02-Jul-2020 12:00 AM
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छत्तीसगढ़ में इन दिनों गोबर को लेकर राजनीति गर्माई हुई है। दरअसल, प्रदेश सरकार द्वारा गोधन न्याय योजना लॉन्च की गई है। योजना के तहत सरकार अब जैविक खाद बनाने के लिए गोबर भी खरीदेगी। इसी को लेकर प्रदेश की राजनीति में भूचाल आ गया है। पूर्व पंचायत मंत्री अजय चंद्राकर ने तो ट्वीट कर योजना पर सवाल उठाते हुए गोबर को राजकीय प्रतीक चिन्ह बनाने का सुझाव दिया है, तो वहीं कांग्रेस ने भी पलटवार करते हुए चंद्रकार सहित अन्य भाजपा नेताओं को दिमाग में भरे गोबर को इस योजना के तहत बेचकर आर्थिक लाभ कमाने को कह दिया। चंद्राकर के ट्वीट पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के राजनीतिक सलाहकार विनोद वर्मा ने टिप्पणी की। वर्मा ने कहा कि आपकी संघशिक्षा और दीक्षा एकदम दूरस्त है। वो विनायक सावरकर, जिन्हें आप वीर कहते हैं, वो भी गौमाता और गोबर के बारे में ऐसी ही अपमानजनक बात कहते थे।
भाजपा चुनाव में अवसरवादिता का लाभ उठाते हुए हिंदुत्व और गौ सेवा का मुद्दा भुनाती रही है। लेकिन वास्तव में ना तो भाजपा के मन में हिंदुओं के प्रति कभी प्रेम रहा है और ना ही गौ माता के प्रति। गोबर के बाद सरकार गोमूत्र की खरीदी पर भी विचार कर सकती है, तब इस योजना का भाजपा के द्वारा इतना विरोध क्यों? भाजपा तय कर ले या तो वह गौ माता, सनातन हिंदू धर्म और छत्तीसगढ़ वासियों के पक्ष में है या खिलाफ। प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता आरपी सिंह ने कहा है कि छत्तीसगढ़ का राजकीय प्रतीक चिन्ह कोई सामान्य तस्वीर नहीं है। यह छत्तीसगढ़ की जनता के मान-सम्मान और अस्मिता का प्रतीक है। यह प्रतीक चिन्ह हमें हमारी सांस्कृतिक धरोहर, फसल उत्पादन, विद्युत उत्पादन और समृद्धि वनों की विरासत से जोड़ता है।
बता दें कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने हरेली त्योहार से छत्तीसगढ़ में गोबर खरीदने के लिए गोधन न्याय योजना की शुरुआत की थी। इस योजना को अमल में लाने के लिए सरकार ने 5 मंत्रियों की समिति और अधिकारियों की एक अन्य समिति भी बनाई है। मंत्रिमंडल की समिति गोबर खरीदने की दर तय करेगी, जबकि मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बनी समिति गोबर से बनी खाद खरीदने की व्यवस्था करेगी। पशु पालकों को लाभ पहुंचाने के लिए छत्तीसगढ़ की बघेल सरकार किसानों से गाय का गोबर खरीदेगी। गौ-पालन को आर्थिक रूप से लाभदायी बनाने तथा खुले में चराई की रोकथाम के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने गोधन न्याय योजना शुरू करने का ऐलान किया है। इसके तहत सरकार किसानों से गाय का गोबर खरीद उससे वर्मी कम्पोस्ट खाद बनाएगी। जिसे बाद में किसानों, वन विभाग और उद्यानिकी विभाग को दिया जाएगा। इस योजना की शुरुआत 21 जुलाई को हरेली त्योहार के दिन होगी। इसी के साथ छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य होगा जो गोबर की खरीद करेगा।
इस योजना से गांवों में रोजगार और अतिरिक्त आय के अवसर बढ़ेंगे। गोबर की खरीदी निर्धारित दर पर होगी वहीं सहकारी समितियों से वर्मी कम्पोस्ट की बिक्री होगी। गोबर की खरीदी की दर तय करने 5 सदस्यीय मंत्री मंडलीय उप समिति गठित की गई है। राज्य के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस योजना की जानकारी देते हुए बताया कि गोधन न्याय योजना का उद्देश्य प्रदेश में गौ-पालन को बढ़ावा देने के साथ ही उनकी सुरक्षा और उसके माध्यम से पशुपालकों को आर्थिक रूप से लाभ पहुंचाना है। मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले डेढ़ साल में छत्तीसगढ़ की चार चिन्हारी नरवा, गरूवा, घुरूवा, बाड़ी के माध्यम से राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने के लिए चारों चिन्हारियों को बढ़ावा देने का प्रयास किया गया है।
उन्होंने कहा कि गांवों में पशुधन के संरक्षण और संवर्धन के लिए गौठान का निर्माण किया गया है। राज्य के 2,200 गांवों में गौठान का निर्माण हो चुका है इसके साथ ही 2,800 गांव में गौठान का निर्माण किया जा रहा है। आने वाले दो-तीन महीने में लगभग 5,000 गांवों में गौठान बन जाएंगे। इन गौठान को हम ग्रामीण के लिए आजीविका केंद्र के रूप में विकसित कर रहे हैं। यहां बड़ी मात्रा में वर्मी कम्पोस्ट का निर्माण भी महिला स्व-सहायता समूहों के माध्यम से शुरू किया गया है। उन्होंने कहा कि गोबर प्रबंधन की दिशा में प्रयास करने वाली छत्तीसगढ़ देश की पहली सरकार है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में सरकार गोमूत्र खरीदने पर भी विचार कर सकती है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।
इस योजना को पूरी तरह से आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के आधार पर तैयार किया गया है। इससे अतिरिक्त आमदनी सृजित होगी। रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। इस योजना के क्रियान्वयन के लिए पूरा एक सिस्टम काम करेगा। एक सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्मी कम्पोस्ट के जरिए हम जैविक खेती की ओर बढेंगे। इसका बहुत बड़ा मार्केट उपलब्ध है। गोधन न्याय योजना के माध्यम से तैयार होने वाली वर्मी कम्पोस्ट खाद की बिक्री सहकारी समितियों के माध्यम से होगी।
राज्य जैविक खेती की तरफ आगे बढ़े
मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि सरकार चाहती है कि राज्य जैविक खेती की तरफ आगे बढ़े, फसलों की गुणवत्ता में सुधार हो, इसलिए किसानों से गोबर खरीदने का फैसला किया गया है। किसानों से गोबर खरीदने की दर के निर्धारण के लिए कृषि एवं जल संसाधन मंत्री रविन्द्र चौबे की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय मंत्री मंडलीय उप समिति गठित की गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि गोबर खरीदी से लेकर उसके वित्तीय प्रबंधन एवं वर्मी कम्पोस्ट के उत्पादन से लेकर उसके विक्रय तक की प्रक्रिया के निर्धारण के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में प्रमुख सचिव एवं उप सचिव की एक समिति गठित की गई है। मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि गोधन न्याय योजना के माध्यम से गांव में रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। मैं किसानों, पशुपालकों एवं बुद्धिजीवियों से राज्य में गोबर खरीदी के दर निर्धारण के संबंध में सुझाव देने का आग्रह करता हूं।
- रायपुर से टीपी सिंह