03-Sep-2020 12:00 AM
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सु शांत सिंह राजपूत केस में सीबीआई जांच का रास्ता खोलकर नीतीश कुमार ने तेजस्वी यादव से मुद्दा झटक लिया है, फिर एक के बाद एक लगातार झटके देते जा रहे हैं। चंद्रिका राय को जेडीयू में लाकर नीतीश कुमार ने लालू यादव को जो झटका दिया है उससे उबर पाना तेजस्वी यादव के लिए अकेले काफी मुश्किल होने वाला है। तेजस्वी यादव के लिए जीतनराम मांझी का महागठबंधन छोड़कर जाना कोई अच्छी बात तो नहीं है, लेकिन चंद्रिका राय का जेडीयू ज्वाइन कर लेना बहुत बड़ा नुकसान है, और वो इसलिए भी क्योंकि वो तेजस्वी यादव की चुनावी घेरेबंदी में मुख्य भूमिका निभाने की ओर बढ़ते नजर आ रहे हैं।
लालू प्रसाद की गैरहाजिरी में नीतीश कुमार न सिर्फ आरजेडी को खोखला करते जा रहे हैं, बल्कि तेजस्वी यादव को चारों तरफ से घेरते जा रहे हैं और तेजस्वी को लेकर कहते हैं जिसके पास कोई काम नहीं होता वो ट्वीट करता है। लालू परिवार के लिए धीरे-धीरे नीतीश कुमार हद से ज्यादा खतरनाक होते जा रहे हैं और ऐसा भी नहीं है कि तेजस्वी यादव ऐसी बातों से बेखबर हैं, लेकिन नीतीश कुमार के सामने उनका वैसा ही हाल हो रहा है जैसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने कांग्रेस नेता राहुल गांधी का। वैसे भी दोनों एक ही तरीके की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने के लिए जूझ रहे हैं।
जंग कोई भी हो, किसी करीबी के विरोधी के पाले में चले जाने से ज्यादा खतरनाक कुछ और नहीं होता। बिहार चुनाव के ऐन पहले लालू प्रसाद के समधी चंद्रिका राय का नीतीश कुमार को नेता मान लेना बिलकुल वैसा ही है। साथ ही, चंद्रिका राय का बेटी ऐश्वर्या के चुनावी इरादे की तरफ इशारा करना इसे और भी खतरनाक बना रहा है। अव्वल तो चंद्रिका राय ने सीधे-सीधे ऐसी कोई बात नहीं कही है कि उनकी बेटी ऐश्वर्या चुनाव लड़ने ही जा रही हैं, लेकिन सवालों के जवाब में जो संकेत दिया है उससे तो ये अंदाजा लगाना भी मुश्किल नहीं हो रहा है कि उनकी विधानसभा सीट कौन सी होगी?
लालू यादव और चंद्रिका राय के बीच बदले की लड़ाई तो उसी दिन शुरू हो गई थी जिस दिन ऐश्वर्या ससुराल छोड़कर मायके शिफ्ट हो गईं। ऐश्वर्या का लालू प्रसाद के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव के साथ तलाक का मुकदमा चल रहा है। चंद्रिका राय ने लालू परिवार के राजनीतिक विरोधी नीतीश कुमार से हाथ मिलाकर एक तरीके से बदले का राजनीतिक ऐलान कर दिया है। चंद्रिका राय से पहले तेजस्वी यादव ने ही दबाव की राजनीति शुरू की थी और ये उसी का प्रतिक्रियात्मक जवाब है। तेजस्वी यादव ने चंद्रिका राय को चुनौती देने के लिए उनके ही परिवार की डॉक्टर करिश्मा राय को हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने का संकेत दिया था। चंद्रिका राय के बड़े भाई विधानचंद राय की बेटी करिश्मा राय पहले ही आरजेडी ज्वाइन कर चुकी हैं और माना जाता है कि वो आने वाले चुनाव में चंद्रिका राय को चैलेंज कर सकती हैं। करिश्मा का अपने इलाके के लोगों से लगातार मिलना-जुलना चुनाव की तैयारियों से जोड़कर ही देखा जा रहा है। चंद्रिका राय की नई राजनीतिक राह को तेजस्वी के इस कदम का काउंटर भी माना जा सकता है।
करिश्मा राय की ही तरह तेजस्वी यादव श्याम रजक की आरजेडी में वापसी कराकर भी इतरा रहे होंगे, लेकिन मालूम होना चाहिए कि नीतीश कुमार ने हाल फिलहाल आरजेडी के जिन छह विधायकों को हथिया लिया है उनमें दो यादव हैं और एक मुस्लिम, यानी नीतीश कुमार अब लालू प्रसाद के सबसे कारगर और कामयाब चुनावी नुस्खे माय फैक्टर पर भी हाथ डाल दिया है। मालूम नहीं तेजस्वी यादव अपने खिलाफ ऐसी राजनीतिक चालों से वाकिफ हैं भी या नहीं?
चंद्रिका राय ने पूछे गए सवाल का सीधा जवाब तो नहीं दिया लेकिन नया सवाल पूछकर तस्वीर जरूर साफ कर दी। चंद्रिका राय ने पूछा कि दोनों भाई कहां से चुनाव लड़ेंगे, ये जानकारी हो तो बता दीजिए। फिर बोले, सुना है दोनों भाई सुरक्षित सीट तलाश रहे हैं। तेजस्वी यादव फिलहाल बिहार की राघोपुर विधानसभा से और तेजप्रताप यादव महुआ सीट से विधायक हैं। चंद्रिका राय के इस सवालिया जवाब के बाद कयास तो यही लगाए जा रहे हैं कि ऐश्वर्या राय चुनाव में महुआ विधानसभा सीट पर तेजप्रताप यादव को चैलेंज कर सकती हैं। बताते हैं कि तेजस्वी यादव को भी अब तक ऐसा ही लग रहा है और वो चाहते भी यही हैं। आरजेडी सूत्रों के हवाले से मिली खबर के मुताबिक तेजप्रताप अगले विधानसभा का चुनाव लड़ने से कहीं ज्यादा एमएलसी बनने या राज्यसभा जाने में दिलचस्पी दिखा रहे थे, लेकिन तेजस्वी ने उनको मना लिया और रणनीति यही है कि अगर जेडीयू की तरफ से ऐश्वर्या को चुनावी मैदान में उतारा जाता है तो तेजप्रताप बाकायदा मुकाबला भी करें।
चार कदम आगे की सोचते हैं सुशासन बाबू
नीतीश कुमार को बिहार की राजनीति का चाणक्य यूं ही तो नहीं कहा जाता है। अगर तेजस्वी यादव, नीतीश कुमार की संभावित राजनीतिक चालों का अंदाजा लगाते हुए रणनीति तैयार कर सकते हैं तो जेडीयू नेता तो चार कदम आगे ही सोचेंगे। यही वजह है कि ऐश्वर्या के लिए विधानसभा चुनाव जीतने से बड़े रोल वाली स्क्रिप्ट लिखी जा चुकी है। दरअसल, नीतीश कुमार की कोशिश इस बार चुनाव जीतकर मुख्यमंत्री बनना भर नहीं है, बल्कि ज्यादा से ज्यादा सीटें हासिल करना है। अगर नीतीश कुमार ऐसा कर पाते हैं तो भाजपा पर दबदबा कायम रखने में सफल रहेंगे। भाजपा भी नीतीश कुमार को एनडीए का नेता घोषित करने के साथ-साथ उनकी जीत पक्की करना इसलिए भी चाहती है ताकि बिहार के राजनीतिक पटल पर आरजेडी का हाल भी वैसा ही हो जाए जैसा राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस का है।
- विनोद बक्सरी