झांसेबाजों पर नकेल
21-Mar-2020 12:00 AM 3351

आर्थिक राजधानी कहे जाने वाला इंदौर शहर ठगी करने वाली एडवाइजरी कंपनियों का गढ़ बनता जा रहा है। पुलिस के पास आ रही शिकायतों से पता चला कि शहर में कई कंपनियां सेबी से पंजीयन के बिना अवैध रूप से चल रही है, कई मामले ऐसे भी हैं जिसमें एक कंपनी का पंजीयन करने के बाद संचालक ने दो अन्य कंपनियां शुरू कर दी। इन कंपनियों के द्वारा शहर के लोगों के बजाय बाहरी राज्यों के लोगों के नंबर हासिल कर उन्हें ज्यादा निशाना बनाया जा रहा है ताकि वे राशि वापस लेने के लिए ज्यादा शिकायत न कर सकें।

पुलिस ने पहले एडवाइजरी कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की तो कई कंपनियों ने यहां से अपना कामकाज समेटकर अहमदाबाद शिफ्ट कर लिया लेकिन पिछले दो महीने से फिर शहर में सक्रिय हो गई है। पुलिस की हेल्पलाइन में आई शिकायतों में अभी तक करीब 235 कंपनियों के नाम से ठगी की शिकायतें आ गई हैं जबकि सेबी से क्राइम ब्रांच ने जानकारी ली तो पता चला कि वहां 158 कंपनियां ही पंजीकृत है। सभी कंपनियों ने शेयर बाजार में निवेश करने की सलाह देने के लिए सेबी में रजिस्ट्रेशन कराया है लेकिन यह लोगों से लाखों की राशि निवेश के नाम पर अपने व्यक्तिगत खाते में डलवाते हैं और फिर हाथ खड़े कर देते है। अभी तक की जांच से यह बात भी सामने आई है कि इन कंपनियों ने अपने निशाने पर दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, नागालैंड, त्रिपुरा आदि राज्यों के लोगों को ले रखा है। कंपनी की ओर से युवतियों को निवेश का काम सौंपा जाता है जो बातों में उलझाकर व राशि दोगुना करने का झांसा देकर राशि खाते में डलवाती हैं। यह बात भी सामने आई है कि कंपनियां रिटायर्ड लोगों को ज्यादा निशाना बनाती हैं। बाहरी लोग व रिटायर्ड लोगों को निशाना बनाने का उद्देश्य होता है कि वे शिकायत नहीं करते और पैसों के लिए चक्कर नहीं लगा पाते हैं।

एडवाइजरी कंपनी के फरार संचालकों से सेटलमेंट करने के लिए शिकायतकर्ता निवेशकों को धमकी देने वाले छह बिचौलियों को क्राइम ब्रांच ने चिन्हित किया है। ये लोग जहां कंपनियों से निवेशकों को रुपए दिलाने का झांसा देते थे, वहीं संचालकों से भी रुपए लेते थे। इधर, सेबी ने 22 ब्लैक लिस्टेड एडवाइजरी कंपनियों की सूची क्राइम ब्रांच को सौंपी है। क्राइम ब्रांच एएसपी राजेश दंडोतिया ने बताया कि शहर में 100 से ज्यादा फर्जी एडवाइजरी कंपनियां हैं।

इनमें से अधिकांश की हम निगरानी कर रहे हैं। जिन भी निवेशकों ने सेबी के पोर्टल पर शिकायतें की हैं, उन सभी पीडि़तों की जानकारी ली जा रही है। सूत्रों की मानें तो विजय नगर में संचालित एडवाइजरी कंपनियों के निवेशकों को धमकाने में सुनील राठौर, विवेक झा, संजय वैद, प्रशांत मिश्र और दो अन्य लोग हैं। इन्होंने केस दर्ज होने या सेबी पर शिकायत मिलने के बाद निवेशकों को धमकाया है। इन्हें भी जल्द पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा। हालांकि क्राइम ब्रांच को कोई लिखित शिकायत इनके खिलाफ नहीं मिली है, लेकिन शहर से बाहर के कई निवेशकों ने इनके नामों का जिक्र किया है।

इधर, ब्लैक लिस्टेड कंपनियों की शिकायतों की जांच के लिए एएसपी राजेश दंडोतिया को नोडल अधिकारी बनाया गया है। एएसपी ने बताया कि एडवाइजरी कंपनियों के खिलाफ अन्य प्रदेशों के कई पीडि़त लगातार शिकायत करने आ रहे हैं। सर्वाधिक पीडि़त और बड़ी राशि से घाटा खाने वालों में गुजरात के लोग हैं। सेबी से हमें जिन 22 ब्लैक लिस्टेड कंपनियों की सूची मिली है, उनमें कैपिटल टू्र फाइनेंशियल सर्विस, झोडी रिसर्च, हाईब्रो मार्केट रिसर्च, ट्रेड ब्रिज रिसर्च, प्रीमियम रिसर्च फाइनेंशियल सर्विस, प्रीमियम कैपिटल सर्विस, एमआई रिसर्च, स्टार इंडिया मार्केट रिसर्च, कैपिटल हीड फाइनेंशियल रिसर्च, कोर इनवेस्टमेंट रिसर्च, कोर ग्रुप, स्मार्ट ट्रेड्स, थ्री एम टीम रिसर्च, रिसर्च इन्फोटेक, ट्रेड इंडिया रिसर्च, एपिक रिसर्च, मनी क्लासिक, रिपल्स एडवाइजरी प्रालि, मनी डिजायर, द यूकॉम फाइनेंस रिसर्च, प्रॉफिट गुरु और इन्वेस्ट मार्ट लिमिटेड कंपनियां शामिल हैं। इस नाम की कंपनियों को लेकर क्राइम ब्रांच एडवाइजरी भी जारी कर रही है कि इन नामों से कोई भी निवेश एडवाइज न ले। ये सभी ब्लैक लिस्टेड हैं।

इधर, वेलवेट पेंसिल के नाम पर लोगों से करोड़ों की धोखाधड़ी करने वाले आरोपी को पुलिस ने गतदिनों गिरफ्तार किया है। उसे 12 मार्च तक रिमांड पर लिया है। आरोपी का नाम रवदीप सिंह निवासी अहमदाबाद है। पुलिस को सूचना मिली थी कि वह अहमदाबाद से जमानत करवाने के लिए इंदौर आया है, तभी उसे पकड़ लिया। उसके खिलाफ शंकर बाग छावनी निवासी ऋषभ सिलावट व अन्य लोगों ने धोखाधड़ी की शिकायत की थी। रवदीप ने पिछले तीन माह में कई लोगों से वेलवेट कोटिंग पेंसिल बनाने के नाम पर व्यापार देने के नाम पर मोटी रकम ली।

सेबी के पास आई 6800 शिकायतें

एडवाइजरी कंपनियों की ठगी की जांच कर रही क्राइम ब्रांच के सामने सेबी की लापरवाही भी आई है। नियमानुसार किसी भी कंपनी को काम करना है तो एडवाइजरी कंपनी का रजिस्ट्रेशन कराना होता है। बाहरी लोग ठगाते हैं तो ऑनलाइन सेबी को ही शिकायत करते हैं लेकिन सेबी सीधे कोई कार्रवाई नहीं करती, जिसके कारण ठगी की शिकायतें लगातार बढ़ती जाती है। एएसपी राजेश दंडोतिया के मुताबिक, सेबी से पता चला कि उन्हें इंदौर की कंपनियों के खिलाफ 6800 ठगी की शिकायतें मिली है। यह बात सामने आई कि देशभर में मिलने वाली सेबी की कुल शिकायतों में से करीब 85 प्रतिशत इंदौर की कंपनियों की है। करीब 20 कंपनियां ऐसी थीं जिनके खिलाफ 150 से 200 शिकायतें थी। इन लोगों के पैसे निवेश के नाम पर ठगे गए और बाद में कंपनी ने अपना ऑफिस भी बंद कर दिया। सेबी ने इतनी शिकायतों में 20 कंपनियों को ही ब्लैक लिस्ट किया। विजयनगर इलाके में रहने वाले अग्रवाल दंपती की कंपनी की अलग ठगी सामने आई है। पुलिस ने पिछले दिनों इनकी कंपनी पर छापा मारा तो संचालक दंपती फरार हो गए थे। छानबीन करने पर पता चला कि पहले अग्रवाल दंपती की कंपनी अहमदाबाद में काम करती थी। वहां लोगों से लाखों की ठगी करने पर ब्लैक लिस्टेड किया तो इंदौर आकर दूसरी कंपनी के नाम से कारोबार शुरू कर दिया। करीब 70 लाख रुपए इनके नाम से जमा हुए थे जो सभी धोखाधड़ी कर जमा किए गए थे।

- विशाल गर्ग

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