07-Oct-2020 12:00 AM
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उप्र की योगी सरकार ने उस 'मुंबईÓ को आइना दिखा दिया है जो 'बॉलीवुडÓ के चलते 'इतरायाÓ करता है। बॉलीवुड की पहचान हिन्दी फिल्मों से जुड़ी है। बॉलीवुड में करीब 80 प्रतिशत कलाकार, लेखक, निर्देशक, गीतकार, संगीतकार, टेक्नीशियन और अन्य स्टाफ उत्तर भारत से आकर अपनी किस्मत अजमाता है। जहां की मातृभाषा हिन्दी है। अक्सर कहा जाता है कि मुंबई लोगों की किस्मत 'संवारतीÓ है। देशभर से हर दिन लाखों लोग अपने हसीन सपने पूरे करने मुंबई आते हैं। बॉलीवुड का नाम अंग्रेजी सिनेमा उद्योग हॉलीवुड के तर्ज पर रखा गया है। हिन्दी फिल्म उद्योग बॉलीवुड में बनीं हिन्दी फिल्में हिन्दुस्तान, पाकिस्तान और दुनिया के कई देशों के लोगों के दिलों की धड़कन हैं।
बॉलीवुड में करीब 20 भाषाओं में फिल्में बनती हैं, लेकिन इसमें 80 फीसदी हिस्सा हिन्दी फिल्मों का है। हिन्दी फिल्मों में उर्दू, अवधी, बम्बइया हिन्दी, भोजपुरी, राजस्थानी जैसी बोलियां भी संवाद और गानों में देखने को मिल जाती हैं। बॉलीवुड की फिल्मों में प्यार, देशभक्ति, परिवार, अपराध, भय, इत्यादि मुख्य विषय होते हैं। बॉलीवुड भारत में सबसे बड़ी फिल्मी नगरी है। यहां का देश के शुद्ध बॉक्स ऑफिस राजस्व में से 43 प्रतिशत का योगदान रहता है, जबकि तमिल और तेलुगू सिनेमा 36 प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करते हैं। बाकी के क्षेत्रीय सिनेमा का योगदान मात्रं 21 प्रतिशत है। बॉलीवुड दुनिया में फिल्म निर्माण के सबसे बड़े केंद्रों में से एक है। बॉलीवुड कार्यरत लोगों और निर्मित फिल्मों की संख्या के मामले में दुनिया में सबसे बड़े फिल्म उद्योगों में से एक है।
बॉलीवुड की फिल्मों की आत्मा हिन्दी है तो इस फिल्म इंडस्ट्री को दुनिया की नंबर दो हैसियत दिलाने में हिन्दी भाषी लोगों का विशेष योगदान है, लेकिन दुर्भाग्य यह है कि बॉलीवुड भले हिन्दी भाषियों के कंधे पर खड़ा हो, परंतु उत्तर भारत से आने वाले कलाकारों को मुंंबई कभी वह सम्मान देने को तैयार नहीं हुआ जिसके वह हकदार हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह शिवसेना जैसे राजनैतिक दल हैं, जो मुंबई को मराठी भाषियों की 'बपौतीÓ मानती है। मुंबई में उत्तर भारतीयों के साथ अक्सर बदसलूकी की जाती है। उन्हें भैया कहकर अपमानित किया जाता है। इनके रिक्शे और ठेले तोड़ दिए जाते हैं। आम उत्तर भारतीय तो दूर उत्तर भारत से आए बड़े-बड़े कलाकार तक मुंह नहीं खोल सकते हैं, जो खोलता है उसका हश्र फिल्म अभिनेत्री कंगना रनौत जैसा होता है। उत्तर भारत से आए फिल्मी कलाकारों के साथ हमेशा से दोयम दर्जे का सलूक किया जाता है। इसीलिए जब योगी आदित्यनाथ ने उप्र में नई फिल्म सिटी बनाने की घोषणा की तो बॉलीवुड में काम कर रहे उत्तर भारतीय कलाकारों ने उन्हें हाथों-हाथ लेने में देरी नहीं की।
उप्र में नया 'बॉलीवुडÓ बसाने के सपने साकार करने में सिने जगत के दिग्गज हमकदम हो लिए हैं। उन्होंने रियायती दर पर जमीन की मांग से इसकी शुरूआत कर दी है तो सरकार ने भी रजामंदी का संकेत दिया है। फिल्मी दिग्गजों के साथ बैठक में मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि उप्र में संपूर्ण फिल्म सिटी बनेगी। सबसे बड़ी नई फिल्म सिटी युमना एक्सप्रेसवे के किनारे ग्रेटर नोएडा में बनेगी। इस संबंध में मुख्यमंत्री बॉलीवुड के दिग्गजों अनपुम खेर, परेश रावल, सतीश कौशिक, सौंदर्या रजनीकांत, गीतकार मनोज मुंतशिर आदि से वीडियो कांफे्रंसिंग के जरिए मिल चुके हैं। योगी ने फिल्मी दिग्गजों को विश्वास दिलाया है कि उनकी सरकार उप्र में एक भव्य और आपकी जरूरतों को पूरा करने वाली सर्वसुविधायुक्त 'पूर्ण फिल्म सिटीÓ का विकास कर दुनिया को एक उपहार देगी। बॉलीवुड दिग्गजों ने भी माना कि मुंबई में सिर्फ शूटिंग की जगह है। उप्र में फिल्म सिटी का जो खाका बनाया गया है उसे तैयार करने में पटकथा लेखक विजयेंद्र प्रसाद, कला निर्देशक नितिन देसाई, फिल्म निर्देशक संघ के अध्यक्ष अशोक पंडित, गायक उदित नारायण, कैलाश खैर, निर्माता-निर्देशक शैलेष सिंह, भजन सम्राट अनूप जलोटा, मनोज जोशी, उप्र फिल्म विकास परिषद के अध्यक्ष राजू श्रीवास्तव की भी अहम भूमिका रही है।
बहरहाल, एक तरफ उप्र में नई फिल्म सिटी बनने से लोग खुश हैं तो दूसरी तरफ इसको लेकर सियासत भी शुरू हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने, योगी सरकार पर उनकी सरकार के समय के एक और प्रोजेक्ट का फीता काटने का आरोप लगाया है। अखिलेश को इस बात का बेहद मलाल है कि आइडिया उनका था, फिल्म सिटी की घोषणा उन्होंने की और उस पर श्रेय योगी सरकार लेना चाहती है। अखिलेश ने ट्वीट कर फिल्म सिटी के उद्घाटन को पुरानी फिल्म की 'रीलांचिंगÓ करार दिया है। अखिलेश के रीलांचिंग वाले ट्वीट का जवाब मशहूर भजन गायक अनूप जलोटा ने अपने स्टाइल में दिया। जलोटा ने अखिलेश को आईना दिखाते हुए याद दिलाया कि जब वह कानपुर में पढ़ाई करते थे, तब करीब पचास वर्ष पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री चंद्रभानु गुप्ता ने उप्र में फिल्म सिटी की घोषणा की थी। ऐसे ही अखिलेश यादव ने भी की, लेकिन वह सपना योगी राज में साकार होते दिख रहा है।
योगी के कदम की सराहना
खैर, अच्छी बात यह है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संकल्प के साथ सिर्फ उप्र के कलाकार ही नहीं, सिने जगत के दिग्गज भी जुड़े हैं। बाहुबली फिल्म के लेखक विजयेंद्र प्रसाद ने हर संभव सहयोग देने की बात कही है। कहा है कि वह प्रस्ताव भी भेजेंगे। कला निर्देशक नितिन देसाई ने फिल्म इंस्टीट्यूट का सुझाव दिया। साथ ही सभी ने अपने-अपने सुझाव देने की बात कही है। फिल्म निर्देशक संघ के अध्यक्ष अशोक पंडित का कहना है कि मुंबई के बाद उप्र सरकार इकलौती है, जो इस दिशा में आगे आई है। उन्होंने भरोसा जताया है कि 2023 तक उप्र की फिल्म इंडस्ट्री बनकर तैयार हो जाएगी। मशहूर गायक उदित नारायण मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तारीफ में गाना गुनगुना रहे हैं, 'उप्र को जैसा मुख्यमंत्री चाहिए था, मिल गया।Ó वहीं, बॉलीवुड के ड्रग मामले पर बोले कि उप्र में ऐसा नहीं होगा, क्योंकि यह संस्कारों की धरती है। फिल्म अभिनेता अनुपम खेर को उप्र में फिल्म सिटी का निर्माण उत्सव जैसा लगता है। अनुपम कहते हैं, 'योगी जी की क्षमता पर सभी को भरोसा है। उप्र की फिल्म सिटी उप्र में तो होगी, लेकिन पूरी दुनिया इसे अपना मानेगी। यह ताजमहल की तरह ही दुनियाभर को आकर्षित करने वाली होगी।Ó
- लखनऊ से मधु आलोक निगम