17-Jan-2015 11:57 AM
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हल ही में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने कहा है कि जेल में बंद कैदी को संतान सुख से वंचित नहीं किया जा सकता और इसके लिए उन्हें जेल में सेक्स करने की सुविधा दी जानी चाहिए। यह निर्णय
पटियाला की सेंट्रल जेल में बंद जसवीर सिंह और सोनिया नामक बंदियों की याचिका पर दिया गया है। दोनों ने मिलकर एक 16 साल के लड़के को अगवा कर फिरौती की मांग की थी और रकम न मिलने पर उसकी हत्या कर दी थी। अब दोनों ने कोर्ट में गुहार लगाई कि उन्हें आपस में मिलने दिया जाए और सेक्स करने की इजाजत प्रदान की जाए ताकि वे संतान पैदा कर सकें। विश्व की कई जेलों में कैदियों को यौन सुख प्रदान करने के लिए समय और दिन तय किया गया है। ऐसा इसलिए है कि भोजन, पानी, हवा की तरह यौन सुख को भी व्यक्ति की बुनियादी जरूरत माना जाता है। जो कैदी लंबे समय तक जेल मेें जीवन बिताते हैं वे कई बार वर्षों तक अपने साथी से दूर रहकर असह्य यातना भुगतते हैं। पंजाब और हरियाणा कोर्ट के न्यायाधीश ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 का हवाला देते हुए कैदियों को अपने साथी के साथ सेक्स करने की इजाजत को उनके जीवन जीने और निजी स्वतंत्रता का अधिकार माना है। यह फैसला भारतीय जेलों में माहौल बदलने में सहायक होगा। इसके तहत कैदियों को उनके परिजनों के साथ निजी पल बिताने की सुविधा मुहैया कराई जाएगी। पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने इस मामले में किसी सेवा निवृत्त न्यायाधीश के नेतृत्व में जेल सुधार कमेटी गठित करने का सुझाव भी दिया है।
किराए की कोख पर भी मातृत्व अवकाश
किराए की कोख को लेकर सरकार तो चिंतित है ही न्यायालय ने भी इस पर चिंता जताई है। केरल हाईकोर्ट का कहना है कि सरोगेसी के माध्यम से बच्चे को जन्मने वाली माँ को भी मातृत्व के सभी फायदे और अधिकार मिलने चाहिए। दरअसल कानून में सरोगेसी के लिए कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है। इसी कारण सरोगेट प्रक्रिया से माँ बनने वाली महिलाओं को आमतौर पर मातृत्व अवकाश से वंचित कर दिया जाता है। नियोक्ता यह दलील देते हैं कि ऐसी महिलाओं ने स्वयं बच्चे को जन्म नहीं दिया और किराए की कोख में बच्चे को पाला है लिहाजा उन्हें मातृत्व अवकाश नहीें मिल सकता और न ही अन्य सुविधाएं। अब कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया है। इसके बाद संभवत: उन मांओं को भी लाभ मिलेगा जो बच्चे को भले ही जन्म न देती हों लेकिन उन्हें पाल-पोस कर तो बड़ा करती ही हैं। सरोगेसी भारत में एक तेजी से बढ़ती प्रक्रिया बनती जा रही है। जो दंपति बच्चे को जन्मने में सक्षम नहीं होते वे किराए की कोख से अपना जैनेटिकल बच्चा पैदा करवाते हैं। लेकिन यह एक फलता-फूलता व्यवसाय भी बन चुका है। बड़े-बड़े महानगरों से लेकर छोटे शहरों तक हर वर्ष हजारों महिलाएं इस प्रक्रिया को अपना रही हैं। इसी कारण सरोगेसी को लेकर कानूनों की मांग की जा रही है।
बिन्दु माथुर