16-Feb-2013 11:31 AM
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भारत में राजनीतिक उथल-पुथल चल रही है। भ्रष्टाचार, आतंकवाद से लेकर अफजल गुरु की फांसी तक कई राजनीतिक मुद्दे देश में लगातार सामने आ रहे हैं, लेकिन इन सबके बीच जिस महत्वपूर्ण
तथ्य की उपेक्षा की जा रही है वह है रसातल में जाती विकास दर। भारत की विकास दर पिछले एक दशक में सबसे निचले पायदान पर है। उत्पाद कृषि और सेवा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में विकास दर सबसे निचले पायदान पर पहुंच चुकी है तथा उत्पादन में मंदी के चलते घटते जीडीपी का असर अब देश में रोजगार पर भी पडऩे लगा है।
भारतीय सांख्यिकीय संगठन (सीएसओ) के ताज़ा अनुमान के मुताबिक साल 2012-13 के वित्तीय वर्ष के दौरान सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में बढ़ोत्तरी की दर इस दशक के सबसे निचले स्तर पर पहुंचने का अनुमान है। आर्थिक विशेषज्ञों के मुताबिक सकल घरेलू उत्पाद की घटती दर महंगाई से जूझ रहे आम आदमी पर बेरोजग़ारी की गाज बनकर गिर सकती है। सकल घरेलू उत्पाद की घटती दर कृषि और उत्पादन क्षेत्र में मंदी का सूचक है और इन क्षेत्रों में विकास की रफ्तार धीमी हो तो रोजग़ार के अवसर पैदा नहीं होंगे। पिछले सालों में जब सकल घरेलू उत्पाद की दर बढ़ी तब भी रोजग़ार के अवसर उसके अनुपात में उतने नहीं बढ़ पाए, तो अब जब यह सीधे तौर पर घट रही है तब रोजगार हर हाल में प्रभावित होंगा। भारतीय अर्थव्यवस्था इन दिनों एक कुचक्र की शिकार है जिसमें महंगाई की मार ने आम आदमी की बचत को निशाना बनाया है और निवेश में छाई इस मंदी का सीधा असर उत्पादन और दूसरे क्षेत्रों पर पड़ रहा है। आर्थिक विशेषज्ञों के मुताबिक अगले बजट में सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती इसी कुचक्र को तोडऩा है। विदेशी निवेश और वित्तीय घाटे को कम करने के मुद्दे पर राजनीतिक सहमति बनाना और ठोस व्यावहारिक कदम उठाना भी
चुनौतीपूर्ण है। भारतीय सांख्यिकीय संगठन (सीएसओ) के मुताबिक 2012-13 के वित्तीय वर्ष के दौरान सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में इजाफे की दर साल 2011-12 के 6.2 फीसदी की तुलना में 5 प्रतिशत रहने का अनुमान है। सीएसओ का यह अनुमान हाल ही में जारी रिजर्व बैंक और सरकार के पूर्वानुमान से बहुत कम है। आंकड़ों के लिहाज़ से विकास दर में सबसे बड़ी कमी वित्त, बीमा, रियल एस्टेट और व्यापारिक सेवाओं को मिलाकर बने सेवा क्षेत्र में दर्ज होने के अनुमान हैं। जहां पिछले साल का आंकड़ा 11.7 फीसदी था वहीं मौजूदा वित्तीय वर्ष में यह आंकड़ा 8.6 फीसदी रहने के आसार हैं। भारत की आर्थिक विकास दर वर्तमान में सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है कृषि से लेकर कई अन्य क्षेत्र ऐसे हैं जहां ये 1.9 फीसदी तक घटने की आशंका है। यानी अफ्रीका के कुछ देश भी विकास दर की दृष्टि से हमसे आगे हैं। भारतीय सांख्यिकीय संगठन (सीएसओ) के अनुमान के मुताबिक 2012-13 के वित्तीय वर्ष के दौरान सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में इजाफे की दर साल 2011-12 के 6.2 फीसदी की तुलना में 5 प्रतिशत रहने का अनुमान है। सीएसओ का यह अनुमान हाल ही में जारी रिजर्व बैंक और सरकार के पूर्वानुमान से बहुत कम है। वर्ष 2002-03 में जीडीपी चार फीसदी की दर से बढ़ी थी और इसके बाद से ही भारतीय अर्थव्यवस्था का विस्तार छह प्रतिशत की दर से होता रहा है। साल 2006-07 में विकास दर अपने उच्चतम स्तर 9.6 फीसदी पर पहुंच गया था। सीएसओ के पूर्वानुमानों में 2012-13 के लिए खेती और उससे जुड़ी आर्थिक गतिविधियों की विकास दर 2011-12 के 3.6 फीसदी की तुलना में घटाकर 1.8 प्रतिशत कर दिया गया है।
उत्पादन क्षेत्र भी इस कमी से अछूता नहीं रह पाया है। पिछले वित्तीय वर्ष के 2.7 फीसदी की तुलना में इसके घटकर 1.9 फीसदी हो जाने की संभावना जताई गई है। सीएसओ का अनुमान पिछले हफ्ते आरबीआई के त्रैमासिक मौद्रिक नीति की समीक्षा में जताई गई 5.5 फीसदी की विकास दर की संभावना के उलट बहुत कम है। साल के बीच में की जाने वाली आर्थिक समीक्षा में सरकार ने भी विकास दर के 5.7 से 5.9 फीसदी के बीच रहने का अनुमान लगाया था। इन सारे हालातों को देखते हुए विदेशी निवेशकों ने भारत से मुंह मोड़ लिया है और यह भारत के लिए चिंता की बात है तथा इससे आर्थिक मंदी आने का खतरा बढ़ता जा रहा है। आईएमएफ के वर्ल्ड इकॉनामिक आउटलुक की इस रिपोर्ट के मुताबिक़ दुनिया भर की अर्थव्यव्स्थाओं में चीन सबसे आगे चल रहा है। वर्ष 2012 में चीन की आर्थिक विकास दर 7.8 रही है।
दूसरे नंबर पर भारतीय अर्थव्यवस्था को ही आंका जा रहा था, लेकिन इस रिपोर्ट के मुताबिक एशिया के दूसरे देश अब भारत से आगे निकल गए हैं। इंडोनेशिया, मलेशिया, फि़लिपींस, थाईलैंड और वियतनाम में आर्थिक विकास की रफ्तार दर 5.7 रही। पड़ोसी देश बांग्लादेश में विकास दर भारत से बेहतर था। हालांकि कुछ आर्थिक विश्लेषक रिपोर्ट को इस आधार पर तर्कसंगत नहीं मान रहे हैं कि इंडोनेशिया, मलेशिया, फि़लिपींस, थाईलैंड और वियतनाम की अर्थव्यवस्था भारत की तुलना में बेहद छोटी हैं। एशियाई देशों के अलावा सब-सहारा के अफ्रीकी देशों में भी 2012 के दौरान आर्थिक विकास की दर 4.8 प्रतिशत आंकी गई है। हालांकि उम्मीद की जा रही है कि साल 2013 में भारत में विकास दर 5.9 होगी। इसके बल पर भारतीय अर्थव्यवस्था फिर से दूसरे नंबर पर आ जाएगी। वैसे आईएमएफ की इस रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया भर की अर्थव्यवस्था पटरी पर आने लगी है। इसके मुताबिक अमरीका और जापान में अर्थव्यवस्था में सुधार दिख रहा है, हालांकि अभी इसे बेहद मामूली माना जा रहा है। लेकिन यूरोपीय संघ के देशों की अर्थव्यवस्था में कोई खास सुधार के आसार नहीं दिख रहे हैं।
शोभन बनर्जी