मोहन, मोदी की जुगलबंदी पर ऐतराज
17-Oct-2014 09:19 AM 1234842

विजयदशमी के दिन देश के सरकारी मीडिया में दो अभूतपूर्व घटनाएं घटीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आकाशवाणी के जरिए मन की बात की तो उधर दूरदर्शन के जरिए मोहन की बात से राजनीति और पत्रकारिता के जगत में बवाल मच गया। विपक्ष ने दोनों के कदम को सरकारी मीडिया का दुरुपयोग बताया। कांग्रेस ने तो यह तक कहा, कि प्रधानमंत्री को महाराष्ट्र, हरियाणा चुनाव के समय आकाशवाणी पर नहीं आना था। उधर मोहन भागवत के भाषण के सीधे प्रसारण को भी राजनीति से प्रेरित माना गया।
मोदी के भाषण को छोड़ दिया जाए, तो भी सवाल यह है कि आखिर सरकारी मीडिया की मर्यादा क्या है, उसे क्या दिखाना चाहिए और क्या नहीं? क्या मोहन भागवत का भाषण लाईव प्रसारित इसलिए किया गया क्योंकि दूरदर्शन पर किसी का दबाव था? यदि ऐसा है तो यह निश्चित रूप से सरकारी मीडिया का दुरुपयोग है, जिसकी स्वायत्तता को लेकर भाजपा उस समय से चिल्लाती रही है, जब वह विपक्ष में थी। तब राहुल गांधी और सोनिया गांधी को ज्यादा कवरेज मिलने तथा भाजपा नेताओं की उपेक्षा किए जाने पर भाजपा हल्ला मचाया करती थी। आज सरकारें बदल गई हैं, लेकिन हालात वही हैं। सरकारी मीडिया को सरकार का प्रवक्ता बनाकर प्रस्तुत किया जा रहा है। सरकारी मीडिया वाले भी अपनी रोजी-रोटी के डर से चाहकर भी निष्पक्ष नहीं हो पाते। बहरहाल नरेंद्र मोदी का रेडियो पर आना एक अच्छा प्रयोग कहा जा सकता है। उन्होंने कुछ अच्छी बातें भी कीं।
रेडियो के जरिये समय-समय पर लोगों से संपर्क करने का वादा करते हुए मोदी ने नागरिकों से सुझाव मांगे। करीब 15 मिनट के संबोधन में प्रधानमंत्री ने मंगल पर कम खर्च में पहुंचने की उपलब्धि का जिक्र  करते हुए देशवासियों की क्षमताओं को बेजोड़ करार दिया। लोगों से निराशा त्यागने की अपील करते हुए प्रधानमंत्री ने उनकी शक्ति याद दिलाई। इस कड़ी में स्वामी विवेकानंद की एक कथा का जिक्र किया, जिसमें भेड़ों के बीच पला-बढ़ा शेर का बच्चा जब एक दूसरे शेर के संपर्क में आता है, तो अपनी ताकत पहचानता है। प्रधानमंत्री ने गांधी को प्रिय खादी की भी मार्केटिंग भी खुलकर की। उन्होंने सबसे एक वस्त्र खादी का रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि मैं आपसे खादीधारी बनने को नहीं कह रहा हूं, लेकिन आपसे आग्रहपूर्वक कह रहा हूं कि आपके वस्त्र में कम से कम एक तो खादी का हो। मोदी ने कहा, यह देश सभी लोगों का है, केवल सरकार का नहीं है। कुछ लोगों ने लघु उद्योगों की पंजीकरण प्रक्रिया को सरल बनाने का सुझाव दिया है। साथ ही सुझाव दिया कि स्कूलों में पांचवीं कक्षा से कौशल विकास का कार्यक्रम होना चाहिए, ताकि जब वे पढ़ाई खत्म करके निकलें तब अपने हुनर की बदौलत रोजगार प्राप्त कर सकें। इसी तरह प्रत्येक एक किलोमीटर पर कूड़ेदान लगाने और पॉलीथीन के इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने जैसे सुझाव भी मिले।
इससे पूर्व नागपुर में विवादित हुए अपने विजयादशमी संबोधन में मोहन भागवत ने हिंदुत्व को देश की राष्ट्रीय पहचानÓ करार दिया और कहा कि एकता का ताना-बाना इसकी विविधता से होकर गुजरता है। आरएसएस के 89वें स्थापना दिवस पर रेशमबाग मैदान में संघ कार्यकर्ताओं को भागवत ने पिछले चार महीने की अल्पावधि में राष्ट्रीय सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय संबंधों से जुड़े विषयों पर की गई पहलों के लिए मोदी सरकार की पीठ थपथपाई। भागवत ने कहा कि लोगों को सरकार को थोड़ा और समय देना चाहिए, ताकि वह अपनी नीतियों को तेजी और प्रभावी ढंग से लागू कर सके। जब तक देश का अंतिम व्यक्ति कल्याण योजनाओं, सुरक्षा और संरक्षा के प्रति संतुष्टि महसूस नहीं करेगा, तब तक सरकार का कार्य पूरा नहीं हो सकता है। हमारे पास बदलाव के लिए जादू की छड़ी नहीं है, लेकिन सरकार प्रतिबद्ध दिख रही है। भागवत ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की हाल की अमेरिका यात्रा से सकारात्मक संकेत मिले है और इससे देश के लोगों में नया उत्साह जगा है। दुनिया को भारत की जरूरत होने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि लोगों के दिलों में उम्मीद की नयी किरण जगी है। यात्रा और अमेरिकी सरकार के साथ बातचीत के बाद पूरा देश गर्व महसूस कर रहा है। उन्होंने केंद्र और आरएसएस कार्यकर्ताओं के जम्मू कश्मीर में बाढ़ प्रभावित लोगों के राहत एवं बचाव कार्य में योगदान की सराहना की। भागवत ने बाढ़ में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा, कि हमारी संवेदनाएं पीडि़त परिवारों के साथ हैं। भारत ने दुनिया को मानवता का उदाहरण पेश किया है और कट्टरता हमारे व्यवहार में कभी नहीं रही है। पूरी दुनिया भाषा, पंथ और निवास के आधार पर बंटी हुई है। इस वजह से लोग खुद को औरों से अलग मानते हैं। आज कट्टरवाद का एक बड़ा तबका खड़ा हो गया है। हमें कट्टरवाद के खिलाफ एकजुट होना होगा।

 

-Bindu Mathur

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