खजाना खाली तो कैसा रिपोर्ट कार्ड
03-Jan-2015 05:49 AM 1237744

मध्यप्रदेश में एक घिसा-पिटा रिवाज चालू हो गया है कि मंत्री अपना रिपोर्ट कार्ड जारी करते हैं और बताते हैं कि 1 साल के दौरान क्या किया। लेकिन जब किसी प्रदेश का खजाना खाली हो और केंद्र से भी मायूसी हाथ लग रही हो, तो किसी भी मंत्री का रिपोर्ट कार्ड संतोषप्रद कैसे हो सकता है। मध्यप्रदेश में जारी किए गए रिपोर्ट कार्डों का सार यह है कि 11 वर्ष तक शासन चलाने वाली भाजपा और 9 वर्ष तक मुख्यमंत्री के पद पर विराजमान शिवराज सिंह चौहान को अब मध्यप्रदेश के वित्तीय हालात पर गंभीर चिंता सता रही है। लेकिन इसके लिए रास्ता तलाशा गया है, जनता की जेब पर भार डालने का। पेट्रोल-डीजल पर वैट के अलावा भी कई ऐसे तरीके हैं जिनसे जनता को राहत नहीं मिल पा रही है। दिन-रात ऐड़ी-चोटी का जोर लगाकर रोजी-रोटी कमाने वाले गरीब और मजदूरों को जब तक सस्ता अनाज, सस्ता कपड़ा, सस्ता आवास, सस्ता परिवहन और सस्ता उपचार नहीं मिलेगा, भारत का यह हृदय प्रदेश अपनी ही समस्याओं के झंझावातों में फंसा रहेगा। जनता को तो रिपोर्ट कार्ड तभी अजीज लगेगा, जब बदलाव की बयार उस तक पहुंचेगी। उसे बेरोजगारी से छुटकारा मिले, भुखमरी और कुपोषण से निजात मिले, गरीबी के दुष्चक्र से वह निकले और स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता गरीब से गरीब व्यक्ति के लिए हो, तभी इन रिपोर्ट कार्डों का महत्व है। भारत रत्न से सम्मानित अटल बिहारी वाजपेयी से एक पत्रकार ने पूछा था कि आप अपनी सबसे बड़ी असफलता किसे मानते हंै, तो अटल जी ने जवाब दिया था कि जो देश की असफलता है वही मेरी भी असफलता है। आजादी के इतने वर्ष बाद भी जनता दुखी और पीडि़त है, गरीबी, भुखमरी का बोलबाला है, तो यह असफलता ही है। इसलिए वाजपेयी जैसे नेताओं ने कभी रिपोर्ट कार्ड की चिंता नहीं की। उन्हें मालूम था कि जब तक यह समस्याएं हैं रिपोर्ट कार्ड में नंबर कितने भी भर लिए जाएं लेकिन परिणाम तो शून्य ही रहेगा। इसीलिए मध्यप्रदेश के मंत्रियों की किंटर गार्टन के छात्रों की तरह रिपोर्ट कार्ड का प्रदर्शन नकली और खोखला लग रहा है। जो बदलाव है वह स्वत: ही दिखने लगेगा, उसके लिए किन्हीं आंकड़ों की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। ऐसा नहीं है कि काम न हुआ हो। कुछ मोर्चों पर काम अवश्य हुआ है, कुछ बदलाव भी दिखाई दे रहा है। बिजली, सड़क आदि की स्थिति पहले से बेहतर है, लेकिन बहुत सा काम करने के चक्कर में फैलारा बहुत हो गया। इस फैलारे को समेटने की आवश्यकता है। पहले से जो चल रहा है वह दु्रत गति से पूर्ण हो ताकि नया काम हाथ में लिया जा सके। जहां तक रिपोर्ट कार्ड का प्रश्न है, जनता ने हर चुनाव में विजय दिलाई है तो कुछ न कुछ अवश्य किया ही होगा। लेकिन यह विजय अर्थवान और सार्थक तभी बन सकेगी जब मध्यप्रदेश के जन-जन का मन जग-मग करने लगेगा।

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