19-Jun-2014 02:53 PM
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पुणे में एक आईटी प्रोफेशनल मोहसिन शेख की हत्या इसलिये कर दी गई क्योंकि उसने फेसबुक और व्हाइट्सएप पर कथित रूप से शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे छत्रपति शिवाजी और हिंदू देवताओं की विकृत तस्वीरें पोस्ट कर दी थीं। 24 वर्षीय मोहसिन नमाज अदा करके लौट रहा था। तभी भीड़ में से किसी ने उसे निशाना बनाया और भीड़ के बाकी लोगों ने पीट-पीटकर बेरहमी से उसकी हत्या कर दी। रियाज के मुताबिक मोहसिन को भीड़ ने इसलिये निशाना बनाया क्योंकि उसने लंबी दाढ़ी रखी हुई थी, उसकी मूंछें सफाचट्ट थीं और सिर पर मुस्लिम टोपी थी। इसका अर्थ यह हुआ कि भारत अब ऐसा देश बन चुका है जहां अपनी पसंद की वेशभूषा में रहना या अपनी पसंद से चेहरे-मोहरे को रखना या कोई विशेष धार्मिक पहचान कायम रखना मौत का सबब बन सकता है। मोहसिन की मौत उसी नफरत भरी मानसिकता का नतीजा है जिसके चलते विशेष वेशभूषा में रहने वाले हर मुस्लिम को आतंकवादी और कट्टर समझकर समाज के कुछ लोग उनके खून के प्यासे हो जाते हैं।
कमाल की बात यह है कि इस देश में चोटी रखना, तिलक लगाना, भगवा पहनना, पगड़ी पहनना या ऐसा ही कोई चिन्ह धारण करना अपराध नहीं है। लेकिन जैसे ही कोई व्यक्ति विशुद्ध मुस्लिम बनने का प्रयास करे उसका कत्ल हो सकता है। यह बड़ी खतरनाक स्थिति है और इसमें सोशल मीडिया का व्यापक योगदान है। जिसने नफरत और अफवाहों के बाजार में महारत हासिल कर ली है।
कुछ समय पूर्व जब महेश भट्ट ने कहा था कि सोशल मीडिया कायरों के लिये है तो उनके इस कथन की बड़ी आलोचना हुई थी। लेकिन महेश भट्ट ने क्या गलत कहा? दूसरे धर्मों की खिल्ली उड़ाना, दूसरे धर्म के सम्मानित देवी-देवताओं का मजाक बनाना, अपमान करना या किसी की धार्मिक भावना से खिलवाड़ करना कायरता ही तो है। सोशल मीडिया निश्चित रूप से उन लोगों का हथियार बन चुका है जो नफरत से भरे बैठे हैं और अपनी नफरत सोशल मीडिया पर उड़ेल रहे हैं। लेकिन इसने माहौल भी खराब कर दिया है। केवल नफरत ही नहीं बल्कि गलत खबरें और अफवाहें भी सोशल मीडिया के द्वारा फैलाई जा रही हैं।
कुछ समय पूर्व अफवाह उड़ी थी कि कादर खान का निधन हो गया जबकि वे सही सलामत हैं। सोशल मीडिया पर ही किसी ने खबर फैला दी कि लता मंगेशकर ने गायकी से संन्यास ले लिया है इस खबर ने लता मंगेशकर को गहरा आघात पहुंचाया। अभी कुछ दिन पूर्व ही हनी सिंह की मौत की खबर आई थी। इससे पहले बोनी कपूर की मृत्यु की खबर भी सोशल मीडिया पर प्रसारित की गई। केंद्रीय मंत्री तपन सिकदर का निधन जिस दिन हुआ उससे कई दिन पहले ही सोशल मीडिया पर उनके निधन की अफवाह फैला दी गई। शम्मी कपूर, शशि कपूर के मामले में भी कुछ ऐसा ही हुआ था।
ये अफवाहें क्यों फैलाई जा रही है? और कौन है इनके पीछे? भारत का आईटी कानून इत
ना लचर है कि वहां चाहकर भी पीडि़तों को समाधान नहीं मिल पाता। साइबर क्राइम दिनोंदिन बढ़ते जा रहा है। वर्ष 2012 में बैंगलोर और अन्य भारतीय शहरों में रह रहे पूर्वोत्तर के लोग अचानक पलायन करने लगे। बाद में पता चला कि मोबाइल पर किसी ने पूर्वोत्तर के लोगों को धमकी दी थी और अफवाहों के बाद लोग भागने लगे। फेसबुक जैसी वेबसाइट कट्टरपंथ और नफरत फैलाने का माध्यम बन गई हैं। म्यांमार में मुस्लिमों के विरुद्ध हुई हिंसा के गलत चित्र सोशल मीडिया पर डाले गये और भारत में बड़ी संख्या में मुसलमानों ने प्रदर्शन किया। मुंबई में तो शहीद स्मारक ही तोड़ दिया गया। लखनऊ में भी गौतम बुद्ध की मूति को नुकसान पहुंचाया गया। मुजफ्फरनगर में हुए दंगे में सोशल मीडिया का रोल काफी अहम था. फेसबुक और यू-ट्यूब पर शेयर किया गया विडियो दंगे का कारण बताया गया था. इस मामले में दो विधायकों को जेल भी जाना पड़ा था. दरअसल, फेसबुक पर आज चौथी पोस्ट किसी न किरी सम्प्रदाय के खिलाफ होती है. ऐसे में इन पर लगाम लगाना काफी जरूरी है.
इनकी मौत की अफवाह उड़ी
कादर खान, बोनी कपूर, हनी सिंह, आशा पारिख, लता मंगेशकर, आयुष्मान खुराना, अमिताभ बच्चन, रितिक रोशन।