इतनी उत्सुकता क्यों?
20-Dec-2014 06:21 AM 1238650


ओबामा का गणतंत्र दिवस समारोह में आना सामान्य सी घटना है, इसे मोदी की कामयाबी या असफलता से जोडऩे की जरूरत नहीं थी। अमेरिका एशिया में मजबूत सहयोगियों को तलाश रहा है। जापान और भारत पर उसकी नजर है। जापान से उसके रिश्ते मजबूत हैं लेकिन भारत पर उसका विश्वास पूरी तरह जमा नहीं है, यही कारण है कि जब ओबामा ने भारत आने की योजना बनाई तो साथ ही पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को भी फोन किया जिसकी आवश्यकता नहीं थी।

  • देवेश बंसल, पिपरिया

लापरवाहियां बढ़ती रहेंगी

छत्तीसगढ़ में जिन बेकसूर महिलाओं को अपनी जान गंवानी पड़ी उनका दर्द बांटने वाला कोई नहीं है। सरकार ने जांच के आदेश दे दिए हैं और आज तक इस देश में कोई भी सरकारी जांच निष्पक्ष तरीके से पूरी नहीं हो सकी। इसलिए इस सामूहिक संहार प्रकरण को भी सरकारी फाइलों में दबा दिया जाएगा। जनता की स्मृति भी देर-सवेर कमजोर पड़ जाएगी लेकिन लापरवाहियां फिर भी नहीं रुकेंगीं। असली चिंता का विषय तो यही है।

  • सुमन एक्का, रायपुर

कानून बने

जिस तरह राजनेताओं, अधिकारियों आदि के लिए प्रति वर्ष अपनी संपत्ति की सार्वजनिक घोषणा करना और उसका स्रोत बताना अनिवार्य है, उसी तरह इन कथित बाबाओं, आध्यात्मिक गुरुओं की आमदनी का जरिया भी पूछा जाना चाहिए। इनको मिलने वाले धन पर नजर रखी जानी चाहिए। एक बार धन मिलने के बाद यह लोग किस तरह निरंकुश और कानून के दुश्मन बन जाते हैं, किसी से छुपा नहीं है। इन बाबाओंं पर लगाम लगाना जरूरी है।

  • अस्तित्व शुक्ला, भोपाल

बीसीसीआई नाकाम

बीसीसीआई क्रिकेट में भ्रष्टाचार रोकने में नाकाम रही है। इसलिए इस संस्था को भंग करते हुए हाकी फेडरेशन की तर्ज पर नई संस्था का गठन किया जाना चाहिए जिसका नियंत्रण सरकार के हाथ में हो। कम से कम प्रशासनिक स्तर पर सरकार का दखल जरूरी है। अभी बीसीसीआई किसी निरंकुश संस्था की तरह काम कर रही है। सुप्रीम कोर्ट ने बीसीसीआई की कार्यशैली पर गंभीर टिप्पणी की है। यदि अभी भी आंख नहीं खुली तो भारत में क्रिकेट खत्म हो सकता है।

  • लोकेश विराट, दिल्ली

पाक को लगाम नहीं

नरेंद्र मोदी भले ही दुनिया में घूम-घूम कर बड़ी भारी मीडिया हाइप पैदा करने में कामयाब हो गए हों किंतु सच तो यह है कि मोदी की सफलता तभी संभव है जब विदेश नीति में पाकिस्तान को लेकर दुनिया का नजरिया बदले। आज रूस, चीन जैसे देश पाकिस्तान के निकट आ रहे हैं, यह शुभ संकेत नहीं है। कश्मीर पर भी पाकिस्तान लगातार भारतीय हितों को नुकसान पहुुंचाने की कोशिश कर रहा है। इन सब बातों का दूरगामी परिणाम निकलेगा। मोदी को विदेश नीति पर और मेहनत करनी पड़ेगी।

  • अमरिंदर सिंह, दिल्ली

महा घाघ है मांझी

जीतनराम मांझी बिहार में नीतिश कुमार का सफाया करने में जुट गए हैं। वे नीतिश की छत्रछाया में ही रहकर नीतिश की जड़ों को दीमक की तरह चट कर रहे हैं। मौके की नजाकत को देख मांझी भविष्य मेंं भाजपा से भी जुड़ सकते हैं। सुनने में यह अजीब लगे लेकिन मांझी मौका परस्त हैं। चुनाव के समय उन्हें कोई अच्छा प्रस्ताव मिला तो वे पाला अवश्य बदल डालेंगे।

  • मुकुल सिन्हा, इंदौर

शहरों की स्थिति दयनीय

भारतीय जनता पार्टी ने स्थानीय निकाय के चुनाव बेजोड़ प्रदर्शन करते हुए जीत लिए हों किंतु मध्यप्रदेश के शहरों के हालात दयनीय हैं। धूल-धूसरित और कीचड़-कवलित इन शहरों को जीतकर भाजपा भले ही प्रसन्न हो ले, लेकिन यहां हालात दयनीय हैं। मध्यप्रदेश गंदे शहरों का प्रदेश है। सारे प्रदेश में शहरों की अधोसंरचना अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप नहीं है। कचरे के ढेर सफाई अभियान के बाद अब कुछ ज्यादा ही दिखाई देते हैं। जिनके कंधों पर स्वच्छता की जिम्मेदारी है, उनकेआचरण में लापरवाही पहले की अपेक्षा अधिक बढ़ गई है। राजधानी भोपाल की अधिसंख्यक कॉलोनियां दयनीय और जर्जर हैं। ऐसी स्थिति में चुनावी जीत से ज्यादा भाजपा को इस जीत को अर्थवत्ता प्रदान करने के लिए काम करना चाहिए और अपने घोषणा-पत्र को सही मायने में लागू कर दिखाना चाहिए।

  • विशेष ताम्रकार, इंदौर

अभी खुमार उतरा नहीं

राजस्थान की जनता मेें भाजपा का खुमार बाकी है। विधानसभा और लोकसभा में पराजय के बावजूद कांग्रेस ने संगठन की मरम्मत नहीं की, इसी कारण स्थानीय निकाय के चुनाव में वह बुरी तरह पिट गई। भाजपा का खुमार जनता के जेहन में बाकी है, इसी कारण अगले एक-दो वर्ष कांग्रेस को कोई बड़ी सफलता नहीं मिलेगी। कांग्रेस उपचुनाव के नतीजों से उत्साहित थी। यही गलतफहमी उसके लिए भारी पड़ गई।

  • मनप्रीत राजावत, जयपुर

 

 

 

 

 

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