26-Dec-2020 12:00 AM
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भोपाल स्मार्ट सिटी डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड केंद्र सरकार की स्मार्ट सिटी मिशन की रैंकिंग में प्रदेश में अव्वल और देश में दूसरे नंबर पर आया है। लेकिन भोपाल स्मार्ट सिटी के प्लान में कई विसंगतियां सामने आ रही हैं। जिससे यह साबित हो रहा है कि अधिकारियों ने हड़बड़ी में कागजी प्लान बना दिया है, जबकि धरातल पर स्थिति कुछ अलग ही है। इसका असर यह हो रहा है कि स्मार्ट सिटी की राह में जगह-जगह बाधाएं खड़ी हो रही हैं। टीटी नगर में 342 में से 87 एकड़ जमीन का स्मार्ट सिटी कंपनी को पजेशन ही नहीं मिल सकता। इसमें निजी मकान, दुकान, स्कूल और मांगलिक भवन आदि शामिल हैं। स्मार्ट सिटी के व्यापारियों के विरोध के बाद कंपनी ने फिर सर्वे कराया है। इसके बाद तैयार नक्शे में 'नॉट इन पजेशनÓ जमीन का अलग से उल्लेख है। कंपनी को यहां डेवलपमेंट करने के लिए इस क्षेत्र को डिनोटिफाई करना पड़ेगा।
नए नक्शे से पता लगता है कि स्मार्ट सिटी का प्लान हड़बड़ी में तैयार हुआ है। टीटी नगर की बसाहट के समय का नक्शा लेकर प्लान बना दिया, जबकि बाद में शासन ने जमीन लीज पर दी है। इसमें से कई तो हाल के वर्षों में ही अगले 30 वर्षों के लिए रिन्यू भी की गई हैं। स्मार्ट सिटी कंपनी के ईडी वीएस चौधरी कोलसानी का कहना है कि फिलहाल फोकस चालू प्रोजेक्ट पूरा करने पर है। इस मसले पर बाद में विचार किया जाएगा। माता मंदिर से जवाहर चौक तक लगभग तैयार हो चुकी बुलेवर्ड स्ट्रीट के दोनों ओर अवैध सब्जी मंडी बन गई है। एक तरफ भाजपा और दूसरी तरफ कांग्रेस के स्थानीय नेताओं ने कब्जा करा दिया है। 40 करोड़ से तैयार हुई बुलेवर्ड स्ट्रीट पर स्मार्ट सिटी कंपनी 30 करोड़ रुपए से लेकर 80 करोड़ रुपए के प्लॉट बेचकर पहले चरण में 265 करोड़ जुटाना चाहती है। लेकिन यहां हो रहे अतिक्रमण को रोकने के लिए कोई इंतजाम नहीं किया गया है।
स्मार्ट सिटी कंपनी ने जनवरी के पहले सप्ताह में जवाहर चौक से 211 दुकानदारों को हटाया था। करीब सालभर में भी इनका व्यवस्थापन नहीं हो सका है। व्यापारी कल्याण महासंघ के अध्यक्ष राकेश जैन ने कलेक्टर अविनाश लवानिया, नगर निगम के कमिश्नर वीएस चौधरी कोलसानी और स्मार्ट सिटी कंपनी के सीईओ आदित्य सिंह से मुलाकात की। उन्होंने सामाजिक संस्थाओं और निजी व्यक्तियों को लीज पर दी गई जमीन को स्मार्ट सिटी के प्लान में शामिल करने से आ रही परेशानियों पर अफसरों से चर्चा की। अफसरों ने उन्हें बताया कि नए सिरे से सर्वेे कराया गया है। रंगमहल चौराहे से जवाहर चौक तक सड़क को 45 मीटर चौड़ा करने की प्लानिंग है। ऐसी स्थिति में ओल्ड एमएलए क्वार्टर्स के 24 मकान दायरे में आ रहे हैं। सड़क के दूसरी ओर की निजी दुकानें भी इसमें आ रहीं हैं। कुल मिलाकर 2000 से अधिक दुकानदार और 100 निजी मकान स्मार्ट सिटी के दायरे में हैं।
भोपाल स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट घटिया निर्माण और धांधली के कारण भी चर्चा में है। वर्ष 2017 में जिस स्मार्ट रोड के भूमिपूजन के दौरान दावा था कि प्रदेश की पहली स्मार्ट रोड का निर्माण ऐसा होगा, जो देश के लिए मिसाल बन जाएगी, हकीकत तो यह है कि जिम्मेदारों की लापरवाही, धांधली और मनमानी का शिकार हुई। 32 करोड़ रुपए की लागत से भारत माता चौराहे से पॉलीटेक्निक तक 95 प्रतिशत बनकर तैयार स्मार्ट रोड की हालात आम सड़कों से भी बदतर है। गुणवत्ता इनती खराब कि हाथों से ही सीमेंट के थप्पे निकल जाते हैं। सेंट्रल वर्ज तक जर्जर स्थिति में पहुंच चुके हैं। शहर की आम सड़कों की स्थिति भी स्मार्ट रोड से कही बेहतर है। स्मार्ट सिटी कंपनी ने इस प्रोजेक्ट में सिर्फ सपने दिखाने का काम किया है। स्मार्ट रोड को दो भागों में बांटने के लिए डिवाइडर का निर्माण कार्य हाल ही में पूरा हुआ है। घटिया निर्माण कार्य के चलते कई स्थानों पर डिवाइडर जर्जर स्थिति में पहुंच चुके हैं। हिंदी भवन से कुछ ही दूरी पर डिवाइडर टूटे पड़े हुए हैं। स्मार्ट रोड में साइकिल ट्रैक व रोड के बीच एक पट्टी का निर्माण किया गया है। सिविल वर्क के तहत निर्माण कार्यों की लेवलिंग तक नहीं की गई है। कई स्थानों पर निर्माण समतल नहीं है। वर्ज की वॉल भी बिना स्ट्रक्चर के तैयार की गई। इन पर पेंट भी कर लिया गया। स्मार्ट रोड में बनाए गए साइकिल ट्रैक का अलाइमेंट तक नहीं किया गया। इसके अलावा फिनिशिंग वर्क के पहले ही लाल रंग का पेंट पोता गया। यह ट्रैक समतल दिखने के स्थान पर ऊपर-नीचे दिखाई देता है। स्मार्ट सिटी परियोजना के एबीडी एरिया टीटी में जमीन मोनेटाईजेशन की प्रक्रिया शुरू की दी गई है। स्मार्ट सिटी कंपनी के पास जर्मनी और सिंगापुर सहित पूरे देश निवेशकों के फोन कॉल के जरिए संपर्क किया। प्रक्रिया शुरू होते ही पहले दिन करीब 1400 निवेशकों ने स्मार्ट सिटी कंपनी की संपत्ति खरीदने इच्छा जाहिर की। ऐसे में सवाल उठता है कि कोई निवेशक स्मार्ट सिटी परियोजना में किस आधार पर निवेश करेगा।
ये हो रहे डेवलपमेंट
भोपाल स्मार्ट सिटी डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीएससीडीसीएल) द्वारा एरिया बेस्ड डेवलवमेंट (एबीडी) व पेन सिटी प्रोजेक्ट पर काम किया जा रहा है। टीटी नगर स्थित 343 एकड़ क्षेत्र में एबीडी प्रोजेक्ट के तहत बुलेवार्ड स्ट्रीट, स्मार्ट रोड, गर्वमेंट हाउसिंग फेस-1 व दशहरा मैदान रीडेवलवमेंट का काम अंतिम चरणों में है। पेन सिटी प्रोजेक्ट में हैरिटेज कंसर्वेशन प्रोजेक्ट के तहत शहर की ऐतिहासिक इमारतों में शामिल सदर मंजिल को संरक्षित करने का काम किया जा रहा है। यह काम भी 90 प्रतिशत पूरा हो चुका है। छोटे तालाब के रानी कमलापति घाट पर पुराने शहर को नए शहर से जोड़ने वाला आर्च ब्रिज का निर्माण दो माह के अंदर पूरा हो जाएगा। इसके अलावा स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत बटरफ्लाई पार्क का निर्माण कार्य भी शुरू हो चुका है। स्मार्ट रोड का निर्माण कार्य भी ऐसे किया जा रहा है कि लोग इसका उपयोग कर सके। उधर, स्मार्ट सिटी ने बड़े तालाब स्थित वीआईपी रोड पर लगाए सोलर प्लांट का काम भी पूरा कर लिया है।
- धर्मेन्द्र सिंह कथूरिया