20-Oct-2020 12:00 AM
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मप्र की राजधानी भोपाल और व्यावसायिक राजधानी इंदौर में मेट्रो रेल परियोजना धीरे-धीरे रफ्तार पकड़ती जा रही है। भोपाल में तो परियोजना के तहत तेजी से काम हो रहा है। जमीनों के अधिग्रहण के लिए अधिकारी सक्रिय हो गए हैं। वहीं मेट्रो के पहले गर्डर की लॉन्चिंग का काम भी पूरा हो गया है। एक माह पहले 9 सितंबर को गर्डर लॉन्च करने के लिए लॉन्चर लगाया गया था। इसके साथ ही गर्डर के सिगमेंट बिछाने का काम शुरू हुआ। एक महीने में 12 सेगमेंट की लॉन्चिंग की गई। फील्ड में काम कर रहे मेट्रो के इंजीनियरों के अनुसार पहला स्लैब पूरा होने में एक माह लग गया। लेकिन इसके बाद एक-एक स्लैब एक-एक सप्ताह में बिछ जाएंगे। स्टेशन-आरबीआई के सामने मेट्रो स्टेशन का एक छोर होगा। दूसरा छोर बीडीए ऑफिस के सामने है। मेट्रो का अगला स्टेशन सुभाष नगर रेलवे क्रॉसिंग पर होगा।
मेट्रो के एम्स से करोंद (पर्पल लाइन) के 16.05 किमी लंबे रूट और भदभदा से रत्नागिरी (रेड लाइन) के दो रूटों पर 37 लोकेशन पर करीब 100 एकड़ जमीन का अधिग्रहण होना है। इसके बाद राजधानी में मेट्रो दौड़ेगी। पर्पल लाइन के लिए ही करीब 60 एकड़ जमीन का अधिग्रहण होना है। रेड लाइन में करीब 40 एकड़ जमीन की जरूरत पड़ रही है। भोपाल टॉकीज से अंडरग्राउंड ट्रेन एलिवेटिड रूट पर आएगी। जिसमें नादरा बस स्टैंड और सिंधी कॉलोनी के दो अंडरग्राउंड स्टेशन बनेंगे। पर्पल रूट का सिविल वर्क शुरू होने के साथ मेट्रो स्टेशन, पार्किंग, कास्टिंग यार्ड, शॉपिंग कॉम्पलेक्स और अन्य जरूरतों के जमीन की जरूरत पड़ रही है। मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने इसके लिए जिला प्रशासन को इन जमीनों का पजेशन देने का प्रस्ताव सौंप दिया है। मेट्रो के लिए ली जा रही जमीन में सरकारी जमीन के साथ रेलवे, भेल और अन्य विभागों की जमीनें शामिल हैं। कुछ जमीनों पर अतिक्रमण भी है। जबकि कई जगहों पर जमीनों का अधिग्रहण भी करना पड़ेगा।
बोगदा पुल से करोंद चौराहे के बीच 24 एकड़ का पुट्ठा मिल सहित बड़ा बाग कब्रिस्तान की 2.4 एकड़ जमीन भी शामिल है। भोपाल टॉकीज से अंडरग्राउंड ट्रेन एलिवेटिड रूट पर आएगी। इसके लिए पीएंडटी विभाग की 0.262 एकड़ जमीन जाएगी। यहां एक निजी मकान को भी तोड़ा जाएगा, जिससे मेट्रो का रूट क्लियर होगा। इसके बाद काजी कैंप सड़क पर निजी मकानों को भी हटाया जाना है। 10 एकड़ जमीन करोंद चौराहे के पास भी ली जाएगी। इधर रेट रूट के लिए भदभदा से लेकर रत्नागिरी तक 40 एकड़ जमीन ली जाएगी, इसमें ज्यादातर सरकारी जमीन है। जिसमें भदभदा तिराहे पर दस एकड़ और मत्स्य विभाग की 4 एकड़ जमीन शामिल है। बाकी अन्य जमीनें भी शामिल हैं। मेट्रो की पर्पल लाइन के लिए ग्रांड होटल के पाछे 0.39 एकड़ जमीन का अधिग्रहण करना है। ये जमीन नवाब साजिया सुल्तान के नाम पर रिकॉर्ड में दर्ज है। इसके अलावा यहीं पर 0.13 और 0.092 एकड़ जमीन चिन्हित की गई है। 0.046 एकड़, ग्रांड होटल के पीछे ये जमीन न्यू वल्लभ गृह निर्माण सोसायटी के पास है। जिसे वापस लेना है।
मेट्रो रूट में आ रहे विवादित जमीन और मकानों के कारण निर्माण कार्य नहीं रोका जाएगा। यदि मामला कोर्ट में लंबित है तब भी निर्माण जारी रखा जाएगा। ग्लू फैक्टरी, नर्मदा आइस फैक्टरी और पुट्ठा मिल की जमीनें भी मेट्रो के लिए अधिग्रहित हो चुकी हैं। मेट्रो एक्ट के अनुसार इन विवादों को सुलझाया जाएगा। एम्स से सुभाष नगर तक मेट्रो के जिस 6.22 किमी रूट पर सबसे बड़ी बाधा अब सुभाष नगर रेलवे क्रॉसिंग के पास की आजाद नगर झुग्गीबस्ती है। इन 225 परिवारों को पास की खाली जमीन पर शिफ्ट किया जाएगा। इन परिवारों को प्लॉट दिए जाएंगे। साथ ही स्टड फार्म के लिए आरक्षित 67.95 एकड़ जमीन को अतिक्रमण से बचाने के लिए बाउंड्री बनाई जाएगी। इधर, इस रूट पर पेड़ों की कटाई शुरू हो गई है। मेट्रो कंपनी ने इसके लिए राशि जमा करा दी है। अगले चरण में जिंसी क्षेत्र में रूट का काम शुरू होने पर चिकलोद रोड के मकानों को पीछे किया जाएग। इन मकान मालिकों को मुआवजा दिया जाएगा।
इंदौर में कछुआ चाल से चल रहा प्रोजेक्ट
इंदौर मेट्रो का ट्रैक 31.55 किमी का है। इसमें सिर्फ 5.27 किमी के उस ट्रैक के टेंडर हुए हैं, जहां काम करना सबसे सरल था। इसके बाद की जद्दोजहद बेहद चुनौतीपूर्ण होगी, क्योंकि फिर मेट्रो शहरी क्षेत्र और इंदौर के सबसे घनत्व वाले इलाकों से निकलेगी। इसमें जिला कोर्ट से एयरपोर्ट तक 6 किमी का ट्रैक अंडरग्राउंड है। इसी ट्रैक के पास राजबाड़ा, खजूरी बाजार सहित इंदौर के पुराने मार्केट हैं। अंडरग्राउंड ट्रैक की खुदाई टनल बोरिंग मशीन से की जाती है। इस मशीन के कंपन को रोकने के लिए कुशन लगाने पड़ते हैं। ऐसा तब हो पाता है, जब जियो टेक्निकल सर्वे से पता चल सके कि इमारतों की नींव कितनी गहरी है। इस जियो टेक्निकल सर्वे की शुरुआत जनवरी 2019 में हुई, लेकिन बाद में काम बंद हो गया। अब इस सर्वे को ही करवाने में पांच से छह महीने लगेंगे। मेट्रो के पहले एमडी रहे आईएएस प्रमोद अग्रवाल ने जनवरी 2019 में जियो टेक्निकल सर्वे का टेंडर कराया था। काम शुरू होने के पहले ही तकनीकी गड़बड़ी के कारण नए सिरे से टेंडर की प्रक्रिया शुरू की गई। बाद में यह काम शुरू ही नहीं हो सका। कंसल्टेंट ने रूट की डिजाइन ही फाइनल नहीं की। इस प्रोजेक्ट से शुरुआती दौर में जुड़े अधिकारियों ने बताया, कंपनी ने बड़ी-बड़ी गलतियां कीं, जैसे मेट्रो को बोलिया सरकार की छत्री के नीचे से ही निकालने की डिजाइन बना ली थी।
- राकेश ग्रोवर