01-Sep-2022 12:00 AM
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देश की सत्ता में लगातार तीसरी बार काबिज होने को बेताब भाजपा ने अभी से मिशन-2024 की तैयारी शुरू कर दी है। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने पार्टी संसदीय बोर्ड और केंद्रीय चुनावी समिति की घोषणा कर दी है। पार्टी की सबसे पावरफुल माने जानी वाली दोनों ही समितियों से कुछ बड़े चेहरों की छुट्टी कर दी गई है तो कुछ नए नेताओं की जगह दी है। शिवराज सिंह चौहान और नितिन गडकरी को हटाकर भाजपा ने सिर्फ खाली पदों को नहीं भरा है बल्कि उससे आगे बढ़कर काम किया है। इस तरह भाजपा ने नई टीम से पांच बड़े सियासी संदेश देने की कोशिश की है?
भाजपा ने पार्टी संसदीय बोर्ड का ऐलान किया और साथ ही नई केंद्रीय चुनाव समिति का भी गठन किया है। पार्टी की यह दोनों ही कमेटियां सबसे अहम मानी जाती हैं। भाजपा के संसदीय बोर्ड में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जेपी नड्डा, राजनाथ सिंह, अमित शाह, बीएस येदियुरप्पा, सर्बानंद सोनोवाल, के लक्ष्मण, इकबाल सिंह लालपुरा, सुधा यादव, सत्यनारायण जटिया और बीएल संतोष को जगह मिली है। वहीं, भाजपा केंद्रीय चुनाव समिति का भी ऐलान किया गया है, जिसमें संसदीय बोर्ड के सदस्यों के अलावा भूपेंद्र यादव, देवेंद्र फडणवीस, ओम माथुर, वनथी श्रीनिवास को भी जगह मिली है। इस तरह केंद्रीय चुनाव समिति से शाहनवाज हुसैन, जोएल ओराम को भी नई समिति में जगह नहीं मिली है जबकि संसदीय बोर्ड से नितिन गडकरी और शिवराज सिंह की छुट्टी कर दी है।
भाजपा ने अपने संसदीय बोर्ड और केंद्रीय चुनाव समिति में फेरबदल कर 2024 के चुनाव के लिए सियासी बिसात बिछा दी है। भाजपा शीर्ष नेतृत्व ने सुषमा स्वराज, अरुण जेटली के निधन, एम वेंकैया नायडू के उपराष्ट्रपति और थावरचंद गहलोत को राज्यपाल बनाए जाने से खाली पड़े पदों को सिर्फ नहीं भरा है बल्कि 2024 के चुनाव को देखते हुए उससे आगे बढ़कर काम किया है। दोनों ही समिति में ऐसे नेताओं को जगह दी गई है, जिनके जरिए सियासी संदेश देने के साथ-साथ सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन भी बनाने की कोशिश की गई है। भाजपा में संगठन के लिहाज से दोनों ही पावरफुल कमेटियां मानी जाती हैं, जो संगठन ही नहीं बल्कि भाजपा के चुनाव और सत्ता में आने पर मंत्रिमंडल के गठन में अहम भूमिका होती है। भाजपा में 8 साल के बाद और 2024 के लोकसभा चुनाव से ठीक डेढ़ साल पहले दोनों कमेटियों का गठन किया गया है ताकि समय रहते रणनीति बनाई जा सके और जमीनी स्तर पर भी संदेश दिया जा सके।
भाजपा ने संसदीय बोर्ड और चुनाव समिति के जरिए अपने सियासी आधार को मजबूत करने का दांव चला है। 2014 के बाद से भाजपा का पूरा फोकस उच्च जातियों के साथ-साथ ओबीसी और दलित मतदाताओं पर है। भाजपा अपने ओबीसी वोटबैंक को और भी मजबूत करने के लिए संसदीय बोर्ड में तीन नेताओं को जगह दी है। संसदीय बोर्ड में प्रधानमंत्री मोदी, ओबीसी मोर्चा के अध्यक्ष के लक्ष्मण, भाजपा ओबीसी मोर्चा की पूर्व प्रभारी सुधा यादव को शामिल किया गया है। पार्टी की चुनाव समिति में भूपेंद्र यादव को रखा गया है। भाजपा ने अपनी हाई प्रोफाइल कमेटियों में दो यादव समुदाय के नेताओं को एंट्री देकर साफ संकेत दिए हैं कि उसकी नजर हरियाणा और राजस्थान के यादव समुदाय को नहीं बल्कि उप्र की सपा और बिहार की आरजेडी के कोर वोटबैंक को अपने पाले में लाने की रणनीति है। ओबीसी में सबसे बड़ी आबादी यादव समाज की है, जिन्हें भाजपा अपने साथ जोड़ने की कवायद कर रही है। इसी मद्देनजर यादव को जगह दी गई है तो साथ ही ओबीसी मोर्चा के अध्यक्ष के लक्ष्मण को जगह दी गई, जो तेलंगाना से आते हैं और उप्र से राज्यसभा सदस्य हैं।
भाजपा ने अपनी दोनों कमेटियों में पूर्वोत्तर से लेकर पश्चिम और दक्षिण भारत तक साधने की कवायद की गई है। प्रधानमंत्री मोदी के सत्ता में आने के बाद से भाजपा का पूरा फोकस पूर्वोत्तर के राज्यों पर रहा है। यही वजह है कि भाजपा के संसदीय बोर्ड में असम के पूर्व मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल को जगह मिली है। वहीं, दक्षिण भारत से कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा, तेलंगाना से के लक्ष्मण और तमिलनाडु से वनथी श्रीनिवास को जगह मिली है। इसके अलावा पश्चिमी क्षेत्र से देखें तो महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को केंद्रीय चुनाव समिति में रखा गया है। गुजरात में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह खुद आते हैं। पूर्वोत्तर और हिंदी बेल्ट वाले राज्यों में मजबूती से अपने पैर जमाने के बाद भाजपा का फोकस अब नए इलाकों पर है। ऐसे में भाजपा की कोशिश दक्षिण भारत के राज्यों में अपने सियासी आधार को मजबूत करने की है। कर्नाटक में भाजपा का दबदबा कायम है तो आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और तमिलनाडु पर नजर है। भाजपा ने अपनी हाई प्रोफाइल कमेटियों में दक्षिण भारत के लोगों को जगह देकर एक बड़ा सियासी संदेश देने की कोशिश की है। इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी लगातार दक्षिण का दौरा कर रहे हैं।
आजमाया 8 साल पुराना फॉर्मूला
भाजपा ने अपनी संसदीय बोर्ड और चुनाव समिति गठन में 8 साल पुराने फॉर्मूले को आजमाया है। 2014 में अमित शाह भाजपा के अध्यक्ष बने थे तो उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी जैसे दिग्गज नेताओं को संसदीय बोर्ड से हटाकर मार्गदर्शक मंडल में रखा था। इसी तरह से दोनों ही कमेटियों से पार्टी ने अपने दिग्गज नेताओं को हटाकर नए चेहरों को भरोसा जताया है। भाजपा संसदीय बोर्ड में फेरबदल में शिवराज सिंह चौहान नितिन गडकरी को हटा दिया गया है। ऐसे ही केंद्रीय चुनाव समिति से शाहनवाज हुसैन और जोएल ओराम की छुट्टी हो गई है। इस बार भाजपा ने मार्गदर्शक मंडल समिति को लेकर कोई एलान नहीं किया है। नए चेहरे को तौर पर गडकरी की जगह देवेंद्र फडणवीस को लाया गया है तो थावरचंद गहलोत की जगह दलित चेहरे के तौर पर सत्यनारायण जटिया को जगह मिली है। इसके अलावा संसदीय बोर्ड में बीएस येदयुरप्पा, सर्बानंद सोनोवाल, के लक्ष्मण, इकबाल सिंह लालपुरा और सुधा यादव को पहली बार जगह मिली है। ऐसे ही चुनाव समिति में भूपेंद्र यादव, ओम माथुर और वनथी श्रीनिवास को शामिल किया गया है। इस तरह भाजपा ने पुराने चेहरों की जगह नए नेताओं को हाई प्रोफाइल कमेटी में जगह देकर बड़ा सियासी संदेश दिया है। भाजपा ने संसदीय बोर्ड और केंद्रीय समिति का गठन में चुनावी राज्यों का खास ध्यान रखा गया है। 2024 लोकसभा चुनाव के साथ या फिर उससे पहले होने वाले राज्यों के नेताओं को पार्टी ने तवज्जो दी है।
- धर्मेंद्र सिंह कथूरिया