बराबरी का दांव
18-Jul-2019 07:37 AM 1237559
महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों के लिए भाजपा एवं शिवसेना के बीच सीटों के बंटवारे का फार्मूला करीब-करीब तय हो चुका है। इसका औपचारिक ऐलान होना बाकी है। दोनों दल बराबर सीटों पर चुनाव लड़ेंगे। इसी प्रकार सत्ता में आने पर दोनों के मुख्यमंत्री भी ढाई-ढाई साल के लिए बनाये जा सकते हैं। शिवसेना के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि विधानसभा चुनावों को लेकर दोनों दलों के बीच तालमेल बन चुका है। दोनों दलों में सत्ता में बराबर की हिस्सेदारी के तहत साथ चुनाव लडऩे की सहमति बनी है। इसके तहत राज्य में कुल 288 विधानसभा सीटों पर दोनों दल आधी-आधी सीटों पर चुनाव लड़ेंगे। इसी प्रकार दोनों दलों के मुख्यमंत्री आधे-आधे कार्यकाल के लिए बनाए जा सकते हैं। तीसरे, अपने छोटे सहयोगी दलों को भाजपा या शिवसेना को अपने-अपने हिस्से से सीटें देनी होंगी। हाल में हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा ने 25 और शिवसेना ने 23 सीटों पर चुनाव लड़ा और शानदार जीत हासिल की थी। पिछला लोकसभा चुनाव भी दोनों दलों ने साथ लड़ा था। लेकिन पिछले विधानसभा चुनाव में दोनों दल अलग-अलग लड़े लेकिन बाद में मिलकर सरकार बना ली। लेकिन इस बार लोकसभा चुनाव के वक्त ही दोनों दलों में विधानसभा चुनाव साथ लडऩे की सहमति बन गई थी। महाराष्ट्र भाजपा के अध्यक्ष राव साहेब दानवे ने कहा है कि युति की दोनों प्रमुख पार्टियां भाजपा और शिवसेना बराबर-बराबर सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेंगी। हालांकि उन्होंने तय सीटों का खुलासा नहीं किया। सूत्र बताते हैं कि राज्य की कुल 288 विधानसभा सीटों में से दोनों दल 135-135 सीट लेने पर लगभग सहमत हो गए हैं। शेष 18 सीटें युति में शामिल छोटे दलों के लिए छोड़ी जाएंगी। छोटे दलों में रामदास आठवले की आरपीआई (ए) और महादेव जानकर की राष्ट्रीय समाज पक्ष जैसे दल शामिल हैं। सूत्र बताते हैं कि सीटों को लेकर छोटे दलों से सहमति मिलने के बाद भाजपा और शिवसेना के वरिष्ठ नेता संयुक्त संवाददाता सम्मेलन करके इसकी औपचारिक घोषणा करेंगे। हालांकि जानकार बताते हैं कि युति के दोनों बड़े दलों के बीच भले ही बराबर-बराबर सीटें लेने पर सहमति बन गई हो, परंतु आगे का रास्ता अभी भी इतना आसान नहीं है। दरअसल केन्द्र में भारी बहुमत से सरकार बना चुकी भाजपा अंदरखाने महाराष्ट्र में अकेले चुनाव लडऩे के विकल्प पर भी विचार कर रही है। सूत्रों की मानें तो भाजपा ने प्रदेश में एक सर्वें कराया है जिसका निष्कर्ष है कि अकेले लडऩे की सूरत में भी पार्टी को बहुमत हासिल हो सकता है। इस बात से शिवसेना के वरिष्ठ नेता भी अवगत हैं। ऐसे में चौकन्नी शिवसेना गठबंधन को लेकर इस बार ज्यादा नखरे दिखाने के मूड में नहीं है। लोकसभा चुनावों के बाद महाराष्ट्र में बीजेपी शिवसेना गठबंधन का मिलकर विधानसभा चुनाव लडऩा तय है। लेकिन मुख्यमंत्री को लेकर अंदर ही अंदर रार है। अगले महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में शिवसेना, उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे को मुख्यमंत्री पद का दावेदार बनाने की तैयारियों में जुटी हुई है। शिवसेना के प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद राउत ने इसके संकेत दिए। दरअसल एक इंटरव्यू के दौरान राउत से सवाल पूछा गया कि बीजेपी और शिवसेना के सत्ता में वापसी करने पर क्या आदित्य ठाकरे उप मुख्यमंत्री बनेंगे? इस पर उन्होंने कहा कि ठाकरे उप पद नहीं लेते हैं। ठाकरे परिवार के सदस्य हमेशा प्रमुख बने हैं। इस परिवार की राज्य और राष्ट्रीय राजनीति में अपनी प्रतिष्ठा रही है। संजय राउत के इस बयान के बाद अब कयास लगने लगे हैं कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में अगर शिवसेना, भाजपा से बेहतर प्रदर्शन करती है तो शिवसेना आदित्य ठाकरे को महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री बनाए जाने के लिए नाम आगे कर सकती है। -बिन्दु माथुर
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