निरर्थक कवायद
05-Dec-2014 09:50 AM 1234884

भूमि अधिग्रहण कानून बदलने से बेहतर है कि जिन इकाइयों ने जमीनें अधिग्रहीत कर ली हैं, उन इकाइयों से यह पूछा जाए कि उन्होंने इन जमीनों का क्या किया? यदि किसी कंपनी ने सस्ती सरकारी जमीन लेकर लैंड बैंक बनाया है, तो यह अक्ष्मय अपराध ही कहलाएगा। ऐसी इकाइयों से जमीनें वापस ले लेना चाहिए।

  • सुमित राजपूत, खंडवा

 

जनता हो जागरूक

डेंगू का फैलाव प्रशासन नहीं जनता की देन है। पानी के स्टोरेज को लेकर हम सभी लापरवाह हैं। पानी का भंडारण तो कर लेते हंै लेकिन उस रखे हुए पानी को डेंगू मच्छर के लार्वा से मुक्त रखने की तरकीब सभी को नहीं आती। इसी कारण डेंगू डेंजरस होता जा रहा है। घर के आस-पास ही नहीं छत पर भी और अन्य जगह जहां पानी का जमाव हो सकता है या पानी एकत्र किया जा रहा है, वहां डेंगू से बचने के लिए हर तरकीब अपनाई जानी चाहिए। चाहे वह कीटनाशकों का छिड़काव हो या फिर जल में खाद्य तेल डालना।

  • भूपेन्द्र यादव, भोपाल

अब काम करें

मोदी सरकार ने अभी तक यूपीए के काम को ही आगे बढ़ाया है और पिछली सरकार द्वारा उठाए गए अच्छे कदमों का सुयश भोग रही है। इस सरकार के खाते मेंं तो कोई उपलब्धि नहीं है। काम में तेजी अवश्य आई है लेकिन जो वादे चुनाव के समय किए गए थे और उनके लिए समय सीमा भी दी गई थी, उन वादों को पूरा करने का अब सही अवसर है।

  • महेंद्र शर्मा, पटना

इंसान नहीं समझा जाता

बिलासपुर में जिस तरह एक जर्जर पड़ी इमारत में महिलाओं को नीचे पटक कर उनकी नसबंदी की गई, वह लापरवाही का निकृष्ट उदाहरण है। इस देश में गरीब की जान की कोई कीमत नहीं है। जमीन पर पटक कर उसकी नसबंदी की जा सकती है, कीटनाशक मिली हुई दवाई दी जा सकती है और यदि इतने से भी दिल न भरे तो उसे अस्पताल से बीमारी की हालत में ही भगाया जा सकता है। दुख तो इस बात का है कि यह सारी अनियमितताएं सरकारी अस्पतालों में ही होती हैं, जो मुफ्त स्वास्थ्य देने का वादा करते हैं।

  • रत्नेश टोप्पो, रायपुर

 

अनिश्चितता खत्म हो

दिल्ली में चुनाव होंगे यह एक अच्छी खबर है, लेकिन इसके साथ ही सवाल भी पैदा होता है कि क्यों इतने समय तक चुनाव रोका गया? भाजपा भयभीत क्यों थी? उसका वह आत्मविश्वास कहां गया, जो लोकसभा चुनाव के समय था? अब भाजपा के समक्ष नेतृत्व का संकट है। दिल्ली में सीएम पद के लिए कई दावेदार हैं, जिनके बीच घमासान मच सकता है।

  • भावना पटेल, दिल्ली

सांप्रदायिकता सुलगती रहेगी

यूपी में साम्प्रदायिकता की आग सुलग रही है। भाजपा भले ही विकास की बातें करे, लेकिन भाजपा और समाजवादी पार्टी दोनों का भविष्य साम्प्रदायिक तनाव की भट्टी पर ही तय होगा। दोनों दल अपने-अपने वोट बैंक को साधने के लिए माहौल बिगाड़े रखना चाहते हंै।

  • प्रवेश निगम, लखनऊ

बीसीसीआई भंग हो

आईसीसी के चैयरमेन जैसे पद पर विराजमान एन श्रीनिवासन का स्पॉट फिक्सिंग मामले में चुप बने रहना अक्ष्मय अपराध ही कहा जाएगा। वे भले ही इसमें सीधे तौर पर शामिल नहीं थे लेकिन सब कुछ जानते-बूझते उन्होंने कोई अनुशासनात्मक कदम नहीं उठाया, यह उनका भ्रष्ट आचरण ही कहा जा सकता है। क्रिकेट की दुनिया में ऐसे भ्रष्टों की कमी नहीं है। जब से एक दिवसीय और 20-20 क्रिकेट का जन्म हुआ है, क्रिकेट में फिक्सिंग का नासूर देखा जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट के रुख के बाद सरकार को चाहिए कि वह बीसीसीआई भंग करते हुए, क्रिकेट की कमान अपने हाथ में ले।

स्वच्छता स्वभाव है

शौचालय बनाना एक अलग विषय है, लेकिन घर में शौचालय का उपयोग करना ज्यादा बड़ी चुनौती है। ग्रामीण क्षेत्रों में बाहर शौच जाने का चलन मध्यम वर्गीय परिवारों में भी देखा जा सकता है। शहर में लोग मजबूरी के कारण खुले में शौच करते हैं, लेकिन गांव में शौचालय का उपयोग ही नहीं किया जाता। शौचालय के निर्माण से अधिक आवश्यकता उसके उपयोग के प्रति लोगों को जागरूक करने की है। स्वच्छता सिखाई नहीं जा सकती, स्वच्छता अपनाने के लिए तो व्यक्ति को स्वयं प्रेरित होना चाहिए।

  • प्रेरणा दुबे, भोपाल
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