क्रिकेट की नई सनसनी शेफाली
21-Mar-2020 12:00 AM 3746

 

अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट के इतिहास में पहली बार भारतीय महिला क्रिकेट टीम आईसीसी टी-ट्वेंटी विश्वकप के फाइनल में पहुंची। हालांकि भारतीय टीम विश्वकप नहीं जीत पाई। लेकिन टीम को यहां तक पहुंचाने का श्रेय 16 वर्षीय शेफाली वर्मा की बल्लेबाजी को जाता है। महज छह महीने पहले अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में आई शेफाली अपने शानदार प्रदर्शन के चलते दुनिया के उत्कृष्ट बल्लेबाजों की आईसीसी रैंकिंग में पहले स्थान पर पहुंच गई हैं।

बीते 28 जनवरी को ही शेफाली वर्मा 16 साल की हुई हैं। भारतीय महिला क्रिकेट टीम की यह ओपनिंग बल्लेबाज इस छोटी-सी उम्र में ही विश्व क्रिकेट के बड़े-बड़े रिकॉर्ड ध्वस्त कर चुकी हैं। यहां विश्व क्रिकेट से आशय केवल महिला क्रिकेट से नहीं है, पुरुषों का क्रिकेट भी इसमें शामिल है। शेफाली की हालिया उपलब्धि यह है कि वे अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट काउंसिल (आईसीसी) की 20-20 क्रिकेट की महिला बल्लेबाजों की रैंकिंग में पहले पायदान पर पहुंच गई हैं। यानी कि वे वर्तमान में महिला टी-20 क्रिकेट में विश्व की नंबर एक बल्लेबाज हैं। और दिलचस्प पहलू यह है कि उन्हें अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट खेलते हुए छह माह भी नहीं हुए हैं। 24 सिंतबर 2019 को उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया था। लेकिन अपनी आक्रामक बल्लेबाजी और प्रदर्शन में निरंतरता के दम पर उन्होंने इतने कम समय में ही केवल 18 मैच खेलकर यह उपलब्धि हासिल करते हुए विश्व की कई दिग्गज महिला बल्लेबाजों को पीछे छोड़ दिया है। केवल इतना ही नहीं, महिला एवं पुरुष दोनों ही प्रकार के क्रिकेट को देखें तो आईसीसी की बल्लेबाजी रैंकिंग में शीर्ष पर पहुंचने वाली वह सबसे युवा भारतीय बल्लेबाज बन गई हैं। यह उपलब्धि उन्होंने महज 16 साल और 36 दिन की उम्र में पाई है। और ऐसा संभव हुआ विश्वकप में उनकी धमाकेदार बल्लेबाजी के प्रदर्शन के चलते।

भारतीय महिला क्रिकेट टीम ऑस्ट्रेलिया में खेले जा रहे सातवें टी-20 महिला क्रिकेट विश्वकप में हार गई। लेकिन क्रिकेट इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है और इसमें शेफाली का बहुत बड़ा योगदान रहा है। भारतीय बल्लेबाजी की ताकत स्मृति मंधाना और हरमनप्रीत कौर, जिनसे भारत को विश्वकप जिताने की उम्मीद थी, वे पूरे विश्वकप में एक-एक रन के लिए जूझती नजर आईं। इन विपरीत हालातों में टीम की सबसे कम उम्र की सदस्य शेफाली ने स्कोरकार्ड पर भारत के लिए रन टांगे और जिस तेज गति से टांगे, उसका मुकाबला इस पूरे विश्वकप में विश्व की अन्य कोई भी बल्लेबाज नहीं कर पाई। हरियाणा के रोहतक जिले की रहने वाली शेफाली के पिता पेशे से सुनार हैं। रोहतक महिलाओं के प्रति मानसिकता को लेकर अपेक्षाकृत अधिक रूढि़वादी रहा है। कई मौकों पर शेफाली के पिता संजीव वर्मा बता चुके हैं कि शेफाली का क्रिकेट खेलना भी आसानी से स्वीकार नहीं किया गया था, लेकिन वे अपनी बेटी के साथ डटे रहे। तब किसे पता था कि एक दिन वे भारत के लिए विश्वकप खेलेंगी और महज 16 साल की ही उम्र में टीम की सबसे प्रमुख बल्लेबाज बनकर उभरेंगी। इस विश्वकप में शेफाली अब तक खेले 4 मैचों में 40.25 के औसत से 163 रन बना चुकी हैं और उनका स्ट्राइक रेट (प्रति 100 गेंदों पर बनाए कुल रन) 163 का है, जो टूर्नामेंट में सबसे अधिक है। उनकी आक्रामक बल्लेबाजी का ही कमाल है कि इस विश्वकप में भारत ने पावर-प्ले (किसी भी पारी के शुरुआती छह ओवर जिनमें कि फील्डिंग पाबंदियां लागू होती हैं) में सबसे अधिक तेजी से रन बनाए हैं। कुल चार मैचों के 24 ओवर में 8.25 के रन रेट के साथ भारत ने 198 रन बनाए हैं। जबकि दूसरे नंबर पर इंग्लैंड है जिसने इस दौरान 6.79 के रन रेट से 163 रन बनाए हैं। भारत से फाइनल में भिडऩे वाली ऑस्ट्रेलिया ने तो सिर्फ 5.96 का रन रेट निकाला है।

पावर-प्ले में शेफाली के धुआंधार खेल की बानगी उनकी खेली पारियों से समझ आती है। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उन्होंने 15 गेंदों पर 29 रन, बांग्लादेश के खिलाफ 17 गेंदों पर 39 रन, न्यूजीलैंड के खिलाफ 34 गेंदों पर 46 रन और श्रीलंका के खिलाफ 34 गेंदों पर 47 रन की पारियां खेलीं। इस दौरान उन्होंने 9 छक्के भी मारे हैं जो इस विश्वकप में किसी भी बल्लेबाज द्वारा मारे छक्कों में सर्वाधिक हैं।

सहवाग से तुलना

शेफाली की इसी आक्रामक बल्लेबाजी की तुलना भारतीय पुरुष टीम के पूर्व विस्फोटक सलामी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग से करते हुए भारतीय महिला क्रिकेट टीम की पूर्व कप्तान डायना एडुल्जी कहती हैं, ‘शेफाली वो खिलाड़ी हैं जो दर्शकों को महिला क्रिकेट देखने के लिए विवश करेंगी। तुलना करना ठीक तो नहीं होगा लेकिन वे मुझे वीरेंद्र सहवाग की याद दिलाती हैं। उनकी हमलावर शैली महिला क्रिकेट में एक नयापन लेकर आई है।’ उनका कहना सही भी है। जब से शेफाली ने अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखा है, वे हर मैच के साथ नए कीर्तिमान गढ़ रही हैं। अपने पांचवे ही अंतर्राष्ट्रीय मैच में उन्होंने क्रिकेट के सर्वकालिक महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर का तीन दशक पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया था।

- आशीष नेमा

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