आखिर गीता में क्या खास है?
02-Jan-2020 07:55 AM 1238541
हर कोई चाहता है कि वह अपने जीवन में हर तरह की तरक्की को हासिल कर सके। लेकिन कई बार बहुत मेहनत करने के बावजूद भी व्यक्ति को वे सारी शोहरत हासिल नहीं हो पाती जिसका वह हकदार होता है। ऐसे में अगर इंसान अपने अंदर कुछ खास गुणों को पैदा कर ले तो वह जीवन में आनी वाली हर मुश्किल का सामना कर सकता है। आज हम आपको भगवान कृष्ण द्वारा बताई गई कुछ बातों का जिक्र करने जा रहे हैं। जिन्हें व्यक्ति अपने जीवन में अपनाकर सफलता को पा सकता है। श्रीमद्भगवद्गीता में कुछ ऐसी बातें बताई गई हैं, जो आज के समय में बहुत ही उपयोगी मानी जाती है। ऐसा माना जाता है कि जीवन में आगे बढऩे के लिए व्यक्ति को गीता में बताई इन बातों को जरूर अपना लेना चाहिए। कहते हैं कि जीवन में मिलने वाली हर सीख व्यक्ति को कुछ न कुछ सिखाकर जाती है। गीता में भक्ति, ज्ञान और कर्म मार्ग की चर्चा की गई है। उसमें यम-नियम और धर्म-कर्म के बारे में भी बताया गया है। गीता ही कहती है कि ब्रह्म (ईश्वर) एक ही है। गीता को बार-बार पढ़ेंगे तो आपके समक्ष इसके ज्ञान का रहस्य खुलता जाएगा। गीता के प्रत्येक शब्द पर एक अलग ग्रंथ लिखा जा सकता है। इसका कोई सा भी अध्याय अन्य अध्याय का रिपिटेशन नहीं है। विषय भले ही एक हो लेकिन प्रत्येक अध्याय में अलग ही तरह का ज्ञान है। गीता में सृष्टि उत्पत्ति, जीव विकास क्रम, हिन्दू संदेशवाहक क्रम, मानव उत्पत्ति, योग, धर्म-कर्म, ईश्वर, भगवान, देवी-देवता, उपासना, प्रार्थना, यम-नियम, राजनीति, युद्ध, मोक्ष, अंतरिक्ष, आकाश, धरती, संस्कार, वंश, कुल, नीति, अर्थ, पूर्वजन्म, प्रारब्ध, जीवन प्रबंधन, राष्ट्र निर्माण, आत्मा, कर्मसिद्धांत, त्रिगुण की संकल्पना, सभी प्राणियों में मैत्रीभाव आदि सभी की जानकारी है। गीता का मुख्य ज्ञान है कैसे स्थितप्रज्ञ पुरुष बनना, ईश्वर को जानना या मोक्ष प्राप्त करना। श्रीमद्भगवद्गीता योगेश्वर श्रीकृष्ण की वाणी है। इसके प्रत्येक श्लोक में ज्ञानरूपी प्रकाश है जिसके प्रस्फुटित होते ही अज्ञान का अंधकार नष्ट हो जाता है। ज्ञान-भक्ति-कर्म योग मार्गों की विस्तृत व्याख्या की गई है। इन मार्गों पर चलने से व्यक्ति निश्चित ही परम पद का अधिकारी बन जाता है। महाभारत के 18 अध्यायों में से 1 भीष्म पर्व का हिस्सा है भगवत गीता। गीता में भी कुल 18 अध्याय हैं। 18 अध्यायों की कुल श्लोक संख्या 700 है। वेदों का सार अर्थात संक्षिप्त रूप है उपनिषद्ध और उपनिषदों का सार है गीता। गीता सभी हिन्दू ग्रंथों का निचोड़ और सारतत्व है इसीलिए यह सर्वमान्य हिन्दू धर्मग्रंथ है। इसे वेद और उपनिषदों का पॉकेट संस्करण भी कह सकते हैं। गीता को अर्जुन के अलावा संजय ने सुना और उन्होंने धृतराष्ट्र को सुनाया। गीता में श्रीकृष्ण ने 574, अर्जुन ने 85, संजय ने 40 और धृतराष्ट्र ने 1 श्लोक कहा है। हरियाणा के कुरुक्षेत्र में जब यह ज्ञान दिया गया तब तिथि एकादशी थी। संभवत: उस दिन रविवार था। कहते हैं कि उन्होंने यह ज्ञान लगभग 45 मिनट तक दिया था। कलयुग के प्रारंभ होने के मात्र तीस वर्ष पहले, मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी के दिन, कुरुक्षेत्र के मैदान में, अर्जुन के नन्दिघोष नामक रथ पर सारथी के स्थान पर बैठ कर श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश किया था। इसी तिथि को प्रतिवर्ष गीता जयंती का पर्व मनाया जाता है। कहते हैं प्रथम दिन का उपदेश प्रात: 8 से 9 बजे के बीच हुआ था। लोगों का मानना है कि गीता में लिखे श्लोक किसी के जीवन में कई अहम बदलाव ला सकते हैं। खासतौर पर अगर आप करियर, नौकरी या किसी भी व्यवसाय में मिल रही विफलता को लेकर चिंतित हैं तो आपकी यह चिंता श्रीमद् भगवद गीता दूर कर सकती है। अगर आप श्रीमद् भगवद गीता में कही बातों को अपने जीवन में लागू करेंगे तो सफलता आपसे दूर नहीं रहेगी। आइए जानते हैं भगवद् गीता में लिखे उन 5 उपदेशों के बारे में जो आपको करियर में जरूर सक्सेस दिलाएंगे... - जो ज्ञानी व्यक्ति ज्ञान और कर्म को एक रूप में देखता है, उसी का नजरिया सही है। - जीवन में कोई भी काम करने से पहले खुद का आकलन करना बहुत जरूरी होता है। साथ ही अगर किसी काम को करते समय अनुशासित नहीं रहते हो तो कोई काम ठीक से नहीं होता है। - जो मन को नियंत्रित नहीं करते उनके लिए वह शत्रु के समान कार्य करता है। - कोई भी काम करने से पहले खुद पर विश्वास करो। व्यक्ति अपने विश्वास से निर्मित होता है। जो जैसा विश्वास करता है वैसा ही बन जाता है। - व्यक्ति जो चाहे बन सकता है, यदि वह विश्वास के साथ इच्छित वस्तु पर लगातार चिंतन करे। - ओम
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