाएं पैदा कर सकते हैं। इस क्षेत्र के देशों के सभी नेताओं की इस विशाल जन समूह के विकास और प्रगति की ओर एक अहम जिम्मेदारी है।

प्रोजेक्ट लॉयन की होगी शुरुआत

प्रधानमंत्री मोदी ने देश में जैव विविधता को लेकर कहा, अपनी जैव विविधता के संरक्षण और संवर्धन के लिए भारत पूरी तरह संवेदनशील है। बीते कुछ समय में देश में शेरों की, बाघों की आबादी तेज गति से बढ़ी है। अब देश में हमारे एशियाई शेरों के लिए एक प्रोजेक्ट लॉयन की भी शुरुआत होने जा रही है।

लद्दाख जल्द बनेगा कार्बन न्यूट्रल क्षेत्र

प्रधानमंत्री मोदी ने लद्दाख के विकास को लेकर कहा, जिस प्रकार से सिक्किम ने ऑर्गेनिक स्टेट के रूप में अपनी पहचान बनाई है, वैसे ही आने वाले दिनों में लद्दाख, अपनी पहचान एक कार्बन न्यूट्रल क्षेत्र के तौर पर बनाए, इस दिशा में भी तेजी से काम हो रहा है।

लोगों की बनेगी हेल्थ आईडी

नेशनल डिजिटल हेल्थ मिशन को लेकर प्रधानमंत्री ने बताया, आपके हर टेस्ट, हर बीमारी, आपको किस डॉक्टर ने कौन सी दवा दी, कब दी, आपकी रिपोर्ट्स क्या थीं, ये सारी जानकारी एक हेल्थ आईडी में समाहित होगी।

जनधन खातों का आधा हिस्सा महिलाओं का

प्रधानमंत्री मोदी ने महिलाओं के खाते को लेकर कहा, देश के जो 40 करोड़ जनधन खाते खुले हैं, उसमें से लगभग 22 करोड़ खाते महिलाओं के ही हैं। कोरोना के समय में अप्रैल-मई-जून, इन तीन महीनों में महिलाओं के खातों में करीब-करीब 30 हजार करोड़ रुपए सीधे ट्रांसफर किए गए हैं। इसके अलावा प्रधानमंत्री ने कई विकासात्मक योजनाओं की घोषणा की है। जिससे नए भारत की आधारशिला मजबूत होगी। 

भारत ने असाधारण समय में असंभव को संभव किया

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, आज भारत ने असाधारण समय में असंभव को संभव किया है। इसी इच्छाशक्ति के साथ प्रत्येक भारतीय को आगे बढ़ना है। वर्ष 2022, हमारी आजादी के 75 वर्ष का पर्व, अब बस आ ही गया है। उन्होंने कहा, 21वीं सदी के इस दशक में अब भारत को नई नीति और नई रीति के साथ ही आगे बढ़ना होगा। अब साधारण से काम नहीं चलेगा। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, बीते वर्ष मैंने यहीं लाल किले से कहा था कि पिछले 5 साल देश की अपेक्षाओं के लिए थे, और आने वाले 5 साल देश की आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए होंगे। बीते एक साल में ही देश ने ऐसे अनेकों महत्वपूर्ण फैसले लिए, अनेकों महत्वपूर्ण पड़ाव पार किए।

- राजेंद्र आगाल

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