17-Oct-2015 08:38 AM
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साल पहले देशभर में बाघों की कब्रगाह के रूप कुख्यात मप्र के अभयारण्यों और जंगलों में बाघों की तादाद इतनी तेजी से बढ़ रही है कि अब उनके रहने का क्षेत्रफल छोटा पडऩे लगा है। भोपाल सर्कल के

जंगलों में इनदिनों 25 बाघ घूम रहे हैं और ये बाघ जंगल के आसपास के गांवों और सड़कों पर नजर आने लगे हैं। चौकाने वाली खबर यह है कि बाघों के इस तरह घुमने से उनपर खतरा मंडराने लगा है, क्योंकि सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के साथ ही आसपास के जंगलों में बाघों के के लिए सक्रिय शिकारी अब इधर का रूख कर चुके हैं। हालांकि इसकी सूचना मिलते ही वन विभाग ने वन क्षेत्र के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी है और दिन-रात गस्त की जा रही है। वैसे देखा जाए तो अंतिम बार जून 2012 में भोपाल में करंट लगाकर बाघ का शिकार किया गया था।
दरअसल, भोपाल फॉरेस्ट सर्कल में बाघों का कुनबा बढ़ रहा है। इसके अंतर्गत आने वाली रातापानी सेंचुरी से केरवा क्षेत्र तक 25 से अधिक बाघ-बाघिन और शावक घूम रहे हैं। भोपाल से महज दस किमी दूर स्थित समरधा रेंज में ही 6 टाइगर देखे जा रहे हैं। यहां कलियासोत, केरवा, समसपुरा, रीछनखोह, सरोतियापुरा, चिचली बीट में वर्ष 2010 से अब तक एक बाघ, दो बाघिन और तीन शावक देखे गए हैं। हाल ही में प्रेमपुरा बीट में नए बाघ ने आमद दर्ज कराई है। वहीं रातापानी सेंचुरी में बरखेड़ा रेंज के कैरी गांव के नजदीक जंगल में एक बाघिन ने दो शावकों को जन्म दिया है। शावकों की उम्र तकरीबन तीन माह है। ये तीनों गांव के नजदीक देखे गए हैं। औबेदुल्लागंज डिवीजन के कंजरवेटर केपी शर्मा का कहना है कि फिलहाल औबेदुल्लागंज डिवीजन और रातापानी सेंचुरी के अंदर 20 से 22 बाघ तो हैं। यह संख्या वह है, जिसमें शावकों को शामिल नहीं किया गया है। भोपाल फॉरेस्ट सर्कल के चीफ कंजरवेटर महेंद्र यादुवेंदु ने भी बाघों की संख्या बढऩे की पुष्टि की है।
भोपाल को करीब से जानने वाले लोग बताते हैं कि जिस इलाके में बाघ घूम रहे है, वह उनका पुराना इलाका है। इस क्षेत्र के गांव बैरागढ़ चिंचली, मैंडोरा, मैंडोरी, दौलतपुरा, रीछनखो, महाबडिय़ा, बोरदा, चन्दनपुरा और छावनी में बाघ और तेंदुए की मौजूदगी बहुत लंबे समय से रही है। लेकिन केरवा और कलियासोत के आसपास तेजी से रहवासी क्षेत्र बढ़े हैं। इसलिए बाघों की उपस्थिति अटपटी लग रही है। लोगों की इन क्षेत्रों में उपस्थिति के कारण बाघों की सटीक लोकेशन की खबरे रोजाना मिलने के कारण बाघों के लिए खतरा बढ़ा दिया है। ऐसे में जंगल में कुछ शिकारियों के आने की सूचना वन विभाग को मिली है। इसको लेकर अधीनस्थ अमले को गश्त बढ़ाने व निगरानी के निर्देश जारी किए गए। डीएफओ रवींद्र सक्सेना सहित वन विभाग के अधिकारियों ने जंगलों की गहन छानबीन की है। जंगल में कुछ जगह बाघ की उपस्थिति मिली है। सक्सेना के अनुसार सभी अधीनस्थों को सतर्क रहने और गश्त बढ़ाने को कहा गया है।
बाघों के लिए अनुकूल है जंगल
रिटायर्ड पीसीसीएफ पीएम लाड का कहना है कि भोपाल सर्कल बाघों के लिए अनुकूल है। बाघ उस स्थान पर ज्यादातर रहता है, जहां उसे पर्याप्त आहार, पानी, छिपने लिए घास और घना जंगल मिलता है। इसी वजह से बाघों की संख्या बढ़ रही है। समरधा रेंज के रेंजर जितेंद्र गुप्ता कहते हैं कि क्षेत्र में बाघों पर नजर रखने के लिए गश्ती दल लगातार सक्रिय रहता है। राजधानी का मदरबुल फार्म वाला इलाका वन्य प्राणियों के मूवमेंट की वजह से एरिया में जाना प्रतिबंधित किया जा चुका है। जिसमें फार्म की पीछे वाली पहाड़ी से लेकर मिंडोरा की पहाड़ी, आंवला नर्सरी, केरवा नर्सरी, रीछन खोह, गोल गांव का जंगल, कठोतिया, झिरी सहित पूरा इलाका शामिल है।
ये वन्य प्राणी भी घूम रहे जंगल में
तेंदुआ, जंगली बिल्ली, नीलगाय, सांभर, सेही, भालू, जंगली सुअर, चीतल, मोर, सियार, लकड़बग्घा।
-ज्योत्सना अनूप यादव