संतान योग
05-Jun-2015 08:28 AM 1238438

कुण्डली का पांचवा घर संतान भाव के रूप में विशेष रूप से जाना जाता है (ञ्जद्धद्ग द्घद्बद्घह्लद्ध द्धशह्वह्यद्ग शद्घ ह्लद्धद्ग रुड्डद्य ्यद्बह्लड्डड्ढ ह्यह्लड्डठ्ठस्रह्य द्घशह्म् श्चह्म्शद्दद्गठ्ठ4)। ज्योतिषशास्त्री इसी भाव से संतान कैसी होगी, एवं माता पिता से उनका किस प्रकार का सम्बन्ध होगा इसका आंकलन करते हैं।
इस भाव में स्थित ग्रहों को देखकर व्यक्ति स्वयं भी काफी कुछ जान सकता है जैसे पांचवें घर में सूर्य (स्ह्वठ्ठ द्बठ्ठ स्नद्बद्घह्लद्ध ॥शह्वह्यद्ग)
पांचवें घर में सूर्य का नेक प्रभाव होने से संतान जब गर्भ में आती है तभी से व्यक्ति को शुभ फल प्राप्त होना शुरू हो जाता है। इनकी संतान जन्म से ही भाग्यवान होती है। यह अपने बच्चों पर जितना खर्च करते हैं उन्हें उतना ही शुभ परिणाम प्राप्त होता है। इस भाव में सूर्य अगर मंदा (ङ्खद्गड्डद्म ह्यह्वठ्ठ द्बठ्ठ रुड्डद्य द्मद्बह्लड्डड्ढ द्दद्ब1द्गह्य ह्वठ्ठद्धड्डश्चश्चद्बठ्ठद्गह्यह्य द्घह्म्शद्व ष्द्धद्बद्यस्रह्म्द्गठ्ठ) होता है तो माता पिता को बच्चों से सुख नहीं मिल पाता है। वैचारिक मतभेद के कारण बच्चे माता-पिता के साथ नहीं रह पाते हैं।
पांचवें घर में चन्द्रमा (रूशशठ्ठ द्बठ्ठ द्घद्बद्घह्लद्ध द्धशह्वह्यद्ग) : चन्द्रमा पंचवें घर में संतान का पूर्ण सुख देता है। संतान की शिक्षा अच्छी होती है। व्यक्ति अपने बच्चों के भविष्य के प्रति जागरूक होता है। व्यक्ति जितना उदार और जनसेवी होता है बच्चों का भविष्य उतना ही उत्तम होता है। इस भाव का चन्द्रमा अगर मंदा हो तो संतान के विषय में मंदा फल देता है (ङ्खद्गड्डद्म रूशशठ्ठ द्बठ्ठ द्घद्बद्घह्लद्ध द्धशह्वह्यद्ग ष्ड्डह्वह्यद्गह्य श्चह्म्शड्ढद्यद्गद्वह्य द्घह्म्शद्व ष्द्धद्बद्यस्रह्म्द्गठ्ठ) लाल किताब का उपाय है कि बरसात का जल बोतल में भरकर घर में रखने से चन्द्र संतान के विषय में अशुभ फल नहीं देता है।
पांचवें घर में मंगल (रूड्डह्म्ह्य द्बठ्ठ ह्लद्धद्ग द्घद्बद्घह्लद्ध द्धशह्वह्यद्ग शद्घ रुड्डद्य द्मद्बह्लड्डड्ढ द्मह्वठ्ठस्रड्डद्यद्ब) मंगल अगर खाना संख्या पांच में है तो संतान मंगल के समान पराक्रमी और साहसी होगी (रूड्डह्म्ह्य द्बठ्ठ द्घद्बद्घह्लद्ध द्धशह्वह्यद्ग द्दद्ब1द्गह्य ड्ड ष्द्धद्बद्यस्र ड्डह्य ड्ढह्म्ड्ड1द्ग ड्डह्य रूड्डह्म्ह्य) संतान के जन्म के साथ व्यक्ति का पराक्रम और प्रभाव बढ़ता है. शत्रु का भय इन्हें नहीं सताता है। इस खाने में मंगल अगर मंदा है तो व्यक्ति को अपनी चारपायी या पलंग के सभी पायों में तांबे की कील ठोकनी चाहिए। इस उपाय से संतान सम्बन्धी मंगल का दोष दूर होता है।
पांचवें घर में बुध (रूद्गह्म्ष्ह्वह्म्4 द्बठ्ठ द्घद्बद्घह्लद्ध द्धशह्वह्यद्ग): बुध का पांचवें घर में होना इस बात का संकेत है कि संतान बुद्धिमान और गुणी होगी (रूद्गह्म्ष्ह्वह्म्4 द्बठ्ठ ह्लद्धद्ग द्घद्बद्घह्लद्ध द्धशह्वह्यद्ग शद्घ द्यड्डद्य द्मद्बह्लड्डड्ढ द्मह्वठ्ठस्रड्डद्यद्ब द्दद्ब1द्गह्य ड्डठ्ठ द्बठ्ठह्लद्गद्यद्यद्बद्दद्गठ्ठह्ल ष्द्धद्बद्यस्र)। संतान की शिक्षा अच्छी होगी। अगर व्यक्ति चांदी धारण करता है तो यह संतान के लिए लाभप्रद होता है। संतान के हित में पंचम भाव में बुध वाले व्यक्ति को अकारण विवादों में नहीं उलझना चाहिए अन्यथा संतान से मतभेद होता है।
पांचवें घर में गुरू (छ्वह्वश्चद्बह्लद्गह्म् द्बठ्ठ ह्लद्धद्ग द्घद्बद्घह्लद्ध द्धशह्वह्यद्ग): पंचम भाव में गुरू शुभ होने से संतान के सम्बन्ध में शुभ परिणाम प्राप्त होता है।  संतान के जन्म के पश्चात व्यक्ति का भाग्य बली होता है और दिनानुदिन कामयाबी मिलती (्र श्चद्गह्म्ह्यशठ्ठ द्दड्डद्बठ्ठह्य ह्यह्वष्ष्द्गह्यह्य ड्डद्घह्लद्गह्म् ड्ढद्बह्म्ह्लद्ध शद्घ ष्द्धद्बद्यस्र द्बद्घ छ्वह्वश्चद्बह्लद्गह्म् द्बह्य द्बठ्ठ द्घद्बद्घह्लद्ध द्धशह्वह्यद्ग) है। संतान बुद्धिमान और नेक होती है. अगर गुरू मंदा हो तो संतान के विषय में शुभ फल प्राप्त नहीं होता है। मंदे गुरू वाले व्यक्ति को गुरू का उपाय करना चाहिए।
पांचवें घर में शुक्र (ङ्कद्गठ्ठह्वह्य द्बह्य द्बठ्ठ द्घद्बद्घह्लद्ध द्धशह्वह्यद्ग शद्घ रुड्डद्य द्मद्बह्लड्डड्ढ द्मह्वठ्ठस्रड्डद्यद्ब): पांचवें घर में शुक्र का प्रभाव शुभ होने से संतान के विषय में शुभ फल प्राप्त होता है। इनके घर संतान का जन्म होते ही धन का आगमन तेजी से होता है (क्कद्गह्म्ह्यशठ्ठ द्दड्डद्बठ्ठह्य द्वशठ्ठद्ग4 2द्धद्गठ्ठ ड्ड ष्द्धद्बद्यस्र द्बह्य ड्ढशह्म्ठ्ठ ड्डठ्ठस्र ङ्कद्गठ्ठह्वह्य द्बह्य द्बठ्ठ ह्लद्धद्ग द्घद्बद्घह्लद्ध द्धशह्वह्यद्ग)। व्यक्ति अगर सद्चरित्र होता है तो उसकी संतान पसिद्ध होती है। अगर व्यक्ति अपने व्यक्तित्व और चरित्र का ध्यान नहीं रखता है तो संतान के जन्म के पश्चात कई प्रकार की कठिनाईयों का सामना करना होता है। शुक्र अगर इस भाव में मंदा हो तो दूध से स्नान करना चाहिए।
पांचवें घर में शनि (स्ड्डह्लह्वह्म्ठ्ठ द्बठ्ठ ह्लद्धद्ग द्घद्बद्घह्लद्ध द्धशह्वह्यद्ग) : शनि पांचवें घर में होने से संतान सुख प्राप्त होता है। शनि के प्रभाव से संतान जीवन में अपनी मेहनत और लगन से उन्नति करती है (स्ड्डह्लह्वह्म्ठ्ठ द्बठ्ठ द्घद्बद्घह्लद्ध द्धशह्वह्यद्ग शद्घ द्यड्डद्य द्मद्बह्लड्डड्ढ द्दद्ब1द्गह्य ह्यह्वष्ष्द्गह्यह्य 2द्बह्लद्ध श2ठ्ठ द्गद्घद्घशह्म्ह्लह्य)। इनकी संतान स्वयं काफी धन सम्पत्ति अर्जित करती है। अगर शनि इस खाने में मंदा होता है तो कन्या संतान की ओर से व्यक्ति को परेशानी होती है। इस भाव में शनि की शुभता के लिए व्यक्ति को मंदिर में बादाम चढ़ाने चाहिए और उसमें से 5-7 बादाम वापस घर में लाकर रखने चाहिए।
पांचवें घर में राहु (क्रड्डद्धह्व द्बठ्ठ ह्लद्धद्ग द्घद्बद्घह्लद्ध द्धशह्वह्यद्ग): खाना नम्बर पांच में राहु होने से संतान सुख विलम्ब से प्राप्त होता है. अगर रहु शुभ स्थिति में हो तो पुत्र सुख की संभावना प्रबल रहती है। मंदा राहु पुत्र संतान को कष्ट देता है। लाल किताब के अनुसार मंदा राहु होने पर व्यक्ति को संतान के जन्म के समय उत्सव नहीं मनाना चाहिए। अगर संतान सुख में बाधा आ रही हो तो व्यक्ति को अपनी पत्नी से दुबारा शादी करनी चाहिए।
पांचवें घर में केतु (्यद्गह्लह्व द्बठ्ठ ह्लद्धद्ग द्घद्बद्घह्लद्ध द्धशह्वह्यद्ग): केतु भी राहु के समान अशुभ ग्रह है लेकिन पंचम भाव में इसकी उपस्थिति शुभ हो तो संतान के जन्म के साथ ही व्यक्ति को आकस्मिक लाभ मिलना शुरू हो जाता है। यदि केतु इस खाने में मंदा हो तो व्यक्ति को मसूर की दाल का दान करना चाहिए. इस उपाय से संतान के विषय में केतु का मंदा प्रभाव कम होता है।

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