29-May-2015 05:51 AM
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नेपाल में भूकंप क्या आया सारी दुनिया की सहानुभूति का सैलाब उबल पड़ा। कुछ देशों के लोग जहां नि:स्वार्थ भाव से बचाव कार्य के लिए पहुंचे वहीं कुछ देशों ने बचाव कार्य का इस तरह महिमा मंडन किया मानों आपदा में बचाव करने में उन्हें महारथ हासिल है। पाकिस्तान ने तो बीफ मसाला भेजकर नेपाल की भावनाओं का अनादर किया और पाकिस्तान के रिलीफ कैंप में जन्मी बच्ची का नाम लाहौर रखकर सोशल मीडिया पर भरपूर प्रचार किया। हालांकि चीन-भारत जैसे देशों के बचाव दल ने मानवता की इस भीषण त्रासदी के समय बढ़-चढ़ कर काम किया है। दोनों देशों का प्रयास सराहनीय और अनुकरणीय है। हालांकि मीडिया ने इसे भी कुछ इस तरह से प्रचारित किया मानों दोनों देश संवेदना प्रकट करने में भी प्रतिस्पर्धा कर रहे हों। मीडिया का यह बचपना ही कहलाएगा। ऐसे संवेदनशील मामलों में रिपोर्टिंग करते वक्त सावधानी बरतनी चाहिए। भूकंप एक ऐसी त्रासदी है जो नेपाल जैसे छोटे राष्ट्रों को विकास की डगर पर कई दशक पीछे धकेल देती है। नेपाल में भूकंप की संभावना वर्षों से है। जबसे इस क्षेत्र में जनसंख्या की बसावट शुरू हुई कई बार भूकंप ने यहां तबाही मचाई। इसका कारण नेपाल की भौगोलिक स्थिति है। नेपाल ही नहीं बल्कि उत्तर भारत सहित पाकिस्तान का कुछ हिस्सा खतरनाक भूगर्भिक हलचल वाले क्षेत्र में स्थित है। पाक अधिकृत कश्मीर में कुछ समय पहले आए भूकंप ने 80 हजार लोगों की जान ले ली थी। यह त्रासदी अनियंत्रित विकास और बिना किसी विवेक किए गए निर्माण की वजह से भयानक हुई है। भारत ही नहीं बल्कि सारी दुनिया का यह फर्ज है कि वह नेपाल के पुनर्निर्माण में दिल खोलकर सहभागी बनें। यह सुखद है कि नेपाल के लिए सारे देशों ने हाथ बढ़ाए हैं। जो विदेशी सहायता नेपाल को खाद्य सामग्री, दवाओं आदि के रूप में मिल रही है वह तो तत्काल ही पीडि़त जनता के लिए उपयोगी सिद्ध होगी। किंतु नेपाल की त्रासदी के नाम पर सारी दुनिया से जो फंड एकत्र हुआ है, उसका उपयोग नेपाल में ऐसी अधोसंरचना और निर्माण के लिए होना चाहिए जो भूकंप-रोधी होने के साथ-साथ टिकाऊ तथा स्थानीय संसाधनों से निर्मित हो। नेपाल को इस त्रासदी से उबरने में अभी दो-तीन वर्ष लगेंगे, लेकिन इस दौरान फिर कोई भयानक भूकंप नहीं आएगा इस बात की क्या गारंटी है। इसलिए राहत के साथ-साथ पुनर्निर्माण का काम भी जारी रखना चाहिए। यदि नेपाल जापान की तरह भूकंप सुनामी जैसी आपदाओं से जूझना सीख गया, तो नेपाल बहुत तरक्की कर जाएगा। अन्यथा इस भूकंप ने उसे जिन हालातों में पहुंचाया है, वे बहुत गंभीर और चिंतनीय हैं। जहां तक भारत का प्रश्न है, भारत की जमीन का आधा हिस्सा खतरनाक है। यहां भूकंप कभी भी तबाही मचा सकता है। लातूर, गुजरात, असम जैसे भूकंपों के बाद भूकंप संभावित क्षेत्रों में निर्माण संबंधी जो नियम कानून अपनाए जाने थे, उनका गंभीरता से पालन नहीं हुआ। इसी कारण नेपाल के भूकंप का जो कंपन भारत में महसूस किया गया उससे कई जानें चली गर्र्ईं। इस आपदा ने नेपाल के साथ-साथ भारत को भी सबक दिया है।