20-Nov-2014 01:59 PM
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स्वच्छता अभियान को परवान चढ़ाने के लिए घरों-घर टॉयलेट बनाने का सपना देख रहे हमारे देश की कड़वी हकीकतों में अब कुछ नए सत्य भी जुडऩे लगे हैं। जैसे हाथ में मोबाइल लेकर शौच को जाना। देखने में यह दृश्य बड़ा हास्यासपद और विडम्बनापूर्ण लग सकता है, किंतु यह इस दौर की एक और ज्वलंत सच्चाई है। सरकार ई-क्रांति (कनेक्टिविटी) के लिए 1 लाख करोड़ की रकम खर्च करने वाली है। तब हो सकता है हमें खेत में टैबलेट लिए दिशा-मैदान को जाते कुछ लोग दिख जाएं। टॉयलेट के निर्माण पर सरकार की नीयत साफ है, लेकिन टॉयलेट के उपयोग की आदत सरकार नहीं डाल सकती। गुजरात में सरकार ने विधानसभा में पारित नए कानून के तहत अब नगर-निगम समेत स्थानीय निकाय का चुनाव लडऩे वाले प्रत्येक प्रत्याशी के लिए यह साबित करना अनिवार्य कर दिया है कि उसके घर में शौचालय है। लेकिन शौचालय होने के बावजूद उस शौचालय का उपयोग घर के सभी सदस्य करते हैं अथवा नहीं, यह कौन सुनिश्चित करेगा। दशकों से गांव मेंं संभ्रान्त परिवारों में भी केवल महिलाओं अथवा वृद्धों के शौचालय का उपयोग करने की परंपरा रही है। युवा नदी या अन्य जल स्रोतों पर नहाने और बाहर शौच जाने के चलन में ढले होते हैं। गांव में कहा जाता है कि जब तक हाथ-पैर चल रहे हैं, घर को क्यों गंदा करें। इसलिए ई-क्रांति के बरक्स चल रही शौचालय क्रांति तभी सफल हो सकती है, जब शौचालय निर्माण के साथ-साथ उनके उपयोग के लिए भी लोगोंं को प्रेरित किया जाए। खुले में शौच करना कुछ लोगों को ज्यादा सुविधाजनक लगता है, क्योंकि उन्हें इसकी आदत पड़ चुकी होती है। लेकिन यह आदत निजी और सार्वजनिक स्वच्छता की दृष्टि से खतरनाक है। खासकर तब जब इस देश की जनसंख्या अत्यंत विशाल आकार पर पहुंच चुकी है, इस तरह की गंदगी खतरनाक बीमारियों का कारण बन सकती है। इसलिए टॉवर के साथ-साथ टॉयलेट बनाना और उन टॉयलेट के उपयोग के लिए लोगोंं को प्रेरित करना भी परम आवश्यक है। यदि लोग मोबाइल, टैब सहित तमाम आधुनिक यंत्रों को अपनी दैनिक जीवनशैली में शामिल कर सकते हैं, तो टॉयलेट के उपयोग को भी अपनी आदत में शुमार कर सकते हैं। उपयोग होगा तो वह अपने खर्च पर भी टॉयलेट बनाएंगे और उनको साफ-सुथरा तथा व्यवस्थित रखेंगे। ई-क्रांति के मुहाने पर खड़े भारत के लिए यह एक शर्मनाक आंकड़ा है कि जितने लोग मोबाइल का उपयोग करते हैं, उनमें से सभी टॉयलेट का उपयोग नहीं करते। इस शर्म से निकलना ही होगा। स्थानीय निकाय का चुनाव लडऩे वालों से एक हलफनामा यह भी लिया जाना चाहिए कि जिनके घर में शौचालय है वे उसका सदुपयोग और उचित रख-रखाव करते हैं। स्वच्छ भारत अभियान का यह एक अहम बिंदु है। टॉवर के साथ-साथ ऐसे टॉयलेट भी बनें जो उपयोग में लाए जा सकें।