18-Feb-2020 12:00 AM
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भगवत गीता जीवन का मार्गदर्शन है। श्रीमद्भगवत गीता में जीवन का गूढ़ रहस्य छिपा हुआ है। कुरूक्षेत्र में जब सारथी बनकर भगवन कृष्ण ने गीता का उपदेश दिया तो उसे सुनकर अर्जुन को अपने सारे सवालों का जवाब मिल गया और उन्होंने हाथ जोड़कर श्रीकृष्ण से कहा कि प्रभु आपने तो जीवन का सार ही समझा दिया है। हर प्रकार की तृष्णाओं को मिटा दिया है। इस उपदेश को सुनकर ऐसा प्रतीत हो रही है कि आत्मा शुद्ध हो गई है। गीता के उपदेशों में आत्मा की शुद्धि पर विशेष बल दिया गया है। गीता के उपदेश व्यक्ति को महान बनने के लिए प्रेरित करते हैं।
जिसे अपने अग्रजों का आर्शीवाद, अनुजों का प्यार और मित्रों का स्नेह प्राप्त होता है वह समाज में सदा ही सम्मान प्राप्त करता है। ऐसे व्यक्ति समाज में अनुकरणीय बन जाते हैं। ऐसे लोग अपने आचरण से लोगों के लिए प्रेरणा बन जाते हैं। व्यक्ति का यह चरित्र उसे लोकप्रिय और महान बनाता है। व्यक्ति को अपने जीवन में ऐसा व्यवहार और आचरण करना चाहिए जिससे उसे सदैव बड़ों का आर्शीवाद मिलता रहे, छोटे भी उसे प्यार करें और मित्रों-सखाओं का स्नेह मिलता रहे। सामने वाला व्यक्ति आपको सम्मान प्रदान करे इसके लिए सबसे पहले आपको भी उस व्यक्ति को सम्मान देना होगा। सम्मान देना सम्मान लेने की ही एक प्रकिया है। ये ठीक वैसा ही है जैसा वक्ता बनने से पहले अच्छा श्रोता बनना। जो दूसरों की नहीं सुनेगा तो भला उसकी कौन सुनेगा। इसी तरह से जब किसी को सम्मान देते हैं तो दूसरा भी आपको सम्मान देने के लिए बाध्य हो जाता है। दवाब में कराया गया सम्मान भविष्य में मुसीबत पैदा करता है। सम्मान पाने के लिए सदैव सही मार्ग अपनाना चाहिए।
मां किसी भी व्यक्ति की पहली शिक्षक होती है। विद्यामंदिर और गुरूकुल में बच्चा उतना ग्रहण नहीं करता है जितना वह अपनी से ग्रहण करता है। इसलिए मां को हमेशा बच्चों के सामने उच्च आर्दश प्रस्तुत करना चाहिए। वही परिवार तरक्की करता है जिसमें स्त्रियां आधिक जागरूक और आर्दश होती हैं। ऐसी माताओं के पुत्र हमेशा इतिहास रचते हैं। ऐसी माताओं के पुत्रों को ये धरती युगों-युगों तक याद रखती है। जो मां अपने बच्चों में नैतिक गुणों को विकसित नहीं कर पाती है, ऐसी मां को पुत्र की असफलता पर कष्ट सहना पड़ता है। मां ही बच्चे में अच्छे संस्कार डालती है जो राष्ट्र के निर्माण में एक अहम भूमिका निभाते हैं। श्रीमद्भगवत गीता के उपदेशों में मानव के कल्याण का रहस्य छिपा हुआ है। धर्मयुद्ध में जब अर्जुन धर्मसंकट में फंस गए तब भगवान ने उन्हें गीता का रहस्य समझाया। आज भी गीता के उपदेश लोकप्रिय हैं। करोड़ों लोग इन उपदेशों को आत्मसात करके जीवन का आंनद ले रहे हैं। जो व्यक्ति गीता के उपदेशों को जीवन में उतार लेता है उसे सही मायने में जीने की कला आ जाती है। रणभूमि में भगवान कृष्ण ने अर्जुन को समझाया कि हे अर्जुन कुछ भी स्थाई नहीं होता है। जो आया है वह जाएगा। जिसने जन्म लिया है उसे मरना ही पड़ेगा। ऐसे में मोह व्यर्थ है। जो व्यक्ति इस मोह में घिर जाता है वह सिर्फ अपनी परेशानियों को ही बढ़ाता है। ये संसार, शरीर कुछ भी स्थाई नहीं है। मनुष्य का जीवन जब तक है तब तक श्रेष्ठ कार्य करने चाहिए। लोगों के हित में कार्य करने चाहिए। आपके द्वारा अच्छे कार्यों की छाप रह जाती है बाकी सब मिट जाता है। इसलिए जीवन में ऐसे कार्य करने चाहिए जिससे आने वाली पीढिय़ां उदाहरण लें। ये दुनिया इसी तरह से चलती है। और आगे भी चलती रहेगी। व्यक्ति को सदा ही अच्छे कार्यों की तरफ अग्रसर रहना चाहिए।
व्यक्ति के जीवन में बहुत कुछ घटित होता रहता है। लेकिन ज्ञान और जागरूकता के अभाव में यह निर्णय नहीं ले पाता है कि उसे किन चीजों का हिस्सा बनना चाहिए। सफल व्यक्ति हर चीज का ज्ञान रखता है फिर वह बुरी हो या अच्छी। जानकारी हर चीज की होनी चाहिए। लेकिन अच्छी चीजों का हिस्सा बनना चाहिए और बुरी चीजों का नहीं। लेकिन बुरी चीजें व्यक्ति को अधिक प्रभावित करती हैं। ऐसे में व्यक्ति अच्छी चीजों को त्यागकर बुरी चीजों को अपना लेता है और यहीं से उसके पतन का आरंभ होता है।
भगवत गीता में सेहत को प्राथमिकता दी गई है, अर्थात् सेहत है तो सबकुछ है। अच्छी सेहत के लिए मनुष्य को नियमित समय पर संतुलित आहार लेना चाहिए। भगवान श्रीकृष्ण ने कहा है कि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ आत्मा का वास होता है। मनुष्य स्वस्थ रहेगा तभी वह नियमित भगवान की भक्ति, उपासना, साधना, दैनिक एवं सामाजिक कार्य कर पाएगा। अच्छी सेहत ही सफलता की ओर अग्रसर करती है। इसलिए नए साल में आप भी सेहत को पहली प्राथमिकता दें और संतुलित आहार लेने की आदत डालकर चुस्त-दुरुस्त बनें और प्रगति करें।
कहा जाता है कि व्यक्ति जैसा भोजन करता है, उसका मन भी वैसा ही होता है फिर वह वैसे ही सोचता है और वैसे ही काम करता है। गीता में भोजन को बहुत महत्व दिया गया है। भगवान श्रीकृष्ण ने कहा है कि जीवन में सफल बनने के लिए मनुष्य को सदैव सात्विक और पोषक तत्वों से युक्त एवं पौष्टिक भोजन करना चाहिए। समय बहुत मूल्यवान होता है। अगर मनुष्य ने समय की कीमत समझ ली तो उसे जीवन में सफलता प्राप्त करने में कोई अड़चन नहीं आएगी। गीता में कहा गया है कि जिसने समय के महत्व को जान लिया उसने अपने जीवन के पहले पड़ाव को पार कर लिया। समय पर काम करने की आदत व्यक्ति को न सिर्फ सफल बनाती है बल्कि वह अपने जीवन में हमेशा उन्नति ही करता है।
- ओम