20-Apr-2015 06:08 AM
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कहते हैं देर से दिया गया न्याय अंधेर ही है। अपनी लैंड कू्रजर गाड़ी से 2002 में 5 लोगों को कुचलने वाले सलमान खान के मामले में फैसला अभी भी नहीं आया है। 13 वर्ष बीत चुके हैं। अदालत में मामला चल रहा है। कई बार बयान बदले गए हैं और बहुत से गवाहों को डराया-धमकाया भी गया है। लेकिन सलमान खान का बाल का बांका नहीं हुआ। हिरण शिकार के मामले में तो कम से कम सलमान ने 3 दिन की जेल भी काट ली थी, लेकिन इस मामले में अभी तक कोई निर्णय नहीं आया। एक-दो बार सलमान को विदेश जाने से रोका गया। अभियोग पक्ष का कहना है कि यदि सलमान खान का चालक गाड़ी चला रहा था तो उसने यह स्वीकारने में 13 वर्ष क्यों लगा दिए? यह दलील एकदम सटीक है। शायद सलमान के अंदर का इंसान उन्हें ड्राइवर को बलि का बकरा न बनाने के लिए प्रेरित कर रहा होगा। अभियोजन पक्ष के वकील प्रदीप घरत का कहना है कि ड्राइवर ने यह सोचने में 12 वर्ष लगा दिए कि सलमान के साथ कुछ गलत हो रहा है। सवाल यह भी है कि सलमान ने अपराधिक लापरवाही करने वाले ड्राइवर को हटाया क्यों नहीं? बल्कि सलमान ड्राइवर के पाप का भार ढोने के लिए प्रस्तुत हो गए। यह सब दिखावटी लग रहा है। ड्राइवर अशोक सिंह का कहना है कि सलमान खान के पिता सलीम खान के कहने पर उसने सच बताना उचित समझा। लेकिन यह समझ में नहीं आता कि सलीम खान ने ड्राइवर से सच बोलने के लिए पहले क्यों नहीं कहा? सलमान की कार होटल जेडब्ल्यू मेरियट के पोर्च में खड़ी थी। फाइव स्टार होटल के नियमों के ्रमुताबिक पोर्च में वही कार खड़ी हो सकती है, जो कार मालिक द्वारा चलाई जा रही हो न कि ड्राइवर द्वारा। सलमान के ड्राइवर ने कार का टायर बस्ट होने और फिसलने की बात कही है। लेकिन इतनी महंगी गाड़ी के टायर कीचड़ से लेकर हर तरह के रास्ते पर संतुलन से चलते हैं, फिसलने का तो सवाल ही पैदा नहीं होता। बचाव पक्ष के वकील ने कहा है कि दुर्घटना के बाद सलमान ने कार उठाने की कोशिश की थी, लेकिन अभियोजन का कहना है कि ड्राइवर अशोक सिंह ने बताया है कि जब कार फुटपाथ पर चढ़ी तो टायर के नीचे कोई नहीं था। खास बात यह है कि बचाव पक्ष हमेशा यह कहता आया है कि सलमान कार नहीं चला रहे थे। तो फिर कार कौन चला रहा था? बचाव पक्ष ने कार चलाने वाले का नाम पहले क्यों नहीं जाहिर किया? एक दशक क्यों लग गए उत्तर देने में? अब यह मामला निचली अदालत में है, इसके बाद कोई फैसला आता है तो उसे ऊंची अदालत में चुनौती दी जाएगी, जहां 5-10 वर्ष लगेंंगे, उसके बाद सर्वोच्च अदालत में भी 5-10 वर्ष लग सकते हैं। यदि 1 फैसले को 3 दशक लग गए, तो सजा किसको मिलेगी? हाल ही मेें मुख्य न्यायाधीश ने कहा है कि 5 वर्ष में मुकदमे निपटने चाहिए। लेकिन ऐसा हो पाता है? यह एक बड़ा सवाल है। सलमान खान के विरुद्ध हिरण शिकार का मामला 1998 से चल रहा है। हर बार समाचार आता है कि सलमान खान को नोटिस दिया गया है, उनकी मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। लेकिन कोई सजा आज तक नहीं हुई। सुप्रीम कोर्ट भी सलमान खान के रवैये पर नाराजगी जाहिर कर चुका है। निचली अदालत इस मामले में 5 साल की सजा सुना चुकी है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट में निर्णय कब होगा, कहा नहीं जा सकता। ताकतवर लोग कानून को किस तरह अपनी जेब में रखते हैं उसका यह उत्कृष्ट उदाहरण है।
काले हिरण के शिकार मेें सजा
सलमान खान को निचली अदालत में जोधपुर में 2 काले हिरण मारने के मामले में कुछ वर्ष पूर्व 5 वर्ष की सजा सुनाई थी। सलमान ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिस पर सुनवाई जारी है। सलमान खान, सैफ अली खान, तब्बू, सोनाली बेंद्रे और नीलम ने 1 अक्टूबर 1998 की रात में जोधपुर के पास कांकणी गांव में 2 काले हिरण का कथित रूप से शिकार किया था। काले हिरण को संरक्षित प्रजाति माना जाता है और उनकी संख्या बहुत कम है। राजस्थान का विश्नोई समाज काले हिरण को बचाने के लिए कई बलिदान दे चुका है। सलमान खान और अन्य एक्टर उस वक्त फिल्म हम साथ-साथ हैंÓ की शूटिंग कर रहे थे। पुलिस ने वन्य प्राणी अधिनियम के अनुच्छेद 51 एवं 52 तथा भारतीय दंड संहिता की धारा 149 के तहत मुकदमा दायर किया था। यह मामला भी अब अपने अंतिम दौर में है। यदि सलमान को सजा होती है तो फिल्म उद्योग को अरबों का नुकसान होगा। दोनों मामलों में उन्हें 15 वर्ष सलाखों के पीछे बिताना होंगे। यह 15 वर्ष सलमान के कॅरियर पर बहुत भारी पड़ेंगे। यदि सजा में कुछ रियायत मिलती है, तो भी सलमान के लिए छोटी-मोटी कुछ एक वर्षों की सजा उनके कॅरियर का अंत ही साबित होगी। सलमान हिरण शिकार कांड में जमानत पर ही हैं और उन्हें देश छोडऩे से पहले बार-बार अदालत की इजाजत लेनी पड़ती है, जो कि किसी सजा से कम नहीं है।