19-Jun-2019 08:41 AM
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महाराष्ट्र कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को उम्मीद है कि पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव में युवाओं को प्राथमिकता देगी। राज्य में पार्टी के निचली सतह के लोगों से बातें करने के बाद अंदाजा होता है कि लोकसभा में बुरी तरह से पिटने के बाद कार्यकर्ताओं का मनोबल टूट सा गया है। लेकिन वो विधानसभा में अपनी भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं। मुंबई की महिला कांग्रेस की भावना जैन कहती हैं, मुझे लगता है कि राहुल गांधी प्रदर्शन के आधार पर पार्टी में सुधार लाएंगे। वह आगामी विधानसभा चुनाव में युवाओं को मौका देने के लिए दृढ़ हैं। मुंबई के ही नितिन शिंडे कहते हैं कि पार्टी के नेताओं में ताल-मेल की कमी से लोकसभा चुनाव में इतनी बुरी तरह से हार हुई। राज्य के बड़े नेताओं के बीच बहुत कम ताल-मेल था। उम्मीदवारों के चयन से लेकर चुनावी मुहिम की योजना तक में बड़े नेताओं में आपसी मतभेद था। हम चाहते हैं कि पार्टी विधानसभा में युवा नेताओं को बड़े फैसले लेने दे।
133 साल पुरानी कांग्रेस पार्टी की अपने जन्म स्थान मुंबई में हालत बुरी है। पिछले आम चुनाव में नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने कांग्रेस-मुक्त भारत का वादा किया था। पांच साल बाद हुए आम चुनाव में पार्टी 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अपना खाता भी खोल नहीं पायी। आगामी लोकसभा सत्र में सुरेश उर्फ बालू धानोरकर महाराष्ट्र से कांग्रेस पार्टी के अकेले जलते चिराग होंगे। उन्होंने चंद्रपुर लोकसभा चुनावी क्षेत्र से केंद्रीय मंत्री हंसराज अहीर को हराकर कांग्रेस पार्टी के लिए राज्य में अकेली सीट हासिल की। दिलचस्प बात ये है कि चुनाव से पहले वो शिवसेना के विधायक थे और उनकी उम्मीदवारी पक्की नहीं थी।
सच तो ये है कि महाराष्ट्र में कांग्रेस पार्टी का खाता ही नहीं खुलता, क्योंकि शुरू में पार्टी आला कमान ने धानोरकर का नाम उम्मीदवारों की लिस्ट से खारिज कर दिया था। राज्य के नेताओं के हस्तक्षेप के बाद उनका नाम लिस्ट में दोबारा शामिल किया गया। महाराष्ट्र में कांग्रेस की ये सबसे खराब हार थी और लगातार दूसरी भारी शिकस्त। पिछले आम चुनाव में इसे राज्य में केवल दो सीटें मिली थीं। कांग्रेस पार्टी और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के गठबंधन ने पहली बार लोकसभा चुनाव एक साथ मिल कर लड़ा था लेकिन दोनों 48 में से केवल पांच सीटें जीत सकीं। अब सब की निगाहें अक्टूबर में होने वाले महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव पर टिकी हैं। पिछली बार कांग्रेस और एनसीपी अलग-अलग चुनाव लड़ी थीं और उन्हें 42 और 41 सीटें मिली थीं जबकि बीजेपी को 122 और शिवसेना को 63। बीजेपी और शिवसेना ने गठबंधन करके सत्ता हासिल कर ली। पंद्रह साल में ये कांग्रेस-एनसीपी की पहली हार थी। इस बार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को एक बार फिर से बीजेपी और शिवसेना का सामना करना पड़ेगा। भावना जैन कहती हैं कि विधानसभा चुनाव से आम चुनाव अलग होता है। वे कहती हैं, महाराष्ट्र में किसान बेहाल हैं, युवाओं के पास नौकरियां नहीं हैं, विकास रुक गया है। ये मुद्दे आम लोगों से जुड़े हैं। इन मुद्दों को लेकर हम एक बार फिर जनता के पास जाएंगे।
यवतमाल के एक किसान गौतम शिर्के कहते हैं कि उनके गांव के काफी लोगों ने आम चुनाव में बीजेपी को वोट दिया था लेकिन उनके अनुसार विधानसभा चुनाव में स्थानीय मुद्दों पर वोट दिए जाएंगे। लेकिन एनसीपी के नेता और वकील मजीद मेमन के अनुसार विधानसभा की तैयारी से पहले लोकसभा में हुई गलतियों को सुधारना होगा। इस चुनाव में (लोकसभा) कांग्रेस ने अच्छा प्रदर्शन नहीं किया। गलतियों की बात करें तो एक बात पर सभी सहमत हैं कि जनता ने न केवल महाराष्ट्र में बल्कि देश भर में मोदी को वोट दिया। मोदी लहर के आगे कांग्रेस और एनसीपी की रणनीति ने काम नहीं किया। लेकिन विश्लेषक कहते हैं कि कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन से भी कई चूक हुई। विश्लेषक ये कहते हैं कि कांग्रेस के साथ गठबंधन के समय एनसीपी कह सकती है कि वो कांग्रेस से बड़ी पार्टी है इसलिए वो इससे अधिक सीटों पर चुनाव लड़ेगी।
-बिन्दु माथुर