हे भगवान! ये कैसे बयान!
20-Mar-2015 03:22 PM 1237867

ज्यसभा में बीमा बिल पर चर्चा के दौरान शरद यादव ने दक्षिण भारतीय महिलाओं की चर्चा छेड़ दी और कहा कि दक्षिण की महिलाएं सांवली तो होती हैं लेकिन उनकी बॉडी खूबसूरत होती है। चर्चा बीमा विधेयक पर हो रही थी, जिसमें 49 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को मंजूरी दी गई है। यह गंभीर विषय है। शरद यादव कोई रूपक देना चाह रहे थे, लेकिन उनके अंतर्मन में जो पुरुषवादी मानस विराजमान है उसने उनकी मनोवृत्ति के अनुरूप ही रूपक तलाश लिया। अपनी बात कहने के लिए वे दूसरे उदाहरण दे सकते थे, लेकिन शरद यादव मूल रूप से तो उसी माहौल की पैरवी करते आए हैं, जिसमें महिलाओं को चार दीवारी में रहने की हिदायत दी जाती है। महिला आरक्षण पर जब पहली बार संसद में चर्चा हो रही थी, उस समय भी शरद यादव ने कहा था कि इस विधेयक के जरिए क्या आप परकटी महिलाओं को सदन में लाना चाहते हैं।  यादव ही नहीं शब्दों के वीर तो हर दल में हैं। महिलाओं के प्रति इस तरह के बेतुके बयान लोकसभा और राज्यसभा से लेकर विधानसभाओं तक तथा आम जनता में लोकसेवकों के मुंह से कई बार सुने जा चुके हैं। मुलायम सिंह यादव ने मुंबई में बलात्कार कांड के बाद यह कह दिया था कि लड़के हैं गलती हो जाती है। उन्हीं की पार्टी के नेता नरेश अग्रवाल तो बलात्कार की घटना पर पीडि़त को ही जिम्मेदार ठहराते हुए कहते हैं कि आज किसी के घर का जानवर भी कोई जबरदस्ती नहीं ले जा सकता। कैलाश विजयवर्गीय ने भी कभी महिलाओं को मर्यादा और लक्ष्मण रेखा का पाठ पढ़ाया था। राष्ट्रपति के सुपुत्र और जंगीपुर से कांग्रेस सांसद अभिजीत मुखर्जी ने गैंगरेप के खिलाफ दिल्ली में चल रहे विरोध प्रदर्शन पर कहा था कि लड़कियां दिन में सज-धज कर कैंडल मार्च निकालती हैं और रात में डिस्को जाती हैं। सीपीएम के वरिष्ठ नेता और पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री अनिशुल रहमान तो पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से यह तक पूछ चुके हंै कि वे रेप के लिए कितना चार्ज लेंगी। हिंदू संस्कारों से सज्जित भाजपा के मुख्तार अब्बास नकवी ने नेताओं के खिलाफ नारेबाजी कर रही महिलाओं के बारे में कहा था कि यह लिपिस्टिक-पाउडर लगाकर क्या विरोध करेंगी। हरियाणा के एक कांग्रेसी नेता धर्मवीर गोयल ने बलात्कार के लिए लड़कियों को ही दोषी ठहराते हुए कहा था कि 90 प्रतिशत मामले में लड़कियां सहमति से संबंध बनाती हैं। ऐसे कई बयान इन दिनों सुनने में आए हैं। संसद में जब निर्भया के  ऊपर बनी डॉक्यूमेंट्री पर बहस चल रही थी, उस दौरान जावेद अख्तर ने स्पष्ट कहा था कि डॉक्यूमेंट्री में बलात्कारी मुकेश द्वारा कही गई बातों से गंदी बातें तो सदन में सुनी जा चुकी हैं। निश्चित रूप से पुलिस, न्यायपालिका के साथ-साथ राजनीति और राजनीतिज्ञों को भी महिला मुद्दों को संवेदनशील बनाने के लिए अभियान चलाना होगा।

  • राजेन्द्र आगाल
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