19-Sep-2020 12:00 AM
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विधानसभा चुनाव में करारी हार झेलने वाली छत्तीसगढ़ भाजपा इन दिनों संकट के दौर से गुजर रही है। 15 साल तक छत्तीसगढ़ में एकछत्र होकर राज करने वाली भाजपा के सामने इस वक्त खुद अपनी ही पार्टी का नारा चाल चरित्र और चेहरे को लेकर संकट खड़ा होता दिखाई दे रहा है। भाजपा के कार्यकर्ता सोशल मीडिया पर अनुशासन की दीवार को ढहाते दिख रहे हैं। राज्य की सत्ता से भाजपा के बाहर होने के बाद पार्टी कार्यकर्ता सीधे तौर पर बड़े नेताओं को निशाने पर ले रहे हैं। खुलेआम पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह, राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री सौदान सिंह सहित कई वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ टिप्पणियां की जा रही हैं। प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय को एक कमजोर अध्यक्ष बताया जा रहा है। जिला अध्यक्षों की नियुक्ति नहीं करने को लेकर भी लगातार सवाल खड़े किए जा रहे हैं।
राज्य की राजनीति में ऐसा पहली बार देखने को मिल रहा है, जब कार्यकर्ता सोशल मीडिया पर डॉ. रमन और सौदान के खिलाफ जमकर आग उगल रहे हैं। पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल के मीडिया प्रमुख रहे देवेंद्र गुप्ता ने तो सौदान सिंह को भाजपा का सौदागर तक कह दिया। बता दें, प्रदेश प्रवक्ता सच्चिदानंद उपासने ने संघ प्रमुख मोहन भागवत के दौरे के दिन कार्यकर्ताओं की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए एक वीडियो जारी किया था। इसके बाद उपेक्षा से नाराज कार्यकर्ताओं को बल मिला और उन लोगों ने सोशल मीडिया पर जमकर बम फोड़ना शुरू कर दिया। मामले को लेकर एक कार्यकर्ता ने कहा कि छत्तीसगढ़ में सच्चिदानंद उपासने जैसे वरिष्ठ, कर्मठ, जमीन, निष्ठावान की जब नहीं सुनी जा रही है, तो कार्यकर्ताओं की क्या सुनी जाएगी। भाजपा के पत्रों में खुद के लिए देवतुल्य शब्द सुनकर ही कार्यकर्ता खुश हो ले। अपने फेसबुक प्रोफाइल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ तस्वीर लगाए अंबिका ठाकुर ने पोस्ट किया- सत्ता में जो बीज बोए जहर का, वह सत्ता जाने के बाद अमृत पाने की अपेक्षा क्यों पाले हैं। पूर्व में संगठन का कार्यकाल दो वर्ष का था, फिर तीन वर्ष किया गया, अब कार्यकर्ता पूछ रहा है कि जिलाध्यक्ष का कार्यकाल कितने वर्ष का है। मांग की जा रही है कि पार्टी में नए राष्ट्रीय अध्यक्ष बने साथ ही नए प्रदेश अध्यक्ष बने और रायपुर का जिलाध्यक्ष कब चुना जाएगा इस बारे में भी जानकारी चाही।
महाभारत का 16वां अध्याय शुरू कर रहे कार्यकर्ता भाजपा नेता अनूप मसंद ने सोशल मीडिया पर महाभारत का 16वां अध्याय शुरू करने के लिए कार्यकर्ताओं को आमंत्रित किया है। मसंद ने लिखा- सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं। भाजपा को जो नुकसान हुआ, उसकी भरपाई नहीं हो सकती। किसके कारण हुआ, सब जानते हैं। आइए हम सब मिलकर विसंगतियों को दूर करें। प्राइवेट लिमिटेड कंपनी पर ताला लगाएं। हम महाभारत का 16वां अध्याय आरंभ करते हैं और सौगंध खाते हैं कि छत्तीसगढ़ प्रदेश में भाजपा का कमल फिर खिलेगा। इसके लिए पहले आंतरिक चक्रव्यूह तोड़ा जाएगा।
भाजपा के वरिष्ठ नेता सच्चिदानंद उपासने और श्रीचंद सुंदरानी खुलकर एक-दूसरे के खिलाफ आ गए हैं, लेकिन दुर्ग, सरगुजा, राजनांदगांव में भी नाराजगी सतह पर आने लगी है। सरगुजा और सूरजपुर में जिलाध्यक्ष की नियुक्ति के बाद केंद्रीय राज्यमंत्री रेणुका सिंह के समर्थकों ने विरोध शुरू कर दिया है। सरगुजा में लल्लन प्रताप सिंह और सूरजपुर में बाबूलाल अग्रवाल को अध्यक्ष बनाया गया है। बाबूलाल को रेणुका का विरोधी कहा जाता है, इसलिए आने वाले समय में विवाद बढ़ने के आसार हैं। छत्तीसगढ़ भाजपा में कार्यकर्ता पहले ही सोशल मीडिया पर विरोध कर रहे थे। अब नेता भी खुलकर सामने आ गए हैं। वरिष्ठ नेता उपासने और पूर्व विधायक सुंदरानी के बीच विवाद को इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है, क्योंकि दोनों प्रवक्ता की जिम्मेदारी पर हैं। पार्टी के प्रतिनिधि के रूप में दोनों पक्ष रखते थे। यही वजह है कि दोनों के बीच विवाद को भाजपा के भीतर चल रही वर्चस्व की लड़ाई के रूप में देखा जा रहा है। अब केंद्रीय राज्यमंत्री रेणुका सिंह के नाराज होने की खबर आ रही है। रेणुका सरगुजा में भारत सिंह सिसोदिया और सूरजपुर में शशिकांत गर्ग को अध्यक्ष बनाना चाहती थीं। इसके विपरीत संघ के करीबी नेताओं को मौका दिया गया है। इससे पहले रायपुर सांसद सुनील सोनी की पसंद सुरेंद्र टिकरिया को दरकिनार कर पूर्व विधानसभा स्पीकर गौरीशंकर अग्रवाल की पसंद पर डॉ. सनम जांगड़े को जिलाध्यक्ष बना दिया गया। राजनांदगांव सांसद संतोष पांडेय भी मधुसूदन यादव को जिलाध्यक्ष बनाने से संतुष्ट नहीं हैं। दुर्ग और भिलाई संगठन जिलों में अभी अध्यक्ष की नियुक्ति नहीं हुई है, लेकिन चर्चा है कि सांसद विजय बघेल की पसंद के मंडल अध्यक्ष भी नहीं बने। पूर्व मंत्री और वरिष्ठ नेता चंद्रशेखर साहू ने उपासने और सुंदरानी के बीच लड़ाई के संबंध में मीडिया से बातचीत में कहा कि यह पार्टी के भीतर का मामला है, इसलिए बाहर कोई टिप्पणी करना ठीक नहीं है। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि संगठन को हस्तक्षेप कर मामले को सुलझाना चाहिए।
रमन के इर्द-गिर्द सिमटकर रह गई भाजपा
छत्तीसगढ़ में 15 साल सत्ता में रहते हुए पूरी पार्टी मुख्यमंत्री रहे रमन सिंह के इर्द-गिर्द सिमट कर रह गई। रमन सिंह पिछले 15 सालों में छत्तीसगढ़ भाजपा का एकमात्र चेहरा थे और भाजपा ने विधानसभा चुनाव भी रमन सिंह के चेहरे पर ही लड़ा लेकिन चुनाव में जिस तरह भाजपा को करारी हार का सामना करना पड़ा उसके बाद पार्टी के अंदर से ही रमन सिंह के विरोध में स्वर उभरने लगे। छत्तीसगढ़ में भाजपा ने 15 साल सत्ता में रहते हुए जिस तरह चाल यानी काम किया उस पर विधानसभा चुनाव के परिणाम ने सवाल उठा दिया है। छत्तीसगढ़ भाजपा जिस रमन सरकार के मॉडल का ढिंढोरा पूरे देश में पीटती थी वो पार्टी विधानसभा चुनाव में 15 सीट पर सिमट गई। सूबे में बड़े नेताओं के बीच गुटबाजी शुचिता की राजनीति करने वाली पार्टी के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी करती है। जिसका खामियाजा पार्टी को विधानसभा चुनाव में भी उठाना पड़ा।
- रायपुर से टीपी सिंह