भगवा पर हावी भक्ति
04-Feb-2020 12:00 AM 2187

अपनी 'भगवा' राजनीति से विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बनी भाजपा मप्र के मुख्यमंत्री कमलनाथ की 'भक्ति' से टेंशन में नजर आ रही है। दरअसल, दिखावे से ऊपर उठकर मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अपने 13 माह के कार्यकाल में धर्म और संस्कृति के विकास, विस्तार और संवद्र्धन की दिशा में जो कदम उठाए हैं वे जन मानस पर छा गए हैं। इस कारण जनता में कमलनाथ और उनकी सरकार की बढ़ती लोकप्रियता ने भाजपा के रणनीतिकारों की चिंता बढ़ा दी है। कहावत है कि 'लोहे को लोहा ही काट सकता है।' मप्र में 15 साल सत्ता से दूर रही कांग्रेस ने भाजपा की भगवा सरकार को उखाडऩे के लिए भक्ति का माध्यम चुना। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने नर्मदा यात्रा के माध्यम से घर बैठे कांग्रेसियों को निकलने के लिए मजबूर किया और देखते ही देखते कांग्रेस नए जोश के साथ मैदान में नजर आने लगी। फिर 2018 विधानसभा चुनाव का बिगुल बजा और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ ने भक्ति अभियान की बागडोर संभाली। चुनावी अभियान की शुरुआत पूजा-अर्चना से शुरू कर कांग्रेस ने भाजपा को सत्ता की कुर्सी से उतार दिया। उसके बाद से मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ भाजपा के हिंदुत्व के एजेंडे को उसी के अंदाज में जवाब देने में लग गए हैं। भाजपा के एजेंडे में जहां अयोध्या में राम मंदिर बनाने का मुद्दा सबसे ऊपर रहा, वहीं कमलनाथ सरकार श्रीलंका में सीता मंदिर बनाने जा रही है। इसके लिए रामगमन पथ पर काम हो रहा है और गौशालाएं बनाई जा रही हैं। ये वे मुद्दे हैं, जिनका इस्तेमाल भाजपा ने आस्था के नाम पर खूब किया है। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के बारे में एक बात अक्सर कही जाती है कि उनकी सोच वहां से शुरू होती है, जहां लोग सोचना बंद कर देते हैं। महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर भोपाल के मिंटो हॉल में हनुमान चालीसा के सवा करोड़ जाप एक साथ कराए जाने के आयोजन में यह बात पूरी तरह से सही साबित होती दिखाई भी दी। भाजपा जहां अपनी पूरी राजनीति भगवान श्रीराम को केंद्र में रखकर करती रही है, वहीं कमलनाथ ने सीता माता और राम भक्त हनुमान का हाथ अपने संकट निवारण के लिए पकड़कर सभी को चौंका दिया है। श्रीलंका में माता सीता के भव्य मंदिर के निर्माण पर तेजी से अमल करने की तैयारी हो चुकी है। शिवराज सिंह चौहान अपने मुख्यमंत्रित्व काल में इसे अमली जामा नहीं पहना पाए थे। भाजपा से फिसलता हिंदुत्व एजेंडा भारतीय राजनीति में भाजपा यह दर्शाने की हमेशा कोशिश करती है कि उसके एजेंडे में हिंदुत्व सबसे ऊपर है। मप्र की सियासत में अभी तक चित्रकूट के रामपथ गमन, श्रीलंका के सीता मंदिर, हनुमान, नर्मदा और गाय भाजपा के मुख्य मुद्दे रहे हैं, लेकिन कमलनाथ ने प्रदेश की कमान संभालने के बाद से ही ये सभी मुद्दे भाजपा के हाथ से छीन लिए हैं। यही वजह है कि भाजपा आजकल प्रदेश में राम-सीता, हनुमान और गाय के नाम पर सियासत नहीं कर रही है। दरअसल, भाजपा की अब तक की राजनीति पर गौर करें तो हम पाते हैं कि वह अभी तक हिंदुत्व के नाम पर केवल वोट बैंक की राजनीति करती आ रही है। लेकिन कमलनाथ ने इस दिशा में क्रांतिकारी कदम उठाकर भाजपा के हाथ से हिंदुत्व के एजेंडे को फिसला दिया है। अपने 13 माह के कार्यकाल में धर्म और संस्कृति की दिशा में सरकार ने कई क्रांतिकारी कदम उठाए हैं, जिससे भाजपा हासिए पर आ गई है। इसकी एक वजह यह है कि पूर्ववर्ती भाजपा सरकार के शासनकाल के दौरान जिन धार्मिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों के विकास की कोरी घोषणा की गई थी, उन्हें पूरा करने का काम वर्तमान कांगे्रस सरकार करवा रही है। प्रदेश सरकार के इस कदम को भाजपा राजनीति करार दे रही है। वहीं प्रदेश के जनसंपर्क मंत्री पीसी शर्मा कहते हैं कि यह राजनीति नहीं, सरकार का कत्र्तव्य है। मप्र में भाजपा ने अपने पंद्रह साल के शासन में कांग्रेस के परंपरागत वोट बैंक में काफी हद तक सेंध लगा ली थी। पिछले चुनाव में कमलनाथ के सॉफ्ट हिंदुत्व के चलते सांप्रदायिक आधार पर वोटों का धुर्वीकरण नहीं हो पाया था। इंदौर और भोपाल जैसे सांप्रदायिक रूप से संवदेनशील शहरों में भी उम्मीद से ज्यादा सफलता कांग्रेस को मिली। यद्यपि कांग्रेस को चुनाव में स्पष्ट बहुमत नहीं मिल पाया। कांग्रेस को 114 सीटें मिलीं। भाजपा 108 सीटें ही जीत पाई। सिंहस्थ जैसे धार्मिक आयोजनों का भव्य स्वरूप भी भाजपा की मदद नहीं कर पाए थे। दलितों को भाजपा के पक्ष में लाने के लिए आयोजित किए गए समरसता स्नान का भी असर भाजपा के पक्ष में दिखाई नहीं दिया था। मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के विचार विभाग के अध्यक्ष भूपेन्द्र गुप्ता कहते हैं कि मुख्यमंत्री कमलनाथ का भरोसा धर्म की राजनीति में नहीं है। पाखंडी तो भाजपा के नेता हैं। भाजपा का पाखंड उजागर हो चुका है। हनुमान चालीसा और नर्मदा महोत्सव राम, शंकर और नर्मदा भक्ति के सहारे विधानसभा चुनाव की वैतरणी पार करने वाली कांग्रेस के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भोपाल में गांधीजी की पुण्यतिथि के मौके पर हनुमान पाठ का आयोजन सवा करोड़ मंत्रों के साथ कराने के बाद अनूपपुर जिले के अमरकंटक में नर्मदा महोत्सव का रंगारंग आगाज करवाकर सबका मन मोह लिया है। राजधानी के मिंटो हॉल में हुए हनुमान चालीसा के सवा करोड़ जाप को लेकर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह का कहना है कि ऐसे आयोजन लोगों को भ्रमित करने के लिए किए जा रहे हैं, लेकिन जनता भ्रमित नहीं होगी। वहीं भाजपा के सवालों पर पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने निशाना साधते हुए कहा है कि अगर भाजपा ये कहती है कि हनुमान चालीसा का जाप लोगों को भ्रमित करने के लिए किया जा रहा है तो उन पर धिक्कार है। हनुमान चालीसा का राजनीति से कोई लेना देना नहीं है। वहीं राकेश सिंह के सवालों का सीएम कमलनाथ ने जवाब देते हुए पूछा है कि क्या धर्म की एजेंसी भाजपा के पास है। कांग्रेस के पूजा-पाठ करने पर भाजपा के पेट में दर्द क्यों होता है। संजीवनी बनेगी हनुमान चालीसा भोपाल की ऐतिहासिक इमारतों में से एक मिंटो हॉल में 29 जनवरी को एक और इतिहास लिखा गया। इस दिन शाम को हनुमान चालीस का पाठ रखा गया था। इस कार्यक्रम के आयोजक हमारे हनुमान सांस्कृतिक मंच भोपाल नामक संस्था थी। प्रधान पीठ पर जीवन प्रबंधन गुरू पंडित विजय शंकर मेहता थे। हनुमान चालीसा का सवा करोड़ जाप कराने का संकल्प कमलनाथ सरकार के मंत्री पीसी शर्मा ने लिया था। पंडित मेहता के हजारों अनुयायी देश-दुनिया में हैं। एक चैनल के सीधे प्रसारण के जरिए उन्होंने भी हनुमान चालीस जाप के इस आयोजन में हिस्सा लिया। लगभग ढाई घंटे के इस आयोजन में मधुर संगीत के साथ संकट मोचन के जाप किए गए। जिसे भारत सहित विश्व के आधा सैकड़ा से अधिक देशों ने लाइव देखा। कमलनाथ सरकार की इस भक्ति ने भाजपा के हिंदुत्व एजेंडे पर पानी फेर दिया है। हनुमान चालीसा के सवा करोड़ जाप के कार्यक्रम को महानिर्वाण नाम दिया गया था। मंच पर लगाए गए बैनर पर पंडित विजय शंकर मेहता के साथ हनुमान भक्त कमलनाथ की फोटो लगी हुई थी। छिंदवाड़ा के विशाल हनुमान का चित्र भी मंच पर लगाया गया था। राम-सीता के साथ हनुमानजी का चित्र भी लगाया गया। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने खुद को हनुमान भक्त बताने पर गर्व प्रकट करते हुए कहा कि हनुमानजी की मुझ पर अपार कृपा रही है। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी मेरे आदर्श हैं। महात्मा गांधी और हनुमानजी के मेल पर पंडित विजय शंकर मेहता ने सत्य, अहिंसा और राष्ट्र भक्ति को मुख्य आधार बताया। जाहिर तौर पर कार्यक्रम को गैर राजनीतिक स्वरूप देने की कोशिश जरूर की गई। भाजपा नेताओं को ट्वीट के जरिए मुख्यमंत्री कमलनाथ ने न्योता भी दिया। लेकिन, कोई भाजपाई कार्यक्रम में दिखाई नहीं दिया। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने मंच पर रखी कुर्सी पर बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ किया। पंडित मेहता ने कार्यक्रम पर कहा कि मैं साल में आठ-नौ कार्यक्रम करता हूं, लेकिन इस महानिर्वाण को लेकर जो उत्सुकता लोगों में दिखाई दी, वैसी पहले कभी नहीं देखी गई। मेहता ने कहा कि 56 देशों में लोगों ने सीधे प्रसारण के जरिए हनुमान चालीसा का पाठ किया। हनुमान भक्त हैं सीएम कमलनाथ! वैसे मुख्यमंत्री कमलनाथ खुद बड़े हनुमान भक्त माने जाते हैं। 80 के दशक से खुद के संसदीय और अब विधानसभा क्षेत्र छिंदवाड़ा से 15 किलोमीटर दूर ग्राम सिमरिया में कमलनाथ ने 101 फीट ऊंची हनुमान प्रतिमा की भी स्थापना की है। वहीं इंदौर के पास सनावदिया में राम मंदिर निर्माण का काम शुरू हो गया है। एक करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले इस मंदिर में स्थानीय लोगों के अलावा सरकार का आध्यात्म विभाग सहयोग करेगा। विधानसभा चुनाव की पूरी रणनीति कमलनाथ ने खुद तैयार की थी। उनकी रणनीति में अल्पसंख्यक तुष्टीकरण को जगह नहीं मिल पाई थी, जबकि राम वनगमन पथ और गाय जैसे संवदेनशील मुद्दों को भी कांग्रेस ने अपने वचन पत्र में जगह दी। सरकार बनी तो मुख्यमंत्री कमलनाथ ने इन वचनों पर तेजी से अमल भी शुरू किया है। राम वनगमन पथ के निर्माण के लिए 22 करोड़ रुपए भी स्वीकृत किए गए हैं। पंचायत स्तर पर गोशाला निर्माण का निर्णय हुआ। राज्य के विधि मंत्री पीसी शर्मा कहते हैं कि मुख्यमंत्री कमलनाथ हनुमान भक्त हैं। वे कहते हैं कि हर हनुमान भक्त भगवान श्रीराम और माता सीता के बगैर अधूरा है। मंत्री पीसी शर्मा द्वारा कमलनाथ को हनुमान भक्त बताए जाने की बड़ी वजह छिंदवाड़ा का हनुमान मंदिर है। भाजपा से छीने 'राम-सीता, हनुमान और गायÓ मप्र की सियासत में अभी तक चित्रकूट के रामपथ गमन, श्रीलंका के सीता मंदिर, हनुमान, नर्मदा और गाय भाजपा का मुख्य मुद्दे रहे हैं, लेकिन कमलनाथ ने प्रदेश की कमान संभालने के बाद से ही ये सभी मुद्दे भाजपा के हाथ से छीन लिए हैं। कमलनाथ ने 17 दिसंबर 2018 को मुख्यमंत्री की शपथ लेने के एक घंटे के भीतर प्रदेश में एक हजार गौशालाएं बनाने का आदेश जारी कर दिया। कुछ दिनों के भीतर ही बजट भी जारी कर दिया। अब गौशालाओं का लोकार्पण भी शुरू हो गया है। भाजपा गाय के नाम पर शुरू से ही सियासत करती आ रही है, फिलहाल मप्र में गाय का मुद्दा गायब है। अब कांगे्रस ने गौशालाओं को चुनाव में भुनाना शुरू कर दिया है। इसी तरह श्रीलंका में सीता मंदिर निर्माण के लिए पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 2013 के विधानसभा चुनाव से पहले ऐलान किया था, 2018 के चुनाव में भी चौहान ने सीता मंदिर का मुद्दा उठाया। लेकिन मुख्यमंत्री कमलनाथ ने 13 महीने के भीतर श्रीलंका में सीता मंदिर निर्माण की दिशा में काम शुरू कर दिया है। हाल ही में आध्यात्म मंत्री पीसी शर्मा को श्रीलंका भेजकर वस्तु स्थिति जानी। मंदिर निर्माण की कार्ययोजना तैयार कर ली गई। अगले महीने आने वाले बजट में मंदिर निर्माण के लिए राशि का प्रावधान किया जाएगा। जल्द ही अफसरों का दल श्रीलंका जाएगा। महाकाल मंदिर विकास विस्तार योजना विश्व प्रसिद्ध मध्यप्रदेश के भगवान महाकाल मंदिर के विकास और विस्तार की 300 करोड़ की योजना पर काम शुरू हो गया है। पहली बार किसी मुख्यमंत्री ने महाकाल मंदिर के बारे में सोचा है। योजना के कामों की निगरानी के लिए मंत्रिमंडल की तीन सदस्यीय समिति गठित की गई है। समिति में लोक निर्माण मंत्री सज्जन सिंह वर्मा, आध्यात्म मंत्री पीसी शर्मा और नगरीय विकास मंत्री जयवद्र्धन सिंह सदस्य हैं। योजना को समय-सीमा में पूरा कराने की जिम्मेदारी मुख्य सचिव को सौंपी गई है। योजना ऐसी बनाई गई है कि यहां ऐसी व्यवस्थाएं रहे कि श्रद्धालु एक-दो दिन आराम से रुक सकें। महाकाल मंदिर के मूल ढांचे के साथ कोई छेड़छाड़ न हो। उज्जैन शहर और वहां के रहवासियों का विकास भी इस योजना में शामिल है। योजना के पहले चरण में यात्रियों-श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। साथ ही, मंदिर के प्रवेश एवं निर्गम द्वार, फ्रंटियर यार्ड और नंदी हाल का विस्तार किया जा रहा है। महाकाल थीम पार्क, महाकाल कॉरिडोर और वर्केज लॉन पार्किंग आदि का निर्माण कराने की योजना है। दूसरे चरण में महाराजा बाड़ा, कॉम्पलेक्स, कुंभ संग्रहालय, महाकाल से जुड़ी विभिन्न कथाओं का प्रदर्शन, अन्न क्षेत्र, धर्मशाला, रूद्रसागर की स्केपिंग, रामघाट मार्ग का सौंदर्यीकरण, पर्यटन सूचना केंद्र, रूद्रसागर झील का पुनर्जीवन, हरी फाटक पुल, यात्री सुविधाओं और अन्य सुविधाओं का निर्माण और विस्तार शामिल है। ओंकारेश्वर विकास कार्य-योजना मुख्यमंत्री कमलनाथ ने ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के गौरव को चिर-स्थायी बनाने के लिए 156 करोड़ की विकास कार्य-योजना को मंजूरी दी है। साथ ही, ओंकारेश्वर मंदिर के लिए शीघ्र ही कल्याणकारी एक्ट बनाने के निर्देश भी दिए हैं। यहां ओंकारेश्वर के प्रवेश द्वार को भव्य बनाना, मंदिर का संरक्षण, प्रसाद काउंटर, मंदिर के चारों ओर विकास तथा सौंदर्यीकरण, शॉपिंग कॉम्पलेक्स, झूला-पुल और विषरंजन कुंड के पास रिटेनिंग वॉल, बहुमंजिला पार्किंग, पहुंच मार्ग, परिक्रमा-पथ का सौंदर्यीकरण, शेड निर्माण, लैंड-स्केपिंग, धार्मिक-पौराणिक गाथा की पुस्तकों की लायब्रेरी, ओंकार आइसलैंड का विकास, गौ-मुख घाट पुनर्निर्माण, भक्त निवास और भोजन-शाला, ओल्ड पैलेस तथा विष्णु मंदिर, ब्रह्मा मंदिर और चंद्रेश्वर मंदिर का जीर्णोद्धार, ई-साइकिल तथा ई-रिक्शा सुविधा, बोटिंग, आवागमन, बस-स्टैण्ड, पर्यटक सुविधा केंद्र सहित अन्य विकास कार्य किए जा रहे हैं। धार्मिक आस्था स्थलों का जीर्णोद्धार राज्य सरकार ने पिछले साल शासन द्वारा संधारित मंदिरों का जीर्णोद्धार करने का निर्णय लिया। साथ ही, इन मंदिरों के पुजारियों के मानदेय में भी तीन गुना की उल्लेखनीय वृद्धि की। इस दौरान 30 मंदिरों के जीर्णोद्धार और विकास के लिए 4 करोड़ 82 लाख 36 हजार रुपए की राशि जारी की। अब प्रदेश में मंदिरों को पर्यटन केंद्रों के स्वरूप में विकसित किया जा रहा है। देव-स्थानों और नदियों का संरक्षण राज्य सरकार ने मंदिरों, मठों, देव-स्थानों और पवित्र नदियों के संरक्षण के लिए समितियों और न्यासों का गठन किया। मां नर्मदा, क्षिप्रा, मंदाकिनी और ताप्ती के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए न्यास का गठन किया गया। इसी तरह, प्रदेश के मठ-मंदिरों के सुचारू संचालन के लिए सलाहकार समिति गठित की गई। श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति, उज्जैन का 8 मार्च, 2019 को गठन किया गया। ओंकारेश्वर मंदिर अधिनियम, गणपति मंदिर अधिनियम, मप्र शारदा देवी मंदिर अधिनियम, देव-स्थान प्रबंधन एवं विकास विधेयक में आवश्यक संशोधन किए गए। शासन द्वारा संधारित देव-स्थानों की कृषि भूमि, दुकान, व्यावसायिक संपत्ति एवं भवन प्रबंधन का दायित्व संबंधित जिला कलेक्टर को सौंपा गया। शासन नियंत्रित देव-स्थानों की व्यवस्था को सुचारू रूप देने के लिए देव-स्थान स्तरीय, अनुविभाग स्तरीय तथा जिला स्तरीय प्रबंध समिति नियम-2019 जारी किए गए। शासन संधारित मंदिरों/देव-स्थानों के पुजारियों की नियुक्ति के लिए अर्हताएं, नियुक्ति की प्रक्रिया, कत्र्तव्य, दायित्व, पुजारी की पदच्युति तथा पुजारी पद रिक्त होने पर व्यवस्था के संबंध में नियम बनाए गए। साथ ही, शारदा माता, गणपति खजराना, रामराजा ओरछा एवं ओंकारेश्वर ट्रस्ट के प्रस्ताव और प्रारूप तैयार किए गए। प्रमुख तीर्थ-स्थानों पर सुविधाओं का विस्तार प्रदेश के प्रमुख तीर्थ ओरछा और बगलामुखी माता मंदिर नलखेड़ा में तीर्थ-यात्रियों की सुविधा के लिए पौने दो करोड़ से ज्यादा की लागत से सेवा सदन बनवाए जा रहे हैं। नर्मदा परिक्रमा पथ पर यात्रियों की सुविधा के लिए 186 लाख की लागत से तीर्थ-यात्री सेवा सदन का निर्माण कराया जा रहा है। माता मंदिर, रतनगढ़ के विकास की करीब 5 करोड़ की समग्र कार्य-योजना में प्रथम किश्त 80 लाख जारी की गई। जिला दमोह में जोगेश्वर नाथ तीर्थ की विकास कार्य-योजना तैयार की गई। जिला ग्वालियर में धूमेश्वर तीर्थ विकास के लिए 36 लाख से ज्यादा की विकास योजना तैयार की गई। माता रतनगढ़ मंदिर और करीला माता मंदिर पर सौर ऊर्जा प्लांट लगाकर पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित किया गया। करीला माता मंदिर में निर्माणाधीन तीर्थ-यात्री सेवा सदन में वॉटर हॉर्वेस्टिंग, नक्षत्र वाटिका, जैविक खाद, पर्यावरण सुरक्षा तथा विद्युत, ऊर्जा, जल-संरक्षण एवं पर्यावरण संवर्धन को आध्यात्मिक परम्परा से जोड़ते हुए नक्षत्र वाटिका तैयार की जा रही है। सरकार के इन प्रयासों से यह तो साफ हो गया है कि वह बिना राजनीति के धार्मिक स्थलों का विकास करवा रही है। भाजपा के सारे दांव बेअसर मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री कमलनाथ पर भाजपा के सारे दांव बेअसर हैं। अपनी सटीक चाल से वह हर जगह अभी तक भाजपा को मात देते आए हैं। हिंदुत्व के नाम पर राजनीति करने वाली भाजपा से मप्र में वह भी छिनने लगे हैं। इसके लिए उनके पास तीन प्लान हैं। जिसके जरिए भाजपा को मात देने की तैयारी है। इसके लिए वह सहारा ले रहे हैं, भगवान राम, मां सीता और बजरंग बली का। श्रीलंका में बनवा रहे हैं सीता मंदिर कमलनाथ भाजपा को धर्म के आधार पर घेरने के लिए कोई मुद्दा नहीं छोडऩा चाहते हैं। मध्यप्रदेश की सरकार श्रीलंका में भव्य सीता माता का मंदिर बनवा रही है। इसके लिए कमलनाथ ने हाल ही में अधिकारियों को एक समिति बनाने के निर्देश दिए हैं। प्रदेश के मंत्री पीसी शर्मा पिछले दिनों इसे लेकर श्रीलंका दौरे पर भी गए थे। मंदिर निर्माण के लिए वहां से एक प्रतिनिधिमंडल ने आकर सीएम कमलनाथ से मुलाकात भी की। राजा राम की नगरी को संवार रहे भाजपा अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर राजनीति कर रही हैं। लेकिन कमलनाथ राजा राम की नगरी को संवारने में लगे हैं। मध्यप्रदेश के ओरछा में राजा राम का निवास है। यहां के राजा आज भी राम हैं। ऐसे में सरकार ओरछा की ब्रांडिंग के लिए ओरछा महोत्सव का आयोजन कर रही है। जिसमें पर करोड़ों रुपए खर्च किए जाएंगे। इसकी तैयारी तेजी से चल रही है। धर्म-संस्कृति की दिशा में सरकार के कदम - महाकाल मंदिर विकास विस्तार योजना - ओंकारेश्वर विकास कार्य-योजना - रामपथ गमन विकास के लिए 22 करोड़ से अधिक मंजूर - धार्मिक आस्था स्थलों का जीर्णोद्धार - सिंधु दर्शन, कैलाश मानसरोवर और श्रीलंका तीर्थ-यात्रा - मंदिरों, मठों, देव-स्थानों और नदियों का संरक्षण - प्रमुख तीर्थ-स्थानों पर सुविधाओं का विस्तार - धार्मिक-स्थलों पर सुरक्षा एवं प्रबंधन - ब्लॉक-स्तर तक आनंदक मेले - 1100 गौशालाओं का निर्माण - मुख्यमंत्री गौ-सेवा योजना शुरू - गौ-वंश संरक्षण में जन-सहयोग के लिए पोर्टल स्थापित राम वनगमन पथ निर्माण के लिए बनेगा ट्रस्ट राम वनगमन पथ निर्माण के लिए सरकार ट्रस्ट बनाएगी। निर्माण से जुड़े कामों की जिम्मेदारी सड़क विकास निगम की रहेगी। पहले चरण में 60 किलोमीटर का पथ निर्माण किया जाएगा। यह 30 किलोमीटर अमरकंटक और 30 किलोमीटर चित्रकूट क्षेत्र से लगा हुआ होगा। यह निर्णय 30 जनवरी को मुख्यमंत्री कमलनाथ की अध्यक्षता में राम वनगमन पथ निर्माण को लेकर हुई समीक्षा बैठक में लिया गया। पथ के सर्वे के लिए सड़क विकास निगम को अधिकृत किया गया है। आध्यात्म मंत्री पीसी शर्मा विभागीय अधिकारियों के साथ जल्द ही प्रस्तावित मार्ग का जायजा लेने जाएंगे। बैठक में पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी भी मौजूद थे। सरकार ने राम वनगमन पथ का निर्माण करने के लिए बजट में 22 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। सूत्रों के मुताबिक आध्यात्म विभाग के अपर मुख्य सचिव मनोज श्रीवास्तव ने योजना का ब्यौरा दिया तो मुख्यमंत्री ने दो-टूक कहा कि कहानी नहीं, यह बताएं काम कब से शुरू कर देंगे। इसमें तेजी लाएं और जल्द ही ट्रस्ट बनाया जाए। इसमें साधु-संतों और जनप्रतिनिधियों को शामिल करें। पूरा निर्माण ट्रस्ट की निगरानी में हो। पथ निर्माण के लिए भगवान राम के प्रति आस्था रखने वालों से भी आर्थिक सहयोग प्राप्त किया जाए। पथ निर्माण से जुड़े सर्वे सहित अन्य काम सड़क विकास निगम करे। राज्यपाल ने थपथपाई कमलनाथ सरकार की पीठ कभी भाजपा का होने वाले भगवा एजेंडा अब कांग्रेस का बड़ा एजेंडा बन गया है। सीएए के विरोध पर मुस्लिमों के साधने में सफल हुई कांग्रेस के हिंदुत्व एजेंडे ने भाजपा की नींद जरूर उड़ा दी है और यही कारण है कि भोपाल में मुख्यमंत्री कमलनाथ की मौजूदगी में हुए हनुमान चालीसा के पाठ को लेकर मची सियासत के बीच राज्यपाल लालजी टंडन ने सरकार के सनातन धर्म को लेकर किए जा रहे कामों की तारीफ की है, तो वहीं कांग्रेस सरकार के मंत्री राज्यपाल की तारीफ पर खुश हैं। राज्यपाल लालजी टंडन ने कहा है कि सरकार के रामपथ के विकास से लेकर श्रीलंका में सीता मंदिर और सुंदरकांड का पाठ कराने के काम तारीफ के काबिल हैं। आज देश को सनातन संस्कृति को बचाने की और मूल संस्कृति की तरफ लौटने की जरूरत है और सरकार के इस दिशा में उठाए गए कदम प्रशंसा वाले हैं। मंत्री पीसी शर्मा ने कहा है कि राज्यपाल ने 26 जनवरी पर भी सरकार के कामकाज की तारीफ की थी। राज्यपाल संजीदा नेता रहे हैं और गुण-दोष के आधार पर राज्यपाल ने सरकार के कामों की तारीफ की है। उन्होंने कहा कि सरकार को उनका आशीर्वाद मिलना जारी रहेगा। वन मंत्री उमंग सिंघार ने कहा है कि राज्यपाल का तारीफ करना बताता है कि सरकार किस तरीके से अलग-अलग क्षेत्र में कीर्तिमान स्थापित कर रही है। भाजपा प्रवक्ता रजनीश अग्रवाल ने कहा है कि राज्यपाल ने उनकी सरकार के कामकाज की तारीफ की जरूर की है लेकिन सरकार इतने प्रोपेगेंडा कर जनता के सवालों से बच नहीं सकती है। सिंधु दर्शन, कैलाश मानसरोवर और श्रीलंका तीर्थ-यात्रा प्रदेश में पिछले मात्र एक वर्ष में 23 हजार से अधिक तीर्थ-यात्रियों को राज्य सरकार ने 23 विशेष ट्रेनों के माध्यम से मुख्यमंत्री तीर्थदर्शन योजना में विभिन्न तीर्थ स्थलों की यात्रा कराई। इस यात्रा में तीर्थ-यात्रियों को भोजन, स्वास्थ्य, सुरक्षा संबंधी सभी सुविधाएं नि:शुल्क उपलब्ध कराई गईं। राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री तीर्थदर्शन योजना में सिंधु दर्शन, कैलाश मानसरोवर और श्रीलंका यात्रा को जोड़कर सर्वधर्म-समभाव का परिचय दिया। इसके लिए तीर्थ यात्रियों को 27 लाख 71 हजार की आर्थिक सहायता-अनुदान भी दिया गया। साथ ही, अन्य बुनियादी सुविधाएं और सुरक्षा नि:शुल्क मुहैया कराई गई। इस योजना के साथ ही, शासन द्वारा संधारित दो धर्मशालाओं का 32 लाख से जीर्णोद्धार भी कराया गया। आध्यात्म के माध्यम से प्रदेशवासियों को भारतीय संस्कृति से जोडऩे की पहल आध्यात्म वास्तव में मनुष्य में विकास की लालसा को गति प्रदान करने का सशक्त माध्यम है। यह औसत से ऊपर उठकर जीने का विवेकपूर्ण तरीका भी है। मध्यप्रदेश में राज्य सरकार ने इस शाश्वत सत्य को जन-मानस में संचारित करने के लिए वर्ष 2019 में आध्यात्म विभाग का गठन किया। प्रदेश में धर्मस्व, धार्मिक न्यास और आनंद विभाग के बिखरे स्वरूप को आध्यात्म विभाग में समाहित कर प्रदेशवासियों को भारतीय संस्कृति से जोड़े रखने की अहम शुरूआत पिछले वर्ष ही प्रदेश में हुई। मध्यप्रदेश, भारतीय संस्कृति की अमिट धरोहरों से परिपूर्ण एवं समृद्ध राज्य है। यहां देश के 12 ज्योतिर्लिंग में से दो ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर और ओंकारेश्वर प्रतिष्ठापित हैं। राज्य सरकार ने दोनों ज्योर्तिलिंग को विश्व पर्यटन केंद्र के स्वरूप में विकसित करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने ओंकार सर्किट योजना में महाकाल-महेश्वर के साथ ओंकारेश्वर विकास योजना को भी मंजूरी दी है। पिछले एक साल में प्रदेश में जिले/ब्लॉक स्तर पर आनंदक सम्मेलन की शुरुआत की गई। गिविंग सर्किल की अवधारणा पर कार्य किया गया। वरिष्ठ नागरिक स्वैच्छिक डिस्काउंट कार्यक्रम की शुरुआत हुई। प्रदेश में सामाजिक कल्याण एवं पारस्परिकता की भावना को बढ़ावा देने के लिए देश में पहली बार समय विनिमय कोष की परिकल्पना की गई। इस परिकल्पना में एक-दूसरे के कौशल का उपयोग करके दूसरों की मदद करना तथा समय को पूंजी के रूप में निवेश करना शामिल है, जिसका भविष्य में उपयोग किया जा सके। आनंद फैलोशिप चार आवेदकों को स्वीकृत की गई। आनंद शिविरों में आम लोगों की भागीदारी के लिए वेबसाइट पर ऑनलाइन पंजीयन का प्रावधान किया गया। अल्प-विराम के द्वारा लोगों के जीवन में आए सकारात्मक बदलाव से संबंधित उदाहरणों का 'परिवर्तन की कहानीÓ के रूप में प्रकाशन तथा वेबसाइट पर प्रदर्शन किया जा रहा है। लगभग 2200 स्थानों पर 14 से 18 जनवरी, 2019 के बीच आनंद उत्सव का आयोजन किया गया। प्रदेश में आध्यात्मिक गतिविधियों का उद्देश्य यह है कि प्रत्येक प्रदेशवासी जो भी कार्य करे, उसमें केवल उसका स्वार्थ नहीं हो बल्कि सभी की भलाई निहित हो। तभी प्रदेश सही मायने में विकसित राज्य बनने का हकदार होगा। - राजेंद्र आगाल

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