03-Jan-2015 05:43 AM
1238663
मध्यप्रदेश में हर चुनाव जीतने वाली भाजपा को काम करके दिखाना चाहिए। कांग्रेस के प्रति जनता के मन में जो गुस्सा है वह कांग्रेसियों की निष्क्रियता के कारण अभी भी यथावत है। कांग्रेस ने नगरीय निकाय के चुनाव में कोई विशेष प्रयास नहीं किए। उसके नेता भी चुनावी राजनीति से दूर ही रहे। कांग्रेस के खाते में जितनी भी जीत आईं वे सब बिना किसी प्रयास के ही मिलीं। जबकि भाजपा के प्रदेश स्तर के अनेक नेताओं ने पूरी ताकत झोंक रखी थी, मुख्यमंत्री भी विधानसभा चुनाव की तरह लगातार सक्रिय रहे। अब चुनावी परिणामों के बाद स्थानीय स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक व्यवस्थाएं सुधारने और नगरों को सुव्यवस्थित तथा साफ-सुथरे बनाए रखने की जिम्मेदारी भाजपा सरकार और उसकी स्थानीय इकाइयों की है।
दुखद स्थिति
सोन नदी के घडिय़ालों को हम अपनी आंखों के सामने विलुप्त होते देखेंगे। कोर्ट से लेकर एनजीटी तक कोई भी संस्था इन्हें बचा नहीं सकती क्योंकि रक्षक ही भक्षक बने हुए हैं। सरकारें मुनाफा कमाने के चक्कर में अंधी हो रही हैं। सोन नदी ही नहीं, हर नदी अवैध खनन और पर्यावरण के कारण कराह रही है। नदियों की यह कराह घडिय़ालों के अन्त होने का संकेत भी है। कोई उनकी पुकार नहीं सुनेगा। मीडिया में भी खबरें आएंगी और खत्म हो जाएंगी।
बहस तो करनी पड़ेगी
यह सच है कि संसद में कुछ अनावश्यक मुद्दों पर वक्त जाया हो रहा है, लेकिन बहस तो करनी ही पड़ेगी। कब तक बहस से बचेंगे? पर यह बहस भी बगैर शोरगुल मचाए शांत रूप से होनी चाहिए। जिस तरह संघ, विहिप और उसके अनुशांगिक संगठन धर्मांतरण या घर वापसी जैसे मुद्दों को लगातार गर्माए हुए है, उसे देखते हुए प्रधानमंत्री ज्यादा समय तक शांत नहीं रह सकते, उन्हें बोलना ही पड़ेगा। हालांकि यह भी सच है कि विपक्ष ने कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर सार्थक चर्चा का अवसर गंवा दिया है। जहां तक भाजपा का प्रश्न है, साध्वी निरंजन ज्योति, साक्षी महाराज और आदित्यनाथ जैसों पर लगाम नहीं लगाई गई, तो भाजपा अपने लिए मुसीबत खड़ी कर लेगी।
टॉवर हां, सौर ऊर्जा न
अजीब सी बात है कि शहरों में खतरनाक रेडियो एक्टिविटी फैला रहे मोबाइल टॉवरों को ग्रीन सिग्नल दे दिया जाता है और सौर ऊर्जा जैसे वैकल्पिक ऊर्जा के स्रोत को आगे बढ़ाने वाले छोटे निवेशकों के हितों को नुकसान पहुंचाने का हर संभव प्रयास होता है। मध्यप्रदेश में पनप रही यह नकारात्मकता जनता के स्वास्थ्य और व्यवसाय दोनों के लिए घातक है। यदि सरकार सौर ऊर्जा जैसी अक्षय ऊर्जा को बढ़ावा देना चाहती है तो उसे निवेशकों से किए गए वादे को निभाना चाहिए और अपने दायित्व को पूरा करना चाहिए। जहां तक मोबाइल टॉवरों का प्रश्न है, उन्हें हटाने की इच्छाशक्ति नगर निगमों और नगर पालिकाओं में नहीं है। अन्यथा कानून इतना सख्त है कि मोबाइल टॉवर हटाना कोई कठिन काम नहीं है।
मोर्चे से क्या हासिल होगा?
मुलायम सिंह यादव और लालू यादव मिलकर कितनी भी कोशिश कर लें बासी कड़ी में उबाल आने वाला नहीं है। जनता ने वे दिन देखे हैं जब तीसरे मोर्चे की सरकारें कभी भाजपा तो कभी कांग्रेस की दहलीज पर मत्था टेकती रहती थीं। कांग्रेस और भाजपा ने अपना स्वार्थ पूरा करने के लिए तीसरे मोर्चे के नेताओं को कठपुतली की तरह नचाया और वे नाचने को विवश भी हुए क्योंकि उन्हें सत्ता से मोह था। सत्ता का यही मोह अब उन्हें एक-दूसरे के निकट ले आया है। लेकिन जनता इनके बहकावे में आने वाली नहीं है। वह कोई नई राजनीतिक ताकत खड़ी करने में सक्षम है।
राजनीतिक पैंतरा
गीता को राष्ट्रीय धार्मिक ग्रंथ घोषित करने वालों की श्रद्धा और भक्ति जाग्रत हो गई हो, ऐसा नहीं है। इसे एक राजनीतिक मुद्दा बनाया जा रहा है और भाजपा इसे अपनी लाभ-हानि से जोड़कर देख रही है। भाजपा सरकार गीता में दिए गए उपदेशों पर चलने की कोशिश करे तो ज्यादा सार्थक परिणाम सामने आएंगे। इस तरह विवाद खड़ा करके दिखावा करना अच्छी राजनीति का संकेत नहीं है।
सभी बाबाओं की जांच हो
निजी आर्मी या अपने सुरक्षा दस्ते रखने वाले सभी बाबाओं की जांच-पड़ताल की जानी चाहिए और निजी सेना रखने पर कानून बनाकर रोक लगाई जानी चाहिए। भोले-भाले लोगों को मूर्ख बनाने के बाद यह कथित बाबा देश की संप्रभुता से खिलवाड़ करते हैं, जो कि खतरनाक है। यदि इसी तरह इन बाबाओं का आतंक जारी रहा तो देश में सुरक्षा का संकट भी उत्पन्न हो सकता है। इन बाबाओं पर रोक जरूरी है।
- सुमन मल्होत्रा, होशंगाबाद