सलमान की बेल का खेल
23-May-2015 06:13 AM 1238314

 

न्याय में अंधेर के लिए कुख्यात भारत की न्याय पालिका रसूखदारों के चरणों में किस तरह दंडवत हो जाती है इसका प्रत्यक्ष उदाहरण देखने को मिला सलमान खान की सजा और जमानत के प्रकरण में। फुटपाथ पर सोते लोगों (जिन्हें अभिजीत कुत्ता मानते हैं) पर नशे में गाड़ी चढ़ाने और गैर इरादतन हत्या के दोषी सलमान खान को 6 मई को सेशन्स कोर्ट ने पांच साल की जेल और जुर्माने का दंड दिया था। जिसे सुनकर सलमान खान की आंखों से आंसू गिरने लगे और उधर बॉलीवुड में भी आंसुओं का सैलाब आ गया लेकिन दो घंटे के भीतर ही हाईकोर्ट से सलमान खान को दो दिन की अंतरिम जमानत मिल गई। 8 मई को बड़ी राहत देते हुए हाईकोर्ट ने सेशन्स कोर्ट से सलमान को मिली पांच वर्ष की सजा निलंबित करते हुए उन्हें बड़ी राहत दी। मामले में सलमान खान को 30 हजार रुपए का नया बेल बांड भरना था जिसे उन्होंने सेशन्स कोर्ट पहुंचकर भर दिया। मामले की अगली सुनवाई 15 जून को होगी। 15 जून तक तो राहत है।
फिल्मी दुनिया के 2-3 अरब रुपए सलमान की फिल्मों में लगे हुए थे अब इन सारे प्रोजेक्ट को 15 जून से पहले निपटाने की कोशिश की जाएगी। लेकिन प्रश्न यह है कि सलमान को सजा कब होगी। जो भी घटनाक्रम घटा वह सारी दुनिया के सामने है। सेशन्स कोर्ट ने सलमान से स्पष्ट कहा था कि आपके खिलाफ सारे आरोप सिद्ध हो चुके हैं। सलमान ने न्यायाधीश को जवाब दिया कि वे उस रात गाड़ी नहीं चला रहे थे। लेकिन न्यायाधीश ने उनकी दलील नहीं मानी।
दरअसल हाईकोर्ट से सलमान को जमानत मिलने की संभावना तो उसी दिन पैदा हो गई थी जब सेशन्स कोर्ट ने एक ही दिन के भीतर आरोप सिद्ध होने पर सलमान को सजा सुना दी थी। आमतौर पर अपराधी पर आरोप सिद्ध होने के बाद एक या दो दिन उसे अपना पक्ष रखने के लिए दिए जाते हैं। इस दौरान वकील सजा कम से कम कराने की कोशिश करते हैं। लेकिन सलमान को दलील के लिए पर्याप् त समय नहीं मिला। फैसले की प्रति भी समय पर नहीं मिल सकी। इसीलिए हाईकोर्ट में सलमान को जमानत मिलने में आसानी हुई। अब जब तक केस की सुनवाई चलेगी राहत जारी रहेगी। पहला निर्णय आने में ही 13 साल लग गए अब हाईकोर्ट की दहलीज पर कितने वर्ष लगेंगे इसके बाद सुप्रीम कोर्ट भी तो है। कुल मिलाकर उन फुटपाथियोंÓ को न्याय के लिए अभी और इंतजार करना होगा। जिनका जिक्र इस पूरे फंसाने में कहीं हैं ही नहीं। उनके नाम भी कोई नहीं जानता। सलमान की महंगी विदेशी गाड़ी के नीचे दबकर दम तोडऩे वाले नुरुल्लाह शेख का बेटा बड़ी मासूमियत के साथ कहता है कि सलमान को सजा मत दो लेकिन हमें मुआवजा अवश्य दे दो। 13 वर्ष बाद भी नुरुल्लाह की बीवी बेगम जां 19 लाख रुपए के मुआवजे की रकम के लिए भटक रही हैं। हालांकि उन्होंने इस हादसे के पहले ही किसी दूसरे व्यक्ति के साथ निकाह पढ़ लिया था। इसलिए मुआवजे को लेकर मृतक के बेटेे फिरोज के साथ विवाद है, लेकिन बाकी पीडि़तों के यहां कोई विवाद नहीं। इस घटना में अपने हाथ-पैर गंवाने वाले वे गरीब मुआवजा ही तो मांग रहे हैं। सलमान की सजा से उन्हें कोई सरोकार नहीं है। उन्हें मालूम है कि सजा मिलने में दशकों लग जाएंगे और सजा मिली भी तो सलमान के लिए जेल भी जन्नत बन जाएगी। क्योंकि सलमान देश के उन ढाई लाख विचाराधीन कैदियों में से नहीं हैं। जिन्हें सजा के इंतजार में ही वर्षों गुजारने पड़ते हैं। इनमें से कुछ ऐसे भी हैं जिन्हें अपना बेल बांड भरने के पैसे नहीं हैं।  जो जेलों में अपनी आधी उम्र बिता चुके हैं। छोटी-मोटी चोरी भी उन्हें 27-28 साल जेल के भीतर धकेल सकती है। लेकिन उनका रिकार्ड सुरक्षित है पर सलमान खान जैसे हाई प्रोफाइल केस का रिकार्ड सुरक्षित नहीं रह पाता। 2014 में केस के पेपर ही गुम हो गए। बाद में इंस्पेक्टर दिनेश पाटकर ने 60 घंटे तक पेपर खोजे और मुंबई पुलिस के हाथ मजबूत किए। कई बार गवाह पलटे। एक अहम गवाह जो कि घटना वाले दिन सलमान को दी गई सरकारी सुरक्षा में तैनात थे-रवींद्र पाटिल ने कोर्ट को सब कुछ सच बताया। दुर्भाग्य से वे टीबी की बीमारी के शिकार होकर असमय ही ऊपर चले गए। पाटिल की गवाही बहुत अहम थी। उसी ने मुकदमें की दिशा तय की थी।
सलमान के पक्ष में दलील देने वाले कहते हैं कि वे एक अच्छे भले व्यक्ति हैं, लोगों की मदद करते हैं, गरीब बच्चों का इलाज कराते हैं, अपनी आमदनी का बड़ा हिस्सा परोपकार में खर्च कर देते हैं। सवाल यह है कि इतने सारे गुणों, परोपकार और  सहृदयता के बाद शराब पीकर गरीबों पर गाड़ी चढ़ाने का लाइसेंस मिल जाता है? उस दिन तो सलमान लाइसेंस भी हाथ में नहीं लिए हुए थे। बगैर लाइसेंस के ही गाड़ी चला रहे थे, उन्हें देखने वाले एक नहीं अनेक थे। उनके साथ गाड़ी में बैठे कमाल खान ने भी कोर्ट को बताया था कि उस समय सलमान खान ही गाड़ी चला रहे थे। यह सत्य है कि सलमान जैसे प्रसिद्ध व्यक्ति के बारीक से बारीक कदम पर भी मीडिया की नजरें रहती हैं। इसी कारण उनके विरुद्ध किसी भी मामले में सुनवाई के समय अतिरिक्त सतर्कता बरतनी पड़ती है जिससे कहीं यह न लगे कि खास व्यक्ति होने के कारण नरमी दिखाई गई। लेकिन मीडिया भी किसी को नहीं बख्शता। जब सलमान जमानत के कोर्ट से बाहर निकले तो गाड़ी की अगली सीट पर बैठे और सीट बेल्ट लगाना भूल गए। मीडिया ने इसे ही मुद्दा बना दिया कि सलमान ने कानून तोड़ा। एक नजरिए से देखा जाए तो फेमस होना भी कई बार जी का जंजाल बन जाता है। जिस तरह का प्रकरण सलमान का है उससे मिलते-जुलते कई प्रकरण हो जाते हैं। लेकिन वे कोर्ट के बाहर ही समझौता करते हुए हल कर लिए जाते हैं। जाहिर है पैसे का लेनदेन होता है लेकिन सलमान तो पैसा भी नहीं दे सकते थे। क्योंकि पैसा देना उन्हें और भारी पड़ जाता। अब हाईकोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट है रास्ता बहुत लम्बा है तब तक सलमान अपने फिल्मी करियर का पूरा दोहन कर चुके होंगे। वकील कहते हैं कि सलमान सजा से बच नहीं सकते, लेकिन सजा कितनी होगी और कब होगी इसका वकीलों को कोई अंदाजा नहीं है। कुल मिलाकर सलमान फिलहाल बाहर हैं उनके वे प्रशंसक जो उनके जेल जाने पर जहर खाने तक की कोशिश कर रहे थे अब राहत की सांस ले सकते हैं। उधर आसाराम बापू को भी उम्मीद बंधी है कि जब सलमान को जमानत हो सकती हैं तो उन्हें क्यों नहीं? लेकिन आसाराम का मामला सलमान से बहुत अलग है।

कौन-सी दलीलें सलमान के पक्ष में गईं?

  • कार के अंदर मौजूद लोगों की संख्या तय नहीं होने, कार की स्पीड कितनी थी, इस पर सवाल उठने, रवींद्र पाटिल से जिरह नहीं होने और कमाल खान का बयान नहीं होने की बचाव पक्ष की दलीलें काम आ गईं। इससे हाईकोर्ट जमानत देने की मांग पर रजामंद हो गई।
  • सलमान के वकील अमित देसाई और श्रीकांत शेवाड़े ने कहा- निचली अदालत ने इस तथ्य पर ध्यान नहीं दिया कि मामले में चार गवाह हैं। कमाल खान का बयान नहीं दर्ज हुआ। रवींद्र पाटिल भी यह बताने में नाकाम रहे थे कि होटल से लौटते वक्त रूट क्यों बदला गया था। प्रॉसिक्यूशन निचली अदालत में यह साबित नहीं कर पाया कि कार सलमान ही चला रहे थे।

जज ने क्या कहा?

  • जज ने सेशंस कोर्ट के फैसले के खिलाफ सलमान की अर्जी स्वीकार कर ली। जस्टिस अभय थिप्से ने कहा- क्या आपको सेशंस कोर्ट के जजमेंट की कॉपी मिल गई है। आपने अंतरिम राहत हासिल करने के लिए कोर्ट को गुमराह तो नहीं किया था?Ó
  • जमानत अर्जी स्वीकार कर जज ने कहा, सलमान लंबे समय से जमानत पर हैं। उनकी आजादी पर कोई अंकुश नहीं लगा। आमतौर पर ऐसे मामलों में अपील स्वीकार की जाती है और आरोपी को जमानत दी जाती है।Ó इस टिप्पणी के बाद हाईकोर्ट जज ने सलमान के कनविक्शन पर रोक लगा दी और उन्हें जमानत दे दी।
  • जज ने यह भी कहा कि जब इस कोर्ट में अपील पर सुनवाई की जा रही है तो दोषी को क्या जेल भेजने की जरूरत है?

धारा-389 ने बचाया

  • सलमान की सजा को निलंबित रखने में सीआरपीसी की धारा-389 का अहम योगदान है। इसमें धारा-374 के तहत सलमान को अपील करने की छूट दी जिसे सेशन कोर्ट ने शायद ध्यान में नहीं रखा। आम तौर पर जो अभियुक्त जमानत के दौरान कानून का उल्लंघन नहीं करते, उन्हें थोड़ी राहत मिलती है। वैसे भी इस धारा में जमानत देते समय कई पहलुओं पर विचार किया जाता है। यदि इस तरह के दोषियों को जमानत न मिले, तो जेलों में बड़ी संख्या में भीड़ बड़ सकती है।
  • मुंबई से ऋतेन्द्र माथुर
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