बेशर्मी की हद से गुजरे श्रीनिवासन
05-Dec-2014 09:19 AM 1237619

क्रिकेट जगत के बेताज बादशाह या निरंकुश शासक- जो भी कहा जाए एन श्रीनिवासन का सुप्रीम कोर्ट की लगातार झिड़कियों के बावजूद पद पर बने रहना बेशर्मी की पराकाष्ठा ही कहा जाएगा। किसी अन्य खेल प्रशासक में इससे पहले इस तरह की बेशर्मी और लोलुपता देखने को नहीं मिली। इससे भी ज्यादा शर्मनाक है श्रीनिवासन की ढाल बनकर खड़े लोगों का आचरण।

बीसीसीआई में एक कोटरी बन गई है, जो येन-केन-प्रकारेण श्रीनिवासन को बचाते हुए उन्हें फिर से उनके पद पर स्थापित करना चाहती है। उधर सुप्रीम कोर्ट ने श्रीनिवासन के आचरण पर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट का कहना है कि श्रीनिवासन दया के लायक नहीं हैं। यदि फिक्सिंग से मुंह मोड़ा गया तो क्रिकेट खत्म हो जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने श्रीनिवासन से तल्ख लहजे में कहा है कि देश के लिए क्रिकेट धर्म है इसका सत्यानाश न करें।
श्रीनिवासन की दोबारा ताजपोशी में जुटी बीसीसीआई को भी सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी फटकार लगाई है और कहा है कि देश के लिए क्रिकेट धर्म है, इसे यह पहचान तभी मिलती है जब 1 लाख लोग क्रिकेट के मैदान में होते हैं। यदि स्पॉट फिक्सिंग जैसी घटनाएं होंगी तो क्रिकेट की हत्या हो जाएगी। बीसीसीआई का कहना है कि श्रीनिवासन पर सीधे-सीधे कोई दोष नहीं है लेकिन कोर्ट बीसीसीआई की दलील से सहमत नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि बोर्ड के पास मुद्गल कमेटी की रिपोर्ट में दोषी ठहराए गए लोगों पर कार्रवाई के अलावा कोई विकल्प नहीं है। आईपीएल के पूर्व कमिश्नर ललित मोदी ने दावा किया है कि वे श्रीनिवासन और अन्य व्यक्तियों के खिलाफ याचिकाकर्ता की आर्थिक मदद कर रहे हैं। मोदी का कहना है कि जो उनकी मदद कर रहा है, उसका साथ देने में उन्हें कोई बुराई नजर नहीं आती। क्योंकि बीसीसीआई पर्दे के पीछे सभी दोषियों को बचाने की कोशिश कर रहा है। 2013 में आईपीएल-6 के दौरान स्पॉट फिक्सिंग सामने आने के बाद बीसीसीआई ने खुद ही जांच कमेटी बना ली थी। इसके बाद आदित्य वर्मा ने अदालत में याचिका दायर की। वे बिहार क्रिकेट एसोसिएशन के प्रमुख हैं।

मुद्गल कमेटी की रिपोर्ट में दोषी ठहराए गए राजस्थान रॉयल्स के सहमालिक राज कुंद्रा ने कहा है कि वे 11.7 फीसदी हिस्सेदारी कोर्ट में सरेंडर करने को तैयार हैं। यानी इतनी हिस्सेदारी वे बेच नहीं पाएंगे। मीडिया रिपोर्ट में ऐसा दावा किया गया है। बीसीसीआई ने कहा है कि चेन्नईसुपरकिंग्स की मालिक इंडिया सीमेंट कंपनी है, श्रीनिवासन नहीं। बीसीसीआई और आईपीएल अलग-अलग है।
सुप्रीमकोर्ट ने कहा है कि श्रीनिवासनउस टीम के मालिक हैं जिसके एक अधिकारी (गुरुनाथ मयप्पन) सट्टेबाजी के दोषी हैं। एक आदमी बीसीसीआई अध्यक्ष है। इंडिया सीमेंट का मालिक भी है। बोर्ड अध्यक्ष की आईपीएल टीम कैसे हो सकती है? और आईपीएल तो बीसीसीआई का ही बायप्रोडक्ट है। बीसीसीआई ने कहा है कि मुद्गल कमेटी की रिपोर्ट को अंतिम सत्य क्यों माना जाए। सुप्रीमकोर्ट ने कहा है कि बीसीसीआईको केवल अपने कायदे-कानून से चलना चाहिए, बल्कि उसे लोगों के विश्वास के सिद्धांत पर भी चलना चाहिए। जब लोगों को पता होगा कि मैच फिक्स है तो क्रिकेट देखने कौन आएगा? क्रिकेट जेंटलमैन गेम है और इसे ऐसा ही क्यों नहीं बने रहने देते।
क्या बीसीसीआई के अध्यक्ष मूकदर्शक बने बैठे थे?
बीसीसीआईकी कार्यसमिति में 21 राज्यों के एसोसिएशन हैं। केवल बीसीसीआई अध्यक्ष कोई निर्णय नहीं लेते हैं।  सुप्रीमकोर्ट ने कहा है कि आपका मतलब है जब बोर्ड की बैठकों में आईपीएल के गठन का निर्णय हुआ तब क्या अध्यक्ष मूकदर्शक थे? बोर्ड म्यूचुअल बेनिफिट सोसायटी बन गया है जो आईपीएल की शक्ल में चल रहा है।
मुद्गल कमेटी ने श्रीनिवासन को भले ही स्पॉट फिक्सिंग के आरोपों से मुक्त कर दिया हो लेकिन उन पर हितों के टकराव का मामला बनता है। कोर्ट से अगर श्रीनिवासन को राहत नहीं मिलती है तो उन्हें या तो अपने मालिकाना हक वाली टीम चेन्नई सुपरकिंग्स को बेचना होगा या फिर बोर्ड के अध्यक्ष पद का मोह छोडऩा होगा। वे अब दो नावों पर तो सवार नहीं ही हो सकेंगे।
अब तक आईपीएल की हैदराबाद फ्रेंचाइजी टीम बिक चुकी है। लेकिन पुणे और केरल को तो कोई खरीदने वाला नहीं मिला। चेन्नई टीम अगर बिकती है या उसे बाहर का रास्ता दिखाया जाता है तो क्रिकेट में तहलका मच जाएगा। श्रीनिवासन अगर बोर्ड अध्यक्ष पद को प्राथमिकता देते हैं तो देखना होगा कि शरद पवार गुट बाधक बन पाता है या नहीं? अभी श्रीनिवासन गुट हावी है। जगमोहन डालमिया गुट ने भी उन्हें समर्थन देने का मन बना लिया है। ऐसे में श्रीनिवासन अगर और सशक्त होकर उभरें तो कोई आश्चर्य नहीं होगा।

जांच रिपोर्ट के मुताबिक श्रीनिवासन फिक्सिंग में शामिल नहीं हैं। उन्हें बोर्ड के अध्यक्ष पद की दौड़ में शामिल होने दिया जाना चाहिए।

  • कपिल सिब्बल

श्रीनिवासन के वकील संदेह का लाभ खेल को मिलना चाहिए कि किसी व्यक्ति को। आपको पहले हितों के टकराव पर जवाब देना होगा।

  • जस्टिस टीएस ठाकुर


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