मप्र कुछ साल पहले तक अवैध और जहरीली शराब के कारण बदनाम था। लेकिन जबसे प्रदेश के आबकारी विभाग की कमान 2002 बैच के आईएएस अधिकारी राजीव चंद्र दुबे के हाथ में आई है, उन्होंने नए-नए नवाचारों से ऐसी प्रणाली शुरू कर दी है, जिससे अवैध और जहरीली शराब पर अंकुश तो लगा ही है, साथ ही व्यवसायियों की समस्याएं भी दूर हो गई हैं। साथ ही शराब निर्माताओं और व्यापारियों की मोनोपॉली भी खत्म हो गई है।
प्रदेश में शराब के व्यवसाय को पारदर्शी बनाने के लिए आबकारी विभाग ने ई-आबकारी पोर्टल शुरू किया है। अब इसी पोर्टल के माध्यम से सारा काम होगा। आबकारी आयुक्त राजीव चंद्र दुबे ने राष्ट्रीय पाक्षिक अक्स से चर्चा में बताया कि पहले शराब का लाइसेंस लेने के लिए शराब व्यवसायियों को आवेदन लेकर घूमना पड़ता था, अब ऐसी स्थिति नहीं है। अब उन्हें ई-आबकारी पोर्टल पर आवेदन करना पड़ता है। इस प्रक्रिया से भले ही आबकारी विभाग के अफसरों पर बोझ बढ़ा है, लेकिन व्यवसायी खुश हैं। अब उन्हें लाइसेंस के लिए चक्कर लगाने से मुक्ति मिल गई है। यही नहीं विभाग अब शराब कारोबारियों को और सहूलियत देते हुए 1 जून से विदेशी शराब की ऑनलाइन डिमांड की शुरुआत करने जा रहा है। यानी व्यवसायी अपने संस्थान में बैठे-बैठे ही शराब की मांग और आपूर्ति की व्यवस्था कर सकता है। गौरतलब है कि अभी तक देशी शराब के लिए यह व्यवस्था थी।
उल्लेखनीय है कि प्रदेश मे अवैध, जहरीली या किसी अन्य प्रदेश से चोरी-छुपे आई शराब की बिक्री पर नकेल कसने के लिए आबकारी विभाग ने शराब की हर बोतल पर बार कोड लागू कर दिया है। इससे कोड स्कैन करते ही पता चल जाएगा कि यह शराब कहां से आई है और कहां के लिए, किस कंपनी से बनी है। अभी बोतल पर सिर्फ होलोग्राम होता है। विभाग का दावा है कि इससे पता चल जाएगा कि शराब असली है या नकली। गौरतलब है कि कई बार ऐसी जानकारी भी मिलती है कि कंपनियां ड्यूटी फ्री शराब बेच रही हैं। कुछ लोग भी इस तरह का धंधा करते हैं। अब यदि कोई ठेकेदार ऐसा करेगा तो चेकिंग में उसकी पूरी डिटेल सामने आ जाएगी। एक अहम बदलाव यह भी हो रहा है कि अब तक ठेकेदारों को माल मंगवाने के लिए पहले बैंक से चालान भरना पड़ता था। अब आबकारी पोर्टल के माध्यम से इन्हें ई-वॉलेट की सुविधा मिलेगी, जिससे ऑनलाइन पेमेंट हो सके।
गौरतलब है कि आबकारी विभाग के अधिकारियों पर ठेकेदारों से साठ-गांठ के आरोप लगते रहे हैं। यह भी आरोप हैं कि वे अवैध शराब की बिक्री को अनदेखा करते हैं। व्यवस्था में सुधार के लिए ई-आबकारी पोर्टल कुछ दिनों में लांच होने वाला है। इस पोर्टल में जिलेवार हर ठेकेदार का अकाउंट व ई-वॉलेट रहेगा।
ई-वॉलेट से सारे शुल्क ऑनलाइन जमा किए जा सकेंगे। स्थानीय अफसरों के साथ भोपाल व ग्वालियर मुख्यालय के अफसर भी सीधे जानकारी लेते रहेंगे। आबकारी विभाग के अनुसार ई-आबकारी पोर्टल लांच होने वाला है। इससे विभाग की सारी सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध होंगी।
सरकार की नई व्यवस्था से अधिकारियों और वेयरहाउस में बैठने वाले लोगों की दादागिरी खत्म हो जाएगी। गौरतलब है कि अभी तक महंगी-महंगी दुकानों का ठेका लेकर शराब कारोबारी खुद को ठगा सा महसूस करते थे। इसकी सबसे बड़ी वजह दुकानों पर शराब की कमी होना है। डिमांड अनुसार वेयरहाउस और डिस्टलरीज से माल सप्लाय नहीं होता था, इस कारण वे परेशान थे। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। ई-आबकारी पोर्टल पर यह साफ-साफ दिख जाएगा कि वेयरहाउस में शराब है या नहीं।
गौरतलब है कि प्रदेश सरकार ने वर्ष 2022 में अपनी शराब नीति बदल दी, जिसका कई पैमानों पर सीधा असर कारोबार पर पड़ रहा है। सरकार ने सिंडिकेट के एकाधिकार को तोड़कर आमजन को राहत दे दी और ठेकेदारों को भी काम पर लगा दिया। देशी-विदेशी शराब दुकान कम्पोजिट होने का असर खासा नजर आ रहा है। बिक्री में तेजी से बढ़ोत्तरी हो गई है लेकिन ठेकेदार अभी भी परेशान हैं। जबसे ठेके हुए हैं, उनकी जमकर फजीहत हो रही है। माल सप्लाय में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कई दुकानों पर 8 दिन से माल नहीं पहुंच रहा है जिसकी वजह से दुकानें खाली पड़ी रहती हैं। इस समस्या से निजात दिलाने के लिए अब
ई-आबकारी पोर्टल पर विदेशी शराब की ऑनलाइन डिमांड की व्यवस्था 1 जून से शुरू हो जाएगी। इससे शराब व्यवसायियों की सारी समस्याएं दूर हो जाएंगी।
पोर्टल पर दिखेंगे सभी ब्रांड और क्वांटिटी
प्रदेश में शराब के कारोबार को पारदर्शी बनाने के लिए आबकारी विभाग ने ई-आबकारी पोर्टल शुरू किया है, वह शराब कारोबारियों के लिए फायदेमंद होगा। अभी तक शराब कारोबारियों को शराब के लिए वेयरहाउस पर डिपेंड रहना पड़ता था। चौंकाने वाली बात ये है कि सरकारी वेयरहाउस पर ठेकेदारों के कर्मचारियों की लंबी-लंबी लाइन लगी रहती है। माल ट्रक में लोड होता है और सेटिंग से बड़े ठेकेदार लेकर उड़ जाते हैं। छोटे ठेकेदार परेशान होते हैं। डिस्टलरी कंपनी ऑर्डर के बावजूद सप्लाय नहीं कर पा रही है। इसको देखते हुए आबकारी विभाग ने नई व्यवस्था की है। जिसके तहत अब 1 जून से विदेशी शराब ई-आबकारी पोर्टल के माध्यम से कारोबारी ऑर्डर कर सकेंगे। पोर्टल पर अब सभी ब्रांड और उनका स्टॉक नजर आएगा। इससे व्यवसायियों को अपनी मनचाही ब्रांड मिल सकेगी। अभी तक होता यह था कि जब भी शराब कारोबारी वेयरहाउस पहुंचकर अपनी डिमांड रखता था, तो वहां तैनात अधिकारी उसे अपनी पसंद का ब्रांड थमा देते थे। मरता क्या न करता की तर्ज पर कारोबारी को माल लेकर आना पड़ता था।
- लोकेंद्र शर्मा