सीमा पर रेल और सड़क से चीन परेशान
11-Nov-2014 05:59 AM 1238306

यह बड़ी अजीब सी बात है कि भारत में विकास के लिए भारी-भरकम निवेश करने वाला पड़ौसी देश चीन भारत-चीन सीमा पर रेल और सड़क का जाल बिछाने से नाखुश है। लगता है चीन इसे भारत की सामरिक रणनीति का हिस्सा समझते हुए इसका विरोध कर रहा है। भारत ने चीन से सटी सीमा पर सड़क बनाने का फैसला किया था, उसका भी विरोध किया गया और अब भारत ने लगभग 1000 किलोमीटर लंबी रेल लाइन के प्रस्ताव में चीन के कान खड़े कर दिए हैं। सीमा पर किसी भी तरह का विकास चीन को रास नहीं आता है, वह पुरजोर कोशिश करता है कि भारत सीमा पर किसी तरह का कोई विकास कार्य न करे ताकि उसे सीमांध्र प्रदेशों को भड़काने का मौका मिल सके। अरुणाचल को वह अपने नक्शे पर दिखाता ही है, कश्मीर और लद्दाख में भी उसने हजारों वर्गमील जमीन दबाकर रखी है। लेकिन अब लगता है कि केंद्र सरकार ने चीन को चुनौती देने का मन बना लिया है।
सरकार ने चीन से सटी सीमा के नजदीक चार रेल लाइनें बिछाने का फैसला किया है। इसके लिए रेलवे को सर्वे करने का निर्देश दिया गया है। ये रेल लाइनें रणनीतिक तौर पर अहम मानी जा रही हैं। ये चार रेल लाइनें उन 14 रेल लाइनों का हिस्सा होंगी, जिनका भारत की फौज रणनीतिक इस्तेमाल करेगी। इन रेल लाइनों की कुल लंबाई करीब एक हजार किलोमीटर होगी। इनका विस्तार अरुणाचल प्रदेश, असम, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में होगा। रेलवे को इन रेल लाइनों को बिछाने के लिए किए जाने वाले सर्वे के खर्च का आंकलन करने के लिए अगले महीने तक का वक्त दिया गया है। बताया जा रहा है कि इंजीनियरिंग सर्वे का ही खर्च करीब 200 करोड़ रुपए हो सकता है।
चीन कर सकता है विरोध 
कुछ दिनों पहले भारत ने चीन से सटी सीमा पर सड़क बनाने का फैसला किया था। इस फैसले का चीन ने यह कहते हुए विरोध किया था कि सीमा से सटे इलाके में भारत को ऐसी गतिविधियां नहीं करनी चाहिए। तब भारत की ओर से केंद्रीय गृह मंत्री ने पलटवार करते हुए कहा था कि भारत को अपनी जमीन पर कोई काम करने के लिए किसी से पूछने की जरूरत नहीं है। गौरतलब है कि चीन ने भारत से सटी सीमा के नजदीक सड़कों और रेल ट्रैक का जाल बिछा दिया है। रणनीतिक तौर पर इन्हीं बुनियादी ढांचों के चलते चीन को भारत पर बढ़त हासिल है। लेकिन अब भारत चीन की घेराबंदी से बाहर निकलने की भरसक कोशिश कर रहा है और इससे चीन तिलमिला गया है। भारत चीन के साथ बराबरी के संबंध कायम करना चाहता है। सामरिक दृष्टि से चीन भारत से कहीं आगे है लेकिन यह भी सत्य है कि भारत में चीन से आगे निकलने की क्षमता है। पिछले तीन दशक में राजनीतिक अस्थिरता के चलते केंद्र की
सरकारें बैसाखियों पर टिकी रहीं और चीन, पाकिस्तान जैसे पड़ौसियों ने भारत की सामरिक स्थिति दयनीय कर दी। अब एक शक्तिशाली सरकार आने से यह संतुलन बदल रहा है तो ड्रैगन बेचैन है।
कितना वक्त लगेगा
सर्वे को पूरा करने में करीब दो साल का वक्त लग सकता है। ये सभी रेल लाइनें हिमालय के आसपास ही बिछेंगी, इसलिए पूरी कवायद के दौरान पहाड़ में कई सुरंगें खोदनी होंगी।

कहां बिछेंगी रेल लाइनें

मिसामारी- तवांग 378 किलोमीटर
असम-अरुणाचल प्रदेश, उत्तरी लखीमपुर-सिलापथर-248 किलोमीटर
असम-अरुणाचल प्रदेश, मुरकोंगसेलेक-पासीघाट-तेजू-परशुराम कुंड-रुपई-256 किलोमीटर
हिमाचल प्रदेश-जम्मू एवं कश्मीर, बिलासपुर-मंडी-मनाली-लेह 498 किलोमीटर

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