19-Nov-2014 03:06 PM
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कभी-कभी बेहूदा विरोध देखकर दुख भी होता है और हंसी भी आती है। खासकर उस समय जब एक बीमारी को नष्ट करने के लिए दूसरी बीमारी फैलाई जा रही हो। भारत एक स्वतंत्र देश है और यहां किसी को भी नैतिकता की ठेकेदारी करने अथवा मॉरल पुलिसिंग का हक नहीं है। चाहे वह कोई राजनैतिक दल हो अथवा संगठन।

मॉरल पुलिसिंग के प्रति विरोध दर्ज करने का जो तरीका कोलकाता, कोच्चि में और दिल्ली किस ऑफ लव कैंपेन के मार्फत किया गया वह भी उतना ही वीभत्स और निदंनीय था, जितना कालीकट में जयहिंद नामक टीवी चैनल के स्टिंग ऑपरेशन के बाद डाउनटाउन नामक रेस्त्रां में भाजयुमो का उपद्रव। सबसे प्रमुख बात तो यह है कि विरोध करने वालों ने इसे आरएसएस या उससे जुड़े अनुषांगिक संगठनों की साजिश मानते हुए विरोध जताया, बिना यह जाने कि उपद्रव करने वाले कौन थे? कुछ समय पहले बैंग्लुरु में भी एक पब में कुछ अराजक तत्वों ने जींस पहनी लड़कियों को मारा-पीटा था, जिसका जिम्मेदार भी आरएसएस के संगठनों को ठहरा दिया गया। जबकि सच तो यह था कि आरएसएस का इन घटनाओं से कुछ लेना-देना नहीं था। ऐसी ही एक घटना का विरोध करने वाली महिलाओं ने पिंक पेंटी भेजकर बड़े भद्दे तरीके से विरोध प्रकट किया था।
पल भर के लिए मान भी लिया जाए कि इन समस्त घटनाओं के पीछे किसी दक्षिणपंथी संगठन का हाथ है, तो भी विरोध का यह तरीका निहायत भद्दा और अश्लील नहीं है? प्रेम करना व्यक्ति की नैसर्गिक आवश्यकता है और इस प्रकृति का सबसे बड़ा वरदान स्त्री-पुरुष का प्रेम ही है, जिसके कारण इस सृष्टि का आगे बढऩा संभव हुआ है। किंतु इस पे्रम के प्रकटन की भी कुछ मर्यादा है। हम पशुओं की तरह सड़कों पर, खुले में, गली-मोहल्ले में संभोगरत नहीं हो सकते। यह नितांत निजी क्रिया है, जो चुंबन या आलिंगन की तरह दो वयस्कोंं के बीच घटती है।
सार्वजनिक स्थलों पर व्यवहार की एक आचार संहिता है, जिसका पालन किया ही जाना चाहिए। यदि कोई युगल एक-दूसरे से प्रेम कर रहा है तो भी उसे अपने प्रेम के प्रकटन के लिए आस-पास के माहौल और वातावरण का ध्यान तो रखना ही होगा। एक सभ्य समाज और उससे भी बढ़कर मनुष्य होने की यही तो निशानी है। जीवन में कुछ क्रियाएं बुनियादी रूप से मनुष्य के साथ जुड़ी हुई हैं, कोई भी मनुष्य उनसे प्रथक नहीं है लेकिन सभी सभ्य और जिम्मेदार मनुष्य अपनी निजता का पूरा ध्यान रखते हैं और दूसरे की निजता का भी उसी तरह ध्यान रखते हैं। किसी सार्वजनिक स्थल पर युवक-युवतियों द्वारा अश्लीलता फैलाना दूसरे की निजता का हनन है और एक तरह से अपराध भी है। एक युवक एक युवती सरेआम चुंबन ले रहे हैं यह दृश्य कुछ लोगोंं को अप्रिय भी लग सकता है, भले ही यह नैतिक दृष्टि से सही हो किंतु सार्वजनिक स्थल पर संयम बरतना पहली शर्त है। खासकर भारत जैसे देश में जहां की तासीर में मर्यादा, संयम और शालीनता का विशेष महत्व है इन सब चीजों का ध्यान रखा जाना चाहिए, लेकिन लगता है युवा होते या युवा हो चुके वयस्कों के एक वर्ग को किसी भी तरह का बंधन या वर्जना पसंद नहीं है। वे पश्चिम के न्यूडिस्ट कैंपों की तरह सरेआम आदिम परिवेश में रहने और वैसे ही व्यवहार करने की मंशा रखते हंै इसीलिए उन्होंने आरएसएस के झंडेवालान स्थित कार्यालय के समक्ष किस ऑफ लव अभियान चलाया। इन नादानों को यह नहीं मालूम है कि सारे विश्व में हिंदू संस्कृति ही स्त्री-पुरुष के उन्मुक्त प्रेम को मान्यता देती है। अन्य संस्कृतियां तो स्त्री-पुरुष की इन अभिव्यक्तियों को पाप मानती आई हैं। एक समृद्ध संस्कृति को समझे बगैर फूहड़ विरोध करने वाले इन युवाओं के मानस को बदलने के लिए भगवान से प्रार्थना ही की जा सकती है। ईश्वर इनको सद्बुद्धि दे।