सरकारी जेबकटी से आहत!
01-Aug-2022 12:00 AM 2950

 

आम आदमी पर महंगाई की मार बढ़ गई है। 18 जुलाई से जरूरत की कई चीजें महंगी हो गईं, जिसकी वजह से आपकी जेब पर और बोझ बढ़ेगा। दही-लस्सी से लेकर अस्पतालों में इलाज के लिए अब लोगों को अधिक पैसे चुकाने पड़ेंगे। जरूरत की तमाम वस्तुओं पर सरकार ने जीएसटी की दरें बढ़ा दी हैं। कई वस्तुओं को पहली बार जीएसटी के दायरे में लाया गया है। जीएसटी यानी सेंट्रल बोर्ड ऑफ इनडायरेक्ट टैक्सेज एंड कस्टम्स के नए नोटिफिकेशन के मुताबिक गत दिनों इस सिफारिश को लागू किया गया, जिसके कारण कई चीजें महंगी हो जाएंगी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में हुई जीएसटी काउंसिल की बैठक में दूध के प्रोडक्ट को पहली बार जीएसटी के दायरे में शामिल करने का फैसला किया गया था। जीएसटी काउंसिल की बैठक में टेट्रा पैक वाले दही, लस्सी और बटर मिल्क पर 5 फीसदी जीएसटी लगाने का फैसला किया गया।

ब्लेड, पेपर कैंची, पेंसिल शार्पनर, चम्मच, कांटे वाले चम्मच, स्किमर्स और केक-सर्वर्स आदि पर सरकार ने जीएसटी को बढ़ा दिया है। अब इस पर 18 फीसदी की दर से जीएसटी वसूली जाएगी। अब 5,000 रुपए से अधिक किराये वाले अस्पताल के कमरों पर भी जीएसटी देना होगा। इसके अलावा 1,000 रुपए प्रतिदिन से कम किराए वाले होटल के कमरों पर 12 फीसदी के हिसाब से टैक्स लगाने का प्रावधान है। अभी तक इस पर किसी तरह का टैक्स नहीं लगता था। बागडोगरा से पूर्वोत्तर राज्यों तक की हवाई यात्रा पर जीएसटी छूट अब इकनॉमी क्लास तक सीमित होगी। आरबीआई, बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण, भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड जैसे नियामकों की सेवाओं के साथ रिहायशी मकान कारोबारी यूनिट को किराए पर देने पर टैक्स लगेगा।

बैटरी या उसके बिना इलेक्ट्रिक वाहनों पर रियायती 5 फीसदी जीएसटी बना रहेगा। पैक्ड मछली, दही, पनीर, लस्सी, शहद, सूखा मखाना, सूखा सोयाबीन और मटर पर अब 5 फीसदी जीएसटी लगेगा। जो पहले नहीं लगता था। चेक जारी करने के एवज में बैंकों की तरफ से ली जाने वाली फीस पर 18 फीसदी जीएसटी लगेगा। एटलस समेत नक्शे और चार्ट पर 12 फीसदी जीएसटी लगेगा। सौर वॉटर हीटर पर अब 12 फीसदी जीएसटी लगेगा, पहले ये 5 प्रतिशत था। सड़क, पुल, रेलवे, मेट्रो, वेस्ट ट्रीटमेंट प्लांट और शवदाहगृह के लिए जारी होने वाले कॉन्ट्रैक्ट पर अब 18 फीसदी जीएसटी लगेगा। ये अब तक 12 फीसदी था। वहीं रोपवे से वस्तुओं और यात्रियों के परिवहन, सर्जरी से जुड़े उपकरणों पर जीएसटी 12 से घटाकर 5 फीसदी हुआ। ट्रक, वस्तुओं की ढुलाई में यूज होने वाले वाहनों जिसमें ईंधन की लागत शामिल है पर अब 18 की बजाय 12 फीसदी जीएसटी लगेगा। अब तक तो आप समझ ही गए होंगे कि क्या महंगा हो रहा है और क्या सस्ता... हम आपको जीएसटी के इतिहास बारे में बताएं और इससे पहले भारत में वस्तुओं और सेवाओं पर क्या टैक्स प्रणाली थी उसके बारे में बताएं, उसके पहले सोचा आपको एक सरकारी आंकड़ा बता दें।

दरअसल सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, जून महीने में जीएसटी कलेक्शन सालाना आधार पर 56 फीसदी बढ़कर 1.44 लाख करोड़ रुपए पर पहुंच गया। ये लगातार पांचवां ऐसा महीना रहा, जब सरकार को जीएसटी से एक लाख करोड़ रुपए से ज्यादा राजस्व प्राप्त हुआ है। मई में सरकार को जीएसटी से 1.40 लाख करोड़ रुपए प्राप्त हुए थे। प्री-पैक फूड आइटम जैसे दूध के पैक्ड प्रोडक्ट- दही, लस्सी, पनीर और छाछ पर सरकार ऐसे वक्त में 5 फीसदी जीएसटी वसूल रही है जब देश में महंगाई अभी भी कई सालों के उच्च स्तर पर बनी हुई है और दूसरी ओर जीएसटी कलेक्शन भी लगातार बढ़ रहा है। अच्छा! कई लोगों को ये भी लगता है कि सरकार क्या करे, ये फैसला तो जीएसटी कांउसिल ने लिया है। आपको भी ऐसा लग रहा है क्या? चलिए ये भी क्लियर हो जाएगा जीएसटी कांउसिल को जानने से पहले आइए जीएसटी को जान लें जिसकी दरें बढ़ने से लोगों के लिए मक्खन लगाना भी मुश्किल हो गया है। मतलब ब्रेड टोस्ट-रोटी-पराठे पर मक्खन लगाकर खाना भी मुश्किल हो गया है।

साल 2000 में अटल बिहारी वाजपेयी ने पश्चिम बंगाल के तत्कालीन वित्त मंत्री असीम दासगुप्ता की अध्यक्षता में जीएसटी के ऊपर रिव्यू के लिए एक कमेटी का गठन किया था जिसमें उन्हें जीएसटी का पूरा मॉडल तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई। केलकर टास्क फोर्स ने जीएसटी के रूप में अप्रत्यक्ष करों का एकीकरण करने की सलाह दी। 2006 में अपने बजट भाषण में वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने जीएसटी का जिक्र किया था। 2010 में वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने अपने भाषण में घोषणा की थी कि जीएसटी अप्रैल, 2011 से लागू कर दिया जाएगा। 2011 में लोकसभा में सभी वस्तु और सेवाओं पर जीएसटी के लिए 115वां संविधान संशोधन बिल लाया गया। 2013 में स्थाई समिति ने जीएसटी पर अपनी रिपोर्ट पेश की और नवंबर 2009 में सरकार के पेट्रोलियम पदार्थों के जीएसटी में शामिल करने के प्रस्ताव को एंपावर्ड कमेटी ने खारिज कर दिया।

अब तक का सबसे बड़ा टैक्स सुधार

भारत में अब तक का सबसे बड़ा टैक्स सुधार, वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी 1 जुलाई 2017 को लागू हुआ था। एक देश-एक कर कहे जाने वाली इस सेवा को मोदी सरकार ने स्वतंत्रता के बाद सबसे बड़ा टैक्स सुधार कहा था। कहते हैं इस कर सुधार का ढांचा आज से 22 साल पहले भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने देखा था। वस्तु एवं सेवा कर को संक्षिप्त रूप में जीएसटी कहते हैं। गुड्स यानी जिन सामानों का इस्तेमाल हम करते हैं, उसमें कोई भी पैकेज्ड खाद्य सामग्री, सिगरेट पैकेट, मोबाइल हैंडसेट, ट्रक से लेकर कार तक शामिल सेवाओं में हम दूरसंचार सेवाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं या होटल में रहना-खाना और वहां की सर्विस। जीएसटी लागू करने का मकसद सीधा और साफ है- एक देश-एक मार्केट-एक टैक्स। जीएसटी लागू होने से सर्विस टैक्स, वैट, क्रय कर, एक्साइज ड्यूटी और अन्य कई टैक्स समाप्त हो गए। इनकी जगह जीएसटी ने ले ली। हालांकि, अभी भी शराब, पेट्रोलियम पदार्थ और स्टाम्प ड्यूटी को जीएसटी से मुक्त रखा गया है। इन पर आज भी पुरानी टैक्स व्यवस्था लागू है।

- जय सिंह

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