01-Sep-2022 12:00 AM
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मप्र में अगले साल विधानसभा के चुनाव होने हैं। इस चुनाव में आदिवासी, ओबीसी और दलित वोट सत्ता के लिए सबसे जरूरी है। ऐसे में भाजपा आलाकमान मप्र के आदिवासी सांसद डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी को बड़ी जिम्मेदारी दे सकती है। गौरतलब है कि मप्र में आदिवासी बहुल करीब 100 विधानसभा सीटें हैं। इन सीटों को साधने के लिए पार्टी सोलंकी पर बड़ा दांव खेल सकती है।
गौरतलब है कि बीते कुछ महीनों से प्रदेश की सियासत आदिवासी समुदाय के इर्द-गिर्द ही दिखाई दे रही है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह जंबूरी मैदान में तेंदूपत्ता संग्राहक सम्मेलन में शामिल हुए थे उसी मैदान पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी जनजातीय गौरव दिवस में शिरकत कर चुके थे। वहीं राज्य के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान लगातार आदिवासियों पर फोकस किए हुए हैं। इन सबके बावजूद आलाकमान की कोशिश है कि प्रदेश में एक ऐसे आदिवासी चेहरे को आगे बढ़ाया जाए, जिससे इस वर्ग का वोट पार्टी को थोकबंद मिल सके। इसकी वजह यह है कि 2018 में भाजपा आदिवासी समाज के वोट न मिलने के कारण ही सत्ता से बाहर हुई थी।
प्रदेश में आदिवासियों को लेकर तीन बड़े कार्यक्रमों से निकले संकेतों को देखें तो साफ है कि आगामी 2023 के चुनाव में 22 प्रतिशत आदिवासी वोट बैंक को साध कर ही भाजपा सत्ता वापसी का दावा मजबूत करने के प्रयास में है। मप्र में आदिवासी (अनुसूचित जनजाति) वर्ग की 47 सीटें हैं। साथ ही सामान्य वर्ग की 31 सीटें ऐसी हैं, जहां आदिवासी वोटर निर्णायक हैं। ऐसे में यह कहा जा रहा है कि भाजपा आदिवासी चेहरे पर मुख्यमंत्री पद का दांव खेलने की दिशा में आगे बढ़ने लगी है। यही कारण है कि आदिवासी सांसद सुमेर सिंह अचानक से सियासी सुर्खियों में आ गए हैं। सांसद सुमेर सिंह ने बीते दिनों सपरिवार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात भी की थी।
डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी निमाड़ अंचल के बारेला आदिवासी हैं जो आबादी के लिहाज से आदिवासियों की बड़ी उपजाति में एक है। प्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया जब कमलनाथ सरकार को गिरा भाजपा में शामिल हुए थे तब उन्हें राज्यसभा सीट दिए जाने की बात तय हुई थी। उनके साथ दूसरी राज्यसभा सीट पर कई दिग्गज नामों की चर्चा के बीच भाजपा ने साधारण पृष्ठभूमि से आने वाले 45 साल के सुमेर सिंह सोलंकी पर दांव खेल चौंका दिया था। इस तरह प्रोफेसर सुमेर सिंह नौकरी से इस्तीफा देकर पहली बार राज्यसभा पहुंचे हैं। सुमेर सिंह सोलंकी को संघ की पसंद का भी माना जाता है। सांसद बनने से पहले सुमेर सिंह सोलंकी आदिवासी इलाके में आरएसएस के साथ जुड़कर सामाजिक स्तर पर सक्रिय रह चुके हैं। कमजोर परिस्थिति के बाद भी सुमेर सिंह सोलंकी ने संघर्षों के बीच अपनी पढ़ाई पूरी की और प्रोफेसर बने। कहा जाता है कि सुमेर सिंह सोलंकी अपने ब्लॉक के इकलौते पीएचडी होल्डर हैं। आदिवासी वोट बैंक को साधने की कवायद के तहत ही आदिवासी बहुल सीट जोबट में चुनाव जीतीं सुलोचना रावत को भी कैबिनेट में शामिल किए जाने की चर्चाएं हैं। सुलोचना रावत उपचुनाव से ठीक पहले कांग्रेस का हाथ छोड़कर भाजपा के साथ आ गईं थीं। तब सुलोचना रावत को दलबदल के समय मंत्री बनाए जाने का आश्वासन दिए जाने की बात भी सामने आई थी।
भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व और केंद्र सरकार सुमेर सिंह सोलंकी को आने वाले दिनों में बड़ी भूमिका के लिए तैयार कर रही है। यही कारण है कि उन्हें कई तरह की जिम्मेदारियां भी सौंपी गई हैं। दरअसल, प्रदेश के आदिवासियों के बीच बढ़ी कांग्रेस की पैठ और जयस के बढ़ते रूप को देखते हुए भाजपा सुमेर सिंह सोलंकी को आगे लाना चाहती है, ताकि आदिवासी वोटबैंक भाजपा की ओर आ सके। हालांकि सोलंकी का कहना है कि जयस सामाजिक संगठन था। बाद में राजनीतिक रोटी सेंकने लगे। नेतृत्व करने वाले कांग्रेस से विधायक बन गए। राजनीतिक महत्वाकांक्षा इतनी है कि जयस के हर व्यक्ति को सांसद, विधायक, सरपंच, मेयर बनना है। युवाओं की भावनाओं से खेल रहे हैं। जयस तो कांग्रेस की बी-टीम है। जनजातीय वर्ग को भ्रमित करने के लिए विदेशों से फंडिंग हो रही है। केवल राष्ट्र को तोड़ने की कोशिश है। वे कहते हैं कि जनजातीय समाज कांग्रेस के साथ है, ऐसी मानसिकता है। वर्ष 2003 से तीन बार भाजपा ऐतिहासिक जीतीं। 2018 के पहले आदिवासी वर्ग भाजपा के साथ रहा है। कांग्रेस ने भ्रम फैलाया था। झूठे वादे किए, लेकिन पंचायत चुनाव में कांग्रेस बुरी तरह हार गई। चुनाव हारने में कर्जमाफी और बेरोजगारों को 5 हजार हर माह देने की झूठी घोषणा बड़ी वजह थी। राहुल गांधी ने यह घोषणा की थी। जनजातीय युवा भोले हैं। वे भ्रम में आ गए। अब यह वर्ग सबकुछ समझ गया है।
डॉ. सुमेर सिंह बनाए गए केंद्रीय पुरातत्व सलाहकार बोर्ड के सदस्य
संसद भवन परिसर नई दिल्ली में 8 अगस्त को केंद्रीय पुरातत्व सलाहकार बोर्ड, संस्कृति मंत्रालय (भारत सरकार) के सदस्य का निर्वाचन संपन्न हुआ। जिसमें राज्यसभा के 101 सांसदों ने अपना मतदान किया। जिसमें मप्र के युवा आदिवासी सांसद डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी को इस बोर्ड के सदस्य के रूप में चुना गया है। संभवत: यह पहला मौका होगा जब किसी आदिवासी सांसद को इस अति महत्वपूर्ण बोर्ड का सदस्य निर्वाचित किया गया है। डॉ. सोलंकी इस बोर्ड में तीन वर्ष के लिए निर्वाचित हुए हैं। निर्वाचन में भाजपा (एनडीए) की तरफ से सदस्य हेतु प्रत्याशी थे। जिनको राज्यसभा के सांसदों ने 81 वोट देकर जिताया है। वहीं विपक्षी उम्मीदवार जवाहर सरकार (सांसद तृणमूल कांग्रेस) को मात्र 20 मत प्राप्त हुए। वहीं डॉ. सोलंकी सांसद बनने से पहले मप्र के बड़वानी के कॉलेज में इतिहास के प्राध्यापक थे। डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी ने इस बोर्ड के सदस्य चुने जाने पर विश्वास दिलाया कि वह भारतीय पुरातत्व अनुसंधान का संचालन करने वाले भारतीय विश्वविद्यालयों के साथ-साथ भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के साथ मिलकर काम करेंगे। साथ ही पुरातत्व सिद्धांतों के अनुप्रयोग से संबंधित अध्ययनों को बढ़ावा दिलाने के लिए और प्रयास करेंगे। साथ ही विशेषकर जनजातीय क्षेत्रों में स्थित पुरातत्व धरोहर पर विशेष ध्यान देने की बात कही है।
- जितेंद्र तिवारी