02-Feb-2016 07:18 AM
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अभी तक वन विभाग के अफसरों लिए सोने का अंड़ा देने वाले सोनचिरैया अभयारण्य पर अब दबंगों की नजर गड़ गई है। वन विभाग के अधिकारियों के साथ मिलकर दबंगों और माफिया द्वारा अब अभयारण्य की जमीन को हथियाने का

सिलसिला शुरू हो गया है। इनदिनों तिघरा रोड स्थित सोनचिरैया अभयारण्य की जमीन पर दबंगी के दम पर नोटरी से जमकर खेल चल रहा है। अभयारण्य की 12 बीघा जमीन अब तक रसूखदार बेच चुके हैं। अभी भी खुलेआम यहां जमीन बेची जा रही है। शासन-प्रशासन से बेखौफ भू माफिया खुलेआम अभयारण्य की जमीन को अपनी संपत्ति बताकर बेच रहे हैं। जमीन को बेचने वालों के पास न तो जमीन के दस्तावेज हैं न ही कोई अन्य रिकॉर्ड। बावजूद इसके वे दो से तीन सौ रुपए प्रति वर्ग फीट के हिसाब से नोटरी कर रहे हैं। अभी तक यहां अवैध रूप से सैकड़ों मकान बनाए जा चुके हैं।
ग्वालियर शहर से तिघरा जाने वाले मार्ग के बाईं ओर वन विभाग व राजस्व की जमीन है। इस जमीन पर भूमफियाओं की कुदृष्टि पड़ गई है। बेखौफ दबंग इस सरकारी जमीन का आपस में बंदरबांट कर उसे निजी संपत्ति बता रहे है। खासबात यह है कि वे आशियानों के लिए भूखंड बेचने का काम नोटरी से साठगांठ करके कर रहे हैं। दस्तावेज मांगने पर वे साफ कहते हैं कि कागजों की कोई जरूरत नहीं। उनके रसूख का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है वन विभाग ने अपनी जमीन की हदबंदी करने के लिए जो मुड्ढे लगा रखे हैं उन्हें भी दूर तक हटा दिया गया है। अभ्यारण्य की जमीन पर कब्जा कर मकान बनाने की शिकायतें लगातार वन विभाग को मिल रही थीं। लेकिन विभाग आंखें बंद किए हुए सोया पड़ा है। यहां लोगों ने जो मकान बनाए हैं उन्हें जमीन कई रसूखदार लोगों ने बेची है। सस्ते में जमीन मिल जाने के लालच में लोगों ने यहां 50 रुपए से लेकर 300 रुपए प्रति वर्ग फुट के हिसाब से जमीन खरीद ली। हालांकि विक्रेताओं के पास भी जमीन संबंधी कोई दस्तावेज नहीं हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी जमीन को बेचकर उस पर निर्माण कराने में विभाग के कई अधिकारी मिले हुए हैं। इसी जमीन पर बजरंग कॉलोनी समेत कई कॉलोनी व मोहल्ले बस गए हैं फिर भी विभाग केअधिकारियों ने आंखों पर काली पट्टी बांधे हुए हैं।
भूमाफिया सरकारी जमीन को बेचकर खुद तो करोड़पति बन गए। जिन लोगों ने प्लॉट खरीदकर मकान बना लिए उनके आशियानों पर अब खतरा मंडरा रहा है। यहां सरकारी जमीन को अवैध रूप से बेचे जाने से दिक्कत तो है ही, कई मामलों में एक प्लॉट को एक से ज्यादा बार बेचने का मामला सामने आ चुका है। ऐसे में नोटरी कर जमीन बेचने वाला तो हाथ खड़े कर देते हैं और लोगों का पैसा पानी में जा सकता है। सौन चिरैया परिसर में जमीन पर होने वाले बेजा कब्जे का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 512 वर्ग किलोमीटर जमीन में से कई हिस्सों में तो लोग काफी अंदर तक घुस आए हैं। तिघरा रोड के तो यह हालात हैं कि मुख्य सड़क से करीब दो सौ फीट तक कब्जे हो गए हैं। इतना ही नहीं भू माफिया इसी क्षेत्र में आने वाली हरी-भरी पहाड़ी पर भी लोग कब्जे की कोशिश करने लगे हैं । नोटरी कराने वालों का कहना है कि वे तो वन विभाग व पुलिस दोनों को ही संभाल सकते हैं। इस मामले में सोन चिरैया अभयारण्य के अधीक्षक प्रकाश श्रीवास्तव कहते हैं कि शिकायत तो मिली है। जल्द ही मौके पर जाकर निरीक्षण किया जाएगा। जो लोग भी जमीन की खरीद-बिक्री में शामिल हैं उन्हें बख्शा नहीं जाएगा। जो भी निर्माण इस परिसर में हुए हैं वे अतिक्रमण की
श्रेणी में हैं। उन्हें हर हाल में हटाया जाएगा। उधर, स्थानीय लोगों का कहना है की दबंगों के कब्जे से इन जमीनों को छुड़ाना विभाग के लिए टेड़ी खीर साबित होगा।
समाप्त होगा अभयारण्य
शिवपुरी के करैरा सोन चिरैया अभयारण्य जल्द ही समाप्त हो जाएगा। 202 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले अभयारण्य को समाप्त करने से पहले दमोह के वीरांगना दुर्गावती वाइल्ड लाइफ सेंचुरी का विस्तार किया जाएगा। जितना क्षेत्रफल करैरा अभयारण्य का है, उतना ही क्षेत्रफल दुर्गावती वाइल्ड लाइफ सेंचुरी का बढ़ाया जाएगा। केंद्रीय वन्य प्राणी बोर्ड ने अभयारण्य को डिनोटिफाई करने के प्रदेश सरकार के प्रस्ताव को इसी शर्त पर अनुमति दी है कि इसके बदले समान अनुपात में किसी अन्य वाइल्ड लाइफ सेंचुरी के क्षेत्रफल का विस्तार किया जाए। प्रदेश के सभी नेशनल पार्क और वाइल्ड लाइफ सेंचुरी में विस्तार की संभावनाओं का अध्ययन करने के बाद राज्य वन्य प्राणी बोर्ड और वन विभाग ने वीरांगना दुर्गावती सेंचुरी का चयन किया है।
-विशाल गर्ग