21-Dec-2014 11:21 AM
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भारत के इन कथित संतों को अचानक क्या हो गया है? ये भारतीय संघ की एकता को खतरे में डालने की कोशिश क्यों कर रहे हैं? ढोंगी संत रामपाल की गिरफ्तारी और निजी सेना का मामला शांत नहीं हुआ था कि अब डेरा सच्चा सौदा में हथियारों की ट्रेनिंग पर हाईकोर्ट ने संज्ञान लेते हुए हरियाणा, पंजाब और चंडीगढ़ प्रशासन को नोटिस जारी कर दिया है।
डेरा सच्चा सौदा में कुछ पूर्व सैनिक डेरे के अनुयायियों को सैनिक ट्रेनिंग दे रहे हैं। जिस सतलोक आश्रम से रामपाल को पकड़ा गया था, वहां भी कुछ ऐसे ही प्रशिक्षित लड़ाकों ने महिलाओं, बच्चों को बंधक बनाते हुए पुलिस की नाक में दम कर दिया था। बड़ी विकट स्थिति उत्पन्न हो गई थी और पुलिस को नियंत्रित करने में पूरे दस दिन लगे थे। डेरा सच्चा सौदा में हथियारों की ट्रेनिंग का पता गुप्तचर एजेंसी को लगा, जिसके बाद एक जनहित याचिका दायर की गई थी। इस मामले का उल्लेख एमेक्स क्यूरी अनुपम गुप्ता ने पिछले दिनों सतलोक आश्रम के विवादित गुरु रामपाल प्रकरण में चली सुनवाई के दौरान किया था। बेंच ने इस रिपोर्ट को बेहद ही गंभीर मानते हुए इस मामले पर संज्ञान लेते हुए इसे जनहित याचिका के तौर पर सुने जाने के लिए इसे एक्टिंग चीफ जस्टिस को भेज दिया था।
इस रिपोर्ट पर बेंच ने अपने आ
देशों में सख्त टिप्पणी करते हुए कहा था कि डेरे धार्मिक प्रवचन देने के लिए हैं, न कि सैनिकों की ट्रेनिंग या हथियारों का जखीरा इकठ्ठा करने के लिए। इस तरह अब पहले से विवादित डेरा सच्चा सौदा के सामने नई परेशानी खड़ी हो गई है। पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने हरियाणा के सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा में हथियारों के प्रशिक्षण संबंधी सेना की एक रिपोर्ट पर संज्ञान लेते हुए डेरा के अलावा हरियाणा एवं पंजाब सरकारों तथा चंडीगढ़ प्रशासन को आगामी 14 जनवरी तक इस मामले में अपना पक्ष रखने के लिए नोटिस जारी किया है। न्यायमूर्ति टीपीएस मान और न्यायमूर्ति शेखर धवन की खंडपीठ ने पुलिस द्वारा गिरफ्तार सतलोक आश्रम के कथित संत रामपाल मामले की गत 28 नवम्बर को सुनवाई के दौरान सेना गुप्तचर निदेशालय द्वारा पेश की गई रिपोर्ट पर संज्ञान लेने के बाद इन पक्षों को अपना जबाव दाखिल करने को कहा है।
उल्लेखनीय है कि रामपाल मामले में सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति एम जयापाल और दर्शन सिंह की खंडपीठ के सलाहकार अनुपम गुप्ता ने सेना की 13 दिसम्बर 2010 की उस रिपोर्ट का हवाला दिया था जिसमें डेरा सच्चा सौदा सहित पंजाब और हरियाणा स्थित अन्य डेरों में पूर्व सैनिकों द्वारा हथियारों का अवैध रूप से प्रशिक्षण दिए जाने की बात कही गई थी। रिपोर्ट में पूर्व सैनिकों को डेरों में हथियारों का प्रशिक्षण न देने की हिदायत भी जारी की गई थी। खंडपीठ ने गुप्ता की इस दलील को जनहित याचिका के रूप में स्वीकार कर लिया था, जिस पर न्यायमूर्ति मान और न्यायमूर्ति धवन की खंडपीठ ने आज सुनवाई की।
सवाल यह है कि इन संतों को निजी सेना या अंगरक्षकों की क्या आवश्यकता है? पल भर के लिए मान भी लिया जाए कि इन्हेें कोई खतरा है, तो इसके लिए ये सरकार के पास अर्जी दे सकते हैं और सरकार इनकी सुरक्षा का उचित इंतजाम कर सकती है। लेकिन निजी आर्मी रखने की जरूरत ही इस बात का प्रतीक है कि यह संत भारत की न्याय व्यवस्था को चुनौती देने और अपना दबदबा बनाए रखने के लिए इस तरह का नाटक करते हैं। लेकिन उनके इस नाटक के कारण कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ रही है। हरियाणा और पंजाब के आस-पास आश्रमों की बहुतायत है। भोले-भाले ग्रामीणों को अपने जाल में फंसाकर बाबाओं ने बहुत लूटा है और लूट के इस धन से अब कानून-व्यवस्था के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। ठीक से पड़ताल हो तो रामपाल जैसे कई ढोंगी संत बेनकाब हो सकते हैं।
जालंधर में भी संत आशुतोष महाराज की समाधि और मौत के पीछे उत्तराधिकार तथा वर्चस्व की रहस्यमय पहेली सामने आ रही है। महाराज की मृत देह का अंतिम संंस्कार न करना किसी बड़ी साजिश का हिस्सा हो सकता है। भक्तों के एक वर्ग ने यह भ्रम फैलाने की कोशिश की है कि आशुतोष महाराज मरे नहीं हैं। ये लोग अपने निजी स्वार्थों के चलते आशुतोष महाराज का अंतिम संस्कार नहीं होने दे रहे हैं। गोपनीय सूत्रों से पता चला है कि संत की मृत्यु को झुठलाने के पीछे उन भक्तों की साजिश है जो संत की दौलत पर आंख लगाए बैठे हैं। इन लोगों की योजना है कि यदि सरकार जबरदस्ती करेगी तो ये भी सतलोक आश्रम की तरह हंगामा करेंगे।
स्थिति बिगडऩे पर दौलत की लूटमार भी मच सकती है। सरकार को इस दिशा में फंूक-फंूक कर कदम रखना होगा। उधर रामपाल के आश्रम से बरामद राशन, पानी, घी इत्यादि की नीलामी से 52 लाख की आमदनी हुई है।
इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि बाबा रामपाल ने लंबी लड़ाई के लिए असलहा के साथ-साथ राशन-पानी भी जुटा रखा था।
दरअसल इन बाबाओं की अध्यात्म की दुकान राजनीतिज्ञों के प्रश्रय के कारण फलती-फूलती है। आसाराम बापू के अनुयायी करोड़ों की तादात में थे, इसलिए उनके दरबार में मत्था टेकने वाले बड़े-बड़े रसूखदार नेता थे। यू-ट्यूब पर एक वीडियो में आसाराम बापू पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को थिरकाने की कोशिश कर रहे हैं। कांगे्रस के भी कई आला नेता आसाराम की दहलीज पर मत्था टेकते थे, बाद में कांगे्रस से उनके संबंध बिगड़ गए।
पिछले दिनों में कई ढोंगी बाबाओं का पर्दाफाश हुआ है। हालांकि ऐसा पहली बार नहीं हुआ। इंदिरा गांधी के समय भी कुछ बाबाओं को बेनकाब किया गया था। नरसिम्हा राव के समय तांत्रिक चंद्रास्वामी पर हवाला कांड में आरोप लगे। ज्यादातर बाबाओं और ऐसी आध्यात्मिक हस्तियों को राजनीतिज्ञों का साथ मिल ही जाता है, इसी कारण ये लोग मनमानी करते हैं। अब सोशल मीडिया पर एक अभियान चलाया जा रहा है जिसमें बताया गया है कि किस तरह हिंदुओं के बाबाओं, साधुओं और आध्यात्मिक गुरुओं को ही गिरफ्तार किया गया, मुस्लिमों या अन्य धर्मों की आध्यात्मिक हस्तियों पर हाथ नहीं डाला गया। ध्रुवीकरण का यह एक खतरनाक अभियान है। सच तो यह है कि आध्यात्म की दुकानें बाकी सभी धर्मों में भी खुल गई हैं, लेकिन हिंदुओं की संख्या अधिक होने और हिंदुओं का रुझान बाबाओं-आध्यात्मिक गुरुओं की तरफ ज्यादा होने के कारण हिंदुओं के इन कथित गुरुओं का आर्थिक साम्राज्य हजारों करोड़ रुपए का है। जो आध्यात्मि विभूतियां सच्चे मन से मानवता की सेवा कर रही हैं और बिना किसी लाभ की आशा में जनकल्याण में जुटी हुई हैं, उन आध्यात्मिक विभूतियों को छोड़ दिया जाए तो ज्यादातर कथित बाबा और आध्यात्म के व्यापारी अपनी दुकान ही मजबूत कर रहे हैं और इन लोगों ने उन महान आत्माओं को भी बदनाम करवा दिया है जो सच्चे मन से मानवता की सेवा कर रही हैं।
गेहूं के साथ घुन भी पिसता है। इन कथित बाबाओं के कुकृत्यों के कारण जनमानस में साधु-संतों के प्रति आस्था डगमगाई है और उधर राजनीतिज्ञों ने अपने स्वार्थ के लिए बाबाओं की शरणागति लेकर विकृति को और बढ़ा दिया है। डेरा सच्चा सौदा के बाबा गुरमीत रामरहीम के आशीर्वाद के चलते हरियाणा विधानसभा चुनाव में एक दल विशेष को फायदा हुआ, यह बात हरियाणा के बड़े नेता अभय चौटाला
ने ही कही थी। डेरा सच्चा सौदा के 5 करोड़ समर्थक हैं और 60 लाख से ज्यादा मतदाता पंजाब तथा हरियाणा में ही हैं। पंजाब की 117 विधानसभा सीटों में से 65 सीटों पर डेरा समर्थकों की हार या जीत में महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। यहां तक की नरेंद्र मोदी भी डेरा सच्चा सौदा की प्रशंसा कर चुके हैं। खुद बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और केंद्रीय मंत्री सुषमा स्वराज ने बाबा रामरहीम से मुलाकात की, जिसके बाद पहली बार डेरा सच्चा सौदा ने हरियाणा और महाराष्ट्र में भाजपा को समर्थन देने का ऐलान किया। नतीजा सामने है। प्रश्न यह है कि जिस राजनीतिक दल ने चुनाव के समय डेरा सच्चा सौदा की दहलीज पर मत्था टेका हो, वह उनसे विरोध मोल लेगा? जहां तक कोर्ट के नोटिस का प्रश्न है, वर्तमान में उसे शायद ही अमल में लाया जा सके। क्योंकि डेरा सच्चा सौदा राजनीतिक रूप से बहुत ताकतवर हो चुका है। बाबा रामरहीम के खिलाफ 12 साल पुराने मामले हैं। वर्ष 2002 में उन पर अपने आश्रम की साध्वियों से बलात्कार के आरोप लगे थे। रामरहीम कथित रूप से सिरसा के पत्रकार रामचंद्र छत्रपति और डेरा के पूर्व मैनेजर रणजीत सिंह की हत्या के आरोपी भी बताए जाते हैं, जिसकी जांच सीबीआई कर रही है। हरियाणा सिरसा में डेरा सच्चा सौदा का आश्रम 65 सालों से है। बाबा गुरुमीत राम रहीम सिंह इस डेरे के तीसरे गुरु हैं। डेरा सच्चा सौदा का साम्राज्य आज विदेश तक फैल चुका है।
देश में डेरा के करीब 46 आश्रम हैं और उसकी शाखाएं अमेरिका, कनाडा और इंग्लंैड से लेकर ऑस्ट्रेलिया और यूएई तक फैली हुई हैं। डेरा सच्चा सौदा का दावा है कि दुनिया भर में उसके करीब पांच करोड़ मानने वाले हैं, जिनमें से 25 लाख अनुयायी अकेले हरियाणा में ही मौजूद हैं। आम तौर पर डेरा के आश्रम 10 से 40 एकड़ के एरिये में बने होते हैं, लेकिन सिरसा में डेरा का मुख्यालय एक छोटे शहर की तरह है। दो किलोमीटर के दायरे में फैले डेरा के इस हेडक्वॉर्टर में दुकानों और रिहायशी इमारतों के अलावा अस्पताल और सामान बनाने की फैक्ट्रियां भी मौजूद हैं। डेरा में बाबा रामरहीम खेती-किसानी में भी अपने हाथ आजमाते हैं। 65 साल के अपने सफर में डेरा सच्चा सौदा ने तीन गुरुओं का दौर देखा है।
क्या ये मामले खुलेंगे
बाबा राम रहीम उस वक्त मुश्किलों में घिर ग
ए थे जब उनके डेरे की एक साध्वी ने प्रधानमंत्री कार्यालय को चि_ी लिख कर बाबा की शिकायत की थी। साध्वी ने अपने हलफनामें में खुद और आश्रम की दूसरी साध्वियों के साथ यौन शोषण का आरोप लगाया था और फिर इस मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल की गई थी। अदालत के आदेश पर साल 2001 में इस पूरे मामले की जांच का जिम्मा सीबीआई को सौंप दिया गया था। इसी दौरान सिरसा के एक पत्रकार रामचंद्र छत्रपति ने साध्वी बलात्कार मामले का ब्यौरा जब अपने अखबार पूरा सच में छापा तो नवंबर 2002 में उनकी गोली मार कर हत्या कर दी गई। बाबा राम रहीम पर ये भी आरोप था कि उन्होंने डेरे के पूर्व प्रबंधन रंजीत सिंह की भी हत्या करवाई है, क्योंकि वह डेरे के कई राज जान चुका था। रंजीत सिंह की 10 जुलाई 2003 को हत्या कर दी गई थी और तब इन दोनों हत्याओं में डेरा सच्चा सौदा का नाम सामने आया था। पत्राकर रामचंद्र छत्रपति के बेटे अशुंल छत्रपति अपने पिता की ये कहानी बताते हैं कि रामचंद्र छत्रपति के बेटे अंशुल छत्रपति ने कहा कि 2000 में उन्होने पूरा सच नाम से दैनिक अखबार शुरु किया। नाम के अनुरुप उन्होने अखबार में पूरा सच छापा। 2002 में उन्होंने डेरा सच्चा सौदा के खिलाफ, डेरा की साध्वियों द्वारा एक गुमनाम पत्र में जो आरोप लगाए गए थे उसके आधार पर एक न्यूज लगाई, जिसमे उन्होंने डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत सिंह पर जो रेप के आरोप थे उसका खुलासा किया, उसके बाद लगातार डेरा सच्चा सौदा की तरफ से उन्हें जान से मारने की धमकी आने लगी और 24 अक्टूबर 2002 को डेरा के दंबगो ने उन पर अटैक किया और उन्हें गोलियां मारी गईं और 21 नवम्बर 2002 को 28 दिन जिन्दगी और मौत से जुझते हुए उन्होंने दम तोड़ दिया। साध्वी बलात्कार केस में सीबीआई ने 28 लोगों की गवाही ली थी। 2007 में सीबीआई ने हाईकोर्ट में हत्या और बलात्कार के मामलों में अपनी रिपोर्ट भी पेश कर दी थी। जिसके बाद साल 2008 में अंबाला में सीबीआई की विशेष अदालत में आईपीसी की धारा 376 और 506 के तहत बाबा के खिलाफ आरोप तय कर दिए गए थे। सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में कहा था कि बाबा राम रहीम ने साध्वियों से ना सिर्फ बलात्कार किया बल्कि उन्हें डराया-धमकाया भी था, कत्ल के आरोप में डेरा सच्चा सौदा के कर्मचारियों समेत नौ लोगों के खिलाफ भी चार्जशीट दाखिल की गई थी।
