01-Sep-2022 12:00 AM
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पंचायत और निकाय चुनाव निपटने के बाद मप्र में आगामी विधानसभा चुनाव के लिए चौसर बिछने लगी है। भाजपा और कांग्रेस की कोशिश है कि 2023 में उनकी सरकार बने। ऐसे में मिशन 2023 के मद्देनजर भाजपा और कांग्रेस में जमावट शुरू हो गई है। भाजपा में सत्ता और संगठन में बदलाव की तैयारी चल रही है, वहीं कांग्रेस भी संगठन में कसावट करने में जुटी हुई है। भाजपा की तरफ से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, तो कांग्रेस की तरफ से कमलनाथ मिशन 2023 की रणनीति पर काम कर रहे हैं।
मप्र में विधानसभा चुनाव के लिए अभी लगभग सवा साल का अरसा बाकी है। लेकिन प्रदेश में अभी से सत्ता का संग्राम छिड़ गया है। 2018 में विधानसभा हारने के बाद 2020 में सत्ता पलट के बाद सरकार बनाने में सफल हुई भाजपा की कोशिश है कि 2023 में 51 फीसदी वोट के साथ सरकार बनाए। वहीं 15 साल बाद सत्ता में आई कांग्रेस 15 माह बाद ही सत्ता से बेदखल होने के बाद 2023 में फिर से अपनी सरकार बनाने की कवायद में जुटी हुई है। इसके लिए दोनों पार्टियां संगठन को मजबूत करने के साथ ही सारे समीकरणों को साधने की जमावट कर रही हैं। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा के नेतृत्व में भाजपा कई रणनीतियों पर काम कर रही है। वहीं कांग्रेस की तरफ से कमलनाथ ने मोर्चा संभाल रखा है। चुनावी रणनीति के तहत दोनों पार्टियां अपने-अपने संगठन में बदलाव की तैयारी कर रही हैं। प्रदेश में भाजपा सरकार में भी कई बदलाव होने की संभावना दिख रही है।
भाजपा और कांग्रेस का फोकस इस बात पर है कि 2023 में उनकी सरकार बने। अभी हाल ही में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने भोपाल का दौरा कर 20 घंटे में 200 सीटों का खाका तैयार किया है। वहीं आगामी दिनों में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी भारत जोड़ो यात्रा के तहत मप्र भी आएंगे और आदिवासी बहुल क्षेत्रों में कांग्रेस के लिए जनाधार जुटाएंगे।
सत्ता-संगठन में होंगे बड़े बदलाव!
मप्र में कांग्रेस को सत्ता से हटाकर भाजपा जब से सत्ता में आई है सरकार और संगठन में शह-मात का खेल चल रहा है। इस कारण भाजपा में अस्थिरता की स्थिति बनी हुई है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के संसदीय बोर्ड से बाहर होने के बाद केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह भोपाल दौरे पर आए थे। मध्य क्षेत्रीय परिषद की बैठक में शामिल होने आए गृहमंत्री अमित शाह ने प्रदेश के टॉप लीडर्स के साथ वन टू वन मीटिंग की है। साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की खुलकर सराहना की है। शिवराज की तारीफ को लेकर प्रदेश में सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। इसके साथ ही सवाल यह भी है कि आखिर अमित शाह ने टॉप लीडर्स से वन टू वन मीटिंग क्यों की है।
शिवराज सिंह चौहान को हाल ही में भाजपा संसदीय बोर्ड से बाहर कर दिया गया है। उनकी जगह पर मप्र से दलित नेता सत्यनारायण जटिया को जगह मिली है। इसके बाद अटकलों का दौर शुरू हो गया है। इन अटकलों के बीच केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने शिवराज सिंह चौहान की तारीफ की है। उन्होंने कहा कि सिमी जैसे आतंकी संगठन को मप्र की धरती से शिवराज सिंह चौहान ने उखाड़ फेंका है। उन्होंने नक्सलवाद, माफिया के विरूद्ध कड़ी कार्रवाई करने में बिल्कुल भी कोताही नहीं बरती है। वहीं, लगातार दो डिजिट में कृषि के क्षेत्र में जीडीपी का होना चौहान के परिश्रम की पराकाष्ठा को दर्शाता है। केंद्रीय गृहमंत्री शाह ने मप्र सरकार के कार्यों की तारीफ करते हुए कहा है कि नक्सलवाद को समाप्त किया है। कानून-व्यवस्था में आमूल-चूल परिवर्तन लाने का कार्य शिवराज सरकार ने किया है। एक जमाने में मालवा सिमी का गढ़ था। सिमी को समूल उखाड़ फेंकने का कार्य किया है। वहीं, अपने भोपाल दौरे के दौरान गृहमंत्री अमित शाह ने प्रदेश भाजपा के टॉप लीडर्स के साथ वन टू वन मीटिंग की है। प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा के साथ लगभग आधे घंटे तक उन्होंने मीटिंग की है। संगठन मंत्री हितानंद शर्मा से भी अलग से बात की है।
क्या हैं इस मीटिंग के मायने
दरअसल, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के संसदीय बोर्ड से बाहर होने के बाद प्रदेश में कई तरह की अटकलें चल रही हैं। साथ ही यह भी चर्चा है कि 2023 में भाजपा किसी नए चेहरे पर दांव लगा सकती है। इस बीच गृहमंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री की जमकर तारीफ की है। इसके साथ ही उन्होंने अभी बदलाव के अटकलों पर विराम लगा दिया है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार उन्होंने सरकार और संगठन के कामकाज को लेकर फीडबैक लिया है। पहली बार अमित शाह भोपाल में 20 घंटे तक रुके हैं। गौरतलब है कि मप्र में आने वाले दिनों में संगठन में बदलाव की चर्चा जोरों पर है। इसके साथ ही निगम मंडलों में कुछ नियुक्तियां लटकी हैं, उसे लेकर भी चर्चाएं हुई हैं। निकाय चुनाव में हार के कारणों पर भी केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने पार्टी नेताओं से चर्चा की है।
आदिवासियों पर पूरा फोकस
भाजपा का आदिवासियों पर भी पूरा फोकस है। आदिवासी बहुल सीटों के लिए भाजपा हर कदम फूंक-फूंक कर रख रही है। ऐसे माना जा रहा है कि मंत्रिमंडल विस्तार में सुलोचना रावत को मौका दिया जा सकता है। क्योंकि वह आदिवासी बहुल जोबट सीट से उपचुनाव जीती हैं, जबकि यह सीट 2018 में कांग्रेस को मिली थी। इसके अलावा अन्य क्षेत्रीय और जातीय समीकरण साधने के प्रयास किए जाएंगे। शिवराज मंत्रिमंडल में अभी 4 पद खाली हैं। माना जा रहा है कि जल्द ही शिवराज कैबिनेट में दो से तीन मंत्रियों को और बढ़ाया जाएगा। वहीं चुनाव को ध्यान में रखते हुए किसी मंत्री को बाहर करने की संभावना फिलहाल नहीं है। इन सभी विषयों पर शाह से चर्चा हुई। पार्टी से जुड़े सूत्रों की मानें तो पिछले दिनों त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में पार्टी समर्थित उम्मीदवारों से जीत दर्ज कर जिस तरह से ग्राम पंचायतों से लेकर जनपद और जिला पंचायत के अध्यक्ष-उपाध्यक्ष जैसे पद हासिल किए है, उसे राजनीति के जानकार भाजपा के बढ़े जनाधार से जोड़ रहे है। शाह के सामने यह पूरा विश्लेषण किया गया।
माना जा रहा है निकाय चुनाव के बाद शाह नए तरीके से रणनीति बनवाएंगे। क्योंकि इन चुनावों के बाद भाजपा में फिर से समीक्षा का दौर शुरू हो गया है। पिछली बार सभी 16 नगर निगमों में क्लीन स्वीप करने वाली भाजपा को इस बार 9 नगर निगमों में ही मेयर के चुनाव में सफलता मिली है। जीत का शेयर उसका प्रदेश में भले ही ज्यादा हो पर जहां हारे वहां हार के कारणों की समीक्षा में संगठन के आला नेता जुट गए हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा किसी भी चुनाव में उतरने से पहले ही हर काम पर बारीक नजर रखती है। अमित शाह की नजर में भी 2018 में भाजपा के लिए आया यह गैप होगा। ऐसे में माना जा रहा है कि भाजपा अब इस गैप को भरने की कवायद में जुटी है। दरअसल, भाजपा में अमित शाह संगठन को चलाने में सबसे मजबूत माने जाते हैं, यही वजह है कि भाजपा ने उनके जरिए ही मप्र में फिर से 2013 का कमाल दोहराना चाहती है, क्योंकि अमित शाह इस मामले में माहिर है।
नेतृत्व को लेकर अनिश्चितता
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के मप्र दौरे के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। पार्टी के सूत्रों ने बताया कि ये मुख्यमंत्री की प्रधानमंत्री से नियमित मुलाकात थी। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह भोपाल के दौरे पर थे, जहां पर उन्होंने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कामों की तारीफ की। वहीं गृहमंत्री शाह ने संगठन और पार्टी के नेताओं के साथ बैठक भी की। इस दौरान अमित शाह ने संगठन को आने वाले चुनाव के लिए पूरी तरह से तैयार रहने के लिए कहा। गृहमंत्री अमित शाह ने मप्र दौरे पर आदिवासियों के एक कार्यक्रम को भी संबोधित किया। वहीं मप्र के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान इन दिनों काफी खुश नजर आ रहे हैं। राज्य में नेतृत्व को लेकर कुछ महीनों की अनिश्चितता और भ्रम के बाद हाल के घटनाक्रम से संकेत मिल रहा है कि भाजपा केंद्रीय नेतृत्व अपनी सरकार के काम करने के तरीके से काफी संतुष्ट है। भोपाल में अपने आधिकारिक दौरे के दौरान केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की प्रशंसा की और कहा कि जिस तरह से सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण को लागू कर रही है, वह काबिले तारीफ है। शिवराज सिंह चौहान ने दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात की। पार्टी सूत्रों ने बताया कि यह मुलाकात नियमित है। ऐसा लगता है कि नए घटनाक्रम ने शीर्ष पद के लिए शिवराज सिंह चौहान की जगह लेने के इच्छुक लोगों को निराश किया है। गृहमंत्री शाह ने भोपाल में रोड शो किया। इस दौरान उन्होंने महज 12 मिनट में अपना ढाई किलोमीटर लंबा रोड शो खत्म किया और फिर भाजपा कार्यालय पहुंच गए जहां उन्होंने संगठन के नेताओं के साथ बैठक की। करीब 2 घंटे तक अमित शाह ने संगठन के नेताओं के साथ बैठक की और सरकार के कामों पर प्रसन्नता व्यक्त की।
नरोत्तम-वीडी के चेहरे पर मुस्कान
शिवराज सिंह चौहान के संसदीय बोर्ड से बाहर किए जाने के बाद मप्र में अटकलों का दौर शुरू हो गया है। सियासी पंडित तरह-तरह के कयास लगा रहे हैं। इस बीच केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह भोपाल में 20 घंटे तक रुककर अलग ही संदेश दे गए हैं। भोपाल के रविंद्र भवन में आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने शिवराज का जमकर गुणगान किया है। इसके बाद सोशल मीडिया पर एक तस्वीर वायरल हो रही है। इस तस्वीर में केंद्रीय गृहमंत्री के सामने मप्र के तीन पॉवरफुल नेता एकसाथ खड़े हैं। इसमें प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा, प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा हैं। गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा और वीडी शर्मा तस्वीर में मुस्करा रहे हैं, वहीं मुख्यमंत्री कथित रूप से तस्वीर में मायूस दिख रहे हैं। शिवराज के बॉडी लैंग्वेज पर कांग्रेस ने मजे लिए हैं। कांग्रेस प्रवक्ता नरेंद्र सलूजा ने ट्वीट किया कि तस्वीर बहुत कुछ बयां कर रही है। मामाजी को छोड़ वीडी भाई, नरोत्तम मिश्रा बेहद खुश नजर आ रहे हैं। मामाजी के सर पर छतरी भी नहीं, लगता है सब मिलकर भिगोकर ही रहेंगे।
दरअसल हाल ही में भाजपा के संसदीय बोर्ड और चुनाव समिति से शिवराज को हटा दिया गया है। उनकी जगह 76 वर्षीय प्रदेश के सत्यनारायण जटिया को शामिल किया गया है। भाजपा के सबसे पॉवरफुल बोर्ड से शिवराज को हटाने के बाद तरह-तरह के कयास लग रहे हैं। इस 2023 के पहले मप्र की सियासत में बदलाव के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है। अब केंद्रीय गृहमंत्री के दौरे के बाद उनके प्रदेश के टॉप लीडर्स से वन टू वन चर्चा के बाद फिर कयासों का दौर शुरू हो गया है।
तीनों की तारीफ के क्या मायने
भोपाल में एक पुलिस के कार्यक्रम में उन्होंने गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की जमकर तारीफ की। वहीं, विधानसभा सभागार में कुशाभाऊ जन्मशताब्दी पर नई शिक्षा नीति सेमिनार में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा की तारीफ की। गृहमंत्री की तारीफ से तीनों को लेकर जारी कयासों पर कुछ दिन के लिए विराम लग गए हैं। मप्र में हाल में संपन्न हुए निकाय चुनाव में भाजपा को 16 में से 7 सीटों पर हार का सामना करना पड़ा। यह चुनाव मुख्यमंत्री शिवराज के चेहरे पर लड़ा जा रहा था। ऐसे में उनकी छवि को नुकसान पहुंचा है। इसके बाद संसदीय बोर्ड से उनका बाहर जाना भी कई सवाल खड़े कर रहा है। साथ ही 2023 में चेहरे बदलने की बात को इसके बाद से और बल मिला है।
शाह ने टटोली नब्ज
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के दौरे के बाद से ही मप्र के राजनीतिक गलियारों में हलचल मची हुई है। शाह ने जहां राजधानी में मुख्यमंत्री चौहान से लेकर संघ के पदाधिकारियों से वन-टू-वन चर्चा कर प्रदेश की सियासी नब्ज टटोली। वहीं कैलाश-सिंधिया की मुलाकात को नए प्रदेश की सियासत में नए समीकरण के तौर पर देखा जा रहा है। केंद्रीय गृहमंत्री शाह के भोपाल दौरे के पहले से ही माना जा रहा था कि विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा प्रदेश में कोई बड़ा कदम उठाने वाली है। शाह के दौरे के ठीक पहले संघ प्रमुख मोहन भागवत भी भोपाल आए थे। जानकार इसे भी सियासत से जोड़कर देख रहे हैं, क्योंकि इन दौरों के बाद ही संसदीय बोर्ड में 9 साल से जमे एकमात्र मुख्यमंत्री शिवराज सिंह को हटा दिया गया था। मध्य क्षेत्रीय परिषद की बैठक में शामिल होने के बाद गृहमंत्री अमित शाह ने प्रदेश के सभी बड़े नेताओं के साथ वन टू वन चर्चा की। पहले उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा के साथ लगभग आधे घंटे तक मीटिंग की। इसके बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से भी चर्चा की। संगठन मंत्री हितानंद शर्मा से भी अलग से बात की। शाह ने राज्य के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा को भी अलग से समय दिया। इस दौरान शाह ने अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए फीडबैक लिया। इसके पहले भी शाह जब अप्रैल में भोपाल आए थे, तब उन्होंने संगठन की बजाय सत्ता में शामिल नेताओं से बात की थी। इस बार उन्होंने सिर्फ प्रदेश के चार बड़े नेताओं से ही मुलाकात की है। पहली बार अमित शाह भोपाल में 20 घंटे तक रुके हैं। प्रदेश में आने वाले दिनों संगठन में बदलाव की चर्चा जोरों पर है। इसके साथ ही निगम मंडलों में कुछ नियुक्तियां लटकी हैं, उसे लेकर भी चर्चाएं हुई हैं। निकाय चुनाव में हार के कारणों पर भी केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने पार्टी नेताओं से चर्चा की है।
सिंधिया-विजयवर्गीय की मुलाकात से नई हवा
गृहमंत्री के भोपाल दौरे के बीच इंदौर में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय की मुलाकात ने भी हलचल तेज कर दी है। कांग्रेस में रहने के दौरान सिंधिया और कैलाश की सियासी दुश्मनी से सभी वाकिफ रहे हैं। भाजपा में आने के बाद सिंधिया और कैलाश के संबंध ज्यादा ही गहरे दिखने लगे है। इंदौर में सिंधिया ने यह संकेत दिए कि हम कैलाश विजयवर्गीय के साथ कदमताल के लिए तैयार है। इससे प्रदेश की राजनीति में एक नए गठजोड़ की चर्चा हो रही है। साथ ही बदलाव की बातों को और बल मिलने लगा है। मप्र के सियासी गलियारों में फिर हलचल है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने भोपाल में प्रदेश की टॉप लीडरशिप से वन टू वन बात की है, जिसके सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। उधर, इंदौर में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भाजपा महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के नेतृत्व में काम करने की बात करके सबको चौंका दिया है। केंद्रीय गृहमंत्री शाह के भोपाल दौरे से पहले माना जा रहा था कि विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा प्रदेश में कोई बड़ा कदम उठाने वाली है।
शिवराज मंत्रिमंडल का विस्तार जल्द!
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से दिल्ली में मुलाकात की। फिर कुछ दिनों बाद उन्होंने एक बार फिर दिल्ली का दौरा किया और 30 अगस्त को राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात की। इसके साथ ही प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलें भी तेज हो गई हैं। भाजपा सूत्रों का कहना है कि सितंबर के पहले सप्ताह में शिवराज मंत्रिमंडल का विस्तार किया जा सकता है। पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए क्षेत्रीय, सामाजिक, जातिगत फॉर्मूले के अनुसार विस्तार करेगी। ऐसे में कुछ मंत्रियों को बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है, वहीं कुछ का कद बढ़ाया जा सकता है। वहीं कुछ नए चेहरे मंत्रिमंडल में शामिल किए जा सकते हैं। मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलों के बीच मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का दिल्ली दौरा काफी महत्वपूर्ण है। शिवराज के इस दौरे पर सभी की निगाहें लगी हुई थीं। मुख्यमंत्री के दिल्ली दौरे के बाद मंत्री पद के दावेदारों ने भी सक्रियता बढ़ा दी है। माना जा रहा है कि प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार जल्द हो सकता है। गौरतलब है कि प्रदेश मंत्रिमंडल में अभी चार पद रिक्त हैं। इन चार पदों के लिए करीब एक दर्जन विधायक दावेदार हैं। इनमें कई वरिष्ठ विधायक और पूर्व मंत्री तक शामिल हैं। अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा संगठन व सत्ता दोनों ही इन रिक्त पदों को भरने के पक्ष में बताए जाते हैं। अभी शिवराज कैबिनेट में 30 मंत्री हैं जिनमें से 23 कैबिनेट और 7 राज्य मंत्री हैं। मंत्रिमंडल में फिलहाल क्षेत्रीय संतुलन कम है। विंध्य अंचल से सर्वाधिक विधायक आते हैं, वहां से सबसे कम मंत्री हैं। यही हाल महाकौशल अंचल में बना हुआ है। माना जा रहा है कि मंत्रिमंडल विस्तार में विंध्य, महाकौशल के अलावा मालवा से भी एक-एक विधायक को जगह दी जा सकती है। इसमें भी एक मंत्री अनुसूचित जाति को जाना तय है। फिलहाल मंत्री पद के दावेदारों में अजय विश्नोई, संजय पाठक, राजेंद्र शुक्ला, केदार शुक्ला, रमेश मेंदोला, नागेंद्र सिंह, यशपाल सिंह सिसोदिया और सुलोचना रावत के नाम शामिल हैं। सूत्रों का यह भी कहना है कि इसके साथ ही कुछ मंत्रियों के विभागों में भी फेरबदल किया जा सकता है। यह वे मंत्री हैं, जिन्हें अब तक सत्ता व संगठन नॉन परफॉर्मिंग मान रहा है। इसके पीछे ठोस वजह भी है। हाल ही में हुए पंचायत चुनाव और नगरीय निकाय चुनाव में भाजपा का प्रदर्शन मनमाफिक नहीं रहा। लिहाजा आलाकमान की नाराजगी की बातें भी सामने आ रही हैं। सत्ता और संगठन की रिपोर्ट के मुताबिक 10 मंत्रियों की परफॉर्मेंस खराब है। इनमें वे मंत्री शामिल हैं, जिनके पास भारी भरकम विभाग हैं। खबर तो यह भी है कि दो से तीन मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है। हालांकि मुख्यमंत्री चुनाव के पहले रिस्क नहीं लेना चाहेंगे, ऐसे में मंत्री पद से किसे हटाया जाएगा, यह फैसला केंद्रीय हाईकमान को लेना है।
मिशन 2023 के पहले पिछड़ा बनाम ब्राह्मण की सियासत में फंसी भाजपा, ओबीसी वोट बैंक हो सकता है गेमचेंजर
मप्र में विधानसभा चुनाव होने में एक साल से भी कम का वक्त बचा है और भाजपा ओबीसी बनाम ब्राह्मण की सियासत में फंसती दिख रही है। सागर जिले में लगभग एक साल पहले ब्राह्मण समुदाय की एक लड़की और ओबीसी समुदाय के एक व्यक्ति का अफेयर सामने आया था। इस घटना के बाद ओबीसी परिवार के घर को तोड़ा गया और उसके साथ एक तनाव का माहौल बन गया था। अब ऐसा ही कुछ तनाव भाजपा द्वारा प्रीतम लोधी को बर्खास्त करने के बाद पूरे राज्य में दिख रहा है। दरअसल पूर्व भाजपा विधायक प्रीतम लोधी ने आपत्तिजनक बयान दिया था कि ब्राह्मण और स्वयंभू आध्यात्मिक नेताओं ने महिलाओं को बेवकूफ बनाया और उन्हें पैसे खर्च करने के लिए मजबूर किया। जिसके बाद भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने उन्हें पार्टी से बर्खास्त कर दिया। लोधी ने भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर रावण से हाथ मिलाया और कथित अन्याय के खिलाफ लड़ने का संकल्प लिया। इस बीच, शिवपुरी के चित्रापुर गांव में मुख्य रूप से लोधी समुदाय के स्थानीय लोगों ने किसी भी ब्राह्मण को किसी भी काम के लिए आमंत्रित नहीं करने का फैसला किया है। उन्होंने इस नियम को तोड़ने पर 2100 रुपए के जुर्माने का भी ऐलान किया है। ऐसे में अब ओबीसी महासभा राज्य सरकार के खिलाफ 4 सितंबर को बांदा सागर में महापंचायत करने जा रही है। बता दें कि मप्र में लगभग 52 फीसदी आबादी वाले ओबीसी अब भाजपा की चिंता बढ़ा रहे हैं। भाजपा 2003 में ओबीसी वोटों के समर्थन से सत्ता में आई थी खासकर लोधी के समर्थन से, जिसका मप्र की 40 सीटों पर मजबूत प्रभाव है। जिसकी मदद से उमा भारती मुख्यमंत्री बनीं। बाद में उनकी जगह एक अन्य ओबीसी नेता बाबूलाल गौर को लाया गया और गौर की जगह शिवराज सिंह चौहान को लिया गया। लगातार तीन बार भाजपा की जीत सुनिश्चित करने में ओबीसी मतदाताओं ने अहम भूमिका निभाई। जानकारों का कहना है कि भाजपा को इस मुद्दे से निपटने के लिए मजबूत रणनीति बनानी होगी क्योंकि यह अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए खतरनाक हो सकता है। इस बीच भाजपा ने नुकसान को नियंत्रित करने के लिए ग्वालियर से पूर्व विधायक नारायण सिंह कुशवाहा को पार्टी के ओबीसी विंग के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में घोषित किया गया। सितंबर 2021 में सेमरा लहरिया गांव के 25 वर्षीय राहुल यादव को 16 सितंबर को 23 वर्षीय चंचल शर्मा के परिवार द्वारा कथित तौर पर जिंदा जला दिया गया था और छत से धक्का दे दिया गया था जब वह उससे मिलने गया था। सेमरा लहरिया गांव में यादव की मौत के बाद पुलिस ने चार लोगों पर मामला दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया और जिला प्रशासन ने ब्राह्मण समाज के सदस्यों के घर को ढहा दिया था। मप्र में पहली बार ब्राह्मण समुदाय ने राज्य सरकार के खिलाफ एक महापंचायत आयोजित करने की घोषणा की थी और इसके चलते बाद में पुलिस अधीक्षक और जिला कलेक्टर का तबादला कर दिया गया।
घर दुरुस्त करने में जुटे कमलनाथ
15 साल बाद मिली सत्ता 15 महीने में ही खोने वाले कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ अब पूरी तरह मिशन मोड में नजर आ रहे हैं। 2023 में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए वे अपना घर (मप्र कांग्रेस) दुरुस्त करने में जुट गए हैं। इसके लिए सर्वे कराकर पदाधिकारियों और जिलाध्यक्षों की रिपोर्ट तैयार कर ली गई है। इसी संदर्भ में गत दिनों पीसीसी में बड़ी बैठक आयोजित की गई, जिसमें विधायकों, विधानसभा, लोकसभा, मेयर के पूर्व प्रत्याशी, जिला प्रभारी, सह प्रभारी के अलावा प्रकोष्ठों के अध्यक्ष भी शामिल हुए। कमलनाथ ने जिला प्रभारियों, सह प्रभारियों और जिलाध्याक्षों से स्पष्ट कहा कि यदि आपके पास पार्टी और संगठन के लिए समय नहीं है तो अभी बता दो। ऐसे पदों पर हम आने दूसरे मेहनती लोगों को मौका देंगे। बैठक में कमलनाथ ने कहा कि दो सौ गाड़ियों का काफिला लेकर भोपाल आने वाले नेताओं को जमीन पर संगठन को मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए। कारों के काफिले से नहीं जमीन पर काम करने से जीत मिलेगी। अगले साल विधानसभा के चुनाव हैं ऐसे में हवाबाजी के बजाय जमीन पर काम करने से ही कामयाबी मिलेगी। बैठक में पीसीसी चीफ कमलनाथ ने विधायकों को भी संगठन के कामों पर ध्यान देने की नसीहत दी। इसके कुछ देर बाद दो विधायक बैठक से बाहर निकल गए। हालांकि जब जीतू पटवारी से मीटिंग में पीसीसी चीफ द्वारा फटकारने की वजह पूछी तो उन्होंने जवाब दिया कि कोई फटकार नहीं लगाई।
मप्र में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस ने संगठन को मजबूत करने तैयारियां तेज कर दी हैं। हाल ही में हुए नगरीय निकाय के चुनाव में कांग्रेस को 5 नगर निगमों में मिली कामयाबी के बाद अब जमीनी स्तर पर संगठन की मजबूती के प्रयास तेज हो गए हैं। पीसीसी चीफ कमलनाथ ने जमीनी स्तर पर कांग्रेस के संगठन को खड़ा करने की कमान अपने हाथ में ली है। वे विधायकों और व्यक्ति विशेष के बजाय संगठन की कमान जिला प्रभारियों और सह प्रभारियों के हाथों में सौंपने की तैयारी में हैं। विधायकों से जिलाध्यक्षों का प्रभार वापस लेकर फुल टाइम वर्कर को जिला कांग्रेस कमेटी की कमान सौंपी जा रही है।
पीसीसी चीफ कमलनाथ से जब कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष की दौड़ में नाम चलने का सवाल पूछा तो उन्होंने कहा- मैंने साफ कर दिया है कि मैं मप्र नहीं छोडूंगा। मप्र में ही रहूंगा। कई विधायक ऐसे थे जिनके पास एक से अधिक पद थे। उन्होंने इस्तीफा दिया है। उन जिलों में हम नए जिलाध्यक्ष बनाएंगे। धार में मिट्टी का डैम बनाया था, वह टूट गया। मुआवजा कब मिलेगा प्रभावितों को कुछ पता नहीं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में शिवराज सिंह का हवाई सर्वे भी हवाई है, मुआवजा क्यों नहीं दे रहे हैं। शिवराजजी मीडिया इवेंट करने में माहिर हैं।
जानकारी के अनुसार निकाय चुनाव में गड़बड़ी करने वाले और निष्क्रिय जिलाध्यक्षों की छुट्टी हो सकती है। पीसीसी से मिली जानकारी के मुताबिक करीब 10 जिलों के जिला अध्यक्षों को बदला जा सकता है। प्रदेश स्तर से जारी होने वाले संगठन के कामों में ढ़ील बरतने वाले जिलाध्यक्षों को बदलकर सक्रिय कार्यकर्ताओं को मौका दिया जा सकता है। बैठक के बाद पूर्व कृषि मंत्री सचिन यादव ने कहा कि भाजपा के नेता ही अपनी पार्टी के फैसलों से खुश नहीं हैं। अभी जो पंचायत के चुनाव हुए हैं उनमें भाजपा के कई नेताओं ने कांग्रेस की मदद की है। विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को भाजपा की अंर्तकलह का फायदा मिलेगा। जबलपुर नगर निगम के चुनाव के बाद नाराज चल रहे बरगी विधायक संजय यादव ने कहा परिवार में ऐसा होता रहता है। कमलनाथ के नेतृत्व में अगले विधानसभा चुनाव में 200 सीटें जीतेंगे। जबलपुर को लेकर जो शिकायतें थीं उनके संबंध में आज सारी बातें हो गई हैं। हम कार्यकर्ताओं के लिए लड़ रहे थे।
दरअसल, 2018 में करीब 15 साल बाद मप्र में कांग्रेस की सत्ता में वापसी हुई लेकिन ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ 22 विधायकों ने भाजपा का दामन थाम लिया था। दलबदल के बाद हुए उपचुनाव में कांग्रेस को कई क्षेत्रों में करारी हार का सामना करना पड़ा था। कांग्रेस के संगठन की कमान व्यक्ति विशेष के बजाय विचारधारा वाले कार्यकर्ताओं के हाथ में देने के लिए कमलनाथ बदलाव कर रहे हैं। पीसीसी के एक पदाधिकारी ने बताया कि यदि किसी नेता विशेष के हिसाब से संगठन में नियुक्तियां होती हैं यदि नेता पार्टी छोड़ देता है तो उस इलाके में संगठन का काम कमजोर पड़ जाता है। अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए अब कमलनाथ चाहते हैं कि संगठन का काम कांग्रेस की विचारधारा वाले कार्यकर्ताओं को दिया जाए और बूथ से लेकर ब्लॉक, जिला स्तर के संगठन की कमान जिला प्रभारियों और सह प्रभारियों के हाथ में हो। पीसीसी को मिली रिपोर्ट के मुताबिक कई कांग्रेस के नेताओं ने नगर पालिका, नगर परिषद और जनपद अध्यक्ष बनने के लिए अघोषित रूप से भाजपा को समर्थन दे दिया। ऐसे नेताओं की रिपोर्ट भी पीसीसी को मिली है जो भाजपा नेताओं से करीबियां बढ़ा रहे हैं और भाजपा के कार्यक्रमों में शामिल हो रहे हैं। पीसीसी ने दो नावों की सवारी कर रहे ऐसे नेताओं की भी जानकारी मंगाई है।
कांग्रेस में होगी जिला संगठन मंत्रियों की नियुक्ति
मप्र में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। कांग्रेस की हर बैठक में कमलनाथ ये कहते हैं कि हमारा मुकाबला भाजपा से नहीं बल्कि भाजपा के संगठन से है। भाजपा के संगठन का मुकाबला करने के लिए पीसीसी चीफ कमलनाथ अब कांग्रेस के संगठन को भी उसी हिसाब से तैयार करने में जुटे हैं। भाजपा के संगठन मंत्रियों की तरह कांग्रेस में भी जिला संगठन मंत्रियों की नियुक्ति की जाएगी। ये महामंत्री बूथ लेवल से लेकर मंडलम्, सेक्टर तक के संगठन की गतिविधियों को क्रियान्वित करेंगे और सीधे पीसीसी चीफ को रिपोर्ट करेंगे। इसके साथ ही ऐसे सर्वमान्य नेताओं के नाम पर विचार किया जा रहा है जिन्हें स्थानीय परिस्थितियों का ज्ञान हो। हालांकि भाजपा ने विभाग संगठन मंत्रियों और संभागीय संगठन मंत्रियों की छुट्टी कर उन्हें सत्ता और पार्टी में एडजस्ट कर दिया है। 2023 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए कमलनाथ अब दलबदल से निपटने की रणनीति पर भी काम कर रहे हैं। भाजपा सहित दूसरे दलों से आकर कांग्रेस ज्वाइन करने वाले नेताओं को टिकट देने के बजाय कांग्रेस के प्रत्याशी को जिताने की जिम्मेदारी दी जाएगी।
- राजेंद्र आगाल