नेशनल स्पोट्र्स हब बनने की ओर अग्रसर मध्यप्रदेश
02-Jan-2020 07:55 AM 1235062
मध्यप्रदेश में पिछले एक साल में खेलों के लिए विश्व-स्तरीय अधोसंरचना विकास को वांछित गति मिली है। साथ ही, विभिन्न खेलों की पदक तालिका में लगातार पहले और दूसरे स्थान पर अपनी उपस्थिति कायम रखने में भी प्रदेश सफल है। प्रदेश की राज्य खेल अकादमियों के मॉडल को अंडमान-निकोबार, राजस्थान, छत्तीसगढ़, नागालैंड, मेघालय, असम, गोवा और उड़ीसा आदि राज्यों ने सराहा है। ये सभी राज्य आंशिक अथवा पूर्ण रूप से मध्यप्रदेश अकादमी के मॉडल को लागू करने का प्रयास भी कर रहे हैं। अब राज्य सरकार ने प्रदेश की खेल प्रतिभाओं को बढ़ावा देने के लिए नई खेल नीति और खेलों का महत्व स्थापित करने के लिए स्पोट्र्स कोर्स को कंपलसरी करने की योजना लागू करने का निर्णय लिया है। प्रदेश के खिलाडिय़ों को अब चिकित्सा एवं दुर्घटना बीमा का लाभ मिलेगा। मध्यप्रदेश अब खिलाडिय़ों का बीमा कराने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। प्रथम चरण में विभिन्न खेल अकादमियों के लगभग 822 खिलाडिय़ों को बीमा का लाभ दिया जा रहा है। चिकित्सा बीमा से खिलाड़ी देश के चुनिंदा अस्पतालों में से किसी भी अस्पताल में अपना इलाज करवा सकते हैं। इसके लिए उन्हें 2 लाख रुपए तक नि:शुल्क उपचार सुविधा उपलब्ध कराई गई है। खिलाडिय़ों का 5 लाख रुपए का जीवन बीमा भी कराया गया है। साथ ही, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के खिलाडिय़ों के अभिभावकों को भी जीवन बीमा में शामिल किया गया है। बीमा के माध्यम से खिलाडिय़ों को पूरे देश में कैशलेस उपचार की सुविधा उपलब्ध रहेगी। प्रदेश के ऐसे खिलाड़ी, जो अधिकृत रूप से राष्ट्रीय प्रतियोगिता में प्रतिभागिता कर रहे हैं, उन्हें भी चिकित्सा एवं दुर्घटना बीमा की कैशलेस सुविधा उपलब्ध कराने की प्रक्रिया जारी है। इसके लिए संबंधित खेल संघ को राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी की प्रमाणित सूची उपलब्ध करानी होगी। परीक्षण के बाद खिलाड़ी का पंजीयन कर उसे यह सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। प्रदेश में पहली बार ओलंपिक, विश्व कप, एशियाई गेम्स, राष्ट्र-मंडल खेल और दक्षिण एशियाई खेलों में पदक प्राप्त करने वाले खिलाडिय़ों के लिए प्रोत्साहन राशि निश्चित की गई है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण पदक हासिल करने पर 2 करोड़, रजत पदक पर एक करोड़ तथा कांस्य पदक हासिल करने पर 50 लाख की प्रोत्साहन राशि का प्रावधान किया गया है। इसके अतिरिक्त कोई भी खिलाड़ी, जिसने अंतर्राष्ट्रीय खेलों में प्रतिभागिता की है और पदक नहीं भी लिया है, तब भी उसे प्रोत्साहन के तौर पर 10 लाख की राशि दी जाएगी। राष्ट्रीय खेल एवं राष्ट्रीय चैंपियनशिप में पदक विजेता खिलाडिय़ों को स्वर्ण पदक जीतने पर 5 लाख, रजत पर 3 लाख 20 हजार और कांस्य पदक जीतने पर 2 लाख 40 हजार रुपए की राशि दी जाएगी। इसी प्रकार, अधिकृत राष्ट्रीय चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक हासिल करने वाले खिलाड़ी को एक लाख, रजत पदक पर 75 हजार और कांस्य पदक पर 50 हजार रुपए प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। प्रतियोगिता के दौरान खिलाडिय़ों को उपकरण क्रय करने एवं किराए पर लेने के लिए अधिकतम 5 लाख रुपए की राशि दी जाएगी। यह भी निर्णय लिया गया है कि खिलाडिय़ों को उच्च स्तरीय अंतर्राष्ट्रीय/राष्ट्रीय तकनीकी प्रशिक्षण के लिए अधिकतम 5 लाख रुपए की राशि दी जाएगी। राज्य शासन ने यह भी निर्णय लिया है कि प्रशिक्षक, जिनके देख-रेख में खिलाड़ी अपनी पहचान बनाने में सफल होता है, उन्हें भी प्रोत्साहित किया जाएगा। इस संदर्भ में अंतर्राष्ट्रीय/राष्ट्रीय चैंपियनशिप तथा राष्ट्रीय खेल में पदक प्राप्त करने पर खिलाडिय़ों को देय राशि का दस प्रतिशत हिस्सा प्रशिक्षकों को दिया जाएगा। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उच्च स्तरीय प्रदर्शन करने के लिए स्पोट्र्स साइंस की भूमिका महत्वपूर्ण है। वर्तमान में जितने खिलाड़ी ओलंपिक, एशियाई गेम्स एवं कॉमन वेल्थ गेम्स जैसी अंतर्राष्ट्रीय स्पर्धाओं में अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं, उन सभी को स्पोट्र्स साइंस की सपोर्ट टीम मदद करती है। प्रदेश के खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं परन्तु अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उच्च स्तरीय प्रदर्शन के लिए स्पोट्र्स साइकोलॉजिस्ट, स्पोट्र्स न्यूट्रीशियंस, स्पोट्र्स फिजिओलॉजिस्ट, फिजियोथेरेपिस्ट, बायो-मैकेनिकल एक्सपर्ट, वीडियो एनालिस्ट, एक्सरसाइज साइंस एक्सपर्ट, फिटनेस ट्रेनर की बहुत जरूरत होती है। इसलिए राज्य सरकार ने इन पदों पर भी भर्ती करने का निर्णय लिया है। पीपीपी मोड से खेल अधोसरंचना निर्माण प्रदेश में अब पीपीपी मोड से खेल अधोसंरचना के निर्माण कार्य कराए जाएंगे। इसके लिए पायलट प्रोजेक्ट के तहत इंदौर में स्पोट्र्स काम्पलेक्स बनाए जाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इसकी सफलता के बाद भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर और उज्जैन में स्पोट्र्स इन्फ्रास्ट्रक्चर स्थापित किया जाएगा। इसी मोड में ब्यावरा, राजगढ़, खिलचीपुर, सारंगपुर, नरसिंहपुर, विदिशा, शिवपुरी, पोहरी, कोलारस, अशोकनगर, पवई में इंडोर हाल निर्माणाधीन है। छिन्दवाड़ा, आगर-मालवा, कालापीपल, नरसिंहपुर, होशंगाबाद, बैतूल, खरगौन, मंदसौर, मुरैना, गुना और दमोह में इंडोर हाल प्रस्तावित है। टीटी नगर स्टेडियम में तीन मंजिला बहुउददे्शीय इंडोर हाल का निर्माण कार्य जारी है। टीटी नगर स्टेडियम में रॉक क्लाइंबिंग वॉल का निर्माण प्रस्तावित है। - आशीष नेमा
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