05-Dec-2014 09:02 AM
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कंडोम, अश्लील साहित्य, सीसीटीवी कैमरे, स्वीमिंग पूल, 12 और 315 बोर की राइफलें, पिस्तौल तथा विदेश की महंगी शराब, यौन उत्तेजना बढ़ाने वाली दवाइयां और ऐश-ओ-आराम के तमाम साधन। यह किसी माफिया डॉन की आरामगाह से बरामद सामग्री नहीं है, बल्कि 12 एकड़ में फैले हिसार के विवादास्पद संत रामपाल के आश्रम से यह असलहा बरामद किया गया है।
संत रूपी भेडिय़े को पकडऩे में हरियाणा की चुस्त-दुरुस्तÓ सरकार के रहनुमाओं और आला अफसरों को लगभग 1 दर्जन दिवस लग गए, वह पिछले कई वर्षों से किस तरह भीतर ही भीतर अपनी ताकत दिखाने का सामान जुटा रहा था, यह इस गिरफ्तारी ने सिद्ध किया। हमारे देश की यह खासियत है कि यहां भीड़ जुटाने की काबलियत रखने वाला छुटभैया नेता भी अपने आप को महासिद्ध समझने लगता है। जिनकी औकात मदारियों बराबर नहीं होती वे स्वयं को महासिद्ध समझने लगते हैं और यदि भीड़ जुटाने तथा भोले-भाले लोगों को ठगने में माहिर कोई व्यक्ति धर्म और आध्यात्म की दुकान खोल ले तो उसकी ताकत कई गुनी बढ़ जाती है। राजनीतिक दल तो इन लोगों की दहलीज पर मत्था टेकते ही हैं, इनके ऊंचे संपर्कों के कारण पुलिस और प्रशासन भी इन पर हाथ डालने से डरता है। यही कारण है कि ये बाबा निरंकुश होकर जनता-जनार्दन को अपने कथित सतसंगों से बेवकूफ बनाते हैं और अपने आश्रम में महिलाओं के साथ यौनाचार से लेकर तमाम अनैतिक गतिविधियों में लिप्त रहते हैं।
हिसार के जिस सतलोक आश्रम से बाबा रामपाल को गिरफ्तार करने में 45 हजार पुलिस के जवान लगे, वह संत के रूप में किसी शैतान से कम नहीं है। गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने अपने ही भक्तों को बंधक बना लिया। महिलाओं और बच्चों को ढाल की तरह प्रयोग किया। एक बच्चे तथा चार महिलाओं ने दम तोड़ दिया। लेकिन प्रशासन कुछ न कर सका। तीन-तीन विधायकों ने जाकर इस ढोंगी बाबा को मनाया, उसकी चरणवंदना की, उसे झूठे आश्वासन दिए, तब कहीं जाकर 60 घंटे की घेराबंदी के बाद उसने 19 नवंबर को रात्रि साढ़े 9 बजे के करीब आत्मसमर्पण किया। न उसके चेहरे पर उन 5 मासूम मौतों का दर्द था और न ही दुख तथा विषाद की कोई लकीर। किसी पेशेवर खूंखार अपराधी की तरह वह बेखौफ होकर अपनी मांद से बाहर निकला और पुलिस की गाड़ी में बैठ गया। 10 दिन से शर्मिंदगी उठा रही पुलिस ने राहत की सांस ली। यदि यह प्रहसन एक-दो दिन और खिंच जाता तो संभवत: मौतों की संख्या बढ़ सकती थी। पुलिस ने जब रामपाल को अरेस्ट कर लिया तो उसके भक्त बंधकों की तरह अपनी जान बचाकर भागे।
भक्ति का नशा उतर चुका था और संत की असलियत सामने आ गई थी। कई महिलाओं ने बताया कि उनके साथ बलात्कार किया गया। पुलिस जांच कर रही है। जितनी महिलाएं बलात्कार की शिकायत लेकर सामने आई हैं, उनसे कहीं ज्यादा महिलाएं ऐसी हैं जो लोक-लाज के कारण आप बीती सुनाने से डर रही हैं। ऐसे में सवाल उस जनता और भक्तों पर भी उठाए जा सकते हैं जो ऐसे भेडिय़े साधु-संतों को सर-आंखों पर बिठाती है, उनकी पूजा करती है। उन्हें इतना पैसा मिल जाता है कि वे हजार-डेढ़ हजार करोड़ का आर्थिक साम्राज्य खड़ा कर लेते हैं और पैसे से अय्याशियां करते हैं।
आसाराम बापू के भक्त आज भी यह मानने को तैयार नहीं हैं कि जिस संत को उन्होंंने भगवान की तरह पूजा वह बलात्कार जैसे घिनौने कृत्य में लिप्त था। श्रद्धा और आस्था अपनी जगह है लेकिन ऐसे साधु-संतों की भक्ति करने वालों को अपने विवेक और व्यावहारिक बुद्धि का भी सदुपयोग करना चाहिए। बहरहाल रामपाल रूपी समस्या एक-दो दिन में खड़ी नहीं हुई बल्कि प्रशासन द्वारा रामपाल की करतूतों की लगातार उपेक्षा की गई। उसे शह मिली, राजनीतिज्ञ उसके दरवाजे पर मत्था टेकने जाने लगे। हरियाणा की राजनीति में रामपाल की अच्छी-खासी पकड़ बन गई थी। वह एक इशारे पर आला अफसरों के तबादले करवा सकता था, उन्हें मनचाही पोस्टिंग दिलवा सकता था। खबर तो यहां तक है कि नई सरकार में मंत्री बनने के इच्छुक कुछ लोगों ने रामपाल के दरबार में भी दंडवत किया था। इसी कारण रामपाल ने अपने आप को कानून से ऊपर समझ लिया। उस पर हत्या जैसे संगीन अपराध सहित 19 धाराओं के तहत मामले दर्ज किए गए हैं, जिसमें राजद्रोह का मामला भी है। रामपाल इतना बेखौफ था कि अपनी ही महिला भक्तों के साथ बलात्कार करने वालों को उसने प्र्रश्रय देकर रखा था। जो महिला बलात्कार का विरोध करती थी, उसे नग्न अवस्था में ही कमरों में बंद कर दिया जाता था। कई महिलाओं ने अमानवीय यातनाओं का जिक्र किया है।
रामपाल यह सब करता रहा और किसी को कानों-कान खबर न लगी। सवाल यह है कि रामपाल की इन करतूतों की जानकारी के बावजूद उसे पहले क्यों नहीं पकड़ा गया? उसने आश्रम में सुरंगें बना लीं। एनएसजी और एसपीजी वालों ने उसके 300 सुरक्षा कर्मियों को प्रशिक्षण भी दिया, उन्हें हथियार भी दिए गए। नोटों से भरी बोरियां, 30 किलो सोने के जेवरात, सिक्के से भरी 17 बोरियां जिस संत के यहां मिलती हों और जो दूध से नहाने के बाद उस गंदे दूध की खीर बनवाकर भक्तों को खिलाकर उन्हें मूर्ख बनाता हो और वे भक्त बेचारे भक्ति-भाव में बड़े स्वाद लेकर शरीर के गंदें अंगों को धो चुके दूध की खीर को खा लेते हों, तो इसे त्रासदी ही कहा जाएगा। यह त्रासदी इस पूरे मुल्क में धर्म की आड़ में जारी है।
धर्म के कई ठेकेदार दुकानें लगाए बैठे हैं। जहां भोले-भाले लोगों का शोषण किया जाता है। महिलाओंं से बलात्कार होता है और हर तरह के गोरख धंधे होते हैं। लेकिन सरकार ऐसे अपराधियों को संरक्षण क्यों देती है? यह एक बड़ा सवाल है।
क्यों जारी हुआ गैर जमानती वारंट
12 जुलाई, 2006 को हरियाणा के रोहतक के करौंथा में बाबा रामपाल द्वारा संचालित सतलोक आश्रम के बाहर जमा भीड़ पर हुई फायरिंग में झज्जर के एक युवक की मौत हो गई थी। मृतक के भाई का कहना है कि गोली आश्रम की ओर से चली थी। इस मामले में बाबा रामपाल और उसके 37 समर्थकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज है।
करौंथा स्थित सतलोक आश्रम का स्थानीय ग्रामीण विरोध कर रहे थे। इसी मुद्दे पर 12 मई, 2013 को करौथा में पुलिस व ग्रामीणों के बीच हिंसक झड़प में तीन लोगों की मौत हो गई थी। 14 मई, 2013 को पुलिस ने आश्रम खाली कराया। संत रामपाल बरवाला स्थित आश्रम में चला गया। करौंथा आश्रम को प्रशासन ने कब्जे में ले लिया। इन्हीं मामलों में बाबा रामपाल और उसके अनुयायियों के खिलाफ मुकदमा चल रहा है।
पेशी से छूट खत्म होने के बाद हिसार कोर्ट में 14 मई, 2014 को रामपाल की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेशी हुई। सुनवाई के दिन समर्थकों ने कोर्ट परिसर में घुसकर बवाल काटा। वकीलों से हाथापाई की, जजों के खिलाफ नारेबाजी भी की। हाईकोर्ट ने खुद संज्ञान लिया। उसे पेश होने का आदेश दिया गया। कई सुनवाई पर बाबा पेश नहीं हुआ तो अदालत ने रामपाल और उसके अनुयायी व सेवा समिति के अध्यक्ष रामकुमार ढाका के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया।
- 17 अप्रैल 2013 : रामपाल समर्थकों की याचिका पर सिविल जज ने प्रशासन को आश्रम में यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए।
- 2 मई 2013 : आर्य समाजियों की संघर्ष समिति ने बैठक कर 12 मई को निर्णायक कदम उठाने का फैसला लिया।
- 12 मई 2013 : पुलिस व ग्रामीणों के बीच हिंसक झड़प में तीन लोगों की मौत। 110 से ज्यादा लोग घायल।
- 14 मई 2013 : पुलिस ने आश्रम खाली कराया। संत रामपाल बरवाला स्थित आश्रम में चले गए। करौंथा आश्रम की सुरक्षा के लिए पुलिस तैनात।
- 14 जुलाई 2014 : हत्या के मामले में रामपाल को दी गई स्थायी माफी रद्द। हिसार कोर्ट के जरिये रोहतक कोर्ट में हाजिरी लगवाई।
15 दिन से चल रहा था संत और पुलिस का खेल
- 5 नवंबर: बरवाला के सतलोक आश्रम के संचालक रामपाल के खिलाफ वारंट।
- 6 नवंबर: गिरफ्तारी वारंट जारी होने के बाद उनके अनुयायी आश्रम में जुटने लगे।
- 7 नवंबर: उच्च न्यायालय ने पुलिस के डीजीपी व गृहसचिव को 10 नवंबर तक आदेश का पालन सुनिश्चित करने के लिए कहा। डीसी ने आश्रम की प्रबंधन कमेटी के सदस्यों से भी बात की थी।
- 8 नवंबर: प्रशासन ने पैरा मिलिट्री फोर्स और कई जिलों से पुलिस की कंपनियां बुलाई।
- 11 नवंबर: पुलिस व केंद्रीय रिजर्व बल की कंपनियां हिसार लौटी।
- 12 नवंबर: हरियाणा पुलिस और पैरा मिलिट्री की दस से अधिक कंपनियां दोबारा बरवाला पहुंची।
- 13 नवंबर: रामपाल की तरफ से याचिका दायर होनी थी, मगर कागजी कार्रवाई पूरी नहीं हुई।
- 14 नवंबर: हालात से निपटने के लिए 16 आईपीएस अधिकारी हिसार जिले में मोर्चा संभाला। पुलिस के एक हजार ब्लैककेट कमांडो भी बुलाए।
- 15 नवंबर: रामपाल के निजी ब्लैककैट कमांडो का सामना करने के लिए पुलिस-प्रशासन ने 40 से अधिक बुलेटप्रूफ गाडिय़ां मंगवाई।
- 18 नवंबर: 45 हजार जवानों के साथ जब पुलिस टीम ने आश्रम में घुसने की कोशिश की तो रामपाल के समर्थक भड़क गए और आश्रम के भीतर से पुलिस पर फायरिंग की गई, पेट्रोल बम फेंके गए और आंसू गैस के गोले भी फेंके। जिसमें 200 से ज्यादा जवान घायल हुए, लेकिन पुलिस रामपाल तक नहीं पहुंच सकी।
- 19 नवंबर: सुबह से ही आश्रम के बाहर भारी पुलिस बल तैनात था। इसके बाद देऱ शाम पुलिस ने आश्रम पर दबिश देते हुए रामपाल को गिरफ्तार कर लिया।
कौन है बाबा रामपाल
2000 में सिंचाई विभाग से जेई की नौकरी छोडऩे वाले रामपाल ने कंबीरपंथ अपनाया। जून, 2006 में रामपाल ने महर्षि दयानंद पर कथित तौर पर टिप्पणी की। उसी वक्त से रामपाल समर्थकों और आर्य समाज के लोगों के बीच विवाद चल रहा है। हरियाणा के सोनीपत जिले की गोहाना तहसील के गांव धनाना में 1951 में रामपाल का जन्म हुआ था। बताया जाता है कि उसने इंजीनियरिंग में डिप्लोमा करने के बाद सिंचाई विभाग में नौकरी की थी। रामपाल के आश्रम की ओर से चलाई जाने वाली वेबसाइट पर उसे जगत गुरु बताया गया है। रामपाल ने हरियाणा में तीन सतलोक आश्रम बनवाए हैं। पहला आश्रम 1999 में रोहतक के करौंथा में बनाया गया। दूसरा आश्रम हिसार जिला स्थित बरवाला में 2001 में तीन एकड़ में बनवाया गया। इसी इलाके में 2008 में 12 एकड़ में एक और आश्रम बनाया गया। इसी 12 एकड़ के आश्रम में बाबा रामपाल समर्थकों के साथ रहता था। आर्यसमाजियों के साथ विवाद के चलते 14 मई, 2013 को बाबा रामपाल को समर्थकों के साथ करौंथा का सतलोक आश्रम छोडऩा पड़ा। तब यह आश्रम प्रशासन के कब्जे में चला गया। इसके बाद बाबा रामपाल बरवाला में बने सतलोक आश्रम में चला गया। आज रामपाल के अनुयायियों की संख्या 25 लाख से ज्यादा है।
आसाराम बापू
दो बच्चों की मौत और लड़की से बलात्कार से सुर्खियों में आए आसाराम सबसे ज्यादा चर्चा में रहे। ये दोनों बच्चे आसाराम के गुरुकुल में पढ़ रहे थे। इन दोनों की लाश आसाराम के आश्रम के पास मिलीं थीं। साथ ही, काले जादू करने के आरोप लगने पर आसाराम का बड़े पैमाने पर विरोध हुआ और सीबीआई जांच की मांग की गई।
इच्छाधारी संत स्वामी भीमानंद
सन् 1997 में दिल्ली के लाजपत नगर से गिरफ्तार हुई भीमानंद पर देह व्यापार कराने के आरोप लगे हैं। जिसके बाद इन्हें जेल हुई। जेल से छूटने के बाद ये स्वामी खुद को सांई बाबा का अवातार बताने लगा। 12 साल में ही इस स्वामी ने करोड़ों की संपत्ति बना ली।
स्वामी सदाचारी
स्वामी सदाचारी पर महिलाओं से देह व्यापार कराने के आरोप लगे थे।
चन्द्रास्वामी
चन्द्रास्वामी पर हथियारों के लेन-देन से लेकर टैक्स चोरी तक के आरोप लगे हैं। एमसी जैन कमीशन की रिपोर्ट में चन्द्रास्वामी के राजीव गांधी की हत्या से जुड़े होने के सबूत मिले थे।
गुरमीत राम रहीम सिंह
डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह भी इसी गिनती में आते हैं। इन पर सिरसा में अपनी महिला भक्तों के साथ अश्लील हरकतें करने के आरोप लगे हैं। सीबीआई ने इन पर रेप का केस भी दर्ज कर रखा है।
प्रेमानंद
स्वामी प्रेमानंद अपने तमिलनाडु स्थित आश्रम में 13 महिलाओं के साथ बलात्कार करने के आरोप में चर्चा में आए थे। उन पर श्रीलंका के एक व्यक्ति का कत्ल करने का भी आरोप लगे हैं।
जयेंद्र सरस्वती
कांची कामाकोटी पीथम के 69वें शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती को सन् 2004 में गिरफ्तार किया गया था। उन पर अपने ही मंदिर के मैनेजर के कत्ल के आरोप लगे थे।
