02-Jan-2020 07:55 AM
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अगर सरकारें ठान लें तो महिला अपराधों में कमी आ सकती है। यह साबित कर दिखाया है मप्र सरकार ने। मप्र में विगत 11 महीने की अवधि में दुष्कर्म की घटनाओं में आंकड़ों के हिसाब से बेहतर स्थिति दिखाई दे रही है। एक जनवरी से 20 नवंबर की अवधि के दौरान दुष्कर्म की घटनाएं पिछले साल से करीब 400 कम घटित हुईं। दूसरी तरफ दस साल में सोशल मीडिया पर महिलाओं और बच्चियों को ब्लैकमेल करने की 133 शिकायतें सामने आईं। प्रदेश की यह आपराधिक स्थिति विधानसभा में लिखित प्रश्नों से सामने आई है। जानकारों का कहना है कि ये आंकड़ें और सुधर सकते हैं। अगर सरकार निर्भया फंड का पूरी तरह उपयोग करे। गौरतलब है कि केंद्र सरकार द्वारा महिला सुरक्षा के मद्देनजर हर राज्य को निर्भया फंड दिया जाता है। लेकिन राज्य सरकारों की रूचि फंड के इस्तेमाल में नहीं दिख रही है।
निर्भया हादसे को हुए 16 दिसंबर को 7 साल हो जाएंगे। लेकिन तब से लेकर अब तक न जाने कितने मामले घट चुके। तेलंगाना में सामूहिक बलात्कार और हत्या का मामला अभी लोग भूले नहीं हैं। उन्नाव में बलात्कार पीडि़ता को जलाकर मार दिया गया तो छत्तीसगढ़ में भी उन्नाव की तरह जमानत पर रिहा हुए बलात्कार के आरोपियों ने पीडि़ता की चाकू गोदकर हत्या कर दी। यानी अगर आंकड़े निकाले जाएं तो रोजाना पूरे देश में ऐसी घटनाओं की भरमार रहती है। दिसंबर, 2012 में निर्भया मामले के बाद महिला सुरक्षा को लेकर सख्त दिशा-निर्देश दिए गए। निर्भया फंड के जरिए महिला सुरक्षा के लिए जरूरी टेक्नोलॉजी के विकास, राज्यों में इन्फ्रास्ट्रक्चर की कमी को पूरी करने के निर्देश दिए गए। लेकिन क्या सरकारें चौकस हुईं? निर्भया फंड से महिलाएं निर्भय बन सकीं? केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की यह रिपोर्ट दर्शाती है कि राज्य सरकारों के पास फंड की नहीं मंशा की कमी है।
निर्भया कांड क्योंकि दिल्ली में ही हुआ था, इसलिए इस फंड की पड़ताल दिल्ली से ही की जानी चाहिए। केंद्र से मिले 39090.12 रुपए में से 1941.57 फंड ही राज्य सरकार खर्च कर पाई। क्यों? दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने गत दिनों एक ट्वीट कर सूचना दी, दिल्ली के सभी स्कूलों और कॉलेजों में अब लड़कों को लड़कियों और महिलाओं के साथ दुव्र्यवहार न करने की शपथ दिलाई जाएगी। लड़कियां अपने भाइयों से शपथ लेंगी। हर क्लास में एक घंटे महिलाओं के साथ होने वाली छेड़छाड़ और उसके समाधान पर खुलकर चर्चा होगी।’ लेकिन क्या अगर निर्भया फंड के इस्तेमाल के जरिए राज्य की लड़कियों को महिला सुरक्षा से जुड़े प्रशिक्षण देना जरूरी नहीं था। दिल्ली के कई इलाके बिना स्ट्रीट लाइट रात में भयावह हो जाते हैं क्या वहां लाइट लगवाना जरूरी नहीं थी? क्योंकि तेलंगाना का मामला गरम है इसलिए इस राज्य के फंड की पड़ताल जरूरी है। 10351.88 रुपए में से 419.00 ही खर्च हो पाए। हालांकि यहां तो महिला आयोग का अध्यक्ष पद ही 17 महीनों से नियुक्ति की बांट जोह रहा है। उत्तर प्रदेश की हालत तो इससे भी खराब है। कुल फंड 11939.85 रुपए में से 393.00 रुपए ही खर्च हो पाए। कुल मिलाकर पूरे देश में महिला सुरक्षा के नाम पर नूरा-कुश्ती ही जारी है। कारण सबको पता हैं लेकिन निवारण के लिए वक्त किसी सरकार के पास नहीं है।
2017-18 में आठ शहरों दिल्ली, चेन्नई, कोलकाता, मुम्बई, बेंगलुरु, हैदराबाद, लखनऊ और अहमदाबाद में महिलाओं के लिए सुरक्षित-शहर परियोजनाओं की खातिर 2919.55 करोड़ रुपए आवंटित किए और इस धन का क्या उपयोग किया गया, उसके अभी आधिकारिक आंकड़े प्राप्त नहीं हुए हैं। इसके अलावा केंद्रीय पीडि़त मुआवजा कोष (सीवीसीएफ) के लिए 200 करोड़ रुपए के निर्भया फंड की व्यवस्था की गई, जिसे महिलाओं पर तेजाब हमले, दुष्कर्म पीडि़ताओं, तस्करी आदि के मामले में अनुदान के तौर पर देना था, इस पर किए गए खर्च का भी कोई हिसाब नहीं है। कोई नहीं जानता कि आवंटित राशि कैसे खर्च की गई है। संसदीय समिति की रिपोर्ट से यह भी पता चलता है कि निर्भया फंड को महिलाओं की वास्तविक सुरक्षा के बजाय इसके मकसद को लेकर उलझाने में ही फंसा दिया। इस तरह के आवंटन का वह मकसद में असफल हो जाता है, जिसके लिए निर्भया फंड बनाया गया था।
निर्भया फंड के खर्च की स्थिति
राज्य फंड सेंक्शन उपयोग
(लाखों में) (लाखों में)
आंध्रप्रदेश 2085.00 814.01
अरुणाचल प्रदेश 768.86 224.03
पं. बंगाल 7570.80 392.73
असम 2072.63 305.06
तमिलनाडु 19068.36 600.00
बिहार 2258.60 702.00
उत्तराखंड 953.27 679.41
छत्तीसगढ़ 1687.41 745.31
गोवा 776.59 221.00
गुजरात 7004.31 118.50
हरियाणा 1671.87 606.00
यूपी 11939.85 393.00
हिमाचल प्रदेश 1147.37 291.54
राजस्थान 3373.02 1011.00
जम्मू-कश्मीर 1256.02 324.53
झारखंड 1569.81 405.33
कर्नाटक 19122.09 1362.00
केरल 1971.77 472.00
मप्र 4316.96 639.50
दिल्ली 39090.12 1941.57
महाराष्ट्र 14940.06 0
ओडिसा 2270.53 58
पंजाब 2047.08 300
- ज्योत्सना अनूप यादव