20-Nov-2020 12:00 AM
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राजनीति रसूख का ऐसा वायरस होता है, जो अच्छे-अच्छों को अपनी गिरफ्त में ले लेता है। राजनीति के इसी वायरस ने अध्यात्म की अलख जगाने वाले कंप्यूटर बाबा को जकड़ लिया। जिसका परिणाम यह हुआ कि आज उनके साम्राज्य पर प्रशासन का हथौड़ा बरस रहा है। यही नहीं इस वायरस ने बाबा को जेल की सैर भी करवा दी है। साथ ही बाबा का रहा-सहा रसूख भी ध्वस्त हो गया।
कुछ साल पहले तक अध्यात्मिक गुरु कम्प्यूटर बाबा का रसूख ऐसा था कि शासन-प्रशासन उनके सामने नतमस्तक रहता था। लेकिन जबसे बाबा को राजनीति का चस्का लगा उनके दुश्मनों की फौज खड़ी हो गई। यही नहीं राजनीति के वायरस ने उन्हें इस कदर जकड़ लिया कि वे सत्तापक्ष के खिलाफ अभियान चलाने लगे। जिसका परिणाम यह हुआ है कि बाबा का पूरा साम्राज्य तहस-नहस हो गया है। जो प्रशासन बाबा के सामने खड़े होने की हिम्मत नहीं करता था, उसने उनके आश्रम पर बुलडोजर चलवा दिया। यही नहीं अपनी करतूतों के कारण बाबा को जेल की हवा भी खानी पड़ी है।
कम्प्यूटर बाबा का असली नाम नामदेव दास त्यागी है। वर्ष 1998 में नरसिंहपुर के एक संत ने कम्प्यूटर बाबा नाम दिया था, क्योंकि बाबा का दिमाग तेज चलता था। लेकिन पिछले विधानसभा चुनाव में बाबा के कम्प्यूटर मेंं राजनीति का वायरस आ गया था। भाजपा के शासनकाल में कम्प्यूटर बाबा ने अपना अवैध साम्राज्य गोम्मटगिरी टेकरी के समीप बढ़ाया। तब उन पर शिकंजा नहीं कसा गया, लेकिन कम्प्यूटर बाबा ने पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का साथ देना शुरू कर दिया था। सरकार के खिलाफ उन्होंने नर्मदा यात्रा निकालने का ऐलान कर दिया था, तब भाजपा सरकार ने उन्हें नदी न्यास का अध्यक्ष नियुक्त किया था, लेकिन चुनाव के पहले कम्प्यूटर बाबा ने इस्तीफा देकर यात्रा निकाल ली और तब इंदौर में एक बड़ा आयोजन भी किया था। बाबा पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के करीबी माने जाते हैंं। वर्ष 2018 के चुनाव में कांग्रेस का साथ देने के कारण वैसे ही कम्प्यूटर बाबा पर सरकार की नजरे टेढ़ी थी। इस साल बाबा की जन्म कुंडली स्थानीय अफसरों ने तैयार कर ली थी। कम्प्यूटर बाबा ने 15 साल पहले जब टेकरी पर अतिक्रमण करना शुरू किया था, तब तत्कालीन कलेक्टर विवेक अग्रवाल से उनका विवाद हो गया था। कम्प्यूटर बाबा ने तब राजवाड़ा पर धरना दिया था। उनके समर्थन में सैकड़ों साधु चौक पर ही धुनी रमाकर बैठ गए थे। तब अग्रवाल ने मंच पर आकर कम्प्यूटर बाबा से माफी मांगी थी और बाबा ने धरना समाप्त किया था।
भाजपा और कांग्रेस दोनों शासनकाल में राज्यमंत्री का दर्जा पा चुके नामदेव दास त्यागी उर्फ कम्प्यूटर बाबा के ग्राम जम्बूडी हप्सी के खसरा नंबर 610/1 और 610/2 की 46 एकड़ से ज्यादा जमीन में से दो एकड़ पर फैले लग्जरी आश्रम पर जिला प्रशासन ने अवैध कब्जे को तोड़ने की बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। सुबह करीब 7 बजे से शुरू हुई कार्रवाई दोपहर 12 बजे खत्म हुई और पूरे आश्रम को चार पोकलेन की मदद से ध्वस्त कर दिया गया। कार्रवाई के बाद 10 ट्रकों में सामान भरा गया और बाबा के साथी गंगादास के सुपुर्द कर दिया गया। इसमें रजाई, गद्दे, टीवी, फ्रीज, एसी, अलमारी, कुर्सियां, पेंटिग्स, फोटो, टेबल, बुलेट, कार, बाथरूम का सामान, क्रीम, सूटकेस, किचन का सामान, पलंग, कमंडल, माला आदि कई सामग्रियां शामिल हैं। आश्रम में सीसीटीवी भी लगे हुए थे। इस दौरान अशांति फैलाने के आरोप में बाबा और उनके सहयोगी रामचरण दास, संदीप द्विवेदी, रामबाबू यादव, मोनू पंडित, जगदीप सहित कुल सात लोगों को एसडीएम राजेश राठौर द्वारा अगले आदेश तक जेल भेज दिया गया। बाबा को सेंट्रल जेल की बैरक नंबर 5 में रखा है, जहां वे आराम से ध्यान की मुद्रा में बैठे हैं। सूत्रों के अनुसार उन्होंने जेल में कोई विरोध नहीं किया है और प्रशासन की कार्रवाई से खौफ में नजर आ रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार आश्रम पर हो रही कार्रवाई की सूचना प्रशासन ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को पहले ही दे दी थी। वहां से हरी झंडी मिली कि अवैध कब्जा है तो सख्ती से कार्रवाई की जाए। बाबा ने हाल ही में मप्र की 28 सीटों पर हुए उपचुनाव में शिवराज सरकार के खिलाफ लोकतंत्र बचाओ यात्रा भी निकाली थी। मुख्यमंत्री से हरी झंडी मिलने के बाद कार्रवाई की रूपरेखा बनी।
कलेक्टर मनीष सिंह ने धर्मस्थल और कानून व्यवस्था को देखते हुए इसमें अलग-अलग अधिकारियों की टीम गठित की। कार्रवाई के एक रात पहले तक कलेक्टर, डीआईजी, निगमायुक्त और एडीएम अजय देव शर्मा को ही इसकी जानकारी थी। पूरी टीम को सुबह थाने पर एकत्र होने के लिए कहा गया। सुबह 6 बजे सभी को बताया गया कि बाबा के आश्रम पर कार्रवाई है। इसके बाद एसडीएम राठौर और नायब तहसीलदार मनीष श्रीवास्तव की टीम को बाबा के पास भेजा गया। उनके द्वारा विरोध करने पर गिरफ्तार किया गया। आश्रम से 10 ट्रक सामान निकला है। सामान हटाने में निगमकर्मियों को दो घंटे लग गए। इसमें महंगे सोफे, टीवी, एसी, फ्रिज, अलमारी, क्रिस्टा कार जो मूसाखेड़ी के किसी रमेश सिंह तोमर के नाम पर है, एक बंदूक, बुलेट, महंगी क्रीम, साबुन आदि शामिल है। चार माह पहले नगर निगम से बाबा को आश्रम के अवैध निर्माण हटाने का नोटिस गया था, लेकिन तब सामने आया कि यह जगह निगम की सीमा में नहीं आती है। इसके बाद प्रशासन के पाले में गेंद गई। लेकिन जम्बूडी हप्सी गांव में पंचायत होने के चलते मामला पहले पंचायत के पास कार्रवाई के लिए गया और वहां से प्रस्ताव पास कर एसडीएम हातोद को पत्र गया कि बाबा पर कार्रवाई की जाए। इसके बाद तहसीलदार हातोद ममता पटेल की कोर्ट में केस चला और इस दौरान बाबा ने निर्माण के संबंध में कोई दस्तावेज पेश नहीं किए, जिसके चलते उनके आश्रम पर कब्जा हटाने का नोटिस चस्पा कर दिया गया और दो हजार का अर्थदंड भी लगाया गया।
1965 में जन्मे नामदेव दास त्यागी को नरसिंहपुर में साल 1998 में एक बाबा ने उनके गैजेट प्रेम और हमेशा लैपटॉप साथ में रखने के चलते कम्प्यूटर बाबा नाम दिया था। साल 2014 में उन्होंने आम आदमी पार्टी से उन्हें उम्मीदवार बनाने की मांग की थी, लेकिन बात नहीं बनी। साल 2018 में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के खिलाफ उन्होंने नर्मदा यात्रा में हुए पौधरोपण को लेकर आरोप लगाए और यात्रा की घोषणा की। अप्रैल 2018 में राज्यमंत्री बना दिए गए। बाद में भाजपा से मोहभंग हुआ और कांग्रेस की तरफ झुक गए। लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस के दिग्विजय सिंह की जीत के लिए यज्ञ भी किया। बाबा ने गोम्मट गिरी आश्रम की जमीन पर हुए विवाद के बाद सबसे पहले राजबाड़ा पर आमरण अनशन किया था। उस समय तत्कालीन मंत्री और वर्तमान भाजपा महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने अनशन खत्म करवाया था। अंबिकापुरी स्थित श्रीसिद्ध कालीधाम मंदिर को लेकर हुई हत्या के मामले में भी बाबा को लेकर आरोप लगे थे। 2011 में कम्प्यूटर बाबा ने गोम्मट गिरी आश्रम पर लघु कुंभ आयोजित किया था। इसके प्रचार के लिए उन्होंने हेलिकॉप्टर से गांव-गांव में पर्चे वितरित किए थे।
कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह ने ट्वीट करते हुए कहा कि इंदौर में बदले की भावना से कम्प्यूटर बाबा का आश्रम व मंदिर बिना नोटिस दिए तोड़ा जा रहा है। यह राजनीतिक प्रतिशोध की चरम सीमा है। मैं इसकी निंदा करता हूं। विधायक जीतू पटवारी ने कहा कि पहले बाबा भाजपा के साथ थे, तब अतिक्रमण नहीं दिखा। पहले वह संत लग रहे थे और अब शैतान लग रहे हैं। देपालपुर से कांग्रेस विधायक विशाल पटेल ने कहा कि जिसे प्रशासन तोड़ रहा है, वो मंदिर कलोता समाज ने बनवाया था। इस पर कार्रवाई का कलोता समाज विरोध करता है। वहीं इंदौर सांसद शंकर लालवानी ने कम्प्यूटर बाबा को लेकर बयान दिया है कि उन्हें धर्म की पताका फहराना चाहिए थी, लेकिन वो राजनीति का वायरस फैला रहे थे। उन्हें धर्म को आगे ले जाना चाहिए, लेकिन वो उस तरह के काम न करते हुए जिस तरह की भाषा का प्रयोग कर रहे थे, वह किसी संत को शोभा नहीं देता। उनमें राजनीति का वायरस घुस गया था।
कई शहरों में कब्जे के प्रमाण
कम्प्यूटर बाबा के खिलाफ रेत माफिया से वसूली के सुराग मिले हैं। प्रदेश के अन्य कई शहरों में कब्जे के भी प्रमाण मिले हैं। बाबा के नाम पर सांवेर के अजनोद में तीन हैक्टेयर जमीन की रजिस्ट्री और एक पासबुक भी मिली है। जांच से सामने आया है कि दोनों ही जगह बाबा ने कालेधन का उपयोग किया, ताकि पासबुक में पैन नहीं देना पड़े। हर बार 50 हजार से कम राशि यानी 49-49 हजार रुपए जमा किए गए। अजनोद की गाइडलाइन से कीमत 27.69 लाख रुपए थी, लेकिन बाबा ने जून-2009 में 10 लाख में खरीदी। इसके लिए फॉर्म-16 लगाकर आयकर दायरे में नहीं आने का प्रमाण भी लगा दिया। किसी शंकर नाम के व्यक्ति से खरीदी इस जमीन की गाइडलाइन कीमत आज 75 लाख से ज्यादा है, बाजार मूल्य 2.50 करोड़ है। यह खाता करीब एक साल पहले 1.79 लाख रुपए से खुला था। बाबा इसका एटीएम उपयोग करते थे और इससे पांच-दस हजार रुपए की राशि कैश निकालते रहते थे। साथ ही गिफ्ट शॉप व अन्य दुकानों से छोटी खरीदी में भी इस खाते की राशि का उपयोग होती था। बीच-बीच में किसी ने इस खाते में 49-49 हजार करके निर्धारित समय पर राशि जमा कराई। फिलहाल खाते में करीब 25 हजार रुपए जमा हैं।
भाजपा शासन में ही इंस्टाल हुआ था कम्प्यूटर
जिस कम्प्यूटर बाबा को भाजपा के नेता कोस रहे हैं, उन्होंने भाजपा के शासनकाल में ही अपना नाम और काम बढ़ाया। यानी एक तरह से नामदेव त्यागी का कम्प्यूटर भाजपा के ही राज में इंस्टाल हुआ और भाजपा सरकार ने जाते-जाते उन्हें राज्यमंत्री पद से नवाजा भी, लेकिन कांग्रेस और दिग्विजय सिंह से नजदीकी के चलते बाबा ने जाती सरकार को अलविदा कह दिया और कांग्रेस के पाले में आ गए, जहां उनका रुतबा बरकरार रहा। नामदेव दास त्यागी उर्फ कम्प्यूटर बाबा तब चर्चा में आए थे, जब उन्होंने गोम्मटगिरि पर मंदिर बनाया और उसके बाद वहां कब्जा करना शुरू किया। उस समय जैन समाज ने पहाड़ी पर अतिक्रमण को लेकर खूब लड़ाई लड़ी। तत्कालीन कलेक्टर विवेक अग्रवाल ने कार्रवाई की तो कम्प्यूटर बाबा राजबाड़ा पर अन्य बाबाओं के साथ प्रदर्शन करने बैठ गए थे। बाद में मामला ठंडे बस्ते में चला गया और कम्प्यूटर बाबा का कब्जा वहां बरकरार रहा। भाजपा की सरकार के दौरान कम्प्यूटर बाबा का कामकाज खूब फला-फूला। बड़े-बड़े धार्मिक आयोजनों के साथ-साथ राजनीतिक आयोजनों में कम्प्यूटर बाबा को खूब तवज्जो मिली और उन्होंने अपना साम्राज्य फैलाया। बाबा के आश्रम में कुछ भाजपा नेता भी जाते थे और उसे अपने कार्यक्रम में बुलाते थे। बाबा ने शिवराज सरकार के दौरान नर्मदा किनारे हुए पौधरोपण घोटाले को लेकर आवाज उठाई थी और इसको लेकर नर्मदा परिक्रमा शुरू करने की धमकी दी और कहा कि वे इस घोटाले को सामने लेकर आएंगे। 2018 में विधानसभा चुनाव के पहले बाबा को शिवराज सरकार ने राज्यमंत्री का दर्जा देकर उपकृत किया। उनके साथ इंदौर के ही योगेन्द्र महंत को भी यह दर्जा दिया गया था। हालांकि सरकार जाती देख वे कांग्रेस के पाले में कूद गए और बाद में कांगे्रस ने भी खूब तवज्जो दी। भाजपा के राज में ही बाबा ने सारी बारीकियां सीखीं और उसका उपयोग अब वे भाजपा के खिलाफ ही कर रहे थे। कुछ महीनों पहले भी उनके आश्रम पर कार्रवाई होना थी, लेकिन कांग्रेस नेताओं ने इसका विरोध किया तो कार्रवाई रुक गई थी।
- सुनील सिंह