01-Aug-2022 12:00 AM
2944
सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट यानी पीएमएलए के तहत प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को मिले गिरफ्तारी और संपत्ति जब्त करने समेत प्रमुख अधिकारों को बरकरार रखा है। कोर्ट ने यह फैसला पीएमएलए के कई प्रावधानों की वैधता को चुनौती देने वाली 241 याचिकाओं की सुनवाई करते हुए दिया है। न्यायमूर्ति एएम खानविलकर, न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी न्यायमूर्ति सीटी रविकुमार की पीठ ने इस कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर फैसला सुनाते हुए आरोपी की गिरफ्तारी, तलाशी, कुर्की, जब्ती इत्यादि अधिकार समेत कई प्रावधानों को उचित ठहराया है। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब ईडी नेशनल हेराल्ड केस में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से पूछताछ कर रही थी।
साथ ही ईडी ने हाल ही में पश्चिम बंगाल में ममता सरकार के मंत्री पार्थ चटर्जी को मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों में अरेस्ट किया है। सुप्रीम कोर्ट ने ईडी की ताकत को बरकरार रखते हुए प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट यानी पीएमएलए के विभिन्न प्रावधानों की वैधता को बरकरार रखा है। कोर्ट ने कहा कि पीएमएलए के तहत जमानत के लिए सख्त शर्तें कानूनी हैं न कि मनमानी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ईडी अफसर पुलिस अधिकारी नहीं हैं और इसीलिए इन्फोर्समेंट केस इन्फार्मेशन रिपोर्ट यानी ईसीआईआर को एफआईआर नहीं माना जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि ईडी के लिए ईसीआईआर यानी अरेस्ट से जुड़े पेपर देना जरूरी नहीं है और वह केवल गिरफ्तारी की वजह बताकर आरोपी को हिरासत में ले सकती है। गौरतलब है कि मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट यानी पीएमएलए की ताकत से लैस ईडी केंद्र सरकार की अकेली जांच एजेंसी है, जिसे मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में नेताओं और अफसरों को तलब करने या उन पर मुकदमा चलाने के लिए राज्य सरकार की अनुमति की जरूरत नहीं है। ईडी छापा भी मार सकती है और प्रॉपर्टी भी जब्त कर सकती है। हालांकि अगर प्रॉपर्टी इस्तेमाल में है, जैसे मकान या कोई होटल, तो उसे खाली नहीं कराया जा सकता।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से छापेमारी की खबरें कुछ दिन में जरूर पढ़ने-सुनने को मिल ही जाती हैं। बीते कुछ वर्षों से अपनी कार्रवाई को लेकर यह संगठन लगातार खूब चर्चाओं में रहा है। प्रवर्तन निदेशालय वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग का हिस्सा है। प्रवर्तन का मतलब होता है बाध्य करना या लागू करना और निदेशालय का मतलब होता है ऐसा घर जहां से किसी कानून, विधि या उसके स्वरूप को बताया जाए। प्रवर्तन निदेशालय दो विशेष राजकोषीय कानूनों विदेशी मुद्रा अधिनियम, 1999 (फेमा) और धन की रोकधाम अधिनियम, 2002 (पीएमएलए) के प्रावधानों को लागू करने का कार्य करता है।
करीब 17 साल पहले साल 2005 में प्रवर्तन निदेशालय को गंभीर वित्तीय अपराधों की जांच की शक्ति दी गई थी। तब से लेकर अब तक ईडी ने 400 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया है। हालांकि देश में मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में सिर्फ 25 लोगों को ही अदालतों के द्वारा सजा हुई है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, ईडी ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग कानून (पीएमएलए) की आपराधिक धाराओं के तहत 5422 मामले या प्रवर्तन मामले की सूचना रिपोर्ट (ईसीआईआर) दर्ज की है। साथ ही मार्च 2022 तक संपत्तियों को अटैच करने के 1739 आदेश जारी किए जिसके तहत 1,04,702 करोड़ रुपए की संपत्ति अटैच की गई। ईडी को 2002 में अमल लाए गए पीएमएलए के सख्त प्रावधानों को लागू करने के लिए एक जुलाई 2005 से सौंपा गया था। इन शक्तियों के तहत एजेंसी जांच के स्तर पर आरोपी को समन, गिरफ्तार और उसकी संपत्ति को अटैच कर सकती है और अदालत के समक्ष अपराधियों के खिलाफ मुकदमा चला सकती है।
आंकड़ों के अनुसार, केंद्रीय एजेंसी ने इस दौरान अदालतों के समक्ष 992 आरोप पत्र या अभियोजन शिकायतें दाखिल कीं। पीएमएलए के अमल में आने के 17 साल के दौरान मनी लॉन्ड्रिंग के अपराध में 25 लोग ही अदालतों से सजा पाए हैं जबकि 400 लोग गिरफ्तार किए गए। अधिकारियों के अनुसार, जो लोग दोषी ठहराए गए उनमें ड्रग तस्करी, धोखाधड़ी से विदेश पैसा भेजने, आतंकी वित्तपोषण और सरकारी कोष में भ्रष्टाचार जैसे मामले शामिल हैं। एजेंसी ने पीएमएलए के तहत संपत्तियों को अटैच करने के लिए 1739 अस्थायी आदेश जारी किए। पीएमएलए के न्यायाधिकरण द्वारा 1369 आदेश की पुष्टि की गई। इसके तहत 58,591 करोड़ रुपए की संपत्तियां जब्त की गईं जबकि अस्थायी आदेश के तहत 1,04,702 करोड़ रुपए की संपत्तियां अटैच की गई थीं।
ईडी ने शीर्ष राजनीतिज्ञों, अफसरों, कारोबारी समूहों, कारपोरेट्स, विदेशी नागरिकों और अन्य के मामलों की भी जांच की। ईडी ने विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के तहत 31 मार्च तक 30,716 मामलों की जांच शुरू की। यह कानून 1973 के फेरा की जगह 1999 में लागू किया गया था। आंकड़ों के अनुसार, 15,495 फेमा मामलों का निपटारा किया जबकि जांच के बाद 8109 मामलों में कारण बताओ नोटिस जारी किए गए। इनमें से 6472 कारण बताओ नोटिसों पर फैसला सुनाया गया या अंतिम रूप दिया गया। एजेंसी ने विजय माल्या और नीरव मोदी समेत 9 लोगों को 2018 के आर्थिक अपराध भगोड़ा कानून के तहत आर्थिक अपराधी भगोड़ा घोषित किया जबकि 14 लोगों के लिए उसने इसकी मांग की थी।
प. बंगाल में बड़ा घोटाला उजागर
अभी हाल ही में ईडी ने पश्चिम बंगाल में एक बड़े घोटाले को उजागर किया है। ईडी ने पश्चिम बंगाल के मंत्री पार्थ चटर्जी को गिरफ्तार किया तो शिक्षक भर्ती घोटाले मामले में अर्पिता मुखर्जी के दो फ्लैटों पर छापेमारी के दौरान सोने, डॉलर और कुछ दस्तावेजों के अलावा 51 करोड़ रुपए की नकदी का एक बड़ा भंडार मिला है। बंगाली और उड़िया फिल्म उद्योग में काम करने वाली अभिनेत्री और मॉडल अर्पिता मुखर्जी फिलहाल ईडी की हिरासत में हैं। उधर, मामले की गंभीरता को देखते हुए ममता बनर्जी ने पाथ को मंत्री के साथ ही पार्टी के सभी पदों से बर्खास्त कर दिया है। उधर, ईडी इस मामले में और कुछ नेताओं से पूछताछ कर सकती है।
- लोकेंद्र शर्मा