21-Apr-2015 05:54 AM
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लोग यह आरोप लगाते हैं कि मुस्लिमों की बढ़ती जनसंख्या पर भारत में बेवजह चिंता जताई जा रही है। वे शायद इस तथ्य भूल जाते हैं कि भारत से ज्यादा चिंता तो पश्चिमी देशों में व्यक्त की जा रही है। जहां आए दिन आंकड़े अखबारों में छापकर बताया जाता है कि मुसलमानों की तादाद कितनी बढऩे वाली है, लेकिन भारत में इस तरह की चिंताओं को सांप्रदायिक नजरिए से देखा जाने लगा है। वैसे तो जनसंख्या ही अपने आप में बहुत बड़ी चिंता का विषय है। जिस अनुपात में जनसंख्या बढ़ रही है। उस अनुपात में प्राकृतिक संसाधनों पर बोझ बढ़ा है, लेकिन इस्लामी जगत में छिड़ी लड़ाइयों और आतंकवाद के चलते विश्व की जनसंख्या में मुस्लिमों के बढ़ते अनुपात पर कुछ विदवानों ने चिंता व्यक्त की है। भारत में दक्षिण पंथी हिंदुओं ने इस जनसंख्या वृद्धि का प्रचार इस तरह किया है कि भविष्य में मुस्लिमों की जनसंख्या हिंदुओं से ज्यादा हो सकती है। हालांकि इसमें सच्चाई नहीं है, लेकिन फिर भी जनसंख्या वृद्धि से जनित समस्याएं भारत के लिए चुनौती बनती जा रही हैं। सबसे बड़ा खतरा सांप्रदायकिता का है। हिंदूवादी नेताओं ने तो एक तरह से चेतावनी देना ही प्रारंभ कर दिया है कि हिंदुओं ने अपनी संख्या नहीं बढ़ाई तो वे मुसलमानों से पिछड़ जाएंगे। लेकिन 2050 तक देश की जनसंख्या में जिस तरह की बढ़ोतरी होगी वह अपने आप में एक बड़ा मुद्दा है। सवाल हिंदू या मुसलमान का नहीं है। सवाल यह है कि देश इतनी अधिक जनसंख्या का भार ढोने में सक्षम है या नहीं। भारत के संसाधनों के हिसाब से भारत की जनसंख्या चौगुनी है। हिंदू और मुसलमान दोनों धर्मों के नेता जो मानसिक दिवालिएपन के शिकार हैं अपने-अपने धर्मांवलंबियों को ज्यादा बच्चे पैदा करने की सलाह दे रहे हैं। यह कोई नहीं देख रहा है कि इसमें देश का कितना अहित है। वर्तमान में दुनिया में आतंकवाद से लेकर तमाम समस्याओं की जड़ में जनसंख्या सबसे बड़ा कारण है, लेकिन इसके बाद भी भारत में हिंदू और मुसलमानों के बीच जनसंख्या युद्ध छेडऩे की साजिश की जा रही है। साक्षी महाराज ने कहा कि जो ज्यादा बच्चे पैदा करे उससे मताधिकार छीन लो। यह एक घटिया बयान हो सकता है। लेकिन जनसंख्या वृद्धि रोकने के लिए सरकार को कुछ उपाए तो करने ही होंगे। भले ही मताधिकार से वंचित न किया जाए। किंतु अन्य तरह की सुविधाओं से ऐसे लोगों को वंचित करना ही होगा जो बच्चे पैदा करके सरकार के ऊपर बोझ बनने का काम कर रहे हैं।
साल 2050 तक दुनिया की कुल आबादी में हिंदुओं की संख्या तीसरे नंबर पर होगी, जबकि भारत में मुस्लिमों की संख्या दुनिया में सबसे ज्यादा होगी। पीयू रिसर्च सेंटर की ओर से की गई स्टडी में इस बात का खुलासा किया गया है। स्टडी के मुताबिक, भारत मुस्लिम आबादी के मामले में इंडोनेशिया को भी पीछे छोड़कर मुस्लिम आबादी के मामले में दुनिया का सबसे बड़ा देश बन जाएगा। रिपोर्ट में बताया गया है कि वर्ष 2050 में भी भारत में सबसे ज्यादा आबादी हिंदुओं की होगी। पीयू रिसर्च सेंटर की स्टडी में कहा गया है कि 2050 तक हिंदुओं की जनसंख्या 34 फीसदी बढ़ कर करीब 1.4 अरब हो जाएगी। स्टडी के मुताबिक, दुनिया की कुल आबादी का 14.9 प्रतिशत हिंदू होंगे। इस तरह हिंदू उन लोगों को पीछे छोड़ देंगे, जिनका विश्वास किसी भी मजहब में नहीं है। 2050 तक दुनिया की 13.2 फीसदी आबादी नॉन बिलिवर्स की होगी जो हिंदुओं से कम होगी। रिपोर्ट के मुताबिक, अगले चालीस सालों में ईसाइयों की संख्या दुनिया में सबसे ज्यादा होगी, लेकिन इसी लिहाज से मुसलमान उनसे ज्यादा पीछे नहीं होंगे। लेकिन इस्लाम किसी भी अन्य धर्म की तुलना में तेजी से बढ़ेगा। इसमें ये भी कहा गया है कि रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि 2050 तक मुस्लिमों 2.8 अरब या आबादी का 30 फीसदी और ईसाइयों 2.9 अरब या 31 फीसदी के बीच आबादी के हिसाब से करीबी मुकाबला होगा। पीयू रिसर्च सेंटरÓ एक नॉन फ्रॉफिटेबल अमेरिकी थिंक टैंक है। वॉशिंगटन स्थित यह रिसर्च सेंटर उन राजनैतिक, सामाजिक और भौगोलिक मुद्दों पर शोध तथा सर्वेक्षण करता है, जिनका अमेरिका या दुनिया से संबंध होता है और जो भविष्य में उपयोगी साबित हो सकते हैं। पीयू चैरिटेबल ट्रस्ट इस रिसर्च सेंटर को आर्थिक मदद देता है।