शिवसेना की घेराबंदी
03-Aug-2019 07:37 AM 1237511
19 जून को मुंबई में शिवसेना के 53वें स्थापना दिवस समारोह में 1966 में बाल ठाकरे द्वारा पार्टी के गठन का उल्लेख किया गया था। सायन में षण्मुखानंद सभागार, वो स्थान था जहां बाल ठाकरे ने 2012 में अपनी मृत्यु तक स्थापना दिवस समारोह के तेज तर्रार भाषणों को संबोधित किया था और इसीलिए ये पार्टी के लिए पवित्र भूमि बनी हुई है। 19 जून को भरे सभागार में शिवसेना के नेता, विधायक, पार्षद और कार्यकर्ताओं ने उम्मीद की कि मुख्य अतिथि और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस मराठी मानुस के अधिकारों के लिए लडऩे के लिए बनाई गई पार्टी के गौरव को याद करेंगे। लेकिन उन सभी को धक्का लगा। क्योंकि फडणवीस ने इसके बजाय ये याद दिलाया कि भाजपा और शिवसेना ने एक बार फिर नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाने के लक्ष्य के लिए गठबंधन में लोकसभा चुनाव लड़ा था। दर्शक दीर्घा में बैठे शिवसैनिक मन ही मन सोच रहे थे कि क्या ये शिवसेना का स्थापना दिवस समारोह था या भाजपा-शिव सेना गठबंधन का स्थापना दिवस। इस समारोह में शिव सैनिकों ने फडऩवीस के हर कदम को पढऩा शुरू किया। मुख्यमंत्री ने बाल ठाकरे और उनके पिता प्रबोधनकर ठाकरे की तस्वीरों पर फूलमाला अर्पित की जो आमतौर पर शिवसेना प्रमुख ही किया करते हैं। ये शहर में शिवसेना के कम होते रुतबे की तरफ विनम्रता से इशारा कर रहा था, वो रुतबा जिसे इस शहर के अभेद्य किले के रूप में माना जाता था। 1995 में भाजपा के साथ पहली बार सत्ता पर काबिज होने के बाद शिवसेना ने शहर का नाम बॉम्बे से बदलकर मुंबई कर दिया था। मध्य मुंबई के दादर में पार्टी मुख्यालय कांच से बनी एक पांच मंजिला इमारत है, जिसमें किले जैसी दीवारें बनाई गई हैं जिससे पहाड़ी पर बने किलों को याद किया जाए जहां से मराठा राजा शिवाजी ने अपनी लड़ाइयां लड़ी थीं। लोकसभा चुनाव में भाजपा की शानदार जीत के एक महीने के भीतर ही ये स्थापना दिवस आ गया। शिवसेना भी 18 लोकसभा सीटों पर अपना कब्जा बरकरार रखने में सफल रही, लेकिन कोई भी राजनेता पार्टी अध्यक्ष उद्धव ठाकरे की सफलता का श्रेय लेने को तैयार नहीं है। इस आयोजन के तुरंत बाद, उद्धव ने भाजपा के साथ 1984 से अपने गठबंधन को दिल का रिश्ता कहा। 2014 में शिवसेना-भाजपा गठबंधन में कुछ खटास सी आ गई थी जब भाजपा ने अक्टूबर 2014 का विधानसभा चुनाव अपने दम पर लड़ा था। भाजपा को चुनाव में 288 सीटों में से 123 मिलीं जबकि शिवसेना को 63। नागपुर से भाजपा के विधायक फडणवीस को मुख्यमंत्री बनाया गया। ये पद आमतौर पर वरिष्ठ गठबंधन के लिए आरक्षित होता है। 1972 में वसंतराव नाइक के बाद पांच साल का कार्यकाल पूरा करने वाले वो महाराष्ट्र के पहले मुख्यमंत्री बनने से सिर्फ चार महीने ही दूर हैं। शिवसेना ने 227-वार्ड बृहन्मुंबई महानगर पालिका (क्चरूष्ट) पर 1997 से लगातार राज किया है। ये दुनिया के सबसे बड़े नगर निगमों में से एक है। यहां भी, 2017 के नगरपालिका चुनावों में भाजपा को बढ़त मिली थी। भाजपा 31 वार्डों से बढ़कर 82 तक पहुंच गई थी जो शिवसेना के 84 में से दो ही कम था। लेकिन यह राज्य विधानसभा है जहां उद्धव अब अपनी पार्टी को तेजी से हारते हुए पाते हैं। पार्टी ने मुंबई में 14 सीटें जीतीं जबकि 2014 में भाजपा ने 15 सीटें जीती थीं। मुंबई के पश्चिमी उपनगर जो शिवसेना का पारंपरिक गढ़ रहे हैं, वहां शिवसेना अपने बूढ़े बुजुर्गों का रिप्लेसमेंट खोजने के लिए संघर्ष कर रही है। नेताओं की अगली पीढ़ी तैयार करने में उद्धव की विफलता को इसके प्राथमिक कारण के रूप में देखा जाता है। 2018 में जब वरिष्ठ नेता और पूर्व स्वास्थ्य मंत्री दीपक सावंत विधान परिषद से रिटायर हुए, तो शिवसेना उनकी जगह पर किसी को खोजने के लिए संघर्ष करती रही। अंत में उन्हें 80 साल के बुजुर्ग विलास पोटनीस को चुनना पड़ा। दहिसर में उद्धव ने शिवसेना के पूर्व विधायक विनोद घोषालकर को बर्खास्त नहीं किया, जिन्होंने कथित रूप से लड़ाई में घी डालने का काम किया था, क्योंकि उनकी पार्टी कुशल नेतृत्व की कमी से जूझ रही थी। -बिन्दु माथुर
FIRST NAME LAST NAME MOBILE with Country Code EMAIL
SUBJECT/QUESTION/MESSAGE
© 2025 - All Rights Reserved - Akshnews | Hosted by SysNano Infotech | Version Yellow Loop 24.12.01 | Structured Data Test | ^