03-Apr-2020 12:00 AM
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देश में अब महिलाएं कई क्षेत्रों में पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रही हैं। कई निजी संस्थान तो ऐसे हैं जहां महिलाओं की संख्या पुरुषों से अधिक है।
थलसेना और वायुसेना के बाद नौसेना की महिला अधिकारियों को भी अब स्थायी कमीशन मिलेगा। सर्वोच्च न्यायालय ने अपने एक ऐतिहासिक फैसले में महिला अधिकारियों को नौसेना में स्थाई कमीशन देने पर अपनी मुहर लगा दी है। न्यायमूर्ति धनंजय वाई चंद्रचूड़ और अजय रस्तोगी की खंडपीठ ने नौसेना में पुरुष और महिला अधिकारियों के साथ समान व्यवहार किए जाने पर जोर देते हुए कहा कि सैन्य बलों में महिलाओं को लैंगिक समानता नहीं देने के बहाने नहीं चल सकते। उनके लिए समान अवसर देने की जरूरत है।
ऐसे पर्याप्त दस्तावेजी साक्ष्य हैं, जिनसे पता चलता है कि नौसेना में महिला अधिकारियों ने ढेरों उपलब्धियां प्राप्त की हैं। अदालत ने इस संबंध में केंद्र को जरूरी औपचारिकताएं पूरी करने के लिए तीन महीने का समय दिया है। अदालत के इस आदेश के बाद महिला अधिकारियों को भी स्थायी कमीशन मिलेगा और वे अपने पुरुष सहयोगियों की ही तरह नौसेना से सेवानिवृत्त होंगी। उन्हें पेंशन आदि लाभ भी मिलेंगे। अभी तक नौसेना में महिलाओं को केवल शॉर्ट सर्विस कमीशन ही मिलता था और उनकी तैनाती प्रशासनिक, चिकित्सा और शैक्षणिक विभागों में ही की जाती थी।
थलसेना और वायुसेना की महिला अधिकारियों को स्थाई कमीशन मिलने के बाद, नौसेना की 19 महिला अफसरों ने अपना हक पाने के लिए, दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की। याचिका में उन्होंने अदालत से नौसेना में महिलाओं को स्थायी कमीशन दिलाने का अनुरोध किया ताकि उन्हें भी पेंशन जैसे सेवानिवृत्ति लाभ मिल पाएं। बहरहाल दिल्ली हाईकोर्ट ने साल 2010 में अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में महिला अधिकारियों को शार्ट टर्म कमीशन के बाद, जबरन सेवानिवृत्त करने के सरकार के निर्णय को गलत ठहराते हुए, रक्षा मंत्रालय और केंद्र सरकार को निर्देश दिया था कि याचिकाकर्ता महिला अधिकारियों को जल्द से जल्द स्थाई कमीशन प्रदान किया जाए।
केंद्र सरकार इस फैसले के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय चली गई। अदालत में उसने दलील दी कि नौसेना में महिला अधिकारियों को समुद्र में जाने की ड्यूटी नहीं दी जा सकती क्योंकि, रूस निर्मित जहाजों में उनके लिए अलग से स्नानागार नहीं हैं। इसके अलावा महिलाओं की शारीरिक स्थिति और पारिवारिक दायित्व जैसी बहुत-सी बातें उन्हें कमांडिंग अफसर बनाने में बाधक हैं। उस वक्त भी शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में सरकार को फटकार लगाते हुए कहा था कि वह अपने दृष्टिकोण और मानसिकता में बदलाव लाए। उसकी यह सोच, अतार्किक और समानता के अधिकार के खिलाफ है। शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार की इस बेतुकी दलील को स्पष्ट तौर पर खारिज करते हुए कहा कि ऐसी दलीलें केंद्र की साल 1991 और 1998 की नीति के खिलाफ हैं। अदालत ने इसके साथ ही साल 2008 से पहले नौसेना में शामिल की गई महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन देने पर पड़ने वाले प्रभाव को भी निरस्त कर दिया। अदालत ने सेवानिवृत्त हो चुकी उन महिला अधिकारियों को पेंशन का लाभ भी प्रदान किया, जिन्हें स्थायी कमीशन नहीं दिया गया था। अदालत ने केंद्र सरकार को उन पांच महिला अधिकारियों को 25 लाख रुपए मुआवजा देने का आदेश दिया, जिन्हें दोबारा बहाल नहीं किया गया।
नौसेना में अफसर चाहे पुरुष हों या महिलाएं, उनकी नियुक्ति शॉर्ट टर्म कमीशन में यानी चौदह साल के लिए की जाती है। अभी तक होता यह रहा है कि चौदह साल के बाद पुरुष अफसरों को तो स्थायी कमीशन दे दिया जाता है, लेकिन महिला अफसरों को सेवानिवृत्त कर दिया जाता है। पिछले महीने ही सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक अलग फैसले में सेना के अंदर शॉर्ट सर्विस कमीशन के तहत आने वाली महिला अफसरों को स्थायी कमीशन देने को सही ठहराया था। नौसेना में शार्ट सर्विस कमीशन के जरिए भर्ती होने वाली महिलाओं को अभी चार शाखाओं में स्थायी कमीशन के लिए विचार होता है। इनमें शिक्षा, कानून, नौसेना पोत निर्माण और नौसेना हथियारों के रखरखाव से जुड़ी शाखाएं शामिल हैं। ये शाखाएं ऐसी हैं, जहां महिला अधिकारियों को समुद्र के भीतर पोतों में तैनात नहीं होना पड़ता। लेकिन अदालत के हालिया फैसले के बाद, यह रुकावट दूर होगी। जंगी पोतों पर अब महिला अफसरों की तैनाती का रास्ता साफ होगा। अगर सरकार और सेना दोनों, महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन देने को तैयार हुए हैं, तो वह भी अदालत के दखल के बाद ही मुमकिन हो पाया है।
महिलाओं के भरोसे
भारतीय सेनाओं में महिलाओं को उनकी योग्यता के अनुसार पद और प्रतिष्ठा तो मिल ही रही है, निजी संस्थानों में भी महिलाओं को अधिक महत्व दिया जा रहा है। खासकर बैंकिंग और व्यापारिक प्रतिष्ठानों में तो महिलाएं ही फ्रंट लाइन पर हैं। कई संस्थान तो महिलाओं के भरोसे ही चल रहे हैं। इसलिए आज सरकारी और गैर सरकारी हर जगह महिलाओं को महत्व दिया जा रहा है। यह भारत के विकास की दिशा में क्रांतिकारी पहल है। वह दिन दूर नहीं जब पुरुषों को किसी बड़े पद को पाने के लिए महिलाओं से मुकाबला करना पड़ेगा।
- ज्योत्सना अनूप यादव