09-Nov-2014 11:23 AM
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कोल ब्लॉक आवंटन में महा घोटाले के उजागर होने के बाद सितंबर माह में सुप्रीम कोर्ट ने 214 कोल ब्लॉक आवंटन को रद्द कर दिया था। इसके बाद से ही यह तय हो गया था कि इन सभी कोल ब्लॉक्स को बेच दिया जाएगा, लेकिन नीलामी की प्रक्रिया में पारदर्शिता उस वक्त भी एक बड़ा सवाल थी और आज भी है। कैग ने घोटाले का जो आंकड़ा दिया था, उसकी भरपाई नए सिरे से आवंटन के बाद हो सकेगी? यदि ऐसा हुआ तो सरकार का खजाना भरना तय है और नई सरकार इस भरे हुए खजाने से बहुत से विकास कार्यों को अंजाम दे सकती है। किंतु घोटाले का नया तरीका कितना फलदायी है, यह तो तभी पता चलेगा जब नए सिरे से आवंटन किया जाएगा। नीलामी प्रक्रिया में सिर्फ भारतीय कंपनियों को ही भाग लेने की अनुमति होगी। सरकारी बिजली कंपनियों जैसे एनटीपीसी और राज्य के बिजली निगमों को खदानों के आवंटन में प्राथमिकता दी जाएगी। सीमेंट, इस्पात और बिजली क्षेत्र की निजी कंपनियों के लिए पूल बनेगा। उन्हें ई-ऑक्शन के जरिए खदानें आवंटित होंगी। सीधी सी बात यह है कि कोल ब्लॉक्स का आवंटन अब वास्तविक उपभोक्ता कंपनियों को किया जाएगा। इसका अर्थ यह हुआ कि सरकार की कोई भूमिका नहीं होगी। लेकिन खदानों का निजीकरण नहीं होगा। कोयला खदानों के राष्ट्रीयकरण की व्यवस्था बनी रहेगी तथा वर्ष 1973 का कोयला राष्ट्रीयकरण कानून भी रद्द नहीं होगा। यह जैसा था वैसा ही रहेगा। इससे यह पता चलता है कि सरकार कोई बड़ा भारी परिवर्तन करने नहीं जा रही है। जिन कोल ब्लॉक्स का पुन: आवंटन किया जा रहा है, वे उन कंपनियों को भी मिल सकते हैं जिन पर आरोप हैं।
जिन पर आरोप साबित हुए हैं, उन्हें रोका जाएगा। भविष्य में खदान का आवंटन केंद्र सरकार ही करेगी। एक समिति नीलामी के लिए आधार मूल्य तय करेगी। इससे प्राप्त राजस्व संबंधित राज्यों को दिया जाएगा। कोयला भंडार झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और छत्तीसगढ़ में हैं। इन राज्यों की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। इससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। लाखों लोगों को रोजगार मिलेगा। इन ब्लॉक्स में फंसे बैंकों का पैसा निकालने में मदद मिलेगी।
कोर्ट ने रद्द किया था आवंटन
सुप्रीम कोर्ट ने 24 सितंबर को 1993 से 2010 तक आवंटित 218 में से 214 का आवंटन निरस्त कर दिया था। हालांकि, इन कंपनियों को छह माह तक उत्पादन जारी रखने की अनुमति दी थी। कैग ने 2012 में एक रिपोर्ट दी थी। इसमें कहा था कि 2005 से 2009 के बीच मनमाने तरीके से कोयला ब्लॉक आवंटित किए गए। इससे देश को 1.86 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है।
लेकिन भ्रष्टाचारियों का क्या होगा?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस तरह से बिना किसी पारदर्शिता के इन कोल ब्लॉक्स का आवंटन किया गया था, उस प्रक्रिया में शामिल समस्त आपराधिक तत्वों का क्या किया जाएगा? सरकार ने फिलहाल कोयला घोटाले के दोषियों के खिलाफ कोई ठोस कदम नहीं उठाया। बल्कि उल्टे उन कंपनियों को लाभ पहुंचाने के लिए सरकार ने गैस की कीमतें बढ़ाने की बात की है, जो इस घोटाले में शामिल थीं। गैस की कीमतें बढऩे से नुकसान आम आदमी को ही होगा। घरेलू गैस की कीमत भी बढ़ जाएगी। सरकार ने नए आवंटन में पारदर्शिता तो बनाई है पर सबसे बड़ा प्रश्न राजस्व का है। यदि राजस्व बढ़ता है तो फायदा आम जनता तक भी पहुंच ही जाएगा।