उद्यानिकी बनेगी किसानों के लिए आय का जरिया
12-Sep-2015 05:18 AM 1237789

उद्यानिकी बनेगी किसानों के लिए आय का जरिया 

कृषि की तरह मध्यप्रदेश सरकार उद्यानिकी को भी लाभ का धंधा बनाने में जुट गई है। इसके लिए विभाग के प्रमुख सचिव प्रवीण कृष्ण के दिशा निर्देशन में कार्य योजना बनाई गई है तथा उद्यानिकी स्वर्ण क्रांति अभियान शुरू किया गया है। इसके तहत 20 लाख किसान को उद्यानिकी से जोडऩे का अभियान चल रहा है। साथ ही खाद्य प्र-संस्करण कार्य से गांव, छोटे कस्बे और शहरों को जोड़ा जाएगा। वहीं प्रदेश में 10 अगस्त से उद्यानिकी एवं पुष्प महोत्सव शुरू किया गया है। फरवरी, 2016 तक चलने वाले इस महोत्सव में प्रदेश के सभी 51 जिले में फलों के 15 लाख तथा फूलों के एक करोड़ पौधे रोपित किए जाएंगे। दरअसल, विभाग की मंशा है कि उद्यानिकी किसानों के लिए आय का जरिया बने और अधिक से अधिक लोग फूलों और फलों की खेती करके लाभ कमाएं।

अभी तक अनजान रहे उद्यानिकी विभाग अपने इस प्रयास से अचानक चर्चा में आ गया है। विभाग द्वारा किए जा रहे प्रचार-प्रसार के कारण बड़ी संख्या में किसान इस ओर आकृष्ट हो रहे हैं। प्रवीर कृष्ण ने विभाग में पदस्थ होते ही उद्यानिकी की फसलों के उत्पादन को बढ़ाने का लक्ष्य तय किया है। जिसके लिए जिलों के अधिकारियों को लक्ष्य निर्धारित किए गए हैें। किसानों को योजनांर्गत सब्सिडी और अन्य लाभ पहुंचाने के लिए ऑन लाइन तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। पिछले तीन सालों के दौरान जिन किसानों को लाभांवित किया गया है, उनका पंजीयन किया जा रहा है। किसानों को उत्तम तकनीक से परिचित कराकर समग्र लाभ दिया जा रहा है। उद्यानिकी विभाग को भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के लिए विभिन्न स्तर पर निगरानी सिस्टम तैयार किया जा रहा है। प्रदेश में खाद्य प्रसंस्करण मिशन को शुरू करने की भी तैयारी की जा रही है। हस्तशिल्प विकास निगम में स्वसहायता समूहों, कारीगरों और प्रदेश की को देश विदेश में पहचान देने के लिए प्राथमिकता से कार्य शुरू किया जा रहा है।

उल्लेखनीय है की वर्तमान समय में करीब 15 लाख किसान उद्यानिकी से जुड़े हैं और फल, फूल, सब्जी और मशाले की खेती में लगे हैं, लेकिन इनकी व्यवसायिक स्थिति गौण है। इस कारण इस ओर किसानों का आकर्षण नहीं बढ़ा है। अब विभाग ने इसके लिए व्यापक पैमाने पर तैयारी की है। प्रबीण कृष्ण कहते हैं कि राज्य के किसानों को स्वर्णक्रांति अभियान से जोडऩे के लिए गांव-गांव के किसानों तक पहुंच बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। किसानों को जागरूक करने के लिए कार्यशाला आयोजित की जा रही हैं। वह कहते हैं कि हमारा प्रारंभिक लक्ष्य है कि वर्तमान खेती के 20 फीसदी हिस्से में उद्यानिकी की खेती हो। इसके लिए प्रत्येक गांव में समितियां बनाई जाएंगी।  उन्होंने बताया कि उद्यानिकी स्वर्ण क्रांति अभियान में चल रहे महोत्सव में भोपाल और पचमढ़ी के 7-7 तथा प्रदेश की सभी 307 नर्सरी एवं शासकीय विद्यालय, महाविद्यालय, चिकित्सालय, कार्यालयों की रिक्त भूमि पर विभिन्न किस्म के पौधे रोपित किए जा रहे हैं। पौध-रोपण के बाद रख-रखाव और सिंचाई की जिम्मेदारी संबंधित संस्था की होगी। जिलों में कलेक्टर, नगर निगम, नगरपालिका के समन्वय से कार्य होगा। उद्यानिकी एवं पुष्प महोत्सव में जन-प्रतिनिधि आदि भाग ले रहे हैं। भोपाल के राजा भोज हवाई अड्डा से लेकर पॉलीटेक्निक चौराहे तक फूल के पौधों का रोपण किया जा रहा है। शासकीय मॉडल नर्सरी में हर माह 2 लाख फूल के पौधे तैयार किए जायेंगे। जिला मुख्यालय की नर्सरी में कम से कम 20 हजार फूल के पौधे तैयार कर उनका रोपण सुनिश्चित किया जायेगा। भोपाल की मॉडल नर्सरी कानासैया में प्रतिमाह 2 लाख फूलों की सीड लिंग तैयार होगी।  उन्होंने कहा कि फल-फूल की खेती से 2 से 20 लाख तक आय हो सकती है।

विंध्या वेली उत्पादों की बिक्री का लक्ष्य 51 करोड़

प्रमुख सचिव उद्यानिकी प्रदेश में इस साल विंध्या वेली प्रोजेक्ट के उत्पादों की बिक्री का लक्ष्य 2 करोड़ 54 लाख से बढ़ाकर 51 करोड़ निर्धारित किया गया है। प्रदेश में अभी विंध्या वेली के 51 उत्पादन केन्द्र हैं, जिन्हें बढ़ाकर 99 किया जाएगा। प्रोजेक्ट से ग्रामीण क्षेत्र में लगातार रोजगार के अवसर मुहैया करवाकर आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में ठोस पहल की जा रही है। प्रोजेक्ट में अभी 828 स्व-सहायता समूह कार्य कर रहे हैं। इन्हें इस वर्ष बढ़ाकर 928 तथा अगले वर्ष 978 किया जाएगा। विंध्या वेली से लाभार्थियों की संख्या 4000 को भी बढ़ाकर 5000 किया जाएगा। उत्पादों की संख्या अभी 36 है, जिन्हें 45 किया जाएगा। अगले वित्तीय वर्ष इन्हें 51 किया जायेगा। उत्पादों की श्रृंखला में च्यवनप्राश, आंवला मुरब्बा, तुलसी सिरप, टमाटर, मिर्च एवं फलों के विभिन्न उत्पाद की भी लांचिग की जा रही है। प्रवीर कृष्ण के अनुसार उत्पादन वृद्धि के साथ ही विंध्या वेली की मार्केटिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसमें रिटेल शॉप की श्रंृखला के अलावा ऑनलाइन शॉपिंग से जोडऩे का लक्ष्य है। इसके लिए होल-सेलर और रिटेलर की संख्या में भी वृद्धि की जाएगी। उन्होंने बताया कि विंध्या वेली ब्राण्ड को विकसित कर ग्रामीण क्षेत्र के उत्पादकों को बाजार उपलब्ध करवाकर उन्हें वाजिब मूल्य दिलवाया जाना है। इससे उन्हें निरंतर रोजगार भी उपलब्ध होगा। योजना में ग्रामीण उत्पादों का मूल्य संवर्धन, कौशल उन्नयन, गुणवत्ता नियंत्रण, आकर्षक पेकेजिंग और मानकीकरण की सुविधा मुहैया करवायी जा रही है।

-अजय धीर

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